Heer Ranjha Story in Hindi हीर रांझा के प्यार की कहानी

Heer Ranjha Story in Hindi हीर रांझा के प्यार की कहानी
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हेलो दोस्तों आज हम आपको Heer Ranjha Story in Hindi के बारे में बतायंगे ताकि आप सभी इस प्रसिद्ध प्रेम-कथा से जुडी रोचक बातों को जान सको। जैसा की आप सभी जानते है की हीर—रांझा की अमर प्रेम कहानी दुनिया के रहते सुनाई जाती रहेगी. हीर बेइंतहा खूबसूरत थी उसका ऐसा रूप जिसे देखने भर के लिए दूसरे गांव के लड़के गाय चराते हुवे हीर को देखने के लिए चले आते थे। इस आर्टिकल में हम आपको बतायंगे की Heer और Ranjha की मुलाकात और फिर प्यार कैसे हुवा। इसकी पूरी जानकारी के लिए Heer Ranjha Story को पूरा पढ़े और हमें कमेंट करके जरूर बताये।

Heer Ranjha Story in Hindi

हीर पंजाब के झंग शहर के एक अमीर परिवार में पैदा हुई थी और वो बहुत सुन्दर स्त्री थी उनके गॉव के दूर दूर तक लोग उसकी सुंदरता को देखने के लिए आते थे।

धीदो रांझा चनाब नदी के किनारे तख़्त हज़ारा नामक गाँव के एक रांझा उपजाति वाले परिवार में पैदा हुवा था। वह अपने घर में सबसे छोटा था। इसलिए भी वह पिता का लाडला बेटा था और कोई काम नहीं करता जबकि उसके सारे भाई खेतो में काम करते थे।

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वह सिर्फ बांसुरी बजाने में माहिर था। रांझा सिर्फ और सिर्फ बांसुरी बजाने का काम करता था। यही सब देखर उसकी भाभियों ने एक दिन उसको रोटी देने से मना कर दिया। इससे उसको गुस्सा आ गया और वह घर छोड़ कर चला गया।

इत्तेफ़ाक़ से वो हीर के गाँव में पहुंच गया। वह भी उसने बांसुरी बजाना नहीं बंद किया। एक दिन हीर गाय-भैसें चरा रही थी तब उसने रांझा की बांसुरी सुनी और उससे मिली उसके बाद दोनों एक दूसरे से प्यार करने लग गए। फिर धीरे धीरे उनका प्यार और बढ़ता चला गया और चुप चुप के प्यार की मीठी मीठी बातें करने लगे।

ये सब हीर के चाचा को पता चला तो उसने हीर के पापा और माता को ये सब बता दिया और हीर की शादी जल्दी से जल्दी किसी और जगह करने के लिए कहा। तभी सैदा खेड़ा नाम के आदमी से हीर की शादी करवा भी दी।

ये सब देखर रांझे का दिल टूट गया और वो बाबा मतलब फ़क़ीर बन गया उसने सब कुछ त्याग दिया। रांझा बाबा गोरखनाथ के प्रसिद्ध डेरे, टिल्ला जोगियाँ में जाकर रहने लगा। बाबा गोरखनाथ के सभी चेले अपना कान छिदाकर बालियाँ पहनते थे इसलिए सभी उन्हें कानफटे भी कहा करते थे।

रांझा भी कान छिदाकर ‘अलख निरंजन’ का जाप करता हुवा पूरे पंजाब में घूमता रहता । आख़िरकर एक दिन वह हीर के ससुराल वाले गाँव पहुँच जाता है। वो दोनों
हीर के गाँव वापिस आ जाते है जहाँ हीर के माँ-पिता उन्हें शादी करने की इजाज़त दे देते हैं लेकिन हीर का चाचा कैदो उन्हें ख़ुश देखकर जलता है।

शादी के दिन चाचा कैदो हीर के खाने में ज़हर डाल देता है। यह ख़बर सुनकर रांझा उसे बचाने के लिए दौड़ा है लेकिन उसके आने से पहले हीर की मौत हो गयी और रांझा भी हीर के पीछे पीछे ही चला गया उसने भी वही जहर वाले लड्डू खा लिए  उसके बाद हीर और राँझा दोनों को उसी शहर में दफ़नाया जाता है और लोग आज भी उनके प्यार याद करते है। हीर-रांझा पर बॉलीवुड में फिल्मे भी बनी हुई है

 

अगर आप भी इस कहानी में कुछ ऐड करना चाहते है तो निचे कमेंट जरूर करे।

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