समाचार पत्र पर निबंध – Essay on Newspaper in Hindi

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समाचार पत्र पर निबंध – Essay on Newspaper in Hindi
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हेलो दोस्तों आज फिर में आपके लिए लाया हु Essay on Newspaper in Hindi पर पुरा आर्टिकल। इंटरनेट के वर्ल्ड में Newspaper की जरूरत उतनी ही है जितनी की बाकि न्यूज़ के साधनो की इसलिए अगर आप भी समाचार पत्र के बारे में बहुत कुछ जानना चाहते है तो हमारा आर्टिकल जरूर पढ़े। आज के essay में आपको समाचार पत्र के बारे में बहुत बातें पता चलेंगे तो अगर आप अपने बच्चे के लिए Essay on Newspaper in Hindi में ढूंढ रहे है तो हम आपके लिए india पर लाये है जो आपको बहुत अच्छा लगेगा। आईये पढ़ते है Essay on Newspaper in Hindi

 

Essay on Newspaper in Hindi

समाचार पत्र पर निबंध – Essay on Newspaper in Hindi

 

समाचार-पत्र जनसाधारण को दैनिक समाचारों से अवगत कराता है। छपाई कला के आविष्कार के बाद समाचार-पत्रों का प्रकाशन आरंभ हुआ। लोगों को देश-विदेश के समाचार ज्ञात होने लगेलोगों में चेतना और जागरूकता फैली। समाचार-पत्रों का महत्त्व दिनोंदिन बढ़ता गया। भारत में ‘बंगाल गजट’ नाम से पहला समाचार-पत्र छपा। धीरे-धीरे समाचार-पत्रों की संख्या में वृद्धि हुई। आज भारत में सैंकड़ों समाचार-पत्र छपते हैं। इनमें आम महत्व की सभी सूचनाएँ छपी होती हैं।

राजनीति, व्यापार, उद्योग शिक्षा, खेल-कूदकृषि, रोजगार, मनोरंजन, आदि से जुड़ी सूचनाएँ इनमें प्रमुखता से होती हैं। इनमें विज्ञापनों की भी भरमार होती है। इनमें छपे लेखों से ज्ञानवर्धन होता है। लोग इनमें खबरों को विस्तार से पढ़ते हैं। समाचार-पत्र सस्ते होते हैं इसलिए ये सब लोगों की पहुंच में होते हैं। रेडियो और टेलीविजन के प्रसार के बावजूद लोग समाचार-पत्रों को उतनी ही रुचि के साथ पढ़ते हैं।

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समाचार पत्र पर निबंध – Essay on Newspaper in Hindi

 

समाचार-पत्र वह पत्र है जिसमें विभिन्न समाचार विभिन्न स्थानों से संग्रहीत किए तथा प्रकाशित किए जाते हैं। आधुनिक युग में समाचारपत्र संसार भर के समाचारों को जानने का सबसे सस्ता व सुगम साधन है। ये कमसेकम समय तथा कमसेकम पैसों में जनता की ज्ञान-वृद्धि तथा भरपूर मनोरंजन कराते हैं। संसार में सबसे पहला समाचारपत्र पेकिंग गजट के नाम से सन् 1640 में छापा गया था। हमारे देश में सर्वप्रथम ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने इण्डिया गजट के नाम से छापा था। इसके बाद राजा राममोहन राय ने कौमुदी’ तथा ईश्वर चन्द्र विद्यासागर ने प्रभाकर पत्र निकाले। उसके बाद तो विभिन्न भाषाओं में सहस्त्रों की संख्या में समाचारपत्र प्रकाशित होने लगे। आजकल समाचारपत्र दैनिक, अर्द्ध साप्ताहिक, साप्ताहिक, पाक्षिक, मासिक, ब्रैमासिक, अर्द्धवार्षिक तथा वार्षिक प्रकाशित हो रहे हैं। इनमें दैनिक समाचारपत्र सर्वाधिक लोकप्रिय हैं। दैनिक समाचारपत्र विभिन्न नगरों व महानगरों से अनेक प्रान्तीय भाषाओं में प्रकाशित होते हैं।

