[300+ सुविचार ] Thought of the Day in Hindi for the School Assembly

दोस्तों इस आर्टिकल में आपको 30 से ज्यादा Thought of the Day in Hindi में मिलेंगे जो आप अपने school Assembly में बोल सकते है। हमने ये Thought of the Day बहुत रिसर्च करके निकले है और बहुत ही आसान भाषा में लिखे है ताकि हर कोई आसानी से Thought of the Day in Hindi में पढ़ bhi सके.

last updated on 27 March 2018

Thought of the Day in Hindi for the School Assembly

 

– जहां तक हो सके कद के साथ ही रहें। या ऐसे लोगों के साथ रहें जिनसे
आप कुछ सीख सकते हैं और जो आपके अंदर सुधार ला सकते हैं।
केवल उनका ही स्वागत करें जिन्हें सुधारने की गुंजाइश दिखाई देती है।
एक पारस्परिक प्रक्रिया है। लोग दूसरों को सिखाते हुए खुद भी हैं।

किसी समस्या का सबसे जरूरी पहलु उसका हल नहीं होता है। हल
निकालते हुए जो ताकत मिलती है, वही सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है।

जब परिस्थितियां बदल जाती हैं तो रणनीति बदलने में कोई बुराई नहीं है।

ऐसा नहीं है कि चीजें मश्किल हैं, इसलिए हम हिम्मत नहीं करते।
हम हिम्मत नहीं करते इसलिए चीजें मुश्किल हैं।

या तो रास्ता तलाशिये या फिर खुद बनाइए।

– केवल खूबसूरती से चकित नहीं होना चाहिए, उन छिपे हुए गुणों को
तलाशना चाहिए जो हमेशा बने रहते हैं।

सबकुछ आपके नियंत्रण में है। चीजों को आसान बना सकते हैं या
मुश्किलया हास्यास्पद चुनाव आपका ही होगा।

– विपत्तियां हमें वृद्धिमान बनाती हैं जबकि समद्धि सही
गलत में फर्क भी नहीं कर पाती।

हम असलियत में कमकाल्पनिक तौर पर ज्यादा दुखी रहते हैं।

– उस व्यक्ति से ज्यादा बदकिस्मत और कोई नहीं जिसने कभी
बदकिस्मती झेली ही नहीं। क्योंकि उसके पास कभी खुद को आजमाने
का साहस ही नहीं था।

– आपने किसी को कुछ दिया है, तो शांत रहें लेकिन किसी ने आपको कुछ
दिया हैतो इसका जिक्र जरूर करें

दुनिया में किसी भी चीज की उतनी तारीफ नहीं होती।
जितनी उस व्यक्ति की होती है, जो बहादुरी से हर दुख सहना जानता है।

– डरते हुए पूछने वाले को ‘ना’ सुननी पड़ती है।

अपना सर्वश्रेष्ठ करेंवर्तमान का मजा लें और जो है उसमें खुश रहें।

हम हमेशा कहते हैं कि जीवन बहुत छोटा है लेकिन बर्ताव ऐसे करते हैं।
जैसे हमेशा के लिए है।

  • अब अपने दुश्मन को हमेशा माफ कीजिए इससे ज्यादा उसे और कुछ परेशान नहीं करता है।
  • जीवन जीना बेहद जरूरी है क्योंकि ज्यादातर लोग तो केवल अपनी मौजूदगी दर्ज करवा रहे हैं।
  • शिक्षा बहुत महत्वपूर्ण है लेकिन हमें ये हरगिज नहीं भूलना चाहिए कि किसी को कभी कुछ सिखाया नहीं जा सकता।
  • मैं अपनी भावनाओं का दास बनकर नहीं जीना चाहता। उन्हें अपने अनुसार इस्तेमाल करना चाहता हूं, उनके साथ मनोरंजन करना चाहता हूं और हमेशा उनपर हावी रहना चाहता हूं।
  • आपके बारे में बात हो रही है, इससे बुरा केवल ये है कि आपके बारे में कोई बात ही नहीं हो रही है।
  • अब जिन्हें हम व्यक्तिगत से पसंद नहीं करते , उनके प्रति नैतिकता का रूप रवैया अपना लेते हैं।
  • जिन किताबों को हम बार-बार नहीं पढ़ सकतेउन्हें एक बार पढ़ना भी जरूरी नहीं ।
  •  ज्यादातर लोग जो दिखते हैं, वो नहीं होते हैं। उनके विचार दूसरों की सलाह पर आधारित होते हैं, उनका जीवन किसी की नकल होता है और उनका जुनून भी केवल शब्दों तक ही सीमित होता है।
  • तब हर संत का एक अतीत होता है और हर पापी का एक भविष्य।
  • अपनी गलतियों को मनुष्य ने ‘तजुर्बा’ का नाम दे दिया है।
  • आप किसी को उनके चेहरे, कपड़े या गाड़ी की वजह से पसंद नहीं करते हैं, बल्कि इसलिए करते हैं कि वे वही धुन बजाते हैं जो आपके कानों को अच्छी लगती है।
  • आजकल लोगों को हर चीज की कीमत तो पता होती है, अहमियत नहीं।
  • सबसे अच्छा तब महसूस होता है जब आपने कोई नेक काम चुपचाप किया हो और कोई उसका पता लगा ले।
  • किसी भी महिला की उस पुरुष के साथ खुश रहने की उम्मीद कैसे की जा सकती है जो उसे एक बेहद सामान्य इंसान मानकर व्यवहार करता है।

