टेलीविजन पर निबंध Essay on Television in Hindi @ 2018

हेलो दोस्तों आज फिर मै आपके लिए लाया हु Essay on Television in Hindi पर पुरा आर्टिकल। आज के दौर में Television हर घर में अपनी एक पहचान बना ली है। बच्चो से लेकर बड़े सभी को इसकी आदत सी हो गयी है।  आज हम आपको Television के बारे में कुछ ऐसी बातें बातयंगे जिससे आपको Television के बारे में बहुत कुछ पता चेलगा।

इस आर्टिकल में हम Television के अलग अलग तरह के essay लिख रहे हो आपको Television को समझने में बहुत मदद करंगे।

Essay on Television in Hindi

टेलीविजन पर निबंध Essay on Television in Hindi

 

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दूरदर्शन मनोरंजन का सर्वोत्तम साधन है। दूरदर्शन पर हम केवल कलाकार की ध्वनि ही नहीं सुन सकतेअपितु उसके हाव-भाव और कार्यकलापों को स्पष्ट देख पाते हैं। आज टेलीविज़न बहुत सस्ते हो गए हैं, जिससे सामान्य व्यक्ति भी उसे आसानी से खरीद सकता है। टेलीविज़न का आविष्कार अधिक पुराना नहीं है। 25 जनवरी, 1926 में इंग्लैण्ड के इंजीनियर जे. एलबेयर्ड ने इसका आविष्कार किया था।

भारत में दूरदर्शन का प्रथम केन्द्र 15 सितंबर 1959 को नई दिल्ली में चालू हुआ था। आज तो सारे देश में दूरदर्शन का प्रसार हो रहा है। दूरदर्शन पर प्रतिदिन अनेक कार्यक्रम और धारावाहिक प्रस्तुत किए जाते हैं। चित्रहार एक लोकप्रिय कार्यक्रम हैजिस में हम मधुर गीतों का आनंद लेते हैं। इसके अतिरिक्त दूरदर्शन पर फिल्में भी प्रसारित की जाती हैं। रामायण महाभारत और बुनियाद जैसे कार्यक्रमों ने दूरदर्शन को बुलंदी पर पहुँचा दिया है। दूरदर्शन मनोरंजन के अलावा ज्ञान में वृद्धि करने वाला भी थ – है। यह हमें प्राकृतिक, भौगोलिक और देश-विदेश का ज्ञान कराता है। इस प्रकार शिक्षा के क्षेत्र में भी दूरदर्शन सहायक सिद्ध हो रहा है। जिससे प्रतिदिन लाखों विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं। जब कोई महत्त्वपूर्ण मैच चल रहा होता है तो उसका सीधा प्रसारण दूरदर्शन पर किया जाता है। हम लोग अपने कमरे में बैठकर उन खेलों का पूरा आनंद लेते हैं।

दूरदर्शन उत्पादित वस्तुओं के प्रचार और प्रसार का भी प्रमुख माध्यम है। टेलीविज़न पर जीवनोपयोगी वस्तुओं के विज्ञापन देखकर लोग बहुत बड़ी संख्या में उनकी ओर आकृष्ट होते हैं। दूरदर्शन से जहाँ अनेक लाभ हैं, वहीं उसकी कुछ कमियाँ भी हैं। सभी लोगविशेषकर बच्चे टीवी के आदी हो चुके हैं और अपना बहुमूल्य समय इसे देखने में व्यतीत कर देते हैं।

इससे उनकी पढ़ाई के साथसाथ आँखों पर भी बुरा असर पड़ता है। दूरदर्शन की सबसे बड़ी हानि यह है कि व्यक्ति सामाजिक दृष्टि से एकाकी होता जा रहा है। अत: दूरदर्शन की इन बुराइयों से हमें खुद को बचाना होगा। वैसे दूरदर्शन का प्रयोग यदि दूरदर्शिता से करें तो ये कमियाँ दूर हो सकती हैं और दूरदर्शन का पूरा लाभ उठाया जा सकता है। इस प्रकार दूरदर्शन हमारे लिए मनोरंजन का एक महत्त्वपूर्ण साधन है और आज यह हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग बन गया है।

 

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टेलीविजन पर निबंध Essay on Television in Hindi

 

टेलिविजन एक नया और मनोरंजन का बढ़िया साधन है । स्काटलैंड के इंजीनियर बेयर्ड ने इसका अविष्कार किया। अभी मंहगा होने के कारण यह भी सबको सुलभ नहीं । रेडियो में तो हम बोलने वाले की आवाज ही सुनते हैं, परन्तु टेलीविजन में हम बोलने वाले को हंसतेबोलते, गातेबजाते, नाचते भी देख सकते हैं । इससे हम समाचार, भाषणबहस, वाद विवाद देख सकते हैं । टेलीविजन पर हम घर बैठे भी फिल्म देख सकते हैं । सभा, मैच, जुलूस आदि को हम घर बैठ अपनी आंखों से देख सकते हैं ।

