स्वास्थ्य ही धन है पर भाषण Speech on Health is Wealth in Hindi

स्वास्थ्य ही धन है पर भाषण Speech on Health is Wealth in Hindi
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‘स्वास्थ्य ही धन है’ बहुत पुरानी कहावत है, जिसका मतलब है कि स्वास्थ्य ही सब कुछ है और इसका महत्व धन से भी अधिक है। पहला सुख निरोगी काया दूजा सुख घर में माया। इस कहावत से भी यही बात पता चलती है। हम आज आपको स्वास्थ्य ही धन है इस पर भाषण देंगे जो आप अपने स्कूल के होमवर्क में इस्तेमाल कर सकते है अगर कोई भी परेशानी हो तो आप कमेंट करके हमें बता सकते है।आईये शुरू करते है Speech on Health is Wealth in Hindi

Speech on Health is Wealth in Hindi

 

स्वास्थ्य ही धन है पर भाषण 1

सभी को सुप्रभात। आज इस अवसर पर, मैं आपको ‘स्वास्थ्य ही धन है’ पर अपने विचार प्रकट करना चाहती हूँ। जैसाकि हम सभी जानते हैं कि, स्वास्थ्य को सबसे बड़ा धन माना गया है। बीमार धनी होने की अपेक्षा स्वस्थ गरीब होना अधिक अच्छा है। बीमार व्यक्ति धन एवं सुखसुविधाओं का उपभोग नहीं कर सकताउसे अपना जीवन भार लगने लगता है। स्वस्थ व्यक्ति बहुत मस्ती में जीता है। उसके मन-मस्तिष्क में उमंग और प्रसन्नता छायी रहती है। वह जिस कार्य को करता हैपूरे उत्साह से करता है। इसीलिए कहा गया है कि स्वास्थ्य ही धन है। अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रयत्न करना मनुष्य का दायित्व है। इसके लिए व्यायामयोगासन तथा स्वस्थ दिनचर्या का अभ्यास जरूरी होता है। व्यक्ति को अपने खान-पान का भी उचित ध्यान रखना चाहिए। मस्तिष्क में सकारात्मक सोच रखनी चाहिए। स्वस्थ रहकर इश्वर-प्रदत्त उपहारों का लाभ उठाना चाहिए। स्वास्थ्य रूपी धन की हर कीमत पर रक्षा की जानी चाहिए। कहा भी गया है-‘एक तंदुरुस्ती हज़ार नियामत। अच्छा स्वास्थ्य ही जीवन के सारे सुखों का आधार है।

स्वास्थ्य ही धन है पर भाषण 2

आदरणीय अध्यापक गण और मेरे प्यारे सहपाठियों को सुबह की नमस्ते। आज में सभी को अपना भाषण सुनाना चाहूंगा जो मेने स्वास्थ्य ही धन है के उप्पेर लिखा आशा करता हु ही आप मुझे चुप चाप सुनेंगे और कुछ अच्छी चीज़े मेरे भाषण से सीखेंगे आज कल हम सभी सिर्फ धन के पीछे पढ़े हुवये है  लेकिन  स्वास्थ्य को सबसे बड़ा धन कहा गया है। यदि रुपयापैसा हाथ से निकल जाए। तो उसे पुन: प्राप्त किया जा सकता है। परंतु एक बार स्वास्थ्य बिगड़ जाए तो उसे पुरानी स्थिति में लाना बहुत कठिन होता है। इसीलिए समझदार लोग अपने स्वास्थ्य की हिफ़ाज़त मनोयोगपूर्वक करते हैं। अच्छा स्वास्थ्य जीवन के समस्त सुखों का आधार है। धन से वस्तुएँ खरीदी जा सकती हैं परंतु उनका उपभोग अच्छे स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। धनी व्यक्ति यदि अस्वस्थ है तो उसके धन का कोई मूल्य नहीं। गरीब यदि स्वस्थ है तो फ्रिक को कोई बात नहीं क्योंकि उसके पास स्वास्थ्य रूपी धन है। उसके पास जो कुछ भी है, वह उसका उचित उपभोग कर सकता है। अच्छे स्वास्थ्य में एक तरह का सौन्दर्य होता है। जो अच्छे स्वास्थ्य से युक्त है। उसके मन में उत्साह और उमंग होता है। वह अपना कार्य चिंतामुक्त होकर करता है। वह कठिनाइयों से नहीं घबराता, हर समय उत्फुल्ल रहता है। उसका खाया-पीया शरीर में लग जाता है, उसे दुर्बलता और थकान नहीं आती। दूसरी तरफ़ बिगड़े हुए स्वास्थ्य वाला व्यक्ति हर समय उदासदु:खी और विचलित रहता है। अतप्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह स्वास्थ्यप्रद जीवनशैली अपनाए और अपने तन को स्वस्थ और मन को आनंदित रखे।

