विषैले फलों का पेड़ की ज्ञान वर्धन वाली कहानी Short Story For Kids

विषैले फलों का पेड़ की ज्ञान वर्धन वाली कहानी Short Story For Kids
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अगर आपको हिंदी कहानिया अच्छी लगती है तो हम आपके लिए लाये है विषैले फलों का पेड़ की ज्ञान वर्धक वाली कहानी जो आप अपने छोटे बच्चो को बढ़ा सकते है आईये पढ़ते है Hindi Short Story For Kids

 

Short Story For Kids No 1 : विषैले फलों का पेड़

कुछ बदमाश एक पेड़ पर टकटकी लगाए रहते थे जिस पर जहरीले फल आते थे। आम जैसे उन फलों को खाकर
जो व्यक्ति मर जाता था उसका सामान वे बदमाश आपस में बांट लेते थे। एक दिन “कोई अच्छी खबर है?” एक बदमाश ने पूछा

 

“एक आदमी फल खा रहा है।” दूसरे ने चुप रहने का सकत करते हुए कहा।

“लगता तो बहुत धनवान है। आज तो दिन की शुरुआत ही अच्छी हुई है।” तीसरे बदमाश ने कहा।

“लगता है अब वह घर जा रहा है। उसका पीछा करते हैं।” चौथे बदमाश ने कहा।

थोड़ी ही देर बाद वह आदमी चकराकर गिर पड़ा और मर गया। “लगता है उस पर जहर का असर हो गया है। चलोहम अपना काम शुरू करे ।

फिर उन्होंने उस आदमी का सारा धन लूट लिया। “यह पेड़ हमें एक दिन जरूर मालामाल कर देगा।” पहला बदमाश बोला।

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“हां भईजो भी इधर से गुजरता है इन जहरीले फलों को आम समझ बैठता है।” कहकर दूसरे बदमाश ने जोरदार कहकहा लगाया। इस पेड़ को कल्पवृक्ष ही समझो।” तीसरे बदमाश ने कहा एक दिन उन्होंने देखा कि चार आदमी उधर से गुजर रहे थे।

बदमाश उन्हें देखकर एक जगह छिपकर बैठ गए। वे चारों आदमी पीछे आ रहे एक काफिले के लोग थे। उनमें से एक ने पेड़ पर पके हुए आम देखे तो बोला, “देखोमैं पेड़ के ऊपर चढ़कर आम तोड़ता हूं। तुम लोग इकट्ठे कर लेना। ”

फिर वह पेड़ पर चढ़ गया और उसने खूब सारे फल तोड़े। उसके बाद जैसे ही वे खाने को हुए कि काफिला आ गया। काफिले के सरदार ने जब अपने आदमियों को पेड़ के नीचे देखा तो वह हत्प्रभ रह गयावह जोर से चिल्लाया, “रुको! फल मत खाना…ये जहरीले हैं।”

“जहरीलेमगर मैंने तो एक खा भी लिया है।” एक बोला। मैंने भी।” दूसरे ने कहा।

सरदार ने उन्हें विषनाशक दवा देते हुए कहाइसे तुरंत पी लो। इससे उल्टी हो जाएगी और जहर बाहर निकल आएगा। ”
इस सरदार को कस पता चला कि ये फल जहरीले हैं? ” बदमाशों के मुखिया ने कहा।

“यही तो मैं भी जानना चाहता हूं।” दूसरे ने कहा।

“पेड़ कोई ऐसा चिह्न होगा। चलो, जरा पता लगाएं।” उनके तीसरे पर जरूर साथी ने कहा।
तुम ठीक कहते हो, अगर अन्य राहगीर भी पेड़ के नजदीक नहीं आए तो हमारा तो धंधा ही चौपट हो जाएगा और भूखों मरने की नौबत आ जाएगी।”

फिर वह बदमाश छिपने की जगह से बाहर निकल आए “यहां क्या हो रहा है?” बदमाशों के मुखिया ने पूछा।
” भले आदमी, तुम्हारे आदमियों ने तो ये फल नहीं खा लिए?” काफिले के सरदार ने पूछा

“नहीं भाई” बदमाशों का मुखिया बोला ।

“मैं समय पर पहुंच गया अन्यथा मेरे साथी मौत के मुंह में चले जाते।” (1 सरदार ने कहा।

