Poem in Hindi on Mother 😎 माँ के ऊपर हिन्दी कविताएँ 😖

Poem in Hindi on Mother 😎 माँ के ऊपर हिन्दी कविताएँ 😖
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दोस्तों आज हम आपके लिए लाये है poem on mother in hindi में क्योकि हम सभी अपनी माँ को बहुत प्यार करते है। अगर आप अपनी माँ को कोई कविता सुनाएँगे तो उन्हें बहुत अच्छा लगेगा। हमने इस आर्टिकल में माँ के ऊपर 4 हिन्दी कविताएँ पब्लिश कर रहे है जो आपको बहुत पसंद आएंगी।

Poem in Hindi on Mother -1

Poem in Hindi on Mother

परीलोक की कथाकहानी
हँसकर मुझे सुनातीं मम्मी
फूलों वाले तितली वाले
गाने मुझे सिखातीं मम्मी।

खीर बने या गरम पकौड़े
पहले मुझे खिलातीं मम्मी
होमवर्क पूरा कर तो
टॉफी-केक दिलातीं मम्मी।

काम अगर मैं रहूँ टालता
तब थोड़ा झल्लातीं मम्मी
झटपट झूठ पकड़ लेती हैं
मनहीमन मुसकातीं मम्मी।

रूहूं तो बस बात बनाकर
पल में मुझे मनातीं मम्मी,
बड़ा लाड़ला तू तो मेरा
कहकर मुझे रिझातीं मम्मी।

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Poem on Mother in Hindi -2

तेरा साथ चाहिए माँ

मै भी आगे बढ़ना चाहती ,
इस जमाने से लड़ना चाहती हूँ।
कुछ सपने हैं मेरी आंखों ,
इसे सच करना चाहती हूं।
बस तेरा साथ चाहिए माँ,
तेरा साथ चाहिए।

मै भी तेरे ऊंगलियों को, पकड़ के चलना सीखा है।
तेरे ही कंधो पर बैठकरआसमान देखना सीखा है।

फिर क्यूँ करती हो भेदभाव,
मै भी आसमान छूना चाहती हूं।
कुछ सपने हैं मेरी आखों में,
इसे सच करना चाहती हूं।
बस तेरा साथ चाहिए माँ,
तेरा साथ चाहिए।

नाजुक हूं , भावुक हूं , पर मेरा भी कहीं किनारा है।
क्यूँ कहती हो बार-बार, की पति ही तेरा सहारा है।

मोम की भांति जलकर ही,
खुद को रौशन करना चाहती हूं।
कुछ सपने हैं मेरी आँखों ,
इसे सच करना चाहती हूं।
बस तेरा साथ चाहिए मा,
तेरा साथ चाहिए।

तूने ही पंख लगा के मुझकोइस धरती पर लाया है।
ऑचल की मीठी छावों , ममता की रंग बरसाया है।

फिर क्यूं तोड़ा इस पर को तुने,
मैं भी गगन चूमना चाहती हूँ।
कुछ सपने हैं मेरी आंखों ,
इसे सच करना चाहती हूं।
बस तेरा साथ चाहिए माँ,
तेरा साथ चाहिए।

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Poem on Mother in Hindi -3

तू मेरा आधार है माँ

तू मेरा संसार है माँ,
कुदरत का चमत्कार है माँ।
मैं जो भी हूँ वजह तुम हो,
तू मेरा आधार है माँ।

खुदा ने जब ये दुनिया गढ़ा होगा,
तुझमें ममता का सागर भरा होगा।
तू दर्पण है इस जग-जीवन का,
उसने बड़े फुर्सत से तुझे रचा होगा।

तू है तो है , जग सारा
तू मेरा संस्कार है माँ।
मैं जो भी हूँ वजह तुम हो,
तू मेरा आधार है माँ।

मैं दूर बहुत हूँ तुझसे माँ,
पर तेरा ऑचल अभी भी याद है।
फिर से छप जाऊँ तेरे आँचल में,
बस रब से यही फरियाद है।
करुणा की अखंड मूरत है तु,
तू मेरा व्यवहार है माँ।
मैं जो भी हूँ वजह तुम हो,
तू मेरा आधार है माँ।

मैं जब भी रोया करता था माँ,
तू कितना मुझे मनाती थी।

प्यार भरी लोरी की धुन 

लगाके गले सुलाती थी।
हर सुखदुख में पाता हूँ तुमको,
तू मेरा आकार है माँ।
मैं जो भी हूँ वजह तुम हो,
तू मेरा आधार है माँ।

कितनी भीड़ भरी दुनिया है माँ,
पर खुद को पाता यहाँ अकेला हूं।
तन मैला था आंगन में गिर कर
पर तेरे गोद में आकर खेला हूं।
बस मुद्दत है की तू साथ रहे

तू मेरा संचार है माँ।
मैं जो भी हूँ वजह तुम हो,
तू मेरा आधार है माँ।

 

Meri Maa Poem in Hindi – 4

न मों मुझे तुम फेंक देना ॥
माँ मुझे तुम फेंक देना,
माँ मुझे तुम फेंक देना ॥
उस जन्म पथ को लांघ कर
ममता की ऑचल न ओढ़ाना ।

माँ मुझे तुम फेंक देना
माँ मुझे तुम फेंक देना ॥

हर लाज से, हर माँज से,
इस निर्दयी संसार से ।

करुणा की निश्छल धारा में,
एक तेज धार हथियार से ।
बेटी की इस व्यथा में,

कोई रूप और न साकार देना |
माँ मुझे तुम फेंक देना,
माँ मुझे तुम फेंक देना ॥

हर ओर एक चित्तकार से,
परुष बन संसार से ।
कब तक बचाऊं खुद को यहाँ पर,

हैवानियत की मार से ।
करुणा की सागर छोड़ कर
बस एक उपकार करना |
माँ मुझे तुम फेंक देना,
माँ मुझे तुम फेंक देना ॥

अब आँख भी ओझल हुई है,
मन भी तो बोझल हुई है ।
मेरे बिना जननी न होगी,

तो फिर आवाम क्यूं निश्छल हुई है ।
ममता की मीठी पूंट पीकर

अपने आँसू को कभी गिरने न देना ।
माँ मुझे तुम फेंक देना,
माँ मुझे तुम फेंक देना ।

 

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