मेरा अच्छा और सच्चे दोस्त पर निबंध Essay on My Best Friend in Hindi

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मेरा अच्छा और सच्चे दोस्त पर निबंध Essay on My Best Friend in Hindi
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हेलो दोस्तों आज फिर में आपके लिए लाया हु My Best Friend in Hindi पर पुरा आर्टिकल लेकर आया हु। My Best Friend जो की हमारे हर अच्छे और बुरे काम में जुड़ा रहता है जो हर समय अपने दोस्तों के लिए आगे रहता है । इस आर्टिकल में हम आपके लिए लाये है My Best Friend in Hindi की पूरी जानकारी जो आपको अपने बच्चे का होमवर्क करवाने में बहुत मदद मिलेगी।

 

दोस्त पर निबंध Essay on My Best Friend in Hindi

Essay on My Best Friend

कहा जाता है-विपत्ति रूपी कसौटी पर कसा जाने वाला व्यक्ति ही सच्चा मित्र होता है। संस्कृत में कहावत है राजदरबारेश्च श्मशाने यो तिष्ठति स बांधव” अर्थात् राजदरबार और श्मशान घाट में साथ रहने वाला ही सच्चा मित्र कहा जाता है। यहाँ राजदरबार’ सुख का और श्मशान’ दुख का प्रतीक है। अत: सुखदुख में साथ रहने वाला व्यक्ति ही सच्चा मित्र होता है।

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सच्चा मित्र अपने स्वार्थों से ऊपर उठकर अपने मित्र को बुराई की राह पर चलने से बचाता है। वह गिरते हुए मित्र का हाथ थामकर उसे गिरने से बचाता है। वह अपने मित्र को न तो कभी भटकने देता है। और न ही सही रास्ता भूलने देता है। सदैव उसे सही रास्ते पर चलाने का कोशिश करता है, और संकट के समय कभी उसका साथ नहीं छोड़ता। सच्चा मित्र अपना विवेक सदैव जगाए रखकर मित्र का विवेक भी जगाए रखता है। यों तो भटकाने और मौजमस्ती में साथ देने वाले मित्र जीवन में कदमकदम पर मिल जाते हैं, परंतु सच्चे मित्र बहुत कम मिलते हैं। ईश्वर से हमें यही प्रार्थना करनी चाहिए कि वह हमें स्वार्थी मित्रों से बचाए और सच्चे मित्रों से मिलाए।

 

दोस्त पर निबंध Essay on My Best Friend in Hindi

मनमोहन मेरा सब से अच्छा मित्र है । वह माता- पिता का आज्ञाकारी है । अध्यापकों पर पूरी श्रद्धा रखता है । उनका आदेश मानता है । वह सदा साफ सुथरे कपड़े पहनता है । प्रतिदिन पाठ याद करके आता है । हम दोनों एक डेस्क पर साथसाथ बैठते हैं। वह कभी किसी की निन्दा नहीं करता। कभी गाली नहीं निकालता । मैंने उसे कभी भी क्रोध में भरे हुए नहीं देखा। मैंने कभी उससे गुस्सा भी कियातो भी वह मुस्कराता रहता है। वह पैसे व्यर्थ नहीं खर्चता, मुझे भी सदा कम खर्च करने के लिये समझाता रहता है ।

एक दिन ज्वर होने के कारण मैं विद्यालय न जा सका । वह छुट्टी होते ही सीधा मेरे घर आया । मेरा हाल-चाल पूछकर एक घण्टे तक मेरे पास बैठा रहा। वह कहने लगा कि मेरा बुखार कल तक उतर जायेगा। मेरे माता-पिता मनमोहन से बहुत स्नेह करते हैं

। उसको संगति से भी लड़का सुधर सकता है । प्रभु उसे दीर्घायु करें । वह जोवन में सफलता प्राप्त करे ।

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‘पुस्तक एक उत्तम साथी होता है”-