“लेकिन आपको कैसे पता चला कि ये फल जहरीले हैं?” बदमाशों के मुखिया ने पूछा

“सीधी-सी बात है। गांव के इतने नजदीक पेड़ हो और ग्रामवासी तथा बच्चे उन फलों को तोड़े नहीं, यह कैसे

 

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संभव हो सकता है। जबकि यह पेड़ फलों से लदा हुआ है। इस पर चढ़ना भी कोई मुश्किल काम नहीं है। बसइसी से मैंने अंदाजा लगा लिया कि ये फल जरूर |
जहरीले होंगे।” सरदार ने कहा”अब हम इस पेड़ को काट डालेंगे ताकि फिर कोई मुसाफिर
धोखे में न मारा जाए। ”

इतना कहकर सरदार ने अपने आदमियों को पेड़ काटने का आदेश दिया। पेड़ काटने के थोड़ी देर बाद उन निराश बदमाशों को वहीं छोड़कर काफिला आग बह गया।

 

इस कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है : कथा-सार

आसपास के हालात को देखने के बाद ही उचित अनुचित का निर्णय लेना चाहिए काफिले का सरदार बुद्धिमान था जो समझ गया कि फल जहरीले हैं वरना पेड़ पर क्यों लटके रहते? बदमाशों को भी पता चल गया कि काठ की
हांड़ी बार-बार चूल्हे पर नहीं चढ़ती।

 

Short Story For Kids No 2: मित्रों का महत्व

एक बड़ी झील के किनारे एक नर बाज रहता था। कुछ समय बाद एक मादा बाज भी दूसरे पेड़ पर आकर रहने लगी। नर बाज ने मादा बाज से शादी का निवेदन किया तो उसने कहा कि पहले कुछ मित्र तो बनाओ, क्योंकि जब कभी मुसीबत आता ह तो मित्रों का बहुत सहारा होता है।

यह सुनकर नर बाज मित्र बनाने के लिए सबसे पहले कछुवे के पास गया। उसने कछुवे को अपना मित्र बना लिया। उसके बाद वह बिलाव के पास गया। बिलाव के साथ भी उसकी मित्रता हो गई और बिलाव ने उससे बुरे वक्त में काम आने का वादा भी किया। उसके बाद वह शेर के पास पहुंचा और उससे भी दोस्ती कर ली।

अब वह वापस मादा बाज के पास आया और उसने उससे शादी कर ली। नदी के किनारे जहां कछुवा रहता था उसके पास कदंब के वृक्ष पर घोंसला

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नाकर वह भी रहने लगे। कुछ ही दिनों बाद मादा बाज ने अंडे दिए जिनमें से दो सुंदर बच्चों ने जन्म लिया।
एक दिन दो शिकारी वहां शिकार खेलने आएकिंतु उन्हें कोई शिकार नहीं मिला। वे थक-हारकर कदंब के पेड़ के नीचे बैठ गएअचानक उनकी निगाह पेड़ पर बाज के बच्चों पर जा पड़ी। उन्होंने विचार किया कि क्यों न पेट की भूख शांत करने के लिए बाज के बच्चों का ही शिकार किया जाएलेकिन अंधेरा काफी हो चुका था।

इसलिए उन्होंने पहले आग जलाने का इरादा किया बाज ने जब यह देखा तो वह सोच में डूब गया। वह तुरंत बिलाव के पास पहुंचा और उससे सारी व्यथा कह सुनाई। बिलाव ने उसे आश्वासन दिया और बाज के साथ चल पडा |

बिलाव आर बाज जब वापस पहुंचे तो देखा कि एक शिकारी के पड पर चढ रहा ह। बिलाव ने तुरंत नदी में डुबकी लगाई और आग ऊपर का के पानी छिड़काव कर दिया। इस प्रकार उसने दो-तीन बार डुबकी लगाई और आग बुझा दी।

वह शिकारी फिर से अंधेरा हो जाने के कारण आया। दोनों शिकारी नीचे उतर |।

फिर आग जलाने लगेलेकिन बिलाव ने फिर पानी से बुझा दिया उसे । इस तरह कई बार यह क्रम चला।
उधर बिलाव भी काफी थक चुका था।

अब बाज अपने मित्र कछवे के पास पहुंचा और उसे सारा हाल कह सुनाया तो 1 कछुवा तुरत तैयार हो गया।
वह शिकारियों के सामने जा पहुंचा।