इनमें नवभारत टाइम्स, हिन्दुस्तानवीर अर्जुन , राष्ट्रीय सहारा, दी हिन्दुस्तान टाइम्स, दी इकोनोमिक टाइम्स, दी ट्रीब्यून आदि हैं। इनमें साहित्यिक, सामाजिक, धार्मिक, राजनैतिक, आर्थिक, व्यापारिक आदि सभी तरह के समाचार छपते हैं। यहाँ तक की इनमें खेलकूदचलचित्र आदि से सम्बन्धित सूचनाएँ भी छपती हैं। ये समाचार-पत्र अनेक प्रकार से हमारे लिए उपयोगी हैं। सर्वप्रथम तो ये हमें विभिन्न प्रकार की जानकारी देकर हमारे ज्ञान को बढ़ाते हैं। इसके अतिरिक्त ये लोगों का मनोरंजन भी करते हैं। ये व्यापारियों को विज्ञापन के माध्यम से व्यापार बढ़ाने में सहायक होते हैं। इनमें महापुरुषों की जयन्तियों पर लेख भी प्रकाशित होते हैं।

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इनके द्वारा खेल प्रेमियों को खेलों की, सिनेमा प्रेमियों को सिनेमा की तथा नारियों को नारी सम्बन्धित विषयों पर जानकारी मिल जाती है। संसार के विभिन्न छोरों से समाचारों को एकत्रित करने वालों को संवाददाता। कहते हैं। ये लोग समाचारों को एकत्रित करके उन्हें समाचारपत्र के कार्यालय तक पहुँचाने के लिए पत्रटेलीफोनतार व टेलीप्रिंटर को प्रयोग में लाते हैं। संवाददाताओं को सपाचारों को संग्रहीत करने में बड़े परिश्रमधैर्यसहनशीलता तथा दूरदर्शिता की आवश्यकता होती है। समाचारपत्र ऐसी गागर के समान है। जिनमें ज्ञान व मनोरंजन का सागर भरा पड़ा है। ये जनता के भूखे मस्तिष्क का आहार हैं तथा राष्ट्र व समाज के सच्चे हितकारी हैं।

 

समाचार पत्र पर निबंध Essay on Newspaper in Hindi

 

समाचार पत्रों के अपने महत्व और लाभ हैं। आधुनिक समय में समाचार पत्रों को सूचना, समाचार एवं विचारों के प्रसार का अच्छा माध्यम समझा जाता है। समाचार पत्रों के बहुत से लाभ हैं। समाचार पत्र विश्व के प्रत्येक हिस्से के समाचार हम तक पहुंचाते हैं। किसी ने सच ही कहा है आज का युग प्रेसएवं प्रात: कालीन सामाचार पत्र का युग है। समाचार पत्र आज की दुनिया में लोकमत को प्रतिबिम्बित करता है। सामाचार पत्र द्वारा वास्तविक लोकमत का मापन सम्भव होता है। समाचार पत्रों में बहुत उपयोगी जानकारी अन्तर्विष्ट होती है। लोगों को ने केवल अपने देश बल्कि सम्पूर्ण विश्व के विचारों एवं विचारधाराओं के विषय में जानकारी मिलती है। समाचार पत्रों में हमें देश-विदेश के समाचार पढ़ने को मिलते हैं। सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक, वैज्ञानिक, साहित्यक एवं धार्मिक घटनाओं की रिर्पोट सभी समाचार पत्रों द्वारा दी जाती है। समाचार पत्र विश्व के सभी देशों में आपसी भाईचारा एवं सौहद पूर्ण सम्बन्ध स्थापित करने में सहायक होते हैं। समाचार पत्र विज्ञापन एवं प्रचार का एक अच्छा माध्यम हैं। समाचार पत्रों के स्तम्भों से हमें विभिन्न प्रकार की जानकारी प्राप्त होती है। कुछ समाचार पत्र हत्या, सेक्सअपराधघोटालोंतलाक, अपहरण एवं इस तरह के अन्य विषयों की खबरें छापते हैं। इस तरह के समाचारों के प्रचार प्रसार से पाठकों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। किन्तु समाचार पत्रों के फायदों को देखते हुये इन नुकसानों की अवहेलना की जा सकती है। आज कल प्रत्येक समाचार पत्र किसी संदेश को प्रतिपादित करता है जबकि उसे निष्पक्ष होकर समाचार छपने चाहिये। कुछ समाचार पत्र अपनी विचारधाराओं का प्रचार करने में लगे हुये हैं। इन विचारों से समाचार पत्र के वास्तविक उद्देश्य को नुकसान पहुँचता है।

