Letters Writing in Hindi For All Class – Writing format for Patra Lekhan
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हेलो दोस्तों आज से में एक नयी केटेगरी ऐड करने जा रहा हु जिसमे आपको बहुत सारे Letters Writing in Hindi यानि Patra Lekhan कैसे लिखते है उसके बारे में बाटूंगा। ये केटेगरी उन सभी के लिए बहुत उपयोगी होगी जो बच्चे अभी स्कूल में पढ़ते है क्योकि स्कूल में इस तरह की चीज़े उनसे जरूर पूछी जाती है और उनको गूगल पर ढूंढ़ना बहुत मुश्किल हो जाता है इसलिए मै आप सभी के लिए बहुत सारे Letters Writing in Hindi लेकर आ रहा हु जो आपको अच्छे से सीखा देंगे की हमें हिंदी में पत्र कैसे लिखने चाहिए क्योकि आजकल सभी को इंग्लिश में लेटर लिखना तो आ जाता है लेकिन हिंदी में लैटर लिखना बहुत मुश्किल लगता है उसके पीछे ये कारण है की इंग्लिश हर जगह लिखी और बोली जाती है लेकिन हिंदी बोलचाल धीरे धीरे ख़तम हो रहा शयद इसलिए भी इस तरह के आर्टिकल लिखने की कोशिश कर रहा हु। आईये शुरू करते है Letters Writing in Hindi में ताकि आप हर तरह के पत्र बिना किसी परेशानी के लिख और पढ़ सके।

पत्र या लैटर 2 तरह के होते है formal (औपचारिक) और informal (अनौपचारिक) अब बात अति है की ये formal और informal letter क्या होते है।

Formal Hindi Letter : ये वो लैटर या पत्र होते है जो किसी मकसद के लिए लिखे जाते है और ऑफिस या business के लिए लिखे जाते है

inFormal Hindi Letter : ये लैटर या पत्र अपने दोस्तों या अपने परिवार वालो को लिखे जाते है इनमे एक भाव छुपा होता है

 

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Letters Writing in Hindi For All Class

 

  1. अपनी संपादकीय पत्र रचना प्रकाशित करवाने के लिए संपादक महोदय को पत्र  लिखिए।

  2. सार्वजनिक स्थानों पर बढ़ते धूम्रपान पर चिन्ता व्यक्त करते हुए उसे रोकने के लिए ‘नवभारत टाइम्स’ के संपादक को पत्र लिखिए।

  3. आपने नया मकान बनवाया है, जिसके लिए आपको बिजली के नए मीटर लगवाने हैं। बिजली विभाग के अधिकारी को पत्र लिखकर पूछिए कि नया मीटर लगवाने की क्या विधि है?

  4. पुस्तकें मंगवाने के लिए प्रकाशक के पत्र लिखिए।

  5. विद्यालय में वृक्षारोपण समारोह का वर्णन करते हुए समाचार पत्र के संपादक को पत्र लिखिए।

  6. अपने क्षेत्र में पेय जल की समस्या की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए स्वास्थ्य अधिकारी को एक पत्र लिखिए।

  7. अपने क्षेत्र के एक उपेक्षित पार्क के समुचित रख-रखाव की व्यवस्था करने के लिए निगम आयुक्त को एक पत्र लिखिए।

  8. झुग्गी झोपड़ियों वाली बस्तियों में जन सुविधाओं की अव्यवस्था का विवरण करते हुए दैनिक समाचारपत्र के सम्पादक के नाम एक पत्र लिखें।

  9. अपने क्षेत्र में खेलकूद के लिए उपयुक्त सामग्री की व्यवस्था करने के लिए ” नगरपालिका अध्यक्ष को पत्र लिखिए।

  10. पुस्तकें मैंगवाने के लिए पुस्तक विक्रेता को पत्र लिखिए।

  11. दिल्ली नगर निगम के समाज शिक्षा अधिकारी को वाचनालय खोलने के लिए एक पत्र लिखिए।