शिकारियों ने बड़ा कछुवा देखा तो उनकी आंखों में लालच क भाव आ गए। उन्हें लगा कि उनका कई दिनों का भोजन आ गया है। फिर उन्होंने अपनी-अपनी कमीज फाड़कर उनसे कछुवे को बांधना शुरू कर दिया।
कछुवा काफी बड़ा और ताकतवर था। उसने उन दोनों को पानी के अंदर खींचना शुरू कर दिया। दोनों गिरते-पड़ते पानी की ओर खिंचने लगे। अचानक एक शिकारी चिल्लाया,

“अगर जान बचानी है तो अपनी कमर से कमीज खोल दो।” यह कहकर उसने अपनी कमर से भी कमीज खोल दी। इस तरह दोनों की जान बच गई और वे शिकार किए बिना ही घर लौट गए

इस कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है   कथा-सार

जीवन में मित्रों का होना बहुत महत्वपूर्ण है। जब कभी संकट की घड़ी आती है तब मित्र ही सहायक होते हैं। ऐसा व्यक्ति जो मित्र होने का दम तो भरता है, लेकिन संकट के समय किनारा कर जाता है वह मित्र कभी नहीं हो
सकता।

 

Short Story For Kids No 3: बोरीभर ठीकरियां

दूलीचंद व नानकचंद गहरे मित्र थे। दूलीचंद ने वृद्धावस्था के लिए कुछ धन जोड़ रखा था। उसके बल पर उसका बुढ़ापा मजे से कट रहा । जबकि नानकचंद ने था जितना कमाया था वह सब उड़ा दिया था। फलस्वरूप उसका बुढ़ापा कष्टों में गुजर रहा था

दूलीचंद का परिवार पर पूरा दबदबा था। बेटे-बहुएं सभी उसकी आज्ञा का पालन करते थे। इसके ठीक विपरीत स्थिति नानकचंद की थी।

एक बार दोनों मित्र एक पार्क में मिले तो सुखदु:ख की बातें करने लगे। नानकचंद बोला, “ भैया, मेरी तो बड़ी दुर्गत हो रही है। बेटा बहू के कहने पर चलता है। सेवा-चाकरी करना तो दूर अब तो सब मुझसे घृणा करने लगे हैं। नौबत
यहां आ चुकी है कि मेरी चारपाई भी घर के बाहर लगा दी गई है।

इच्छा तो तक करती है कि कहीं निकल जाऊं।” “लेकिन इस बुढ़ापे में जाओगे भी कहां? मैं तुमसे पहले ही कहा करता था कि बुढ़ापे के लिए कुछ जमा कर लो, लेकिन तुम मानते कब थे मेरी बात.अब भुगतो अब भी मेरा कहा मान लो। ऐसा उपाय बताऊंगा कि बेटेबहू तुम्हारी सेवा करेंगे।”

 

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“अच्छा, जल्दी बताओ भैया, क्या है वह उपाय? ” नानकचद ने पूछा तब दूलीचंद ने कहा“तुम कुछ ठीकरियां इकट्ठी कर लो और उन्हें सिक्कों की आकृति देकर रात्रि में किसी बरतन में रखकर खनखनाया करोतुम्हारी बहू यह समझेगी कि तुम्हारे पास सिक्कों के रूप में बहुत है। फिर वह तुम्हारी सेवा किया धन करेगी, साथ ही बेटा भी तुम्हारे आगेपीछे दुम हिलाता फिरेगा।”

 

नानकचंद ने उस दिन घर पहुंचकर इस उपाय पर अमल कियाउसने मटके की टूटी ठीकरियां इकट्ठी कीं और रात्रि में उन्हें खनखनाने लगा। सुबह उसकी बहू अपने पति से बोली, “क्यों जी, तुम्हारा बाप यूं ही हमें बुद्ध बनाता
है। मैंने कल रात ही कान लगाकर सुना है। वह रातरातभर पैसे गिना करता है।” नानकचंद का बेटा अपनी पत्नी से बोला, “ऐसा संभव ही नहीं है। यदि पैसे होते 1 तो मेरा बाप मुझे तो कम-सेकम बताता ही।” “कोई जरूरी नहीं। प्राय: सभी बूढ़े अपनी संतानों से छिपाकर कुछ-न-कुछ बचा रखते हैं।