टेलीविजन द्वारा हम अपना तथा अपने मित्रों का बहुत मनोरंजन कर सकते हैं। मनोरंजन के साथसाथ इससे हमारा ज्ञान भी बहुत बढ़ता है । भारत में अभी कुछ ही स्थानों पर टेलीविजन प्रसारण केन्द्र हैं । यथा नई दिल्ली, श्रीनगरअमृतसर, पूना, कानपुर, बम्बई । अन्य स्थानों पर शीघ्र ही दूर दर्शन केन्द्रों की स्थापना की सम्भावना है ।

 

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टेलीविजन पर निबंध Essay on Television in Hindi

कुछ समय पहले तक जब हम किसी जादूगर की कहानी में पढ़ते थे कि जादूगर ने जैसे ही अपने ग्लोब पर हाथ घुमाया, वैसे ही उसका शत्रु ग्लोब पर दिखाई देने लगा। जादूगर ने उसकी सारी क्रियाओं को अपने कमरे में बैठकर ही देख लिया तो हमें महान् आश्चर्य होता था। आज इस प्रकार का जादू हम हर रोज अपने घर करते हैं। स्विच ऑन करते ही बोलती हुई रंगबिरंगी तस्वीरें हमारे सामने आ जाती हैं। यह सब टेलीविजन का चमत्कार है, जिसके माध्यम से हम हजारोंलाखों मील दूर की क्रियाओं को दूरदर्शन-यंत्र पर देख सकते हैं।

दूरदर्शन का आविष्कार- 25 जनवरी सन् 1926 को इंग्लैंड में एक इंजीनियर जॉन बेयर्ड ने रायल इंस्टीट्यूट के सदस्यों के सामने टेलीविजन का सर्वप्रथम प्रदर्शन किया था। उसने कठपुतली के चेहरे का चित्र रेडियो तरंगों की सहायता से बगल वाले कमरे में बैठे हुए वैज्ञानिकों के सामने निर्मित किया था। विज्ञान के लिए यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटना थी। मानव-इतिहास में आज के दिन पहली बार दूरदर्शन संभव हो सका था। सैकड़ों-हजारों वर्ष के स्वन को जान बेयर्ड ने सत्य कर दिखाया।

दूरदर्शन यंत्र की तकनीक- दूरदर्शन यंत्र बहुत कुछ उसी सिद्धांत पर काम करता है, जिस पर रेडियो। अंतर केवल इतना है कि रेडियो यंत्र तो किसी ध्वनि को विद्युत् तरंगों में बदलकर उन्हें दूर-दूर तक प्रसारित कर देता है और इस प्रकार प्रसारित की जा रही विद्युत्-तरंगों को फिर ध्वनि में बदल देता है, परंतु दूरदर्शन यंत्र प्रकाश को विद्युत्-तरंगों में बदलकर प्रसारित करता है। रेडियो द्वारा हम प्रसारित की जा रही ध्वनि को सुन सकते हैं और दूरदर्शन द्वारा हम प्रसारित किए जा रहे दृश्य को देख सकते हैं।

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दूरदर्शन के प्रसारण यंत्र के लिए एक विशेष प्रकार का कैमरा होता है। इस कमर क सामने का दृश्य जिस परदे पर प्रतिबिंबित होता है, उसे ‘मोजेक’ कहते हैं। इस मोजेक में 405 क्षैतिज (पड़ी) रेखाएँ होती हैं। इस मोजेक पर एक ऐसे रासायनिक पदार्थ का लेप रहता है, जो प्रकाश के लिए अत्यधिक संवेदनशील होता है। इलैक्ट्रॉनों द्वारा प्रकाश की किरणें मोजेक पर इस ढंग से फेंकी जाती हैं कि वे मोजेक की 405 लाइनों पर बारीबारी से एक सकेंड में 25 बार गुजर जाती हैं। मोजेक पर लगा लेप इस पर पड़ने वाले प्रकाश से प्रभावित होता है।

किसी वस्तु या दृश्य के उज्ज्वल अंशों से आनेवाला प्रकाश तेज और काले अंशों से आनेवाला प्रकाश मंद होता है। यह प्रकाश एक कैथोड किरण ट्यूब पर पड़ता है। इस ट्यूब में प्रकाश की तेजी या मंदता के अनुसार बिजली की तेजी या मंदता के अनुसार बिजली की तेज तरंगें उत्पन्न होती हैं। इन तरंगों को रेडियो की तरंगों की भाँति प्रसारित किया जाता है और ग्रहणयंत्र द्वारा फिर प्रकाश में बदल लिया जाता है।