अच्छे स्वास्थ्य की कामना करनेवाले बहुत हैं परंतु उसके लिए जागरूक होकर प्रयत्न करने वाले थोड़े ही हैं। लेकिन केवल कल्पना करने से स्वास्थ्य को बनाए नहीं रखा जा सकता। इसके लिए सतत् चेष्टा करनी पड़ती है। अच्छा एवं संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या और नियमित व्यायाम स्वास्थ्य को बनाए रखने के तीन मूलभूत तत्व हैं। भोजन में फलअनाजसब्जी और दूध का समन्वय होना चाहिएफलहरी ताज़ी सब्ज़ियाँ, अंकुरित अनाज तथा दूध की कुछनकुछ मात्रा प्रतिदिन लेने से व्यक्ति का स्वास्थ्य अच्छा बना रहता है। साथ ही बासी, बाज़ारू, अधिक तला-भुना और मैदे की अधिक मात्रा वाला भोजन मानव-स्वास्थ्य के प्रतिकूल होता है। आजकल बच्चे एवं युवा फ़ास्ट फूड की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। यह आकर्षण असमय ही अनेक प्रकार की बीमारियों एवं मोटापे को आमंत्रित करता है। स्वास्थ्य को बनाए रखने में नियमित दिनचर्या का बहुत महत्व है। यह व्यक्ति को तनाव से दूर रखता है। चूक शरीर एक मशीन की भाँति कार्य करता है इसलिए यह नियमितता चाहता है।

यह चाहता है कि इसके साथ किसी प्रकार की अति न की जाय। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को एक नियमित दिनचर्या बनानी चाहिए और उसका पालन भी करना चाहिएइस दिनचर्या में शरीर और मन को तनावमुक्त रखने वाले क्रियाकलापों को उचित स्थान देना चाहिए। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए नियमित व्यायाम का भी पर्याप्त महत्व होता है। व्यायाम शरीर के सभी अंगों को मजबूती प्रदान करता है तथा बीमारियों से लड़ने की शक्ति उपलब्ध कराता है। यह व्यक्ति को फुर्तीला और तनावरहित बनाता है। भारतीय स्वास्थ्य विज्ञान आयुर्वेद में शरीर को स्वस्थ रखने में योगासनों और अन्य उपायों की विशद चर्चा की गई है। आयुर्वेद बताता है कि मानव मौसम और ऋतु के अनुकूल किस तरह की जीवनशैली अपनाए।

अच्छे स्वास्थ्य के लिए समय पर किए गए उपचार का महत्व भी कम नहीं है। यदि व्यक्ति बीमार पड़ गया हो तो उसे तुरंत योग्य चिकित्सक की मदद लेनी चाहिए किसी भी बीमारी को छोटा समझना और उसकी उपेक्षा करना खतरनाक सिद्ध हो सकता है। योग्य चिकित्सक की सलाह मानकर व्यक्ति शीघ्र स्वास्थ्य लाभ कर सकता है। स्वास्थ्य रूपी धन को संचित रखने के लिए विभिन्न स्तरों पर कायम रखी जाने वाली सफाई व्यवस्था का पर्याप्त महत्त्व है।

शरीर की सफ़ाई, घर की सफाई, वस्त्रों की सफ़ाई और आसपड़ोस की सफ़ाई पूरे नियम से की जानी चाहिएसफाई व्यवस्था सही होने पर रोगाणु शरीर से दूर रहते हैं। उपरोक्त उपायों को अपनाने वाला व्यक्ति हमेशा स्वस्थ बना रह सकता है। चूंकि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का निवास होता है इसलिए हमें स्वस्थ रहने के सभी आवश्यक उपाय करने चाहिए।

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