Informal Letter Writing in Hindi With Example for All Class Student

Informal Letter Writing in Hindi With Example for All Class Student
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हेलो दोस्तों आज से में एक नयी केटेगरी ऐड करने जा रहा हु जिसमे आपको बहुत सारे Hindi letters यानि Patra Lekhan कैसे लिखते है उसके बारे में बाटूंगा। ये केटेगरी उन सभी के लिए बहुत उपयोगी होगी जो बच्चे अभी स्कूल में पढ़ते है क्योकि स्कूल में इस तरह की चीज़े उनसे जरूर पूछी जाती है और उनको गूगल पर ढूंढ़ना बहुत मुश्किल हो जाता है इसलिए मै आप सभी के लिए बहुत सारे Informal Letter Writing in Hindi लेकर आ रहा हु जो आपको अच्छे से सीखा देंगे की हमें हिंदी में पत्र कैसे लिखने चाहिए क्योकि आजकल सभी को इंग्लिश में लेटर लिखना तो आ जाता है लेकिन हिंदी में लैटर लिखना बहुत मुश्किल लगता है उसके पीछे ये कारण है की इंग्लिश हर जगह लिखी और बोली जाती है लेकिन हिंदी बोलचाल धीरे धीरे ख़तम हो रहा शयद इसलिए भी इस तरह के आर्टिकल लिखने की कोशिश कर रहा हु। आप हमारे द्वारा लिखा हुवा   informal Letter in Hindi Format with Example का  आर्टिकल भी पढ़ सकते है

पत्र या लैटर 2 तरह के होते है formal (औपचारिक) और informal (अनौपचारिक) अब बात अति है की ये formal और informal letter क्या होते है।

formal : ये वो लैटर या पत्र होते है जो किसी मकसद के लिए लिखे जाते है और ऑफिस या business के लिए लिखे जाते है

informal : ये लैटर या पत्र अपने दोस्तों या अपने परिवार वालो को लिखे जाते है इनमे एक भाव छुपा होता है

Informal Letter Writing in Hindi

CHECK OUT LIST OF INFORMAL LETTER IN HINDI

  1. अपने मित्र को पत्र लिखकर अध्ययनशील होने की सलाह दीजिए ?

  2. प्रातःकालीन सैर के लाभों का वर्णन करते हुए अपने छोटे भाई को पत्र लिखिए।

  3. स्वदेशी वस्तुओं का महत्व समझाते हुए अपने प्रिय मित्र को पत्र लिखिए?

  4. किसी पयर्टन स्थन की यात्रा पूरी करके विद्यालय में सकुशल पहुँच जाने की सूचना पत्र द्वारा अपने पिता जी को दीजिए।

  5. परीक्षा में नकल करते पकड़े जाने पर अपने छोटे भाई को पत्र लिखिए।

  6. आपके विद्यालय में होने वाले वार्षिक उत्सव में आपको पुरस्कृत किया जाएगा। आप चाहती हैं कि आपके माता-पिता भी इस यादगार क्षण को देखें । उन्हें बुलाने हेतु पत्र लिखिए।

  7. बीमारी के कारण आपका मित्र परीक्षा देने में असमर्थ है उसको निराशा से बचाने के लिए प्रेरणात्मक पत्र लिखिए।

  8. अपने छोटे भाई को रक्षा बन्धन पर राखियाँ भेजते हुए स्नेहमयी पत्र लिखिए।

  9. अपनी सहेली को एक पत्र लिखिए जिसमें आ परीक्षा की तैयारियों के विषय में सलाह चाहिए ।

 

अपने मित्र को पत्र लिखकर अध्ययनशील होने की सलाह दीजिए ?