  12. मोहल्ले में सार्वजनिक नल लगवाने के लिए नगरनिगम के अधिकारी को आवेदन पा लिखिए।

  13. आप समाजसेवी प्रवृत्ति के व्यथित हैं इसलिए आप अपने मित्रों के साथ दस दिनों के लिए समाज सेवा के निमित बाढ़ पीड़ित क्षेत्र में जाना चाहते हैं। पत्र द्वारा अपने मातापिता से अनुमति प्राप्त कीजिए।

 

 

अपनी संपादकीय पत्र रचना प्रकाशित करवाने के लिए संपादक महोदय को पत्र लिखिए।

सेवा में,
श्रीमान संपादक महोदय
दैनिक जागरण
मान्यवर,

सविनय निवेदन इस प्रकार है कि आपके ‘कविनारीय परिशिष्ट’ के लिए मैं स्वलिखित एक कहानी प्रकाशनार्थ भेज रही हैं। यह कहानी बहुत शिक्षाप्रद है, जिसमें आज के युवा वर्ग के भटकते कदमों की कहानी बयान की गई है। इस कहानी में मैंने पथभ्रष्ट युवाओं की सभी समस्याओं को दर्शाया है। समस्या का समाधान भी प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। आज के वातावरण से जुड़ी यह कहानी आपको अवश्य ही पसंद आएगी, ऐसा मुझे विश्वास है।

इससे पहले भी मेरी तीन कहानियाँ आज का युवा, धर्मयुद्ध तथा ‘माँ की ममता हिन्दुस्तान टाइम्स में प्रकाशित हो चुकी हैं। कहानी की अस्वीकृति की स्थिति में मैं वापसी हेतु पाँच रुपये के डाक टिकट सहित अपना पता लिखा लिफाफा भी भेज रही हूं। यदि आप मेरी कहानी को स्वीकार करके प्रकाशित करेंगे तो आपकी अति कृपा होगी। इससे हम जैसे उभरते कलाकारों का प्रोत्साहन होगा।

सधन्यवाद,
भवदीय
रिद्धिमा गुप्ता
लक्ष्मी नगर
दिनांक 2 नवम्बर20xx

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सार्वजनिक स्थानों पर बढ़ते धूम्रपान पर चिन्ता व्यक्त करते हुए उसे रोकने के लिए ‘नवभारत टाइम्स’ के संपादक को पत्र लिखिए।

 

सेवा में,
श्रीमान संपादक जी,
नवभारत टाइम्स,
दिली”
विषय : सार्वजनिक स्थानों पर बढ़ते धूम्रपान पर चिन्ता
महोदय,

सविनय निवेदन यह है कि कई सालों से केन्द्रीय सरकार की सिफारिश पर उच्च न्यायालय ने सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर रोक लगाने के आदेश जारी किए थे। इस आदेश से कुछ प्रबुद्ध लोग प्रसन्न हुए तो कुछ बीड़ी, सिगरेट बनाने वाली कम्पनियाँ एवं इनका सेवन करने वाले नागरिक नाराज भी हुए। प्रारम्भ में तो सब कुछ ठीक रहा। लोगों ने दंड तथा जुर्माने के डर से सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करना छोड़ दिया लेकिन अब फिर वही पहले जैसी स्थिति हो गई है।

मान्यवरआज औषधालयों, मंदिरोंस्कूलोंन्यायालयोंबस अड्डोंरेलवे स्टेशनों आदि के आसपास सभी निर्भय होकर धूम्रपान कर रहे हैं और न्यायालय के नियमों का खुलेआम उल्लघंन हो रहा है। इसका मुख्य कारण है, इस बुराई के प्रति सरकार का कड़ा रुख न होना तथा लोगों में सामाजिक चेतना का अभाव होना।

धूम्रपान स्वास्थ्य के साथसाथ धन की भी बरबादी है। यह टी.वी. तथा कैंसर जैसी बीमारियों की जड़ है। यह अन्य लोगों को भी प्रभावित करता है। सार्वजनिक स्थानों पर छात्रों, बीमार महिलाओं तथा सदाचारियों पर धूम्रपान का बुरा असर पड़ता है। अतः आप अपने प्रतिष्ठित समाचार पत्र के माध्यम से लोगों को सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान न करने के लिए। जनचेतना आन्दोलन की नींव रखे। आपकी अति कृपा होगी।

समाज सुधार मंडल
लक्ष्मी नगर,
4 फरवरी, 20xx

 

आपने नया मकान बनवाया है, जिसके लिए आपको बिजली के नए मीटर लगवाने हैं। बिजली विभाग के अधिकारी को पत्र लिखकर पूछिए कि नया मीटर लगवाने की क्या विधि है?