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समाचार पत्र विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर जनमत को परिवर्तित करने में एक बड़ी भूमिका निभाता है। समाचार पत्र लोगों को शिक्षित करने में भी सहायक होते हैं। वह हमें हमारे कर्त्तव्यों के विषय में बताते हैं एवं हमारी जिम्मेवारियों का एहसास कराते हैं। देश में व्याप्त कई समस्याओं पर वह अपनी न्यायपूर्ण उचित एवं ईमानदार राय प्रस्तुत करते हैं। इस तरह वह आम जनता का पथ प्रशस्त करते हैं। शिक्षा के दृष्टिकोण से उनका बहुत महत्व है। समाचार पत्र विभिन्न क्षेत्रों में हुयी नवीनतम खोजों, अविष्कारों एवं अनुसंधानों के विषय में रिर्पोटों को प्रकाशित कर सकते हैं। विश्वविख्यात विचारक, लेखक, कवि, वैज्ञानिक, समाज सुधारक, दार्शनिक एवं राजनितिज्ञ, समाचार पत्रों द्वारा प्रसिद्धि पाते हैं। इस तरह समाचार पत्र आधुनिक समाज के महत्त्वपूर्ण आधार हैं। इससे व्यापार एवं व्यवसाय को प्रोत्साहन मिलता है। यह राष्ट्रीय मत के प्रतीक हैं। इनमें वास्तविक विचार प्रतिबिम्बित होते हैं। संक्षेपतहम यह कह सकते हैं कि समाचार पत्रों के बहुत विस्मयकारी लाभ हैं।

 

 

समाचार पत्र पर निबंध Essay on Newspaper in Hindi

लोकतंत्र में समाचार तथा पत्रिकाओं का काफी महत्व होता है। समाचार पत्र लोकमत को व्यक्त करने का सबसे सशक्त साधन है। जब रेडियो तथा टेलीविजन का ज्यादा जोर नहीं था, समाचार पत्रों में छपे समाचार पढ़कर ही लोग देशविदेश में घटित घटनाओं की जानकारी प्राप्त किया करते थे। अब रेडियो तथा टेलीविजन सरकारी क्षेत्र के सूचना के साधन माने जाते हैं। अतः तटस्थ और सही समाचारों के लिए ज्यादातर लोग समाचार पत्रों को पढ़ना अधिक उचित और प्रामाणिक समझते हैं।

समाचार पत्र केवल समाचार अथवा सूचना ही प्रकाशित नहीं करते वरन् उसमें अलग-अलग विषयों के लिए अलग-अलग पन्ने और स्तम्भ (column) निर्धारित होते हैं। पहला पन्ना सबसे महत्त्वपूर्ण खबरों के लिए होता है। महत्वपूर्ण में भी जो सबसे ज्यादा ज्वलन्त खबर होती है वह मुख पृष्ठ पर सबसे ऊपर छापी जाती है। पहले पृष्ठ का शेष भाग अन्यत्र छापा जाता है। अखबार का दूसरा पन्ना ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं होता उसमें प्रायः वर्गीकृत विज्ञापन छापे जाते हैं। रेडियो, टेलीविजन के दैनिक कार्यक्रमएक-आध छोटी-मोटी खबर इसी पृष्ठ पर छपती हैं। तृतीय पृष्ठ पर ज्यादातर स्थानीय समाचार तथा कुछ बड़े विज्ञापन छापे जाते हैं। चौया पृष्ठ भी प्रायः खबरों तथा बाजार भावों के लिए होता है। पांचवें पृष्ठ में सांस्कृतिक गतिविधियां और कुछ खबरें भी छापी जाती हैं। आधेचौथाई पृष्ठ वाले विज्ञापन और कुछ समाचार भी इस पृष्ठ पर ही छपते हैं। अखबार का बीचोबीच का भाग काफी महत्व का होता है। इसमें ज्वलन्त विषयों से सम्बन्धित सम्पादकीय किसी अच्छे पत्रकार का सामयिक विषयों पर लेखताकि सनद रहे जैसे रोचक प्रसंग भी इसी बीच के पृष्ठ पर छापे जाते हैं।

