विज्ञान और तकनीकी पर निबंध Essay on Technology in Hindi

हेलो दोस्तों आज फिर मै आपके लिए लाया हु Essay on Technology in Hindi पर पुरा आर्टिकल। आज लोग Technology से किसी ना किसी तरह जुड़े है। Technology के फायदों के साथ साथ नुकसान भी है
आज हम आपके लिए लाये है आज हम आपको Technology के बारे में कुछ ऐसी बातें बातयंगे जिससे आपको Technology के बारे में बहुत कुछ पता चेलगा।

 

आज हम आपको Technology के बारे में कुछ ऐसी बातें बातयंगे जिससे आपको Technology के बारे में बहुत कुछ पता चेलगा।

Essay on Technology in Hindi

विज्ञान और तकनीकी पर निबंध Essay on Technology in Hindi

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कम्प्यूटरों और इंटरनेट के इस दौर में सूचना प्रौद्योगिकी सफलता की पर्यायवाची बन चुकी | है। दूरसंचार, टेलीविजन बैंकिंग व्यवसाय उद्योग, विज्ञान, अनुसंधान व मनोरंजन के क्षेत्रों | में इसका प्रभुत्व कायम हो चुका है। अब अन्य क्षेत्रों में भी यह स्वयं को सिद्धहस्त सिद्ध | कर देगी, ऐसा हमारा विचार है। ईमेल और .कॉमर्स सूचना प्रौद्योगिकी के नये रूप हैं। इन्टरनेट के द्वारा हम इन | सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं। इसके अलावा, इन्टरनेट पर विभिन्न वेब साईटों से हम अपने लिए आवश्यक आंकड़े भी प्राप्त (डाऊनलोड) कर सकते हैं। डाइरेक्ट टू होम तकनीक (डी.टीएच) भारत में आ चुकी है।

इसके पदार्पण से भारतीयों को डिजीटल चैनलों को देखने का सुअवसर प्राप्त हो रहा है। कंडीशनल एक्सेस सिस्टम अर्थात् कैस भी उच्च कोटि की टी.वी. प्रसारण क्षमता का एक अन्य उदाहरण है। शिक्षा के क्षेत्र में सूचना प्रौद्योगिकी अहम् भूमिका निभा रही है। सरकार के द्वारा प्रायोजित विद्या वाहिनी परियोजना” इसी तकनीक पर आधारित है।

भारत के साफ्टवेयर निर्माता विश्व के अग्रणी साफ्टवेयर दिग्गजों में गिने जाते हैं। हमारे कम्प्यूटर प्रोग्रामर और वेव मास्टर कई देशों में कार्यरत् हैं। कागज़विहीन दफ्तर और छोटा घरदफ्तर अर्थात् स्माल ऑफिस होम ऑफिस सत्य के धरातल पर आ चुके हैं। भारत में इन्टरनेट कनेक्शनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। कम्प्यूटर विज्ञान व साफ्टवेयर निर्माण के क्षेत्रों में मंदी समाप्त हो चुकी है ।

अब इन क्षेत्रों में उन्नति करने की संभावनाएं अति प्रबल हैं विशेष तौर पर भारत के युवाओं के लिए। अतः भारत के युवकयुवतियों को चाहिए कि वे सूचना प्रौद्योगिकी व कम्प्यूटरीकरण के क्षेत्र में व्यवसायिक तौर पर रुचि लें। भविष्य में सभी कार्यकलापचाहे वे किसी भी क्षेत्र से सम्बद्ध हों, सूचना प्रौद्योगिकी के कार्यक्षेत्र के अंग बन जाएंगें। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि इस युग में सूचना ही सर्वोपरि है।

 