तुम्हारे बाप के पास भी बहुत घंन है। मैं तो अभी से उनकी सेवा करनी शुरू कर देंगी। ”

 

अब नानकचंद की बहू उसकी सेवा-टहल करने लगी। कभी अच्छे-अच्छे पकवान बनाकर खिलाती तो कभी हाथपैर दबाया करती। नानकचंद बहुत खुश हुआ। उसने सोचा कि दूलीचंद का उपाय सफल हो रहा है। साल-छह महीने ऐसे ही व्यतीत हो गएनानकचंद की बहू ने उसकी खूब सेवा की, लेकिन एक दिन वह सख्त बीमार पड़ गया। बेटे ने इलाज का पूरा खर्चा उठाया। बहूबेटे तनमन-धन से उसकी सेवा में जुटे रहे।

आखिरकार एक दिन वह चल बसातब उसके बहू-बेटे ने उसके कमरे की तलाशी ली। उन्हें कहीं भी कुछ नहीं मिला। तभी बहू की नजर एकाएक एक कोने पर पड़ी जहां एक बोरी पड़ी थी। उसका मुंह सिला हुआ था। बहू ने धन के लालच में उस बोरी का मुंह खोला तो देखा कि उसमें ठीकरियां भरी पड़ी थीं।

उसे विश्वास नहीं हुआ। वह सोचने लगी कि शायद बुड्ढे ने ऊपर-नीचे ठीकरियां भर रखी हों और बीच में धन छिपा रखा हो। यह सोचकर उसने बोरी को जमीन पर गिराकर खाली कर दिया, ।

लेकिन उसमें सिवाय ठीकरियों के कुछ भी नहीं था। वह माथा पकड़कर रह गई। फिर भी सुखद बात यह रही कि ठीकरियों के बलबूते नानकचंद का बुढ़ापा अंतिम दिनों में आनंदपूर्वक कट गया।

इस कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है  कथा-सार

धन की माया ही कुछ ऐसी है कि धन पास हो तो पराये भी अपने हो जाते हैं; और न हो तो अपने भी बेगानों की तरह पेश आते हैं।

 

Short Story For Kids No 4 : लाला बैकुंठनारायण

लाला बैकुंठनारायण जीवनभर एक के दो करने के फेर में लगा रहा। कंजूस इतना था कि न तो कभी उसने किसी गरीब की कोई सहायता की और न ही कभी फूटी कौड़ी का दान दिया ।

एक दिन वह असाध्य रोग से ग्रस्त होकर चारपाई पर पड़ गया। परिजनों ने उसके बचने की आशा त्याग दी थी। स्वयं बैकुंठनारायण को भी जीवन की अब कोई आशा नहीं थी।

एक दिन उसने सोचा कि मैंने जीवन में कभी कोई दान नहीं किया। तिजोरियां भरने में ही लगा रहा।

भगवान के घर पहुंचकर क्या जवाब ढूंगा। कमसे-कम एक गाय ही दान कर दें। कोई यह तो नहीं कहेगा कि मैंने दान नहीं किया। फिर उसने अपने पुत्र को बुलाकर कहा”बेटा, एक गाय खरीद ला। मैं दान करना चाहता हूं। जीवन का अब कोई भरोसा नहीं है, लेकिन ज्यादा पैसा खर्च मत करना। कोई | दुबली-पतली गाय ही ले आना जो कुछ ही दिनों में चल बसे। दान में ही तो देनी है।”

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पिता की आज्ञा से बैकुंठनारायण का पुत्र एक मरियल-सी गाय ले आया। उसने वह गाय एक ब्राह्मण को दान में दे दी। दान देने के तुरंत बाद ही गाय मर गई। कुछ ही देर बाद बैकुंठनारायण भी चल बसा।

गाय आगे-आगे थी, बैकुंठनारायण पीछे-पीछे। उसने लपककर गाय की पूंछ पकड़ ली और सीधा यमलोक जा |( पहुचा। यमराज का दरबार लगा था। सभी जीव लाइन में खड़े थे। उनके कर्मों का लेखा-जोखा रखने वाले चित्रगुप्त यमराज को सबकछ बताते जा रहे थे।

बैकठनारायण की जब बारी आई तो चित्रगुप्त बोले, “यमराजइस बनिये ने जीवनभर कोई भी सद्कर्म नहीं कियाबस तिजोरियां ही भरता रहा, लेकिन मरने से पूर्व इसने एक मरियल-सी गाय दान देने का सद्कर्म किया है, अत: यमलोक के नियमानुसार इसे एक दिन का स्वर्ग भोगने का हक है।”