07/2 गाँधी रोड
दिल्ली
17 नवम्बर20xx
प्रिय मित्र शिखर,
शुभाशीष।

तुम कैसे हो? आशा है ठीक ही होगें। कल मुझे तुम्हारे छात्रावास से एक। मित्र का पत्र प्राप्त हुआ। तुम समझ भी गये होगें कि मैं यह पत्र क्यों लिख रहा ? यह जानकर मुझे बहुत दुःख हुआ कि आजकल तुम्हारा ध्यान पढ़ाई से हटकर अन्य शरारतों में लग रहा है। तुम्हारी संगति बिगड़ रही है। प्रियमित्र तुम यह बात भलीभांति जानते हो कि तुम्हे छात्रावास में भेजने का मूल उद्देश्य यह था कि तुम पढ़ लिखकर बड़े अफसर बनो और इस लक्ष्य प्राप्ति के लिए तुम्हें पढ़ाई पर पूरा ध्यान देना होगा।

अध्ययनशील, परिश्रमी तथा सत्संगति वाला व्यक्ति ही जीवन में कुछ बन सकता है। अध्ययन तुम्हारी ज्ञान वृद्धि ही नहीं करता, वरन् तुम्हें सही रास्ता दिखाकर कुसंगति से भी बचाता है। पढ़ाई का अपना ही आनन्द होता है। अध्ययन से मनुष्य सभ्य तथा सुसंस्कृत बनता है। अध्ययनशील व्यक्ति का हर स्थान पर सम्मान होता है तथा वह सबकी नज़रों के ऊपर उठता है। तुम्हारे मातापिता की भी सारी आशाएँ और उम्मीदें तुम पर ही टिकी है। वे इतना धन इसीलिए तो खर्च कर रहे है ताकि तुम्हे जीवन में कभी भी नीचा न देखना पड़े। इसीलिए मैं चाहता हूं कि तुम मेरे द्वारा कही बातों को उपदेश न मानकर सलाह समझकर उस पर अमल करोगें तथा अपने मातापिता, मित्रों तथा राष्ट्र का सिर गर्व से ऊंचा करोगे।

तुम्हारा शुभचिंतक
दीक्षान्त।

प्रातःकालीन सैर के लाभों का वर्णन करते हुए अपने छोटे भाई को पत्र लिखिए।

दिल्ली विश्वविद्यालय
दिल्ली।
प्रिय रीतेश,
सप्रेम नमस्ते।

ईश्वर की अपार कृपा से मैं यहाँ पर कुशलपूर्वक हूँ और आशा करता हूं कि  तुम भी अच्छे स्वास्थ्य का आनन्द ले रहे होगें। जैसा कि तुमने हम सबसे वादा किया है कि तुम पूरी लगन से पढ़ाई करोगे तथा कक्षा में प्रथम आकर दिखाओगे तो हमे यह जानकर बहुत प्रसन्नता हुई कि तुम्हारा परिणाम बहुत अच्छा आया है। प्रथम नहीं तो द्वितीय श्रेणी में पास हुए हो। मेरी ओर से तुम्हे बहुतबहुत बधाई। पिता जी के द्वारा यह ज्ञात हुआ कि तुम आगे जाकर डॉक्टरी में प्रवेश लेना चाहते हो। इसके लिए तुम दिनरात पढ़ते रहते हो। खाना भी ठीक समय पर नहीं खाते, लेकिन मेरे प्यारे भाईइस तरह तो तुम्हारा स्वास्थ्य बिगड़ जाएगा और यदि स्वास्थ्य ही नहीं होगा, तो फिर तुम पढ़ाई कैसे करोगे।

सबसे पहले तो यह बात गाँठ बाँध लो कि स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है। यदि तुम्हारा स्वास्थ्य ही बिगड़ गया तो पढ़ाई असम्भव हो जाएगी । स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए आवश्यक है कि तुम सुबह जल्दी सोकर उठा करो। उठकर थोड़ा व्यायाम या प्राणायाम किया करो। प्रात: कालीन भ्रमण तो सबसे अच्छा व्यायाम है। सूर्योदय के पहले की शुद्ध हवा स्वास्थ्य के लिए संजीवनी बूटी जैसा काम रकती है। इसके अतिरिक्त समय पर खाना खाना तथा छः से सात घण्टे की नींद लेना भी अच्छे स्वास्थ्य की निशानी है। इससे तुम्हारा शरीर हष्टपुष्ट रहेगा तथा पूरा दिन तुम अपने आपको तरोताजा महसूस करेंगे।