आदिम युग में मनुष्य अनपढ़ और अशिक्षित था। लोग लिखना पढ़ना नही जानते थे, सभ्यता के विकास के साथ साथ भाषा-साहित्य की रचना हुई। आरंभ में लेखन क्रिया शिलापट्टभोजपत्र या तालपत्र पर होती थी। पुस्तकों की हस्त लिपि प्राप्त करना सबके लिए संभव नही था। किन्तु कागज और मुद्रणयंत्र के आविष्कार और प्रयोग ने पुस्तक को सर्वसुलभ बनाकर समाज में क्रांति ला दी। ज्ञानविचार और भाव पुस्तक के रूप में छपने लगे । मनुष्य ने पुस्तक के रूप में अपना सबसे अच्छा मित्र प्राप्त कर किया और उसका अध्ययन कर अपने ज्ञान क्षेत्र को विस्तृत करने लगा। पुस्तक मानव जीवन का अभिन्न अंग बन गया है। यह मानव का । सबसे प्रिय सहचर है। यह न केवल हमारे ज्ञान की परिधि का विस्तार करता है अपितु जीवन में पग पग पर हमारा हितैषी, शुभचिन्तक और पथप्रदर्शक बन कर हमारा मार्ग दर्शन करता है। मानस में तुलसी ने लिखा है जे न मित्र दुख होंहि दुखारी।

तिन्हहिं बिलोकत पातक भारी।।
निज दुख गिरि सम रज करि जाना ।
मित्रक दुख रज मेरू समाना ।।
कुपथ निबारि सुपंथ चलावा 1
गुन प्रकट अवगुनहि दुरावा ।
देत लेत मन संक न धरई।
बल अनुमान सदा हित करई।।
विपति काल कर सत मन नेहा।
श्रुति कह संत मित्र गुन एहा ।।

 

सच्चे मित्र के संबंध में संपादित तुलसी का उक्त कथन पुस्तक पर ही चरितार्थ होता है। सच्चे मित्र की भांति पुस्तक का अध्ययन मनुष्य को कुमार्ग पर भटकने से रोकता है। उसके भीतर गुणों का विकास कर अवगुणों को दूर करता है। यह दगाबाजी नही करता, धोखा नहीं देता, दीनता और संकट में साथ नहीं छोड़ता, बरसाती मेढक की तरह अनर्गल प्रलाप और प्रशंसा नही करता। यह लम्बी और मन उबाऊ यात्रा को भी सरल बना देता है। यह नवीन अनुसंधानों की दुनियां में ले जाता है और निर्माण की नवीन सामग्री प्रदान करता है। यह हमारी चित्त-वृत्तियों का परिशोधन करता है। इसके साथ रहने से विमूच्र्युितविषष्ण और हताश मानव को नई संजीवनी शक्ति मिलती है। यह महापुरूषों के पथ पर खड़े होने का अवसर प्रदान करता है। यह सच्चे मित्र की तरह विश्वासी और जीवन के लिए महौषध है।

अच्छी पुस्तक हमारे अंतर्मन में ज्ञान की ज्योति फैलाकर संकट की घड़ियों में हमें रास्ता दिखाता है और सन्मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है। अच्छी पुस्तकें इस लोक की चिंतामणि है। उसके अध्ययन से मनुष्य दुश्चिंताओं से मुक्त हो जाता है। किंकर्तव्यविमूढ़ और संशय ग्रस्त नही होता। हृदय में सौम्य और मृदुल भावों का उदय होता है और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

अच्छे से अच्छे मित्र भी हमेशा मनोनुकूल घड़ियों में साथ नही रहते। कुछ ऐसे भी मित्र होते हैं जो मन उकताऊ होते हैं। हम उनसे पिंड छुड़ाना चाहते हैं किन्तु उन्हें बुरा न लगे इसलिए कुछ बोल नही पाते। किन्तु पुस्तक ऐसा मित्र है जिसे जब चाहे साथ रखें जब चाहे छोड़ दें । वह कभी बुरा नहीं मानता। गांधी ने ठीक ही कहा है-“अच्छी पुस्तकों के पास होने पर हमें अपने भले मित्रों के साथ न रहने की कमी नही खटकती सच्चा मित्र जीवन में आनंद प्रदान करता है । पुस्तकों की दुनियां इस धरती पर वैकुंट लोक है। जहां आनंद ही आनंद है। पुस्तक से मित्रता विचित्र स्वर्गीय वरदान है। भद्र मानस का आनंद और अभिमान-“पुस्तक एक उत्तम साथी होता है।” जो लोग इसके साथ से वंचित रह जाते हैं उन्हें दर-दर की ठोकरें मिलती है। जो पुस्तकों को अपना साथी बनाते हैं वे ।