 

राम शर्मा
11/12 निर्माण विहार,
दिल्ली
सेवा में,
उपमंडल अधिकारी
दिल्ली विद्युत बोर्ड,
दिल्ली।
विषय : नए मीटर की पूछताछ
महोदय

मैंने निर्माण विहारफेस-2 में नया मकान बनवाया है। इसके लिए मुझे बिजली के नए मीटर की आवश्यकता है। कृपया करके मुझे यह बताने का कष्ट करें कि इसके लिए मुझे क्या औपचारिकताएं पूरी करनी होगी।

धन्यवाद सहित.
भवदीय,
राम शर्मा,
1 जनवरी, 2019

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पुस्तकें मंगवाने के लिए प्रकाशक के पत्र लिखिए।

 

नाम दीपांशु भगत
ए-9, प्रीत विहार
दिनांक 4 नवम्बर, 20xx
सेवा में,
श्रीमान व्यवस्थापक महोदय,
रॉयल बुक डिपो,
महावीर मार्किटप्रथम तल
नई सड़क,
दिल्ली

कृपया निम्नलिखित पुस्तकें शीघ्र ही वी.पी.पी. द्वारा उचित कमीशन काटकर उपर्युक्त पते पर भिजवाने का कष्ट करें। इस पत्र के साथ मैं 200/- रुपये का ड्राफ्ट भिजवा रहा हूँ। यदि किताबें तैयार न हो, तो कृपया डाक द्वारा सूचित करने का कष्ट करें।

पुस्तकें भेजते समय कृपया इस बात का ध्यान रखे कि वे अधूरी या कटीफटी न हो। नवीन संस्करण की पुस्तकें ही भेजें। पुस्तकों के नाम निम्नलिखित हैं :

1. रॉयल संस्कृतहिन्दी शब्दकोश
2. रॉयल मेडिकल शब्दकोश
3. रॉयल हिन्दी-अंग्रेजी शब्दकोश
4. अंग्रेजीहिन्दी शब्दकोश रायल
5. रॉयल हिन्दी-हिन्दी शब्दकोश

सभी पुस्तकों की दो-दो प्रतियाँ चाहिए।
सधन्यवाद
भवदीय
दीपांशु भारत

 

विद्यालय में वृक्षारोपण समारोह का वर्णन करते हुए समाचार पत्र के संपादक को पत्र लिखिए।

 

सेवा में,
श्रीयुत संपादक जी,
हिन्दुस्तान टाइम्स,
नई दिल्ली।
विषय : विद्यालय में वृक्षारोपण समारोह का आयोजन
महोदय,

हमारे विद्यालय में आज दिनांक 5 अगस्त, 2008 को वृक्षारोपण समारोह सम्पन्न हुआ, जिसका संक्षिप्त विवरण में आपको प्रेषित कर रहा हूं। आशा है आप इसे कल प्रकाशित होने वाले अपने दैनिक पत्र में अवश्य छापेंगे। आज दिनांक 5 अगस्त, 2008 को रॉयन इंटरनेशनल स्कूल, मयूर विहार, फेस1 में वृक्षारोपण समारोह बड़े ही उल्लास के साथ मनाया गया। इस समारोह का उद्घाटन पर्यावरण मंत्री द्वारा किया गया।

सर्वप्रथम उन्होंने प्रधानाचार्य जी, अध्यापिकाओं तथा विद्यार्थियों के एक दल के साथ विद्यालय के समीप निर्मित ‘सुन्दर वन’ का निरीक्षण किया। फिर उन्होंने विद्यालय परिसर में वृक्षारोपण किया। प्रधानाचार्या तथा विद्यार्थियों ने भी पौधे लगाए। सभी ने वृक्षों के संरक्षण तथा पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। पर्यावरण मंत्री ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए पर्यावरण के महत्व पर प्रकाश डाला। समारोह की समाप्ति पर पर्यावरण से सम्बन्धित ‘हमारी सुन्दर धरती’ शीर्षक नृत्य नाटिका प्रस्तुत की गई, जिसकी सभी में बहुत प्रशंसा की। अंत में प्रधानाचार्या महोदया ने गणमान्य अतिथिगण तथा सभी का धन्यवाद किया।