मुझे विश्वास है कि तुम अपने बड़े भाई की सलाह पर चलकर स्वास्थ्य की ओर ध्यान दोगे। माता जी तथा पिता जी को मेरा नमस्कार कहना।

तुम्हारा शुभचिन्तक
राकेश।

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स्वदेशी वस्तुओं का महत्व समझाते हुए अपने प्रिय मित्र को पत्र लिखिए?

पी/27जी.पी. रोड
दिल्ली
23 नवम्बर 20xx
का
प्रिय मित्र रवि,
सप्रेम नमस्ते।

आज ही तुम्हारा हुआ पत्र प्राप्त जिसे पढ़कर यह ज्ञात हुआ कि तुम दो वर्ष अमेरिका में रहने के पश्चात् वापस भारत लौट रहो हो । तुझे मेरी पसन्द की कोई वस्तु लाने के विषय में भी पूछा है। अतः मेरे प्रिय मित्रपरेशान होने की कोई आवश्यकता नहीं है। हम सब तो बस तुम्हें देखने के लिए लालायित है। दूसरी ओर मैं विदेशी वस्तुओं का प्रयोग बिल्कुल भी नहीं करता हूं। मुझे तो स्वदेशी वस्तुएँ ही पसन्द हैं। मैं गाँधीवादी विचारों को मानने वाला हूं। मैं सच्चा भारतीय हैं तथा मुझे अपने देश से, आपने देश की वस्तुओ से बहुत लगाव है। भारत में भी वस्तुएँ उत्तम कोटि की होती है। वे सस्ती तथा टिकाऊ होती हैं। स्वदेशी होने का सबसे बड़ा लाभ यह भी है कि इससे हमारा पैसा विदेशो में नही जाता है तथा यहाँ के लोगों को रोजगार भी मिलता रहता है। इससे भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है, तथ हमारा देश सम्पन्न तथा खुशहाल होता है। मैं तो तुम्हें बहुत याद करत हैं तथा यह जानकर बहुत अच्छा लगा कि इतने दिनों तक विदेश में रहने पर भी तुम अपने भारतीय मित्रों को भूले नहीं हो। भारत आने का अपना पूरा कार्यकम लिखना, जिससे मैं तुम्हें मिलने हवाई अड्डे पर आ सकें।

तुम्हारी प्रतीक्षा में,
तुम्हारा अपना
रजत सक्सेना

 

किसी पयर्टन स्थन की यात्रा पूरी करके विद्यालय में सकुशल पहुँच जाने की सूचना पत्र द्वारा अपने पिता जी को दीजिए।

 

दिल्ली
10 अक्टूबर 20xx
सादर चरणस्पर्श।

कल ही आपका पत्र प्राप्त हुआ। आपने लिखा था कि मैं अपने पर्यटन के विषय में पूरी जानकारी आपको ढूं। सो पिताजी हमारी आगरा यात्रा बहुत मनोरंजक तथा ज्ञानवर्धन थी। आगरा में हमनें ताजमहललालकिलाफतेहपुर सीकरीबुलन्द दरवाजा तथा अन्य ऐतिहासिक इमारते देखीलेकिन ‘ताजमहल’ के बारे में हमने जितना पढ़ा था, वह तो उससे भी अधिक सुन्दर है। हमनें तो चाँदनी रात में इसके सौन्दर्य का आनंद लिया था। वह शाहजहाँ द्वारा अपनी बेगम मुमताज महल की स्मृति में बनवाया गया था। कुछ इतिहासकार इसे महाराजा जयसिंह का प्राचीन किला भी बताते है।

