Rakesh Sharma History in Hindi भारतीय अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा का जीवन परिचय

Rakesh Sharma History in Hindi भारतीय अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा का जीवन परिचय
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हेलो दोस्तों आज हम आपके Rakesh Sharma History in Hindi या राकेश शर्मा के जीवन परिचय के बारे में बहुत सारी बातें बातयेंगे ताकि आप इस महान नेता को जान सको। राकेश शर्मा भारत के पहले और विश्व के 138 वें अंतरिक्ष यात्री थे । इस आर्टिकल में हम आपको उनके बचपन से जवानी तक के सफर के बारे में सारी जानकारी देंगे।आईये शुरू करते है Rakesh Sharma History in Hindi या राकेश शर्मा का जीवन परिचय

राकेश शर्मा भारत के पहले और विश्व के 138 वें अंतरिक्ष यात्री इनका जन्म 13 जनवरी 1949 को पंजाब के पटियाला में हुआ था। राकेश बचपन से ही विज्ञान में काफी रूचि रखते थें। बिगड़ी चीजों को बनाना और इलेक्ट्रॉनिक चीजों पर बारीकी से नजर रखना उनकी आदत थी।

राकेश जब बड़े हुए तो आसमान में उड़ते हवाई जहाज को तब तक देखा करते थे जब तक वह उनकी आंखो से दूर ना हो जाए। जल्द ही राकेश के मन में आसमान में उड़ने की तमन्ना जाग गई।एक दिन वो कर दिखाया जिससे हर भारतीय को उन पर गर्व है।

 

Rakesh Sharma History in Hindi

Rakesh Sharma History in Hindi
प्रारंभिक जीवन

राकेश शर्मा का जन्म 13 जनवरी 1949 को पंजाब के पटिआला शहर में हुआ था। उनके पिता का नाम देवेन्‍द्र शर्मा तथा माता का नाम तृप्‍ता शर्मा था। उनकी शुरुवाती शिक्षा हैदराबाद के सेंट जॉर्ज ग्रामर स्कूल में हुई। इसके बाद राकेश शर्मा ने हैदराबाद की उस्मानिया यूनिवर्सिटी से स्नातक/ ग्रेजुएशन पूरी की।

किस्मत ने लिया यू-टर्न लिया और राकेश शर्मा को 1966 में एनडीए में इंडियन एयर फोर्स कैडेट बन गए। राकेश शर्मा ने 1970 में भारतीय वायु सेना को ज्वाइन किया ।

मात्र 21 साल की उम्र में ही भारतीय वायु सेना में शामिल हुवे। पाकिस्तान से युद्ध में राकेश शर्मा ने अपने विमान “मिग एअर क्रॉफ्ट” से महत्वपूर्ण सफलता हासिल की। इसी युद्ध के बाद से राकेश शर्मा चर्चा में आए और लोग उनको जानने लग गए।

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राकेश शर्मा 7 दिन 21 घंटे 40 मिंट दिन के लिए अंतरिक्ष में रहे। ये उस समय भारतीय वायुसेना के स्क्वाड्रन लीडर और विमानचालक थे।

आपको जानकर ये अच्छा लगेगा की जब राकेश शर्मा अन्तरिक्ष में थे तो प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने राकेश शर्मा से पूछा कि ऊपर से भारत कैसा दिखता है तो राकेश शर्मा ने उत्तर दिया- “सारे जहाँ से अच्छा”।

भारत सरकार ने राकेश शर्मा को अशोक चक्र से सम्मानित किया उसके बाद विंग कमांडर के पद पर सेवा-निवृत्त होने पर राकेश शर्मा ने हिन्दुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड में परीक्षण विमानचालक के रूप में काम किया।

 

राकेश शर्मा पारिवारिक जीवन

राकेश शर्मा की पत्नी का नाम मधु है और उनके 1 लड़का जिसका नाम कपिल है और वो एक फिल्म डायरेक्टर है उनकी बेटी का नाम कृतिका है जो की एक मीडिया कलाकार है।

राकेश शर्मा आजकल क्या कर रहे हैं?Rakesh Sharma History in Hindi

वो अभी कहा है और क्या कर रहे है ये जानने के लिए बहुत से आर्टिकल पढ़े और वीडियो देखो तब जाकर पता चला की वो रिटायर हो गए है और कुछ गुप्त चीज़ो पर काम कर रहे है। इसके साथ साथ वो मोटिवेशन लेक्चर इंडिया और बाहर देते है।

आईआईटी में जाता हूं. आईआईएम में घूमता हूं. मोटिवेशनल लेक्चर देता हूं. जो भी अनुभव पाया है उसे साझा करता हूं. जब तक संभव होगा करता रहूंगा. जब आपको कोई काम दिया जाता है तो उस वक़्त सारा फोकस काम पर होता है. अंतरिक्ष के बारे में हमें बहुत कम ज्ञान है. हम हर दिन नई चीज़ों की तलाश करते हैं.

भारत की आज़ादी की 72वीं वर्षगांठ के मौक़े पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से प्राचीर किया कि 2022 में देश की किसी बेटी या बेटे को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा

इसपर राकेश शर्मा ने कहा की 30 वर्षों से ज़्यादा समय से मुझे इसका इंतज़ार था. बाक़ी भारतीयों की तरह मैं भी उत्सुकता से बैठा हुआ था. मुझे सुकून मिला कि 2022 में भारत अपनी तकनीक से अंतरिक्ष में दस्तक देगा. अब तकनीक हमारी होगी और पिछले 30 सालों से मैं यही कह रहा हूं. भले मैं अंतरिक्ष में जाने वाला पहला भारतीय था, लेकिन अपने वैज्ञानिकों और तकनीक के दम पर जाने की बात ही कुछ और है.

राकेश शर्मा की उपलब्धिया

  • 20 सितम्बर 1982 को राकेश शर्मा का चयन भारत (इंडियन स्पेस रिसर्च सेण्टर) और सोवियत संघ (इन्टरकॉसमॉस) के एक संयुक्त अंतरिक्ष मिशन के लिए हुआ
  • चाँद पर कदम रखने वाले पहले भारतीय
  • अंतरिक्ष यात्रा करने वाले पहले भारतीय बने
  • भारतीय वायु सेना से विंग कमाडर के पद पर सेवानिवृत्त हो गए
  • Rakesh Sharma को भारत के सर्वोच्च अवार्ड अशोक चक्र से सम्मानित किया गया था –
  • रशियन सरकार ने उन्हें हीरो ऑफ़ सोवियत संघ की उपाधि से सम्मानित किया था।
  • राकेश ने भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की एक समिति में भाग लिया जिसने एक नए भारतीय अन्तरिक्ष उड़ान कार्यक्रम को स्वीकृति दी

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