 

विपत्ति में धैर्य, अभ्युदय में क्षमा, सभा में भाषण चातुर्ययुद्ध में विक्रम और जीवन में यश प्राप्त करते हैं। हमारा कर्तव्य है कि हम इस उत्तम साथी से मिलने वाली प्रेरणा का पाथेय संचित कर महापुरूषों की परवर्ती पंक्ति में अपना स्थान सुरक्षित करा लें।

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जीवन में सच्चा मित्र मिलना किसी खजाने से कम नहीं है। मेरे भी अनेक मित्र हैं, परंतु पवन मेरा सच्चा और सबसे प्रिय मित्र है। मुझे उसकी मित्रता पर गर्व है। हमारी मित्रता को विद्यालय एवं पड़ोस में एक आदर्श के रूप में देखा जाता है, क्योंकि हमारी दोस्ती स्वार्थ पर आधारित नहीं है।

पवन एक अमीर परिवार से है। उसके पिता एक प्रसिद्ध डॉक्टर हैं। उसकी माँ अध्यापिका हैं। पवन उनका इकलौता पुत्र है। उसकी एक छोटी बहन भी है। दोनों बहन-भाई में बड़ा स्नेह है। उसके सारे परिवार का
जीवन बड़ा ही नियमित है और पवन भी एक अनुशासन प्रिय बालक है। वह अपने मातापिता की हर बात को सहर्ष मानता है। उसमें एक अच्छे पुत्र के सभी गुण विद्यमान हैं।

पवन मेरी कक्षा में ही पढ़ता है। हम दोनों एक ही डेस्क पर बैठते हैं। वह हमेशा चित्त लगाकर पढ़ाई करता है। सभी शिक्षक उससे प्रसन्न रहते हैं। वह पढ़ाई में बहुत होशियार है। वह हर वर्ष परीक्षा में 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त (न्य करता है। सभी को विश्वास है कि वह बोर्ड की परीक्षा में स्कूल का नाम अवश्य उज्ज्वल करेगा।
वह अपना। गृहकार्य ( होमवर्क) समय पर करता है और नियमित रूप से उसकी जाँच करवाता है।
वह सदैव पुस्तकालय से पुस्तकें लेकर अपना ज्ञान बढ़ाता रहता है। मैं उसके नोट्स से काफी मदद लेता हैं।

 

मेरा मित्र पवन बड़ा होकर डॉक्टर बनना चाहता है। वह अपने लक्ष्य के प्रति अभी से सचेष्ट है। वह मुझे भी इस दिशा में प्रेरित करता रहता है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि बड़ा होकर वह अपना लक्ष्य अवश्य प्राप्त करेगा।
पवन मेरे पड़ोस में ही रहता है।

वह सदैव मधुर बोलता है। घमंड तो उसमें नाममात्र भी नहीं है। हम दोनों प्रात: प्रतिदिन सैर करने जाते हैं। दो-तीन किलोमीटर की सैर करने के पश्चात् हम बगीचे में व्यायाम करते हैं। फिर घर वापस आते हैं। हम शाम को दो घंटे एक साथ मिलकर पढ़ते हैं। उसके मातापिता मुझे भी अपना पुत्र जैसा ही मानते हैं। हम दोनों के परिवारों में घनिष्ठ संबंध हैं।

मेरा मित्र पवन स्वभाव से बहुत अच्छा है। विनम्रता उसका गुण है। वह सदैव बड़ों का आदर-सम्मान करता है। पढ़ने के अलावा खेलकूद में भी वह सदा आगे रहता है। हम दोनों स्कूल की क्रिकेट टीम मिलकर खेलते हैं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी हिस्सा लेते हैं। मैं ईश्वर से उसकी दीर्घायु की कामना करता हूं। मैं चाहता हूं कि
हमारी मित्रता सदैव बनी रहे।

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