विज्ञान और तकनीकी पर निबंध Essay on Technology in Hindi

पिछले कुछ वर्षों में विज्ञान के क्षेत्र में युगान्तकारी परिवर्तन आये हैं। विश्व में सूचना और प्रौद्योगिकी क्रांति चल रही है। इसके कारण सूचना युग का पदार्पण हो चुका है। अमरीका और जापान जैसे विकासशील देश पहले ही औद्योगिक समाज से सूचना समाज में परिवर्तित हो चुके हैं। आखिर ऐसा तो होना ही था क्योंकि मानव सभ्यता ने पिछले पचास सालों में जितना वैज्ञानिक ज्ञान प्राप्त किया है वह मानव सभ्यता के संपूर्ण इतिहास का नब्बे प्रतिशत बैठता है। इस ज्ञान में सबसे ज्यादा हिस्सा सूचना प्रौद्योगिकी का है। सूचना प्रौद्योगिकी के कारण दूरसंचार, उपग्रह और कम्प्यूटर विज्ञान के क्षेत्र में काफी तेजी से प्रगति हुई है।

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इंटरनेट एक सुपर हाइवे के रूप में सामने आया है। इंटरनेट दूरसंचार और उपग्रह प्रौद्योगिकी के मदद से लाखों कम्प्यूटरों का एक ऐसा सूचना तंत्र है जिसमें पूरे के पूरे पुस्तकालय और रेडियो, टेलीविजन चैनल, समाचार पत्र-पत्रिकाओं के अलावा कई अन्य तरह की जानकारियां उपलब्ध हैं। इंटरनेट की मदद से हम इंग्लैंड की बड़ेबड़े पुस्तकालयों से जानकारियां हासिल कर सकते हैं। संचार प्रौद्योगिकी और इसके विकास के बाद सूचना क्रांति ने मानव जीवन के हर क्षेत्र कुछ न कुछ परिवर्तन अवश्य किया है। सांस्कृतिक क्षेत्र में सूचना क्रांति ने अनेक नई तरह की प्रक्रियाओं को जन्म दिया है। पहले जहां सूचनाओं और जानकारियों को इकट्ठा करने के लिए एक बड़ा तंत्र तैयार करना पड़ता था। वहीं आज सूचना क्रांति के कारण कहीं अधिक सूचनाएं एक छटी सी चिट में सुरक्षित रखी जा सकती है और कम्प्यूटर की मदद से इन सूचनाओं में से पल भर में ही मन चाही सूचनाओं को प्राप्त किया जा सकता है।

सूचना प्रौद्योगिकी के कारण ही अब हम पल भर में ही दुनिया के किसी भी कोने की खबर प्राप्त कर सकते हैं। नि:संदेह सूचना क्रांति मानव सभ्यता की सबसे बड़ी महत्वपूर्ण क्रांति है। विकासशील देशों में अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक सम्बन्धों में साम्राज्यवाद के बचे खुचे अवशेषों को खत्म करने के लिए एक नयी अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था की मांग की थी। इस मांग के मूल में अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्धों का ढांचा अन्यायपूर्ण होना था। सूचना क्रांति ने परिवर्तन की इन दिशाओं को दरकिनार कर ऐसी अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था बनाई जो विकासशील देशों की अवधारणा को नकारती है। इस क्रांति के बदौलत विकसित देश विश्व में एक ऐसी सूचना और संचार व्यवस्था बनाने में सफल रहे जो विकासशील देशों की अवधारणा के प्रतिरूप ही नहीं है बल्कि जिसने एक तरफा मुक्त प्रभाव और भी तेज कर दिया है और आर्थिक उपनिवेशवाद के साथ-साथ सूचना और सांस्कृतिक उपनिवेशवाद को भी जन्म दिया है।

दरअसल मुक्त एकतरफा बनाम संतुलित प्रवाह की बहस के पीछे जो अवधारणाएं हैं वही सूचना युग की सबसे बड़ी ताकत है। सूचना क्रांति का वर्तमान स्वरूप इसलिए विकसित हुआ क्योंकि यह कारखानों में पैदा नहीं होती बल्कि इसकी जन्म भूमि विश्व की सबसे सम्पन्न भूमि थी। इस पर उसी अंतर्राष्ट्रीय बहुराष्ट्रीय सत्ता का नियंत्रण था जो विश्व में अन्यायपूर्ण राजनीतिक, आर्थिक और सूचना व्यवस्था वापस करने का ऐतिहासिक रूप से जिम्मेदार था। यह क्रांति इसी स्वरूप की कोख में पनपी इसी ने उसे जन्म दिया और इसी की देखरेख में यह विकसित हुई। यही कारण है कि यह क्रांति अपने मूल स्वभाव में सबसे अधिक गैर क्रांतिकारी क्रांति है क्योंकि इसमें विश्व की यथास्थिति को बदलने के बजाय मजबूती प्रदान की है। सूचना युग में सूचना ही शक्ति है। इस पर जिसका नियंत्रण है वही शक्तिशाली है। सूचना तंत्र के माध्यम से ही आज दुनिया भर के लोगों को घर बैठे ही ढेरों सामग्री प्राप्त हो रही है।