 

• कोआ पितरों का दूत है। संभव हो तो नित्य कौए को ग्रास दो।
• भगवान् की मार में भी करूणा है। भगवान् करूणावरूणालय है?
• जिस भूमि पर जो काम किया जाए। उसका संस्कार (अकर) उस भूमि पर आता है।
• प्रतिष्ठा, पैसा और विद्वता अन्तकाल में बिल्कुल काम नहीं आते ।
• संयोग में दोष-दर्शन एवं वियोग में गुणदर्शनयही जीव का स्वभाव है।
• मनुष्य का सच्चा मित्र धर्म है।? सर्व सुख का साधन धन नहीं, धर्म है।
• सत्य ईश्वर का स्वरूप है, असत्य के बराबर कोई पाप नहीं है।
• सबका कल्याण हो। ऐसे विवेक से  बोलना ही सत्य है। इसी प्रकार बोलो।

भोजन में विषमता ( भेदभाव) मत करो। ऐसा करने वाले को संग्रहणी का रोग होता है।
• वाणी, व्यवहार और विचार शुद्ध रखो। यह भी बहुत बड़ा तप है।
• शत्रु के प्रति भी सद्भाव रखो. एसा करने से भगवान् तुम्हारे पक्ष में आयेगे और तुम्हारे शत्रु को दण्ड देंगे।
• काया, वाणी तथा मन से किसी को दु:ख न देना ही अहिंसा है।
• त्याग करना धर्म है, धर्म के दस लक्षणों में त्याग एक है?
• भोग वृद्धि आयु नाशक होती है।

•  पवित्रता रखना सबका धर्म है। मन करने के बाद भी साथ आने वाला है। खान-पान व अन्य कार्यों में पवित्रता
आवश्यक है

 

  1. अमारी और गरीबी का असंतुलन ही सभी देशों के लिए घातक सिद्ध होता है।
  2.  ऐसा दोस्त नहीं चाहिए जो मेरे बदलते ही बदल जाएमैं हां कहे तो वो भी हां में सिर हिलाए। ये काम तो मेरी परछाई ज्यादा बेहतर करती है।
  3. माम गलतियां निकालना आसान है, बेहतर काम करना मुश्किल का दिमाग कोई बरतन नहीं है कि भर कर रख लिया जाएइसे तो लगातार प्रज्वलित करते रहना चाहिए।
  4. लंगड़े व्यक्ति के साथ वक्त बिताते हैं तो आप भी लंगड़ाना । सीख जाते हैं। |
  5.  सुनने की कला अपना , क्योंकि इस तरह बुरा बोलने वालों से भी आप फायदा हासिल कर पाएंगे कि गलतियां न करना मनुष्य के बस में नहीं है, लेकिन जो समझदार हैं वे गलतियों से सीख लेकर अपना भविष्य संवार लेते हैं।
  6. खुद को न तो कभी दोष देना चाहिए और न ही तारीफ करनी चाहिए।
  7. अब हमें अंर्तमन में जो प्राप्ति होती है, उसी से ही बाहर की तस्वीर भी बदली जा सकती है।
  8. जिस तरह मधुमक्खियां सबसे मजबूत और सूखे फूल से शहद निकाल लेती हैं, उसी तरह समझदार व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी अपना फायदा निकाल ही लेते हैं।
  9.  समय से बेहतर सलाहकार कोई दूसरा नहीं है।
  10. एक घरेलू महिला के लिए इससे बड़ी उपलब्धि नहीं हो सकती कि उसकी खूबसूरती से नहीं बल्कि चरित्र से प्रेम किया जाए।
  11.  लोग जागते हुए तो एक ही दुनिया में रहते हैं, सोते हुए अपनी-अपनी दुनिया में चले जाते हैं।
  12. समय ही जीवन है और इसका सही इस्तेमाल करना हमारा कर्तव्य।
  13. समझदार व्यक्ति के लिए हर दिन त्योहार की तरह है।
  14.  किसी का भला न कर पाना भी बुरा करने जैसा ही है।
  15. इन मेहनत का मीठा फल है, आराम। चरित्र, लंबे समय से चली आ रही आदत की तरह है। का शब्द दरअसल हमारे कमों की ही परछाई हैं।