यमराज ने बैकुंठनारायण से पूछा, “तुम पहले स्वर्ग चाहोगे अथवा नरक” भागना । बैठनारायण बोला”महाराज! स्वर्ग का सुख मुझे थोड़ा ही मिलेगाअत: पहले मैं स्वर्ग ही भोग लेना चाहता हूं, नरक तो भोगता ही रहूंगा।” तब यमराज बोले, ठीक है, तुमने जो गाय दान में दी थी, वही गाय तुम्हारे आदेश का पालन करेगी। लेकिन ऐसा कुछ समय तक ही होगा।”

बैकुंठनारायण बोला, “ठीक है, यमदेव!” फिर उसने गाय को आदेश दिया, “जाओ, यमराज को मारो।” आदेश मिलते ही गाय नथने फुलाते हुएपूंछ उठाकर यमराज को मारने दौड़ी। गाय से बचने के लिए यमराज शिवलोक में जा पहुंचे और बचाव की प्रार्थना करने लगे।

भगवान शिव अभी कुछ उपाय बताते तब तक गाय और बैकुंठनारायण भी शिवलोक में धमक पड़े।

बैकुठनारायण सोचा ने कि भगवान शिव कहीं यमराज को बचा न लें, अत: उसने गाय को भगवान शिव का पीछा करने का आदेश दे डाला। अब गाय भगवान शिव को मारने दौड़ी तो वह भी भाग छूटे।

इस प्रकार आगेआगे यमराजपीछे भगवान शिवउनके पीछे गाय आर अत में । बैकुठनारायण था। वे सब भगवान विष्णु के धाम बैकुंठलोक में जा पहुंचे। इस बीच स्वर्ग सुख का समय समाप्त हो चुका था। यमराज बैकुंठनारायण को घसीटते हुए यमपुरी ले जाने लगे।

तभी भगवान विष्णु ने कहा“ठहरो यमदेव! बैकुंठनारायण ने एकसाथ ही हम सबके दर्शन कर लिए हैं, इसलिए यह बैकुंठधाम का वासी हो चुका है। अब तुम इसे छोड़ दो। ”

 

इस कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है  कथा-सार।

बुद्धि से काम लिया जाए तो ईश्वर भी सहायता करता है।

 

Short Story For Kids No 5 : बुद्धिमान गंगा 

 

महेश एक जुआरी था। उसकी जुआ खेलने की आदत से उसकी पत्नी गंगा में बड़ी परेशान थी। एक दिन महेश जुए में सोनू से बहुत सारा पैसा हार गया। सोनू ने उससे पैसा माँगा। लेकिन महेश के पास उसे देने के लिए पैसे नहीं थे। तब सोनू बोला, ‘कल मैं तुम्हारे घर आऊँगा और जिस भी वस्तु पर 1 से सबसे पहले मेरा हाथ पड़ेगा, वह मेरी हो जाएगी।”

 

महेश अपने घर गया और सारी बात अपनी पत्नी को कह सुनाई। वह बोली मैं तुम्हारी मदद सिर्फ इस शर्त पर करेगीकि तुम अब कभी जुआ नहीं खेलोगे। मुझसे इस बात का वादा करो” महेश ने जुआ छोड़ने का वादा कर लिया। गंगा ने सारा कीमती सामान एक संदूक में भरकर संदूक को ऊंचाई पर रख दिया।

अगले दिन सोनू उनके घर आयावह जानता था कि सारा सामान एक संदूक में रखा है। वह उस तक पहुँचने के लिए वहाँ लगी सीढ़ी से चढ़ने लगा। उसने जैसे ही सीढ़ी को छुआ, गंगा बोली, “रुको! तुम्हारे कहे अनुसार ये सीढ़ी तुम्हारी हुई, क्योंकि तुमने सबसे पहले इसे ही हुआ है।” बेचारा सोनू दुखी मन से वहाँ से चला गया।

 

Short Story For Kids No 6 : हरा सोना 

एक गरीब लड़की थी। वह भीख माँगकर अपना गुजारा करती थी। एक दिन एक औरत ने उसे भीख के बदले फूलों के कुछ पौधे एवं बीज देते कहा’तुम इन पौधों और बीजों को घर के आंगन में बोना तो तुम्हें कभी भीख नहीं माँगनी पडेगी।”