 

रोहताश वर्मा,
पर्यावरण समिति
रॉयन इंटरनेशल स्कूल
मयूर विहार, दिल्ली
5 अगस्त, 20xx

 

अपने क्षेत्र में पेय जल की समस्या की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए स्वास्थ्य अधिकारी को एक पत्र लिखिए।

 

सेवा में,
श्रीमान स्वास्थ्य अधिकारी,
नगर निगम (उत्तरी क्षेत्र)
कश्मीरी गेट,
दिल्ली

 

विषय : निर्माण विहार में पेय जल का अभाव
महोदय,

इस दिल्ली के उत्तरी क्षेत्र निर्माण विहार) के निवासी इस पत्र के माध्यम से अपने क्षेत्र की पेय जल की समस्या आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं। आजकल यहाँ पर पानी की आपूर्ति के कारण हम लोगों का जीना दुश्वार हो गया है। हर तरफ हाहाकार मचा हुआ है। नलों में पानी सुबह शाम केवल एकडेढ़ घंटे के लिए आता है, लेकिन उसका दबाव इतना कम होता है कि मुश्किल से एक-दो बल्टियाँ ही भर पाती हैं।

तीसरी चौथी मंजिल पर तो पानी चढ़ ही नहीं पाता है। वैसे तो समाचार पत्रों के माध्यम से टैंकरों से पानी देने की सुविधा का विज्ञापन आपकी ओर से बार-बार दिया। जाता है, लेकिन हमारे क्षेत्र में तो एक बार भी टैंकर के दर्शन नहीं हो पाए। कृपया आपसे सविनय विनती है कि आप इस क्षेत्र के निवासियों को इस विपत्ति से निकालने के लिए शीघ्र ही कोई ठोस कदम उठाएँ।

रौनक जैन
उपमंत्री
निर्माण विहार विकास परिषददिल्ली
दिनांक 10 जून, 20xx

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अपने क्षेत्र के एक उपेक्षित पार्क के समुचित रख-रखाव की व्यवस्था करने के लिए निगम आयुक्त को एक पत्र लिखिए

 

सेवा में,
श्रीमान निगम आयुक्त महोदय
दिल्ली नगर निगम
दिल्ली।

में अपने इस पत्र के माध्यम से आपका ध्यान अपने क्षेत्र लक्ष्मीनगर के एक उपेक्षित पार्क की ओर आकृष्ट करना चाहता हूँ।

लक्ष्मीनगर 92 में एक बहुत बड़ा पार्क है। कुछ समय पहले तक इस पार्क की स्थिति ठीक-ठाक थी। लोग सुबहशाम इसमें सैर करने आते थे तथा बच्चे भी। अपने मनपसन्द खेल खेलते थे। पेड़ पौधे भी थे तथा कुछ छायादार पेड़ों के नीचे लोग आराम करके आनन्द का अनुभव करते थे। क्यारियों में सुन्दर ल। भी थे तथा सुबह योगकक्षा भी चलती थी, जिससे काफी लोग अपना जीवन सुधार पाते थे।

परन्तु दुर्भाग्यवश, आज इस पार्क की स्थिति बिगड़ चुकी है, जिसका सबसे बड़ा कारण सरकार की ओर से इस पार्क पर ध्यान न दिया जाना है। अब इस पार्क में हर समय कुत्तों का साम्राज्य रहता है। कुछ लोग जुआ तथा शराब आदि पीने के लिए इस स्थान का दुरुपयोग कर रहे हैं। अब यह पार्क असामाजिक, अवांछनीय तथा अमानवीय कुकर्मों का अड्डा बन चुका है। पार्क में घर तरफ धलमिट्टी दिखाई पड़ती है क्योंकि पानी के अभाव में सभी पेड़ सूख चुके हैं। दूसरे शब्दों में आज यह पार्क पूर्णतया उपेक्षित तथा दयनीय पार्क बन चुका है। अतः आपसे हाथ जोड़कर विनती है कि आप इस पार्क से अवैध कब्जे हटवाकर इसे सुन्दर तथा हराभरा बनवाएँ जिससे इस क्षेत्र के वासी इसका लाभ प्राप्त कर सके।