एक विचित्र तथ्य यह है कि सीधी रेखा में चलती हुई दूरदर्शन की विद्युत् तरंगें लाखोंकरोड़ों मील दूर तक मजे से पहुँच जाती हैं, परंतु पृथ्वी की गोलाई के कारण वे पृथ्वी के एक भाग से दूसरे भाग तक एक निश्चित दूरी तक ही पहुंच पाती हैं। दूरदर्शन का प्रसारणस्तंभ जितना ऊंचा होगा, उतनी ही दूर तक उसका प्रसारित-चित्र दूरदर्शन ग्रहण-यत्र पर दिखाई पड़ सकेगा। इस बाधा के कारण पहले अमरीका से प्रसारित दूरदर्शन कार्यक्रम यूरोप या अन्य महाद्वीपों में नहीं देखे जा सकते थे, परंतु अब कृत्रिम उपग्रहों पर प्रतिक्षिप्त करके इन्हें कहीं भी देखा जा सकता है। उपग्रहों की सहायता से अब सारी पृथ्वी के मौसम के चित्र दूरदर्शन पर देखे जा सकते हैं।

दूरदर्शन के लाभ- दूरदर्शन का प्रयोग केवल मनोरंजन के लिए ही नहीं, अपितु वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए भी किया गया है। चंद्रमा पर भेजे गए अंतरिक्ष यानों में दूरदर्शन यंत्र लगाए गए थे और उन्होंने वहाँ से चंद्रमा के बहुत सुंदर चित्र पृथ्वी पर भेजेजो अमरीकी अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा पर गए थे, उनके पास भी दूरदर्शन कैमरे थे और उन्होंने पृथ्वी पर स्थित लोगों को भी चंद्रमा के तल का ऐसा दर्शन करा दिया, मानो वे (दर्शक) भी चंद्रमा पर ही घूमफिर रहे हों। मंगल तथा शुक्र ग्रहों की ओर भेजे गए अंतरिक्ष-यानों में लगे दूरदर्शन-यंत्रों ने उन ग्रहों के अब तक प्राप्त सबसे अच्छे तथा विश्वसनीय चित्र पृथ्वी पर भेजे हैं।

चिकित्सा व शिक्षा के क्षेत्र में दूरदर्शन का प्रयोग-अन्य क्षेत्रों में भी टेलीविजन की उपयोगिता को वैज्ञानिकों ने पहचाना है। उदाहरण के लिए अनुभवी सर्जन यदि हृदय का आपरेशन करता है, तो उस कमरे में अधिक-से-अधिक पाँच या छह विद्यार्थी ही आपरेशन की क्रिया को देखकर ऑपरेशन का सही तरीका सीख सकते हैं, किंतु टेलीविजन की सहायता से बड़े हाल में परदे पर आपरेशन की संपूर्ण क्रिया तीन-चार सौ विद्यार्थियों को सुगमता से दिखाई जा सकती है।

अमेरिका के कुछ बड़े अस्पतालों के आपरेशनथियेटर में स्थायी रूप से टेलीविजन के यंत्र लगा दिए गए हैं, ताकि महत्वपूर्ण आपरेशन की क्रियाएँ टेलीविजन द्वारा परदे पर विद्यार्थियों को दिखाई जा सकी उद्योग और व्यवसाय के क्षेत्र में दूरदर्शन के प्रयोग-उद्योग और व्यवसाय के क्षेत्र में टेलीविजन महत्त्वपूर्ण योग दे सकता है। कुछ ही दिन हुए अमेरिका की एक औद्योगिक प्रदर्शनी में दिखलाया गया था कि किस प्रकार टेलीविजन की सहायता से दूर से ही इंजीनियर भारी बोझ उठानेवाली क्रेन का परिचालन कर सकता है, यद्यपि क्रेन इंजीनियर की दृष्टि से परे रहता है। मात्र क्रेन का चित्र टेलीविजन के परदे पर हर क्षण रहता है, अत: दूर बैठा हुआ इंजीनियर कलपुर्जों की सहायता से क्रेन का समुचित रूप से परिचालन करने में समर्थ होता है।

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भारत में दूरदर्शन भारत में दूरदर्शन का सबसे पहला केंद्र नई दिल्ली में 15 सितंबर 1959 में चालू हुआ था। पहले उसका उपयोग केवल उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षा के लिए किया जाता था। मई 1965 से आधे घंटे का नियमित मनोरंजन कार्यक्रम शुरू हुआ। सन् 1971 ई. में बंबई, सन् 1973 में श्रीनगर और अमृतसर में भी दूरदर्शन प्रसारण-केंद्र स्थापित कर दिए गए।