आज की मीडिया सामग्री पर भी शक्तिशाली पश्चिमी देशों का ही वर्चस्व है। हालांकि इस वर्चस्व को तोड़ने में सफलता प्राप्त होती जा रही है। राजनीतिक और आर्थिक स्तर पर भी सूचना क्रांति में रंग बिरंगे विश्व को एक ही रंग में रंगने का बीड़ा उठा रखा है। सोवियत रूस के पतन के बाद सूचना प्रौद्योगिकियों की मदद से इस विचार को आसानी से समझा जा सकता है कि वैश्वीकरण और मुक्त अर्थव्यवस्था ही विकास का एक मात्र मॉडल है। इसी मॉडल को सातवेंआठवें दशक के दौरान विकासशील देशों ने समवेद स्वर में नव उपनिवेशवादी रास्ता बताकर अस्वीकृत कर दिया था। आज आर्थिक सुधार और उदारीकरण के नाम पर अनेक देश विकास की इसी राह पर चल रहे हैं या फिर चलने को मजबूर हैं।

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भारत एक विकासशील देश है तथा उन्नति के मार्ग पर निरन्तर प्रयासरत है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत विकास के लिए प्रयत्नशील है। जनवरी 2003 में बंगलौर में आयोजित भारतीय विज्ञान कांग्रेस के 90वें अधिवेशन में प्रधानमंत्री ने कहा था कि भारत को एक विकसित देश बनाने के अपने स्वप्न को साकार करने के लिए ईमानदारी की भावना से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को अपनाना चाहिए। हमारी भारतीय सभ्यता उन सभ्यताओं में से है, जिसके लिए ज्ञान और वैज्ञानिक जिज्ञासा एक मूल विशेषता रही है। पिछले पांच वर्षों से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के चुने हुए क्षेत्रों में सहस्राब्दी कार्यक्रमस्वर्णजयंती स्कॉलरशिप तथा अनुसंधान एवं विकास संस्थानों में व्यापक सुधार और विशिष्ट उद्देश्यों के लिए उनकी नेटवर्किंग जैसी कई तरह की पहल की जा रही है।

इसी प्रकार, मार्च 2003 में अमेरिका के साल्कइंस्टीट्यूट के डा. इंदर वर्मा और भारतीय जीनोम को क्रमबद्ध करने वाले वैज्ञानिकों ने माना है कि भारत विश्व अनुसंधान एवं विकास की धुरी बन सकता है। इसके साथ ही भारत में पिछले पांच सालों से विदेशी कंपनियों ने 100 से भी अधिक अनुसंधान एवं विकास केन्द्र स्थापित किए हैं। अमेरिकी कम्पनी का मानना है कि भारत में कम निवेश होने के बावजूद भी यहाँ के अनुसंधान एवं विकास के परिणाम अद्भुत हैं। इसी कारण से अंतर्राष्ट्रीय कंपनियाँ अपने अनुसंधान एवं विकास कार्यों के लिए भारत को आधार बना रही हैं।

नैनो विज्ञान ऊर्जा प्रचुरता जीनोम अनुसंधान, औषधियों और प्रतिरक्षण विज्ञान में भावी प्रवृत्तियों तथा परिवहन प्रणालियों जैसी उन्नत प्रौद्योगिकियों पर किए जाने वाले विश्व व्यय के लिहाज से वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद के अधीन 40 प्रयोगशालाओं रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन के कई केन्द्र-परमाणु ऊर्जा विभाग में आने वाले भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र और साहा नाभिकीय भौतिकी संस्थान इस बात का प्रमाण हैं कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रति देश में रुझान पैदा हुआ है तथा वह इस क्षेत्र में पूर्णतया विकास करने के लिए प्रयत्नशील है।