सधन्यवाद।
भवदीय,
संचित
लक्ष्मीनगर, दिल्ली।

झुग्गी झोपड़ियों वाली बस्तियों में जन सुविधाओं की अव्यवस्था का विवरण करते हुए दैनिक समाचारपत्र के सम्पादक के नाम एक पत्र लिखें।

सेवा में,
प्रधान सम्पादक जी,
दैनिक जागरण

अम्बेडकर मार्ग
नई दिल्ली।
विषय : जन सुविधाओं के सम्बन्ध में शिकायतीपत्र।
महोदय”

अपने इस पत्र के माध्यम से मैं आपका ध्यान दिल्ली महानगर की झुग्गी-झोपड़ी बस्ती में उत्पन्न हुई जनअसुविधाओं तथा अव्यवस्थाओं की ओर आकृष्ट करना चाहता हूं। इस सन्दर्भ में मैं यह कहना चाहता हूँ कि दिल्ली में झुग्गी झोपड़ियाँ तो बहुत है लेकिन इनमें अपेक्षित और आवश्यक जनसुविधाएं नहीं है। यहाँ के निवासी बहुत ही गन्दगी में दुःखद जीवन बिता रहे हैं। इनके लिए न तो पीने का स्वच्छ पानी उपलब्ध है, न ही खाने के लिए स्वच्छ भोजन। जो पानी ये लोग पीते हैं, वह बहुत गन्दा होता है। साथ में ही शौचालय होने के कारण चारों ओर बदबू आती रहती है।

इस प्रकार पानी, शौचालयों आदि की उचित व्यवस्था न होने के कारण ये लोग सदा ही किसीनकिसी बीमारी के शिकार बनते रहते हैं। इसी तरह यातायात तथा संचार व्यवस्था के न होने से झोपड़बस्तियों का जीवन बड़ा ही संकटमय तथा अंधकारमय होता है। इस सम्बन्ध में नगर निगम के अधिकारियों को हम कई पत्र भी लिख चुके , परन्तु अभी तक कोई भी कार्यवाही नहीं हुई है।
अतएव आपसे सादर अनुरोध है कि आप अपने लोकप्रिय समाचारपत्र के माध्यम से उपयुक्त समस्याओं पर आधारित कोई सन्देशात्मक लेख अवश्य प्रकाशित करें ताकि सोए हुई अधिकारी जाग जाएँ तथा गरीब लोगों का जीवन सुधर पाए। सधन्यवाद।

भवदीय,
अध्यक्ष, समाज सुधार समिति
लोनी, दिल्ली।
10 मई, 20xx

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अपने क्षेत्र में खेलकूद के लिए उपयुक्त सामग्री की व्यवस्था करने के लिए ” नगरपालिका अध्यक्ष को पत्र लिखिए।’

 

सेवा में,
श्रीमान् अध्यक्ष महोदय,
नगर महापालिका
लखनऊ, उ.प्र.

इस पत्र के माध्यम से मैं आपका ध्यान अपने क्षेत्र में खेलकूद के लिए उपयुक्त सामान के न होने की स्थिति की ओर आकृष्ट करना चाहता हूँ।

इस सन्दर्भ में मेरा कहना है कि हमारे क्षेत्र में पर्याप्त खेलकूद सामग्री न होने के कारण खिलाड़ियों को बहुत निराशा होती है। वे इस क्षेत्र में पिछड़ रहे हैं। जबकि हम सभी जानते हैं कि आज हमारे जीवन में खेलकूदों का कितना महत्त्वपूर्ण स्थान है। यदि खिलाड़ियों को उचित सामग्री उपलब्ध कराई जाए तो उनका भविष्य भी उज्ज्वल हो सकता है तथा वे भी देश का नाम रोशन कर सकते हैं। हम सभी जानते हैं कि हमारे यहाँ प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, कमी है तो बस सुअवसरों को।
अतएव मेरा आपसे अनुरोध है कि आप यहाँ के खेल-परिसर के लिए खेलकूद से सम्बन्धित उपयुक्त सामग्री उपलब्ध कराने की कृपा करें।