यह पूरा महल सफेद संगमरमर से निर्मित है तथा यमुना नदी के किनारे स्थित हैं। ताजमहल के द्वार से लेकर मुख्य भवन तक के दोनों ओर पंक्तिबद्ध खड़े वृक्षों की सड़क पंक्तियाँ तथा उनके मध्य में फव्वारों की शोभा दर्शनीय है। आगे संगमरमर के विशाल चबूतरे पर इस महल का निर्माण किया गया है। चबूतरे के चारों कोनों पर चार गगनचुम्बी इमारते है। इस विशाल भवन के बीचोंबीच शाह तथा मुमताज महल की कर्ज़ हैं लेकिन असली कब्र ठीक इसके नीचे तहखाने में स्थित है।

पूर्णिमा की रात को ताजमहल वास्तव में अद्वितीय सौन्दर्यमान प्रतीत हो रहा था। पिता जी आप तथा माता जी भी अवश्य ही इस अद्भुत सौन्दर्य के नमूने को देखने जानातभी आप इसका वास्तविक आनन्द ले पायेगें। अब पत्र समाप्त करता हूँ मम्मी को मेरा प्रणाम कहना तथा सोनू को प्यार।

आपका सुपुत्र,
चितरंजन।

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परीक्षा में नकल करते पकड़े जाने पर अपने छोटे भाई को पत्र लिखिए।

 

छात्रावास,
दिल्ली विश्वविद्यालय,
दिल्ली
10 दिसम्बर, 20xx
मेरे प्रिय आनंद
शुभाशीष

कल ही पिताजी का पत्र प्राप्त हुआ। यह पढ़कर बहुत दुख हुआ कि तुम परीक्षा में नकल करते हुए पकड़े गए हो। तुम्हारे इस तुच्छ कार्य के लिए तुम्हारे साथ-साथ हम सबको भी अपमानित होना पड़ा। हमने तो कभी स्वप्न में भी नहीं सोचा था कि तुम सफलता प्राप्ति के लिए इतना गलत रास्ता अपनागे। यह सब तुम्हारी लापरवाही, कुसंगति तथा आलस्य का ही परिणाम है। पूरे वर्ष तो तुम बिल्कुल भी नहीं पढ़ें और फिर परीक्षाओं में यह किया।

पिताजी जैसे आदर्शवादी व्यक्ति का पुत्र होते हुए भी तुमने उनके आदशों की बिल्कुल भी परवाह नहीं की। तुमने तो पूरे परिवार के माथे पर कलंक का टीका लगाया है।

लेकिन अब तो जो हो चुका वह हो चुका। पिताजी को मैं समझाऊंगा। अब इस घटना से तुम्हे शिक्षा लेनी चाहिए। अपने इन निकम्में मित्रों का साथ छोड़कर पढ़ाई में इस प्रकार जुट जाओ कि अगली परीक्षाओं में तुम बिना किसी गलत कार्य के अच्छे अंक लाओ और परिवार की खोई हुई इज्जत वापिस आ जाए। इस वर्ष तुम नौवीं कक्षा में हो। अगले वर्ष तो बोर्ड की परीक्षाएँ दोगे और यदि बोर्ड की परीक्षाओं में यही कुकृत्य करते पकड़े गए तो तुम्हें तीन साल तक परीक्षाएँ देने की अनुमति नहीं मिलेगी। तब सोचो।

तुम्हारे साथसाथ हम सबका भी क्या होगा? मेरे प्रिय भाई, सुबह का भूला यदि शाम को घर आ जाए तो उसे भूला नहीं कहते। मेरा विश्वास है कि तुम्हे इस पत्र द्वारा नई दिशा मिलेगी। आज से एक-एक क्षण तुम्हारे लिए | बेशकीमती है। खेलों भी और मन लगाकर पढ़ो भी। पूज्य पापा-मम्मी को मेरा चरण स्पर्श।

तुम्हारा भाई
नितिन।

 

आपके विद्यालय में होने वाले वार्षिक उत्सव में आपको पुरस्कृत किया जाएगा। आप चाहती हैं कि आपके माता-पिता भी इस यादगार क्षण को देखें । उन्हें बुलाने हेतु पत्र लिखिए।