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आज विश्व अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्धा बड़ी तेजी से बढ़ रही है। इसका सबसे बड़ा आधार प्रौद्योगिकी है। हमारा विज्ञान सामाजिक दायित्वों को भी पूरा करता है। अंतरिक्ष आधारित प्रणालियोंदूरसंचार, स्वास्थ्य रक्षा और सूचना प्रौद्योगिकी के विकास में भी यह सहायक है। सौर ऊर्जा उत्पन्न करने, थोरियम के अपने प्रचुर भंडारों से ऊर्जा प्रदान करने या हाइड्रोजन आधारित सचल ऊर्जा टैकों का आविष्कार और तटवर्ती समृद्ध में छिपे संघनित मिथेन भंडारों की खोज आदि हाईटेक माने जाने वाले अनुसंधान हमारे लिए कहीं अधिक उपयोगी हैं; क्योंकि अभी भी हम ऊर्जा की भारी कमी का सामना कर रहे हैं।

परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष डा. अनिल काकोदरक ने विज्ञान कांग्रेस में बताया था कि थोरियम उपयोग की प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उन्नत देशों द्वारा इन क्षेत्रों में किए जा रहे अग्रणी प्रौद्योगिकी कार्यों की तुलना में हम आगे हैं। अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की उल्लेखनीय प्रगति ने चार महानगरों से दूर-दूर के स्थानों तक पहुँच उपलब्ध कराई है। चाहे निरक्षरता समाप्त करनी हो या औद्योगिक तथा स्वास्थ्य रक्षा क्षेत्र में नैनो टेग बनाने की बात हो या वनों के क्षरण का पता लगाना हो या भाभा परमाणु अनुसंधान जैसी हाईटेक संस्था में दूरदराज के गांवों के लिए बेजोड़ परमाणु ऊर्जा पैक और तटवर्ती बस्तियों के लिए पानी की समस्या को दूर करना हो, हमें विभिन्न शाखाओं में ऐसी समर्थ प्रौद्योगिकियाँ उपलब्ध करानी होंगी।

नई विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नीति में सभी क्षेत्रों में चाहे वह कृषि का क्षेत्र हो या उद्योग या व्यापार का क्षेत्र या सेवाओं का क्षेत्र हो। हर क्षेत्र में विज्ञान को समस्या का समाधान माना गया है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी काफी हद तक व्यक्ति के रहन-सहन के ढंग को बदल देता है। हमारे देश में परमाणु प्रौद्योगिकी के प्रदर्शन को संभव बनाने वाले हमारे देश के राष्ट्रपति डा. कलाम हैं। भारतवर्ष में निरंतर विज्ञान और प्रौद्योगिकी में विकास और उन्नति हो रही है। इन विकास कार्यक्रमों में यह बात स्पष्ट हो जाती है कि भारत की अनुसंधान एवं विकास केन्द्र बनने की दिशा में अग्रसर है तथा निरंतर प्रयासरत है। यदि वह इसी प्रकार प्रगति के पथ पर बढ़ता रहा तो निस्संदेह वह विश्व में एक महान शक्ति के रूप में उभरेगा।

 

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इक्कीसवीं सदी के विद्यार्थी अपने विकास के लिये सूचना प्रौधोगिकी को एक अति उपयोगी साधन के रूप में पायेंगे। कम्प्यूटर, ‘इन्टरनेट एवं सूचना प्राधौगिकी (आईटी) के आपस में निकट सम्बन्ध हैं। नयी शताब्दी विश्व के कुशल एवं सक्षम नागरिकों की होगी। अतविद्यार्थियों के इस विशाल क्षेत्र में प्रशिक्षण के लिये कठिन श्रम करना होगा।