  • मनुष्य अच्छाइयों की बजाय बुराइयों को जल्दी पहचान लेते हैं।
  •  रक्षा की बजाय आक्रमण में ज्यादा जज्बा दिखाई देता है।
  •  जरूरत, मनुष्य का अंतिम लेकिन सबसे मजबूत हथियार है।
  •  विपत्ति में ही भगवान को ज्यादा याद किया जाता है।
  •  परिपक्वता में उत्कृष्टता लाने में लंबा समय लगता है।
  • यह सच को ढांका जा सकता है लेकिन कभी खत्म नहीं किया जा सकता।
  • उस पैसे की बर्बादी से जो पीड़ा होती है वही सबसे अधिक है।
  •  दोस्तों को उनके कर्मों से परखना चाहिए न की शब्दों से।
  •  गौरव को केवल मानवता के साथ ही जोड़ा जाता है।
  •  जलन भी आग की लपटों की तरह ऊपर उठती दिखती है।
  • अब कोई भी कानून सभी को संतुष्ट नहीं कर पाता है।
  • मक बीमार दिमाग के लिए इतिहास पढ़ना सर्वश्रेष्ठ दवा को लेने की तरह ही है।
  • कि अतीत में हुई गलतियों को कोसना आसान है, सुधारना मुश्किल वह बुरी शुरुआत के अंत भी अक्सर बुरे ही होते हैं।
  • तक उतावलापन हमेशा अच्छा नहीं होता है।
  • पाप हमेशा दिमाग करता है, शरीर नहीं। अगर इरादा ही नहीं किया है, तो दोश भी नहीं है।
  • कि अंधविश्वास छोटी-छोटी बातों में भी ईश्वर को बुला लेता है।
  • कि क्रूरता जारी रखने के लिए कोई भी वजह आधार नहीं बन पाती है।
  • मनुष्य की योजनाएं परिस्थितियों पर निर्भर होनी चाहिए। न कि परिस्थितियां योजनाओं पर निर्भर हों।
  • वह बेहद खराब और मुश्किल परिस्थितियों में सबसे मजबूत और साहसिक योजनाएं ही सबसे सुरक्षित भी साबित होती हैं।
  • – पैसा बांट देना तो बहुत आसान होता है। मुश्किल होता है इसे कमाना और बढ़ाना।

 

  1. जो कुछ मुझे ज्ञात है, वह यही कि मेरे पास रंचमात्र भी ज्ञान नहीं है।
  2. अज्ञानता ऐसी रात्रि के समान है, जिसमें न चांद हो न तारे
  3.  ऐसा भी समय आता है, जब अज्ञानता भी वरदान सिद्ध होती है।
  4. अज्ञानी रहने की अपेक्षा उत्पन्न ही न होना श्रेयस्कर है, क्योंकि दुर्भाग्य का मूल है।
  5. अज्ञान की सबसे बड़ी सम्पत्ति होती है-मौन और जब वह इस रहस्य को। जान जाता है, तब वह अज्ञान नहीं रह जाता।
  6. अज्ञानता ही मोह और स्वार्थ की जननी है, अत: अज्ञानी ही दुष्ट या कापुरुष होते हैं।
  7. जो कुछ मैं नहीं जानताउसके विषय में अपनी अज्ञानता स्वीकार करने में मुझे तनिक लज्जा नहीं आती।
    अज्ञानता से कभी कोई समस्या नहीं सुलझती।
  8. जहां अज्ञानता ही वरदान हो, वहां बुद्धिमानी दिखाना भी मूर्खता है।
  9. अज्ञानी रहने से तो जन्म न लेना अच्छा है; क्योंकि अज्ञानता ही सब दु:खों की जड़ है। नेपोलियन बोनापार्ट
  10. अज्ञान अन्धकार के समान है। दीया बुझाकर भागने वाला यही समझता है। कि दूसरे उसे देख नहीं सकतेपरन्तु उसे यह भी समझ रखनी चाहिए कि वह ठोकर खाकर गिर भी सकता है।
  11. आज जबकि अन्धे, बहरे, लंगड़े और विकलांग भी शिक्षा प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं, तो अनपढ़ व्यक्तियों को लाज आनी चाहिए।
  12. किसी विषय में अधूरे ज्ञान से अच्छा हैउस विषय में अज्ञानी होना।