निशा की समझ में कुछ नहीं आया लेकिन उसने औरत के कथनानुसार उन पौधों एवं बीजों को अपने घर के आंगन में बो दिया। साथ ही उसने उन पौधों की अच्छी तरह देखभाल शुरू कर दी। वह प्रतिदिन उन्हें पानी देती। कुछ हफ्ते बाद उसके घर के चारों ओर सुंदर-सुंदर फूल खिल गए ।

एक दिन एक महिला ने उन फूलों को देखा और वह उन्हें खरीदने के लिए दि निशा के पास आईनिशा ने कुछ फूल तोड़े और उस महिला को बेच दिए। अब निशा घर-घर जाकर भी फूल बेचने लगी। इस तरह उसका जीवन सुधरने लगा और उसने भीख माँगना छोड़ दिया। जल्दी ही कुछ लोग उसके नियमित ग्राहक बन गए
उसने कुछ पैसे बचाकर बाजार में फूलों की एक छोटी-सी दुकान खोली। वहाँ पर काफी सारे लोग फूल खरीदने के लिए आते थे। निशा अपनी तरक्की के लिए उस दयालु
औरत का मन-ही-मन धन्यवाद कर रही थी जिसने उसे हरा सोना दिया था।

 

Short Story For Kids No 7 : समय की कीमत

 

हरी एक गरीब एवं राज्य सबसे चर्चित आलसी था वह कुछ कार्य नहीं करता था। उसके आलस की चर्चा सुनकर एक दिन राजा ने उसे बुलवाकर
कहा,‘तुम पैसे कमाने के लिए कोई कार्य क्यों नहीं करते हो?”हरी बोला मुझे कोई काम ही नहीं देता और मेरे दुश्मन सोचते हैं कि मैं आलसी हु ।”

राजा बोला’ठीक है, तुम मेरे राजकोष में जाओ और आज सूर्यास्त होने से पहले जितना धन ले सकते हो, ले लो।” हरी दौड़कर अपने घर गया। उसने
अपनी पत्नी को पूरी घटना कह सुनाई। उसकी पत्नी बोली, ‘जल्दी जाओ और खूब सारी स्वर्ण मुद्राएँ एवं कीमती जवाहरात लेकर आओ।”

वह बोला, ‘मुझे भूख लगी है, इसलिए पहले मुझे भोजन दो।”

भोजन करने के बाद उसने एक झपकी ली फिर दोपहर में वह एक बड़ा सा थैला लेकर राजमहल की ओर चल पड़ा। उसे रास्ते में थकान महसूस हुई।
और वह एक पेड़ के नीचे विश्राम करने लगा।

दो घंटे बाद जब वह जगा तो फिर सीधे राजमहल जाने की बजाए एक स्थान पर जादू का खेल देखने लगा।
जब वह राजमहल पहुँचा, तब तक सूर्यास्त हो चुका था।
राजमहल के दरवाजे बंद हो चुके थे। हरी अमीर बनने का मौका गंवा चुका था, क्योंकि वह समय की कीमत नहीं जानता था इस तरह वह फिर से गरीब ही रह गया।

 

Short Story For Kids No 8: समस्या का हल

एक दिन तीन निर्धन दोस्तों को सड़क पर एक रुपया गिरा हुआ मिला। वह तीनों ही उस रुपए पर अपना-अपना हक जताने लगे।
अन्ततउन्होंने झगड़ा न करने का निर्णय लेकर तय किया कि वे उस रुपए से कुछ खाने की वस्तु खरीदकर आपस में बाँट लेंगे।
उनमें से पहला बोला,” मैं कुछ मीठा खाऊंगा” दूसरा बोला,’मुझे तो बड़े जोरों की भूख लगी है, इसलिए मैं तो भरपेट खाना खाऊगा। ”
तीसरा बोला,‘मुझे तो बड़ी प्यास लगी है, इसलिए मैं कोई पेय पदार्थ लेना चाहता हूं। ”

जब वे इस प्रकार आपस में बहस कर रहे थे, वहाँ से एक बुजुर्ग व्यक्ति गुजर रहा था। उसने उन तीनों की बात सुनकर उन्हें अपने पीछे एक फल की दुकान तक आने को कहा।