विद्यार्थी कम्प्यूटर संचालन की शिक्षा प्राप्त करके आईटी. का प्रयोग कर सकते हैं। कम्प्यूटर एक सफल यंत्र है। इसका प्रयोग विद्यालय एवं विश्वविद्यालयों में सिखाये जाने वाले पाठयक्रम को सीखने के लिये भी किया जा सकता है। गणित, विज्ञान, चित्रकला, ललितकला, पेंटिग इतिहास नागरिक-शास्त्र एवं अन्य जैव विषयों का अध्ययन शैक्षिक ‘काम्पेक्ट डिस्क’ (सी. डी) की सहायता से किया जा सकता है। इस संदर्भ में अध्यापक भी विद्यार्थियों का पथ प्रदर्शन कर सकते है। इसके अतिरिक्त कम्प्यूटर शौक एवं मनोरंजन के लिये भी बहुत उपयोगी हैं।

उच्च स्तरीय खेल कम्प्यूटर पर खेले जा सकते है। और अगर कम्प्यूटर का ‘मॉनीटर’ बड़ा एवं रंगीन है तो वह कम्प्यूटर के खेलों के रोमान्च को अधिक महसूस कर सकेंगे। (कार रेस) इत्यादि गेम खेलने से विद्यार्थी की एकाग्रता एवं कुशलता में वृद्धि होती है। इसके अतिरिक्त यह खेल विद्यार्थी दिन या रात किसी भी समय खेल सकता है, जिससे परिवार के किसी अन्य सदस्य को कोई परेशानी भी नहीं होगी।

जिन विद्यार्थियों के मातापिता ने ‘इन्टरनेट की सुविधा मुहैया कराई हुई है वह इन्टरनेट पर उपलब्ध विभिन्न वेब साइटों पर जाकर हर प्रकार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। विद्यार्थियों को अच्छी वेबसाइट पर ही ‘स’ करना चाहिये ताकि केवल अच्छे स्तर की उपयोगी जानकारी ही उनके द्वारा एकत्र हो।  अगर विद्यार्थी बिना मतलब ‘इन्टरनेट साइट’ पर घूमते रहते हैं तो वह न केवल अपना बल्कि ‘इन्टरनेट’ का भी समय व्यर्थ करते हैं। और बदले में उन्हें लम्बे-चौड़े टेलिफोन के बिल प्राप्त होंगे। ‘इन्टरनेट पर बहुत सारी शिक्षाप्रद साइट मौजूद हैं।

कुछ वेब साइट से सूचनायें एवं लेखों को ‘डाउन लोड’ भी किया जा सकता है जिससे तात्पर्य है कि अगर विद्यार्थी के पास कम्प्यूटर के साथ प्रिंटर की भी सुविधा उपलब्ध है तो वह सूचनाओं को कागज पर प्रिंट भी कर सकता है। आईटी. (सूचना प्राद्यौगिकी) आने वाले समय का खेल है। सूचना से तात्पर्य है ज्ञान एवं विद्यार्थी जानता है यही शक्ति है।

सत्तर और अस्सी के दशक में सूचनायें उपलब्ध नहीं थीं। किन्तु आजकल इनकी बहुलता है। विद्यार्थी को हस की तरह सही तरह की सूचनायें चुननी हैं एवं शिक्षा के क्षेत्र में उनका उपयोग करना है। यह कोई आसान काम नहीं है क्योंकि इन्टरनेट पर बहुत सी सूचनायें एवं आंकड़े प्रचारित होते हैं। एवं कम्प्यूटर विद्यार्थी के लिये उतने उपयोगी नहीं हैं।

 

सूचना प्राधौगिकी के अन्य साधन है सेलूलर फोन, ईमेल (इन्टरनेट व्यवस्था के अन्तर्गत), फैक्स मशीनें, टेलिफोन, कम्प्यूटर खेलों एवं शिक्षा से सम्बन्धित पत्रिकायेंयेलो पेजेसम्यूजिक,कैसेटसपुस्तकें, सी.डी, विश्वकोश एवं समाचार पत्र। यह सभी साधन विद्यार्थी को अधिक जानकारी प्राप्त करने में मदद करते हैं। और जिस विद्यार्थी के पास अधिक सूचनायें अधिक ज्ञान होगा वह जीवन में अपना अच्छा करियर बनाने में सफल होगा। उन्हें शैक्षिक क्षेत्र में अपनी इस जानकारी का प्रयोग करना चाहिये।

 