बीच के पृष्ठ के दाहिनी ओर भी महत्वपूर्ण लेखसूचनाएँ एवं विज्ञापन दिए जाते हैं। अगले पृष्ठों पर स्वास्थ्यमहिला मण्डलबालबाड़ी जैसे स्तंभ होते हैं। अंतिम पृष्ठ से पहले खेल समाचार, जिन्सों तथा सोना चांदी एवं जेवरातों के भाव आदि होते हैं। कुछ अखबार बहुत चर्चित कम्पनियों के शेयर भाव भी अपने पाठकों के लिए छापते हैं। अंतिम पृष्ठ पर पहले पृष्ठ का शेष भाग तथा कुछ अन्य महत्त्वपूर्ण खबरें तथा आलेख आदि छपते हैं। इस प्रकार पूरे अखबार को सुनिर्धारित स्तंभों के साथ छाप कर पाठकों को सौंपा जाता है। अखबार में बीच में दो चार कॉलम पाठकों की प्रतिक्रिया के लिए भी रखे जाते हैं। नवभारत टाइम्स में पहले पाठकों के विचारों को नजर अपनी अपनी’ के अन्तर्गत छापा जाता था।

 

 

अखबार का सम्पादकीय एवं मुख पृष्ठ काफी अच्छा होना चाहिए। कुछ पाठक तो सम्पादकीय तथा मोटी खबरें पढ़ने के लिए ही अखबार खरीदते हैं । कुछ अखबार ऐसे होते हैं जिनमें रिक्तियों, खाली स्थानों की खबरें काफी विस्तार से छापी जाती हैं। ऐसे अखबार संघ लोक सेवा आयोगकर्मचारी चयन आयोगइम्पलयामेन्ट एक्सचेंज रोजगार समाचारों की जानकारी को काफी महत्व देते हैं। तात्पर्य यह है कि 810 पेज के अखबार में न जाने क्या-क्या भरा होता है। अखबार कई प्रकार के होते हैं दैनिक, त्रिदिवसीय, साप्ताहिक, पाक्षिक तथा मासिक। कैलीफोर्निया में प्रकाशित हिन्दुइज्म टुडे मासिक समाचार पत्र है जो विश्व भर में हिन्दुओं की गतिविधियों का मासिक लेखा-जोखा छापता है। आमतौर से दैनिक समाचार पत्र ही ज्यादा लोकप्रिय होते हैं। कुछ साप्ताहिक अखबार होते हैं जो पूर सप्ताह की गतिविधियों का लेखाजोखा छापते हैं। अखबार के बाद पत्रिकाओं का भी अपना एक विशिष्ट महत्व है।

पत्रिकाएँ ज्यादातर विषय प्रधान तथा अपने एक सुनिश्चित उद्देश्य को लेकर निकाली जाती है। कुछ पत्रिकाएँ केवल नवीन कथाकारों की कहानियाँ ही छापती हैं। सारिका, माया आदि में पहले कहानियाँ छपा करती थीं। कल्याणअखण्डज्योति जैसी पत्रिकाएँ धार्मिक विषयों से सम्बन्धित लेख कविताएँ तथा अनुभव छापती हैं। कई पत्रिकाएँ ज्योतिष जैसे विषयों की जानकारी के लिए ही छापी जाती है। आरोग्य’ जैसी मासिक पत्रिका में योग तथा प्राकृतिक उपचार विषयक सामग्री होती है।

पत्रिकाओं की स्थिति अखबारों से थोड़ा भिन्न होती है किन्तु जो पत्रिकाएँ राजनीति से जुड़ी होती हैं उन्हें अकसर परेशान होना पड़ता है। माया तथा मनोहर कहानियाँ जैसे पत्रिकाएँ हलचल मचाने वाली पत्रिकाएँ हैं। कोई-न-कोई शगुफा छोड़ना इनका काम है। अतएव ऐसी पत्रिकाओं को अपने दृष्टिकोण में सुधार लाना चाहिए। वर्तमान युग में अखबार (समाचार पत्र) एवं पत्रिकाओं का महत्व निरंतर बढ़ता जा रहा है। प्रायः प्रत्येक पढ़ालिखा व्यक्ति अखबार पढ़ने के लिए उत्सुक अवश्य होता है। इसलिए अखबार तथा पत्रिकाओं के मालिकों एवं सम्पादकों को चाहिए कि वे अपने दायित्व को समझें तथा समाज की सहज उन्नति के लिए सदा सचेत रहकर ऐसी खबरें छापे जो सही और समन्वयवादी हों।

 

 