वृद्ध व्यक्ति ने उनसे वह रुपया लेकर उससे कुछ अँगूर खरीदे। फिर वह उन तीनों से बारी-बारी से बोला, ‘तुम इसे खा सकते हो, क्योंकि
ये मीठा है। इन्हें खाने से भूख मिट जाती है, इसलिए तुम इनसे भूख मिटा सकते हो। ये फल रसदार भी होते हैं इसलिए इन्हें खाकर तुम अपनी प्यास
बुझा सकते हो।”

इस तरह तीनों दोस्तों ने खुशी-खुशी अँगूरों का आनंद लिया और अपने-अपने रास्ते चल दिए

Short Story For Kids No 9: दुर्गध वाला शेर

 

एक बार जंगल का राजा शेर बीमार पड़ गया। अधिक बीमार होने कारण शरीर से भारी दुर्गध आने लगी। जब जानवरों ने सुना कि उनका राजा बीमार है तो वे सभी उसे देखने गए लेकिन शेर की माँद के पास पहुँचते ही उन्हें भारी दुर्गध ।

इसलिए उन ने आने लगीसभी दुर्गध से बचने के लिए अपनी-अपनी नाक पर हाथ रख लिया। जब वे शेर के पास पहुँचे तो शेर ने उनसे इसका कारण पूछा। तब एक हिरन और एक गधा एक साथ बोले,

“आपके शरीर से बड़ी दुर्गध आ रही है। इसी वजह से हम सबने अपनी नाक पर हाथ रखा हुआ है।” शेर को यह अपना अपमान लगा। उसने अपना आपा खोकर उन दोनों को
मार दिया। यह देखकर बाकी जानवर वहाँ से बमुश्किल अपनी जान बचाकर भागे।

अगले दिन एक बंदर भी शेर से मिलने आया। शेर ने उससे अपनी शारीरिक दुर्गध के बारे में पूछा। बंदर ने हिरन और गधे का मृत शरीर देखा तो हैं ,वह सब समझ गया। इसलिए वह बोला, महाराजमुझे कोई गंध नहीं आ रही है, क्योंकि सर्दी के कारण मेरी नाक बंद है।’

इतना कहकर बंदर वहाँ से चल दिया। वह बहुत चतुर था। वह जानता था कि प्रत्येक व्यक्ति को परिस्थिति के अनुसार ही बोलना चाहिए

 

Short Story For Kids No 10: राजा विक्रमादित्य

एक महान राजा थे। वे अपने न्याय के लिए प्रसिद्ध थे। एक वे नदी के तट पर घूमने गये उन्हें वह स्थान बहुत अच्छा लगा। इसलिए , दिड़ अपने प्रधानमंत्री को वहाँ पर एक सुंदर महल बनाने का आदेश दिया। राजा का आदेश स्थान निरीक्षण करने पाकर प्रधानमंत्री उस का के लिए वहाँ गए।

लेकिन जल्दी ही वह वहाँ से वापस आ गए और राजा विक्रमादित्य से बोले, ‘महाराज जहाँ पर महल बनना है, ठीक वहीं पर एक बूढ़ी औरत की झोंपड़ी है। इससे महल की सुंदरता खंडित होगी।”

राजा विक्रमादित्य ने बुढ़िया को दरबार में उपस्थित करने का आदेश दिया। अगले दिन वह बूढ़ी औरत राजा से मिलने आईराजा विक्रमादित्य ने उससे अपनी झोंपड़ी छोड़ने के बदले धन देने की पेशकश की तो वह बोली, “मैं अपनी झोंपड़ी नहीं छोड़ेंगीवह मेरे स्वर्गीय पति की निशानी है। कोई भी मुझे उस झोंपड़ी से अलग नहीं कर सकता। ” उस वृद्धा औरत का यह उत्तर सुनकर राजा को उसकी भावनाओं का अहसास हुआ और उन्होंने बनवाने दिया। सभी वहा पर महल का इरादा त्याग लोगों ने विक्रमादित्य के इस आदेश की प्रशंसा की।

Short Story For Kids No 11:बुद्धमान किसान

 