वह विश्व के बारे में, इसके लोगों के बारे में और उनके परिवेश एवं पर्यावरण में अधिक जानकारी पाने में समर्थ होगे। सूचना प्राधौगिकी के कारण विश्व एक छोटा सा गाँव बन गया है। इस बदले हुये परिवेश में विद्यार्थी अपनी क्षमताओं अपने जीवन लक्ष्यों एवं अपने समाज जिसमें वह रहते हैं के बारे में अधिक जागरूक होंगे।

आईटी युग का स्वागत है। हम सूचना एवं उपलब्धि के इस महायुग में आपके सफल प्रयासों की कामना करते हैं।

 

Essay on Technology in hindi

 

कंप्यूटर आरंभ में गणित की जटिल गणनाएँ करने के लिए कंप्यूटर का विकास किया गया था। आधुनिक कंप्यूटर के प्रथम सिद्धांतकार चालेंस बैबेज थे जिन्होंने एक भव्य कंप्यूटर की योजना तैयार की थी। दूसरे महायुद्ध के दौरान पहली बार बिजली से चलने वाले कंप्यूटर बने। आज कंप्यूटर संचार और नियंत्रण के भी शक्तिशाली साधन बन गए हैं। आज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में कंप्यूटरों का व्यापक उपयोग हो रहा है। 1971 में माइक्रोप्रोसेसर का आविष्कार हुआ था।

माइक्रोप्रोसेसर अपने आप में एक स्वतंत्र लघु कंप्यूटर है। इस आविष्कार ने कंप्यूटरों को छोटा, सस्ता और कई गुना शक्तिशाली बना दिया है। कंप्यूटरों के साथ टीवी स्क्रीन और प्रिंटर जुड़ जाने से इनकी उपयोगिता का खूब विस्तार हुआ है। अब पूरी फाइलें और पूरी पुस्तकें कंप्यूटर में भरने या क ी संचित रखने में कोई कठिनाई में नहीं है। और इस संचित सामग्री को कभी भी प्रिंट न किया जा सकता है।

आज देश के लगभग ( सभी बकाका कंप्यूटरीकरण ही हो चुका है। खातों के लेनदेन का हिसाब अब कंप्यूटर से हो रहा है। कंप्यूटर के  ज़रिए दूर के दो देशों के बैंकों के बीच भी लेनदेन का व्यवहार संभव हुआ है। एक कंप्यूटर हज़ारों किलोमीटर दूर के दूसरे कंप्यूटरों से बातचीत कर सकता है। सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए देश के प्रमुख शहरों को कंप्यूटर नेटवर्क के ज़रिए एक-दूसरे से जोड़ने की और कई व्यवस्थाएँ शुरू हो रही हैं। कंप्यूटर नेटवर्क से अब रेल-यात्रा और हवाई -यात्रा का आरक्षण भी होने लगा है।

 

कंप्यूटर अब सुर सजाने का काम भी करने लगे हैं। पाश्चात्य संगीत के स्वरांकन को कंप्यूटर पर प्रस्तुत करने में अब कोई कठिनाई नहीं है। कंप्यूटर के माध्यम से अब संगीत शिक्षा की नई तकनीक विकसित की जा रही है। बड़ेबड़े कारखानों के काम भी अब कंप्यूटर संभालने लगे हैं। ज्योतिष का धंधा भी आज कंप्यूटर से हो रहा है। विवाह-सबध जोड़ने का काम भी कंप्यूटर संभाल रहे हैं। और महायुद्ध की तैयारी के लिए भी सुपर कंप्यूटर का विकास किया जा रहा है। आज अमेरिका से हमारे देश में सुपर कंप्यूटर आयातित किए जा रहे हैं। भवनोंमोटर गाड़ियों और हवाई जहाज़ की डिज़ाइन आदि का कार्य भी कंप्यूटर से सफलतापूर्वक किया जा रहा है। आज वैज्ञानिक अनुसंधान भी कंप्यूटर से हो रहे हैं।

 

इस प्रकार आज कंप्यूटर हमारे जीवन के हर क्षेत्र में हमारा सहयोग कर रहा है। इसने हमारे जीवन को अत्यंत सुगम बना दिया है। यह सच है कि आधुनिक टैक्नोलॉजी कंप्यूटर मनुष्य का एक कल्याणकारी आविष्कार है।

 

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