सधन्यवाद।
भवदीय
उत्सव
2 जनवरी20xx

 

पुस्तकें मैंगवाने के लिए पुस्तक विक्रेता को पत्र लिखिए।

 

सेवा ,
श्रीयुत प्रकाशक महोदय
रॉयल बुल डिपो,
नई सड़क, दिल्ली।
विषय : पुस्तकें भंगवाने के लिए आवेदन पत्र।
मान्यवर

मेरा आपसे सविनय अनुरोध है कि नीचे दिए गए विवरण के अनुसार नवीन संस्करण की पुस्तकेंउचित कमीशन काटकर यथाशीघ्र वी.पी.पी. द्वारा निम्नलिखित पते पर भेजने का कष्ट करें। सभी पुस्तकें साफसुथरी तथा पूरे पृष्ठों वाली होनी चाहिए। पार्सल मिलते ही छुड़ा लिया जाएगा। पुस्तकें मंगवाने हेतु चार सौ रुपए अग्रिम राशि में रूप में भेज रहा हूँ।

पुस्तक का नाम प्रतियाँ

  • रॉयल अंग्रेजीहिन्दी शब्दकोश
  • रॉयल हिन्दी-अंग्रेजी शब्दकोश
  • रॉयल संस्कृतहिन्दी शब्दकोश
  • रॉयल विशालहिन्दी शब्दकोश
  • रॉयल मानकहिन्दी शब्दकोश
  • रॉयल उपयोगीहिन्दी शब्दकोश
  • रॉयल बालहिन्दी शब्दकोश

सधन्यवाद।
भवदीय
दीपक राठी
रामगलीशाहदरा
दिल्ली
2 फरवरी20xx

 

दिल्ली नगर निगम के समाज शिक्षा अधिकारी को वाचनालय खोलने के लिए एक पत्र लिखिए।

 

9089, प्रेम गली,
आजाद नगर, दिल्ली।
2 सितम्बर, 20xx
प्रतिष्ठा में,
श्रीमान् समाज शिक्षा अधिकारी
दिल्ली नगर निगम, दिल्ली।
विषय : वाचनालय खोलने हेतु आवेदन पत्र।
महोदय,

सविनय निवेदन यह है कि आजाद नगर कॉलोनी मध्यवर्गीय एवं निर्धनअनपढ़ तथा पिछड़े लोगों की ऐसी बस्ती है, जहाँ अधिकतर श्रमजीवी लोग रहते हैं, जो दिनभर मेहनत मजदूरी करते हैं तथा सायंकाल जब थके हारे अपने घरों में लौटते हैं तो थोड़ा मनोरंजन भी चाहते हैं। ये लोग जुआ खेलकर शराब पीकर या फिर सस्ता चलचित्र देखकर अपना मनोरंजन करते हैं। इन सब कारणों से परिवारिक कलह जन्म लेता है।

हमारा विचार है कि यदि इन लोगों के लिए एक रात्रि पाठशाला खोल दी जाए और एक ऐसे वाचनालय की व्यवस्था कर दी जाएजिसमें कुछ अच्छे समाचार पत्र तथा पत्रपत्रिकाएँ हों तो निश्चय ही लोग कुछ समय पढ़ने में बिता सकेंगे तथा अपना जीवनस्तर सुधार सकेंगे। मैं उम्मीद करता हूँ कि आप भी हमारे इस विचार से एकमत होंगे तथा समाजहित के इस महत्वपूर्ण कार्य की ओर ध्यान देंगे तथा इस बस्ती में एक वाचनालय अवश्य निर्मित कराएँगे। इस कार्य के लिए हम आपके सदा आभारी रहेंगे