 

 

New Though of day specially for school

केवल जीवन की सफलताएं ही सद्गुणों से वंचित रखती हैं। 

असफलता निराशा का सूत्र कभी नहीं है। अपितु वह तो नयी प्रेरणा है। 

उज्ज्वल मनुजत्व के लिए संचित यौवन के शब्दकोश में ‘असफलनाम को कोई शब्द नहीं होता।

 

असफलता का प्रधान कारण प्राय: धनाभाव नहीं , अपितु शक्ति और सामथ्र्य का अभाव होता है। –

असफलता केवल सिद्ध करती है कि सफलता का प्रयत्न पूरे मन से यह नहीं हुआ। 

असफलता के विचार से सफलता का उत्पन्न होना उतना ही असम्भव है, जितना बबूल के पेड़ से गुलाब के फूल का निकलना। 

हमारी सबसे बड़ी शान कभी न गिरने में नहीं है, अपितु जब हम गिरें, हर बार उठने में है।

असफलताएं कभी-कभी सफलता का आधार होती हैं। यदि हम अनेक बार भी असफल होते हैं, तो कोई बात नहीं। प्रयत्न करके असफल हो जाने की अपेक्षा प्रयत्न न करना अधिक अपमानजनक है।

मनुष्य सफलता से कुछ नहीं सीखता, अपितु विफलता से बहुत कुछ असफलता निराशा का सूत्र कभी नहीं है, अपितु वह तो नयी प्रेरणा है। 

 जो लोग सचमुच बुद्धिमान् हैं, वे असफलताओं से कभी नहीं घबराते।

विफलता से सफलता की शिक्षा मिलती है।

 जो नौजवान अपने चरित्र को अपनी पूंजी बनाने और अपने प्रत्येक वचन को पूरा करने के लिए अपने सारे पौरुष की बाजी लगा देने का दृढ़संकल्प लेकर चलता है, वह असफल नहीं हो सकताचाहे उसे यश या धन कुछ भी न मिले।

 

• पुस्तकों का संकलन ही आज के युग का वास्तविक विद्यालय है।
• सच्चे मित्रों के चुनाव के पश्चात् सर्वप्रथम एवं प्रधान आवश्यकता है उत्कृष्ट पुस्तकों का चुनाव।
• जो पुस्तकें हमें अधिक विचारने को बाध्य करती हैं, वे ही हमारी सबसे बड़ी सहायक हैं।
पुस्तक ही एकमात्र अमर तत्त्व है।
० असभ्य राष्ट्रों को छोड़कर शेष सम्पूर्ण विश्व पर पुस्तकों का ही शासन है।
० बुद्धिमानों की रचनाएं ही एकमात्र ऐसी अक्षय निधि हैं, जिन्हें हमारी सन्तति विनष्ट नहीं कर सकती।
० मैंने प्रत्येक स्थान पर विश्राम खोजा, किन्तु वह एकान्त कोने में बैठकर पुस्तक पढ़ने के अतिरिक्त कहीं प्राप्त न हो सका।
० कुछ पुस्तकें चखने मात्र को होती हैं, दूसरी निगल डालने योग्य और कुछ ही ऐसी होती हैं, जिन्हें चबाया और पचाया जा सके
० केवल पुस्तक ही अमर ।
• अधिक पुस्तकें संजोने का कहीं अन्त नहीं है। अधिक अध्ययन भी शरीर की थकावट है।
० पुराना कोट पहनो और नयी किताब खरीदो।
• पुस्तक प्रेमी सबसे अधिक धनी और सुखी हैं।