अब तो पूरे देश में दूरदर्शन का जाल-सा बिछ गया है। इस प्रकार टेलीविजन हमारे मनोरंजन का सशक्त माध्यम है। भीड़-भरे स्थलों पर, विशिष्ट समाराहों में, क्रीड़ा प्रतियोगिताओं में जहाँ हम आसानी से नहीं पहुँच सकतेटेलीविजन के माध्यम से हम वहाँ पर उपस्थित रहने जैसा सुख प्राप्त करते हैं।

टेलीविजन पर निबंध Essay on Television in Hindi

छोटा परदा इतना लोकप्रिय हो गया है कि लोगों ने सिनेमा हॉल जाना छोड़ दिया है। यह विश्रान्ति के परिवेश में सम्पूर्ण परिवार के लिये सबसे सस्ता मनोरंजन उपलब्ध कराता है। न तो तैयार होने की कोई आवश्यकता है, न जूते-जुराबे कसने की, न मुंह धोना होगा और न कंघी करनी पड़ेगी । हम अपने सोने वाले कपड़ों में ही बिस्तर पर पड़ेपड़े रिमोट की सहायता से टी. वी. चालू कर सकते हैं।

टी. वी. मनोरंजन, शिक्षा एवं विज्ञापन का माध्यम बन गया। है। यह हम पर निर्भर करता है कि हम अपनी रुचि का कौन सा कार्यक्रम चुनते हैं। प्रात: काल इसमें व्ययाम के कार्यक्रम आते हैं और हम अगर टी. वी. के सामने कुछ खुले स्थान का प्रबन्ध कर लें तो पूरा परिवार इसका फायदा उठा सकता है। टी. वी. कभी भी बहुत पास बैठ कर नहीं देखना चाहिये।

इससे हमारी आंखों पर बुरा असर पड़ता है एवं अनपेक्षित परिणाम हो सकते हैं। सोप ओपेरा (लम्बे नाटक) हर प्रकार की रुचि वालों के लिये अच्छा मनोरंजन है। एक रिफ्यूजी पंजाबी परिवार की पृष्टभूमि से सम्बन्धित एक सीरियल इतना लोकप्रिय हुआ कि लोग अपना सब काम छोड़ कर इसे देखने लगे। यह केवल भारत में ही नहीं अपित पडोसी देशों पाकिस्तान एवं बंगलादेश में भी शौक से देखा गया।

कार्यक्रमों में बदलाव किये जाते हैं एवं विभिन्न प्रकार के मनोरजंन उपलब्ध कराये जाते हैं। विभिन्न चेनलों को दर्शकों को सन्तुष्ट करने के लिये कड़े प्रयास करने पड़ते हैं। भारत एक विशाल देश है और प्रत्येक धर्म एवं जाति के लोग अपनी पसन्द का कार्यक्रम देखना चाहते हैं।

टेलिविज़न पर चौबिस घंटे कार्यक्रम आते हैं। वृद्ध लोगों को रामायण एवं महाभारत देखने में सदैव रुचि रहती है चाहे वह दोबारा ही क्यों न दिखाया जा रहा हो। और वह चाहते । हैं कि युवा पीढ़ी भी इनके बारे में कुछ जाने। समाचार पत्रों में कुछ प्रश्न छापे जाते हैं एवं दर्शकों से कुछ सीमित समय में उनके उत्तर माँगे जाते है। जो ठीक उतर ठीक समय पर भेज देते हैं उन्हें टी. वी स्टूडियो बुलाया जाता है। इस तरह की प्रतियोगितायें पूरे वर्ष चलती हैं जिनमें हमारे देश के इतिहास और संस्कृति से सम्बन्धित प्रश्न किये जाते हैं और हमें बहुत | कुछ सीखने को मिलता है।
आज कल केबल टी. वी. अपनी चरम सीमा पर है। सिटी केबलजी सिनेमा, स्टार टी वी नेटवर्क एवं सोनी नेटवर्क इत्यादि निजी चैनल बहुत लोकप्रिय हो रहे हैं क्योंकि वह विभिन्न प्रकार के मनोरंजक कार्यक्रम पेश करते हैं। आज कल पचास से अधिक चैनल हैं जिनमें से चयन किया जा सकता हैं। युवा वर्ग के लिये बहुत से कार्यक्रम हैं जिनमें विभिन्न विद्यालयों एवं कॉलेज के विद्यार्थी भाग लेते हैं। संक्षेप में टी. वी. मनोरंजन एवं शिक्षा का बेहतरीन माध्यम साबित हो रहा है।

 

 

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