सधन्यवाद।

कुलदीप हुड्डा (अध्यक्ष)
समाज सुधार समिति
आजाद नगर, दिल्ली।

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मोहल्ले में सार्वजनिक नल लगवाने के लिए नगरनिगम के अधिकारी को आवेदन पा लिखिए।

 

सेवा में,
श्रीयुत जल अभियन्ता,
दिल्ली नगर निगम
दिल्ली।
विषय : सार्वजनिक नल लगवाने हेतु पत्र।
महोदय

सविनय निवेदन यह है कि हमारे मुहल्ले में 200 से अधिक परिवार रहते हैं। इस प्रकार कुल 500 के करीब व्यक्ति है। हमारे यहाँ केवल दो ही सार्वजनिक नल है इसलिए पानी भरने के लिए सदा लम्बी कतार लगी रहती है। कभीकभी तो पानी की बात पर लड़ाईझगड़ा तथा गालीगलौच व मारपीट तक की नौबत भी आ जाती है। इनमें से कई परिवार ऐसे हैं जिनके अपने घरों के पानी के नल नहीं है तथा वे सार्वजनिक नलो से ही पानी भरते हैं। उनकी दशा तो और भी दयनीय है क्योंकि पानी एक निश्चित अवधि के लिए ही आता है इसलिए वे लोग पर्याप्त पानी नहीं भर पाते हैं।
अतएव हमारी आपसे करबद्ध प्रार्थना है कि इस मुहल्ले की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए कम से कम तीन-चार नल और लगवाने की कृपा करें जिससे जनता का सार्वजनिक हित हो सके तथा परस्पर लड़ाई झगड़ा भी न हो। आशा है आप हमारी परेशानियों को समझते हुए शीघ्रातिशीघ्र इस ओर ध्यान देंगे।

सधन्यवाद।
रतन जैन
शकरपुर दिल्ली
19 जून20xx

 

आप समाजसेवी प्रवृत्ति के व्यथित हैं इसलिए आप अपने मित्रों के साथ दस दिनों के लिए समाज सेवा के निमित बाढ़ पीड़ित क्षेत्र में जाना चाहते हैं। पत्र द्वारा अपने मातापिता से अनुमति प्राप्त कीजिए।

परीक्षा भवन
दिल्ली
2 अगस्त, 20xx
आदरणीय माँ-पिताजी,
सादर चरणस्पर्श।

कल ही आपका पत्र प्राप्त हुआ तथा आपका कुशलमंगल ज्ञात हुआ। जैस कि सब जानते ही हैं कि आजकल उत्तर भारत में बाढ़ का विनाशकारी रूप देखने को मिल रहा है तथा इस विनाशलीला में कई गांव बह चुके हैं। जानमाल की हानि का नंगा नाच हर तरफ देखने को मिला है। अनगिनत लोग बेकार, बेघर, लाचार, भूख से बिलख रहे हैं तथा गन्दे पानी में ही कच्चे चावल मिलाकर रहा खाने को विवश हो रहे हैं अर्थात् लोगों के दुखों का कोई अन्त नहीं दिख है। इन बाढ़ पीड़ितों की सहायता हेतु सरकार की ओर से अनेक सराहनीय कार्य किए जा रहे हैं।

कई स्वयं संस्थाएँ आदि भी आ सेवी संस्थाएंशिक्षण आगे रहे हैं। हमारे विद्यालय से भी एक सेवादल दस दिनों के लिए बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र में सेवार्थ जाने वाला है। मेरी हार्दिक इच्छा है कि मैं भी इस सेवा दल में सम्मिलित होकर बेबस तथा बेसहारा लोगों की मदद कर सकें। मैं तो सोचसोच कर ही घबरा रहा हूँ, उन पर क्या बीत रही होगी। ऐसे समय में मानव ही मानव के काम आता है। पिताजी आप तो स्वयं भी अनेक सेवी-संस्थाओं से जुड़े हुए हो। आशा है आप मुझे भी इस सेवा कार्य में भाग लेने की अनुमति अवश्य देगें। मैं हर क्षण आपके उत्तर की प्रतीक्षा कऊंगा।

आपका सुपुत्र
अजित।

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