आज के लिए और सदा के लिए सबसे बड़ा मित्र है अच्छी पुस्तक।

 

  • जब बाकी लोग अपने दुख गिन रहे हों तब आप अपने सुखों के बारे में सोचें। यही खुश रहने का रहस्य है।
  • सही सही ही रहेगा चाहे सभी विरोध में हों और गलत गलत ही रहेगा चाहे सभी पक्ष में क्यों न हों।
  • जो व्यक्ति खुद पर नियंत्रण नहीं रख सकता वो दूसरों को नियंत्रित करने योग्य कतई नहीं है।
  • ईश्वर के बाद केवल माता पिता ही सच हैं।
  • शादी भी सोच-समझकर करें पहले साथी बाद में पैसा देखें गुण पहले दिखाई , बाद में खूबसूरती। दिमाग पहले बाद में शरीर। तब आपको। एक पत्नी, दोस्त, साथी के तौर पर खुद का ही रूप मिलेगा ।
  • आजादी के बिना दोस्ती संभव नहीं है। दोस्ती में आजाद हवा का होना। जरूरी है। इस रिश्ते को कैद नहीं किया जा सकता है।
  • सबसे अधिक जरूरत हमें समय की होती है और सबसे ज्यादा दुरुपयोग भी हम उसी का करते हैं।
  • हर तरह की बहस में केवल सच बोलना ही मकसद हो, न की जीतना।
  • जो खुद को ईश्वर का अंश नहीं मानते हैं दरअसल वे तानाशाह की गुलामी करते हैं।
  • जलन करने वाले दूसरों के लिए परेशानी का सबब होते हैं लेकिन स्वयं
    के लिए यातना।
  • सच्चा दोस्त न्यायपूर्वक सलाह देगातुरंत मदद देगा, साहसिक कार्य में साथ रहेशासंयम बरतेगाबहादुरी से
    बचाव करेगा और हमेशा दोस्त बनकर ही रहेगा।
  • महंगे कपड़ों में लिपटी अज्ञानता और घमंड से ऊपर और बेहतर है सस्ते कपड़ों में लिपटा ज्ञान और मानवीयता।
  • अक्लमंद और समझदार व्यक्ति का धन ज्ञान होता है। संयम और मेहनतआस्था की ही तरह हैं। ये पहाड़ हिला देते हैं। वो जो प्यार में जीता है, ईश्वर में जीता है।
  • मौत केवल एक दायरा है जो हमारी दृष्टि की सीमा भी है। ज्यादा साफ और देखने पड़ेगी
  • दूर तक के लिए ज्यादा आंखें खोलनी
    उससे कभी घृणा मत करो जिसे समझते ही नहीं हो।

 

  1. काम-दोष क्रिया (कार्य) के परिणाम को अशुभ बनाता है।
  2. कामी व्यक्तियों का स्मरण करने से अपना मन भी कामग्रसत हो जाता है।
  3. प्रात:काल, मध्याह्न एवं रात्रि में सोने से पूर्व मंगलाचरण अवश्य करो।
  4. अच्छा तो यह है कि बराम्बार एक ही स्वरूप का चिंतन करो।
  5. वन्दन सभी देवों को कीजिएकिन्तु ध्यान एक ही देव का करें।
  6. ध्यान करते समय मन एकाग्र न हो तो पुन-पुन: भगवान् के नाम का चिंतन करो।
  7. यवाणी से कीर्तन और आंखों से दर्शन करने से मन शुद्ध होता है।
  8. भगवान से स्वार्थसिद्ध की आशा मत रखो।
  9. धीरे धीरे स्वभाव को सुधारो , स्वभाव के सुधरने से भक्ति सिद्ध होती है।
  10. अच्छे काम को शीघ्रतशीघ्र करो उसे स्थगित मत करो।
  11. एकाग्रचित होकर कथा सुनो।उन क्षणों में संसार को भूल जाओ।
  12. क्रोध करने से पुण्य का नाश होता है। वक्ता तथा श्रोता दोनों क्रोध न करें।
  13. सिर्फ जाना हुआ काम नहीं आता। किन्तु जीवन-व्यवहार में उतारा हुआ काम आएगा।
  14. पूर्व-जन्म के बारे में विचार मत करोवर्तमान जीवन को सुधारने का प्रयत्न करो।
  15. भगवान् को स्मरण ध्यान करने से मनुष्य ईश्वरीय शक्ति को प्राप्त करता है।