समाचार पत्र आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी के दौर में जन साधारण को सूचना प्रदान करने का सर्वोत्तम साधन है। आज सामाजिक उत्थान पतंन को हम समाचार पत्र के माध्यम से भली भांति जान सकते हैं। लोकतांत्रिक प्रणाली में समाचार पत्र जन-जागरण का साधन है। जनमत संग्रह और निर्माण में यह दिशा निर्देशक का कार्य करती है। समाचार पत्र लोगों को जागरूक करने का कार्य करती है। भारतीय समाज के निर्माण में समाचार पत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। स्वतंत्रता के पूर्व आम भारतीयों में ब्रिटानी सरकार की दासता से मुक्त होने का भाव जगाने में समाचार पत्र ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। किन्तु स्वतंत्रता के पूर्व समाचार पत्र नवीन समाज के निर्माण के लिए जिस तरह एक मिशन’ की। तरह काम करते थे, जिस प्रकार उनका उद्देश्य लोगों को जागरूक करना था, आधुनिक समय में उसका वह स्वरूप नहीं रह गया है।

भारतीय पेशा सर्वेक्षण के निर्देशक भी.डी.शर्मा के अनुसार “समाचार पत्र मानव के व्यावहारिक गतिविधियों के बारे में समाचार और विचारों का प्रकाशन करता है”। व्यापक अर्थ में समाचार पत्र आधुनिक लोकतांत्रिक समाज का चौथा आधार स्तंभ और लोक तंत्र का सजग प्रहरी है। इस संदर्भ में उसका महत्व उस फौजी से किसी भी तरह कम नही है। जो अपने घर से मीलों दूर मातृभूमि की रक्षा के लिए सीमा पर तैनात रहता है।

वर्तमान समाज में भी यह जन संचेतना और नवजागरण के संवाहक की भूमिका निभाता है। यदि समाचार पत्र न रहे तो समाचारों का आदान-प्रदान नहीं होगा और पूरी दुनिया की वैचारिक क्रांति की गति और विकास अवरूद्ध हो जाएगी। समाचार पत्र समाज में घटित होने वाली घटना की सूचना ही नही। ट्रेता अपितु उस घटना के फलस्वरूप जन्म लेने वाली प्रतिक्रिया से भी अवगत कराता है।

यह साहित्य और संस्कृति का संवाहक भी है और दोनों को पोषित भी करता है। आधुनिक समाज में अपराध, भ्रष्टाचार और हिंसा बढ़ रही है। चारों तरफ अराजकताविखंडता और अलगाववाद का बिगुल बज रहा । है। ऐसी परिस्थिति में समाचार पत्रों में प्रकाशित विचारों का संतुलित होना आवश्यक है।

 

समाचार पत्र आधुनिक समाज का ताप मापक यंत्र है। एक और जहाँ यह राजनीतिक, आर्थिक नीतियों तथा क्रीड़ा, अपराध और दुघर्टनाओं की खबर देता है वहीं अकालमहामारीअतिवृष्टि, महत्वपूर्ण विभूतियों की मृत्यु और विकासोन्मुखी खबरों से भी अवगत कराता है। समस्यापरक और घटनापरक दोनों ही प्रकार के समाचारों का प्रेषण करने के साथ-साथ एक तटस्थ समीक्षक की । भूमिका का निर्वहन कर समाज को नवीन दृष्टि प्रदान करने का कार्य भी करता है। यह देश काल का यथार्थ चित्र जन जीवन के समक्ष प्रस्तुत कर देश सेवाराष्ट्रप्रेम और समाज सुधारक की भूमिका का निर्वाह करता है। दूसरी ओर दबाव, उत्कोच अथवा पक्षधरता से प्रभावित होकर देश और समाज के लिए संकट भी उत्पन्न कर सकता है। सच्चा समाचार पत्र जनभावनाओं का प्रतिनिधित्व करता है। राजनैतिक शोषणआर्थिक उत्पीड़न, स्थानीय समस्याओं का चित्रण आदि के द्वारा यह मूक और निरीह जनता की ओर से आवाज उठाता है। गरीब और कमजोरी का मार्गदर्शन करता है। साधारण जनता को उसके स्वत्व और अधिकारों से परिचित करा कर उनमें नवीन चेतना को उदित करता है। यदि समाचार पत्र संकुचित उद्देश्य से प्रेरित होकर मिथ्या प्रचार न करे। तो यह समाज निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

 

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