एक दिन एक किसान मेले मेले से अपने घर लौट रहा था। उसने से एक भैंस दी थी। जब घने होकर गुजर रहा डाकू ने उसका वह जंगल से था, एक रास्ता रोक लिया। उसके हाथ में एक मोटा-सा डंडा था। वह बोला, “तुम्हारे पास जो कुछ भी है, वह सब मुझे दे दो।” किसान डर गया। उसने अपने सारे पैसे डाकू को दे दिएतब डाकू बोला, “अब मुझे तुम्हारी कैंस भी चाहिए।” यह सुनकर किसान ने भैंस की रस्सी भी डाकू के हाथ में दे दी। फिर किसान बोला, ‘मेरे पास जो कुछ भी था, मैंने सब तुम्हें दे दिया। कृपा करके आप मुझे अपना डंडा दे दीजिए”

डाकू ने पूछा, ‘ लेकिन तुम्हें इसकी क्या आवश्यकता है?” वह बोला, “मैं यह डंडा अपनी पत्नी को गा। यह डडा देखकर वह बड़ी खुश होगी कि मैं मेले से उसके लिए कुछ तो लाया हूँ।’ डाकू ने डंडा किसान को दे दियाकिसान ने बिना वक्त गंवाए डाकू को जोर-जोर से मारना शुरू कर दिया। डाकू पैसे और कैंस छोड़कर वहाँ से भाग खड़ा हुआ। इस तरह से बुद्धिमान किसान ने अपना सामान डाकू लिया।

Short Story For Kids No 12: सपना सच हुआ

बिट्टू बहुत गरीब था। एक दिन वह रामलाल की दुकान पर गया। रामलाल ने उससे पूछा‘तुम यहाँ क्यों खड़े हो?”

बिट्टू ने जवाब दिया, मैंने पिछली रात एक सपना देखा। सपने में मैंने देखा कि तुम्हारी दुकान के आगे मुझे सोना मिला है।” उसकी बात सुनकर
रामलाल हसन लगा।

वह हंसकर बोला, ‘तुम बड़े ही बेवकूफ हो। सपने कभी सच नहीं होते। चलो मैं भी तुम्हें अपने सपने के बारे में बताता हूं। मैंने भी देखा कि तुम्हारे घर के आंगन के नीचे सोना है।”

बिट्टू ने रामलाल के सपने को गम्भीरतापूर्वक लिया और वह वापस घर की ओर चल पड़ा। घर पहुँचकर उसने अपना आँगन खोदना शुरू किया। काफी खोदने के बाद उसे मिट्टी के अन्दर एक घड़ा नजर | आया। उसने वह घड़ा निकाला। वह सोने के सिक्कों से भरा हुआ था।

बिट्टू मन-ही-मन बोला धन्यवाद रामलाल, कभी कभी सपने भी सच हो जाते ) हैं। आज तुम्हारे सपने की ) वजह से मैं एक धनी आदमी बन गया हूं।’

Short Story For Kids No 13: परिश्रम का फल

 

एक बार मछुआरों का एक दल मछलियाँ पकड़ने के लिए समुद्र में गया। मछुआरों ने मछली पकड़ने के लिए समुद्र के पानी में अपना जाल फेंका जब उन्होंने जाल बाहर खींचा तो वह खाली था। ऐसा कई बार हुआ। हर बार मछुआरों के जाल में कुछ नहीं फंसता। मछुआरे अपना धैर्य खोने लगे। लेकिन उनके बुजुर्ग सरदार ने उन्हें लगातार प्रयास करते रहने की सलाह दी। मछुआरों ने फिर कोशिश की, लेकिन वे असफल रहे। अब उन सबने थक-हारकर मछली पकड़ना बंद कर दिया और निराश होकर बैठ गए। तब उनका सरदार बोला, हमें कार्य को कभी अधूरा नहीं छोड़ना चाहिए। हमें परिश्रम का फल अवश्य मिलेगा”

सरदार की ये बातें सुनकर एक बार फिर उन्होंने जाल फेंका और इस बार उनके जाल में कुछ फंस गया। वृद्ध सरदार बोला,’जाल को बाहर खींचो” जब उन्होंने जाल को बाहर खींचा तो उसमें एक संदूक फंसा हुआ था। उसे

खोलने पर उन्होंने पाया कि वह सोने के सिक्कों से भरा हुआ था। सरदार ने वह धन सभी में बराबर-बराबर बांट दिया। यह देखकर सब समझ गए कि बार-बार कोशिश करने से ही सफलता मिलती है। मनुष्य को कभी निराश नहीं होना चाहिए

 

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  1. HindiApni August 10, 2018

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