 

Thought of the Day in Hindi for the School Assembly

Thought of the Day in Hindi for the School Assembly

1. आपका मन एक बगीचा है आपके विचार बीज हैं आप फूल विकसित कर सकते हैं या घास फूस विकसित कर सकते हैं

2.हमारे सभी कार्यों में, त्रुटियों और गलतियां हमारे liye शिक्षक हैं कौन गलती करता है, सच्चाई का मार्ग उसके द्वारा केवल प्राप्य होता है। स्वामी विवेकानंद”

3.जल्दी मत करो- गलतियों से और अधिक समस्याएं पैदा होती हैं। इसके बजाय, व्यवस्थित रूप से , तार्किक रूप से, और ध्यान से आगे बढ़ें,

4.आपने कुछ गलतियां की हैं, और आप वैसा नहीं हो सकते हैं जैसा आप बनना चाहते हैं, लेकिन इसका आपके भविष्य के साथ कुछ भी लेना नहीं है ज़िग ज़िगलर “

 

5. कठिन समय के बारे में चिंता मत करो क्योंकि हमारे जीवन में सबसे सुंदर चीजें परिवर्तन और गलतियों से ही होती है …… “

 

 

Thought of the Day in Hindi:

 

6. हमारी आत्मा में वृद्धि करने के लिए, हमें बदला ज्यादा जरुरी है नाकि हमारे आसपास के लोगों, जगहों या चीजों को

7. जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, हम जानते हैं कि बहुत से दोस्तों के होने से ज़्यादा ज़रूरी है की एक अच्छा दोस्त हो

 

8. ज्ञान में निवेश हमेशा सबसे अच्छा ब्याज देता है”

9. स्कूल और जीवन दोनों ही समान हैं। स्कूल हमें पहले सिखाना है फिर परीक्षा लेता है और जीवन पहले परीक्षा लेता है फिर हमें सिखाता है

10. शिक्षा का एक ही लक्ष्य है, और वह है शिक्षा के लिए साहस

 

Best Thought of the Day for the School Assembly

 

11. लिखना धर्म की तरह है हर व्यक्ति जो कॉल को महसूस करता है, उससे अपने उद्धार का काम करना चाहिए

12. भाषा के दो गुणा है; भावना व्यक्त करना और जानकारी देना

13. शांत रहकर कड़ी मेहनत करें और ताकि आपकी सफलता चारो तरफ शोर मचा दे

 

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14. सफलता का अर्थ है कि साहस, दृढ़ संकल्प और इच्छा शक्ति, वो व्यक्ति बनने के लिए, जिसका आप विश्वास करते हैं

15.आप अपने सिर में आने वाले दुःखों के पक्षियों को नहीं रोक सकते, लेकिन आप उन्हें अपने बालों में घोंसले बनाने से तो रोक सकते हैं।

16. व्यक्ति अपने विचारों से निर्मित एक प्राणी है, वह जो सोचता है वही बन जाता है

17. ख़ुशी तब मिलेगी जब आप जो सोचते हैं, जो कहते हैं और जो करते हैं, सामंजस्य में हों. पनी गलती को स्वीकारना झाड़ू लगाने के सामान है जो सतह को चमकदार और साफ़ कर देती है

18. अपने सपनों तक पहुंचने के लिए, महत्वपूर्ण कदम है की आप NO शब्द का अर्थ ना जाने

19. हर बुरी स्थिति में कुछ सकारात्मक होगा, यहां तक कि एक बंद घड़ी भी दिन में दो बार सही समय दिखाती है। Think Positive

20. बहाने मत बनाओ सुधार करो ।

21. एक अच्छी गलती बर्बाद मत करो उससे सीखो।

22. शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है जिससे जो आप विश्व को बदलने के लिए प्रयास कर सकते हैं

तर्क आपको A से Z तक पहुंचाएगा लेकिन कल्पना आपको हर जगह पंहुचा सकती है

 

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School Assembly Thought of the Day in Hindi Language:

 