 

छात्रावास
दिल्ली पब्लिक स्कूल
नोएडा
3 अक्तूबर, 20xx

पूज्य मातापिता जी,
सादर प्रणाम।

आज ही आपका प्रेममय पत्र प्राप्त हुआ। आप मेरा पत्र न आने के कारण चिन्तित थे लेकिन मैं थोड़ा व्यस्त चल रही हूं। पहले मेरी परीक्षाएं चल रही थीं जिस कारण मैं काफी व्यस्त थी। परीक्षाओं के समाप्त होते ही हमारे। वार्षिकोत्सव की तैयारियाँ प्रारम्भ हो गई। आप दोनों तो भली भांति जानते ही हैं कि हमारे विद्यालय का वार्षिकोत्सव हर वर्ष बहुत बड़े पैमाने पर आयोजित किया जाता है।

इस वर्ष यह उत्सव 30 अक्तूबर को है। इस अवसर पर अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। हमारी कक्षा की छात्राएँ इस अवसर पर एक नृत्य नाटिका ‘अभिज्ञान शाकुंतलम्’ प्रस्तुत करेंगीं। इसमें मैं भी भाग ले रही हूं। इस कार्यक्रम के लिए मुख्य अतिथि के रूप में शिक्षामंत्री जी आएंगे। वे पुरस्कार वितरण भी करेंगे। आपको यह जानकर अति प्रसन्नता होगी कि मुझे ‘सर्वश्रेष्ठ छात्रा’ का पुरस्कार दिया जाएगा।

मेरी यह दिली इच्छा है कि इस यादगार क्षण में आप दोनों भी मेरे साथ हो क्योंकि यह पुरस्कार आपके कारण ही मुझे मिलेगा। आप 29 अक्तूबर तक पहुँच जाना क्योंकि कार्यक्रम 30 तारीख को सुबह 10 बजे आरंभ हो जाएगा। सभी छात्राओं के परिवारजनों के रहने की व्यवस्था विद्यालय की| ओर से की गई है। आप लोग आएंगे, तो मुझे बहुत प्रसन्नता होगी। शेष मिलने पर

आपकी बेटी,
नित्या

 

बीमारी के कारण आपका मित्र परीक्षा देने में असमर्थ है उसको निराशा से बचाने के लिए प्रेरणात्मक पत्र लिखिए।

 

परीक्षा भवन
10 अप्रैल20xx
मेरे प्रिय राजीव,
मधुर याद।

आज ही तुम्हारा पत्र प्राप्त हुआ। यह पढ़कर बहुत दुख हुआ कि अस्वस्थ होने के कारण तुम 10वीं की बोर्ड की परीक्षाएं देने में असमर्थ हो। मेरे प्रिय मित्र, नियति पर तो किसी का भी वश नहीं चलता। उसके सामने तो रंक ही क्या, राजा भी हार जाते हैं। अतः तुम निराश मत होना। यह बात तो सर्वविदित है कि तुम बहुत ही होनहार तथा परिश्रमी बालक हो तथा अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में पूर्णतया समर्थ हो। मेरे मित्र, कभीकभी जीवन में ऐसी परिस्थितियाँ उपस्थित हो जाती है, जिनके सामने हमें घुटने टेकने पड़ते । अतः तुम भी और अपने स्वास्थ्य का ध्यान हैंबिल्कुल दुखी मत होना

रखना। सेहत से बढ़कर कुछ भी नहीं है। इस साल नहींतो अगले साल तुम बोर्ड की परीक्षाएँ दे देना और मुझे पूरा विश्वास है कि तुम प्रथम श्रेणी में ही उत्तीर्ण हो जाओगे।