23. एक शिक्षक बनने से पहले वह एक छात्र था

24. जितना हम सोचते है उससे कही ज्यादा संभावनाएं है हमारे अंदर

25. दूसरों पर कभी भी निर्भर और विश्वास न रखे हमेशा आपकी क्षमता पर विश्वास रखिए

26. कभी कभी , जीवन में छोटी चीजें आपकी पूरी दुनिया में परिवर्तन कर सकती हैं।

27. एक खराब परिस्थिति एक फ्लैट टायर की तरह है। जब तक आप उसे बदल नहीं सकते तब तक आप कहीं भी नहीं जा सकते

28.जितना ज्यादा हो सके आप उतना सीखें जब तक आप युवा हो, जीवन से बिजी होने से पहले

29.सफलता के लिए कोई लिफ्ट नहीं है आपको खुद सीढ़ी लेनी ही होगी

30. महान काम करने का एकमात्र तरीका यह है कि आप जो करे उससे प्यार करे

 

  • बुद्धी सबसे बुरे के लिए तैयार करती है, लेकिन मूर्खता उस दिन के लिए सबसे खराब होती है जब वह आता है
  • ज्ञान में निवेश हमेशा सबसे अच्छा ब्याज देता है
  • सफलता का अर्थ है कि साहस, दृढ़ संकल्प और इच्छा के रूप में व्यक्ति बनने के लिए, जिसका आप विश्वास करते हैं कि आप होना चाहते थे
  • एक बुरा व्यवहार एक फ्लैट टायर की तरह है आप कहीं भी नहीं जा सकते जब तक आप इसे बदल नहीं सकते
  • आप आज जो करते हैं उसपर भविष्य निर्भर करता है इसलिए आज जो भी करे उसे सोच समझ कर करे

 

•  पुत्र असमर्थ हो या समर्थदुर्बल हो या बलवान, माता उसकी रक्षा करती है। माता के सिवा दूसरा कोई विधिपूर्वक पुत्र का पालनपोषण नहीं कर सकता।

• दस उपाध्यायों की अपेक्षा एक आचार्यसी आचार्यों की अपेक्षा पिता पिता से हजार गुना बढ़कर माता पूज्य होती है।

• माता का गौरव पृथ्वी से भी अधिक है और पिता आकाश से भी ऊंचा है।

• पिता की सेवा अथवा उनकी आज्ञा का पालन करना जैसे महत्वपूर्ण धर्म है, उससे बढ़कर संसार में दूसरा कोई धर्माचरण नहीं।

• जो पुत्र माता-पिता की पूजा करके उनकी प्रदक्षिणा करता है, उसे पृथ्वी परिक्रमाजनित फल सुलभ हो जाता है। पुत्र के लिए माता-पिता और स्त्री के लिए पति सुन्दर तीर्थ घर में ही होते हैं।

• मनुष्य के पालन-पोषण के समय माता-पिता जो क्लेश सहते हैंउसका बदला सौ वर्षों में भी नहीं चुकाया जा सकता।
• माता को गुरु के समान सर्वोत्तम स्थान दिया गया है।

• जो पुत्र सामर्थ्य रहते भी अपने मातापिता की शरीर और धन से सेवा नहीं करता, उसके मरने पर यमदूत उसे उसके अपने शरीर का मांस खिलाते
। जो प्ररुष समर्थ होकर भी बूढ़े माता-पिता, गुरु आदि का भरणपोषण नहीं करता, वह जीता हुआ भा मुद के समान ही है।

. सभी पापों का निवारण किया जा सकता है, परन्तु माता से शप्त हुए पुत्रों को कहीं छुटकारा नहीं।

० माता की भक्ति से मनुष्य इस लोक को, पिता की भक्ति से मध्यलोक को और गुरु की भक्ति से ब्रह्मलोक को प्राप्त कर लेता है।
• माता-पिता की पूजा देवता के समान करनी चाहिए, क्योंकि ये दोनों प्रत्यक्ष देव , जिनका आशीर्वाद पगपग पर फलताफूलता है।

• मनुष्य ऐसे शुभ कर्म करेजिससे माता-पिता तथा गुरुजनों का प्यार उसे मिलता रहे।
• माता के रहते मनुष्य को कभी चिन्ता नहीं होती, बुढ़ापा उसे अपनी ओर नहीं खींचता।

 

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2 Responses to “[300+ सुविचार ] Thought of the Day in Hindi for the School Assembly”
  1. ritusharma December 28, 2017

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