मित्र हौंसला रखो। मार्ग में आने वाली इन बाधाओं से विचलित मत होना। ईश्वर का हर विधान मंगलकारी तथा शुभ होता है। अपनी किस्मत को कभी भी मत कोसना। परीक्षाएँ समाप्त होते ही मैं तुमसे मिलने अवश्य आऊँगा। एक बार दोबारा मैं तुम्हे याद दिलाना चाहता हूं कि अपने स्वास्थ्य के प्रति पूर्णतया सजग रहना। चाचा-चाची जी को मेरा सादर प्रणाम जरूर कहना।

तुम्हारा सच्चा मित्र
अखिल

 

अपने छोटे भाई को रक्षा बन्धन पर राखियाँ भेजते हुए स्नेहमयी पत्र लिखिए।

 

ए/151,
शास्त्री नगर,
दिल्ली
16 अगस्त, 20xx
मेरे प्रिय भाई जतिन,
प्रसन्न रहो।

आशा है मेरा राजा भैया पूर्णतया स्वस्थ तथा प्रसन्न होगा। अगले सप्ताह रक्षाबंधन है। मैं इस बार वहाँ पर नहीं आ पाऊँगी इसलिए मैं इस पत्र के साथ तुम्हारे लिए प्रेम का धागा भेज रही हैं। कृपया मेरी विवशता समझना तथा राखी को स्वीकार करना।

मेरे प्यारे भैया, रक्षाबन्धन एक महान तथा पवित्र पर्व है। इस त्यौहार पर प्रतिवर्ष बहने अपने भाइयों की कलाई पर ये राखियाँ सदियों से बाँधती आई हैं। इन राखी के धागों में बहनों भाइयों का अटूट प्रेमविश्वास तथा स्नेह छिपा होता है। अतः मैं भी अपनी शुभ कामनाओं के साथ ये राखियाँ तुम्हारे लिए भेज रही हूं। मुझे पूरा विश्वास है कि तुम इसे अपनी कलाई पर अवश्य बाँधोंगे और मुझे याद भी करोगे। मेरी ईश्वर से प्रार्थना है कि वह तुम्हें सदैव सुखी रखें, तुम सौ साल जियो तथा दिनरात तरक्की करो।

तुम्हारी अपनी स्नेहमयी बहन
नेहा गुप्ता

अपनी सहेली को एक पत्र लिखिएजिसमें आ परीक्षा की तैयारियों के विषय में सलाह चाहिए । उससे अपनी आने वाले

 

1970, गाँधी मार्ग
20 फरवरी20xx
प्रिय सखी आनन्दिता,
सप्रेम नमस्ते।

कई दिनों से तुम्हारा पत्र नहीं आया। लगता है तुम आजकल अध्ययन बहुत व्यस्त हैं। तुम तो वास्तव में बहुत होशियार लड़की हो तभी तो पिछले वर्ष तुमने अपने विद्यालय में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया था। मेरी परीक्षाएँ भी निकट ही हैं। अब तो मैं भी बहुत पढ़ाई करने लगी हैं। विद्यालय से आते ही पढ़ने बैठ जाती हैं, टी.वी. बिल्कुल भी नहीं देखती फिर भी मैं सभी विषयों का पुनरावर्तन नहीं कर पाती।

मैं भी तुम्हारी तरह अच्छे अंक लेकर उत्तीर्ण होना चाहती हूँ। क्या तुम मेरा मार्गदर्शन करोगी? कृपया मुझे कुछ सुझाव दो, जिनका अमल कर में भी प्रथम श्रेणी प्राप्त कर सऊं। मुझे किस प्रकार समय सारणी बनानी चाहिए जिससे सभी विषयों पर ध्यान दे सर्दी तथा किस प्रकार परीक्षा की तैयारी कटैं?

मैं भी अपने मातापिता का नाम रोशन करना चाहती हूं। इसके लिए मुझे तुम्हारी की आवश्यकता । विश्वास कि मदद हैमुझे है तुम्हारे अमूल्य सुझावों को मानकर में लक्ष्य प्राप्त कर पाऊँगी। चाची जी तथा चाचा जी को मेरा प्रणाम कहना तथा रीकी को प्यार।

 

तुम्हारी अपनी
निशिता।

 

 

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