इंटरनेट पर निबंध Essay on Internet in Hindi 2018

हेलो दोस्तों आज फिर में आपके लिए लाया हु Essay on Internet in Hindi पर पुरा आर्टिकल लेकर आया हु। Internet ने आज पूरी दुनिया को बदल दिया आजकल इंटरनेट पर हम सबकुछ कर सकते है। लेकिन आजकल Essay सिर्फ बच्चो को दिए जाते है ताकि वो उस टॉपिक के बारे में अच्छे से जान सके। अगर स्कूल में आपके बच्चो को इंटरनेट पर निबंध दिया गया है तो आप सही जगह आये है इसलिए हम आपके लिए लाये है Essay on Internet in Hindi भाषा में। अगर आपको किसी भी शब्द का मतलब समझना हो तो हमें कमेंट में बता सकते है आईये पढ़ते है Essay on Internet in Hindi

 

इंटरनेट का जब भी नाम आता तो सिर्फ Google facebook इन बड़ी कंपनी का ही नाम हमारे दिमांग में आता है। इसलिए आज हम आपको इसके बारे में बहुत कुछ बताने वाले है

Essay on the Internet in Hindi

इंटरनेट पर निबंध Essay on Internet in Hindi

 

आज के अत्याधुनिक वैज्ञानिक युग में कंप्यूटर हमारे जीवन का मुख्य भाग बन गया है। इसके अभाव में आज हम अपने जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकतेआज हम अपने रूम या ऑफिस में बैठेबैठे देश-विदेश-जहाँ भी चाहें इंटरनेट द्वारा अपना संदेश भेज सकते हैं। लेकिन यह इंटरनेट जितना सुविधाजनक है, उतना ही खतरनाक भी है। इसमें ईमेल आईडी. में ‘स्पैम’ में अनजाने संदेश आते रहते हैं। कई लोग अज्ञानवश इन अनजाने संदेशों को पढ़कर उनके प्रलोभन में आ जाते हैं।

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इन संदेशों में कई बार लॉटरी खुलने का संदेश आता है, तो कई बार किसी विदेशी द्वारा अपना पैसा हमारे बैंक में जमा करवाने का प्रस्ताव आता है ताकि वह अपने पैसे से हमारे साथ साझेदारी करके भारत में व्यापार कर सके। जो लोग इन संदेशों को सत्य जानकर इनके चंगुल में फंस जाते हैं, वे अक्सर ठग लिए जाते हैं। उनके बैंक से पैसे निकल जाते हैं और वे लुट जाते हैं। इस प्रकार इंटरनेट का इस्तेमाल जितना लाभदायक है, उतना हानिकारक भी है।

होशियार और चालाक लोग अक्सर सीधे-सादे लोगों को अपने जाल में फंसाकर उन्हें लूट लेते हैं। कई लोग तो इंटरनेट द्वारा लड़कियों को अपने जाल में फंसाकर उनसे शादी तक कर लेते हैं और बाद में उन्हें छोड़ देते हैं। इस प्रकार की घटनाएँ आजकल बहुत घट रही हैं। जिनसे आज का युवा वर्ग अत्यधिक प्रभावित हो रहा है। इससे बचने के लिए अत्यंत सावधानी बरतने की आवश्यकता

इंटरनेट पर निबंध Essay on Internet in Hindi

 

वर्तमान समय की इंटरनेट नीति का भारत सरकार के द्वारा नवम्बर 1998 के दौरान निर्णय लिया गया और इसने भारत को सूचना तकनीक की क्रांति में सबसे आगे रख दिया। यह सच में भारतीय कार्यकर्ताओंव्यापारियों और व्यवसायों के लिए अच्छा चिह्न है और यह सूचना तकनीक के क्षेत्र में प्रगति का द्वार साबित हो रहा है।

इस संबंध में सरकार ने जो निर्णय लिए हैं, वह निम्न हैं

1. निजी इंटरनेट सेवा को उपलब्ध कराने वालों को द्वार को स्थापित करने की इजाजत मिल गई, ताकि इंटरनेट के जरिए एक-दूसरे से जुड़ा रहा जा सके।
2 लाइसेंस पन्द्रह सालों के लिए लागू किया गया। पहले पाँच सालों से कोई लाइसेंस फीस नहीं है और बाद के सालों में हर साल एक रुपया फीस लागू की गई।
3. आईएसपी को अपने टैरिफों को निर्धारित करने की इजाजत दे दी जाएगी। इस नीति के चलते सरकार ने कुछ निजी आईएसपी को लाइसेंस जारी कर दिए और ज्यादा लाइसेंस उनको जारी किए गए जो पंक्ति में इंतजार कर रहे थे। निजीकरण ने इंटरनेट सुविधाओं की कीमतों में कमी कर दी है। इससे इंटरनेट में कार्य करना आसान बना
दिया गया है।

कम्प्यूटर यंत्रों की कीमतें पिछले दो सालों से गिर गई हैं, तब भी इंटरनेट भारत में आम आदमियों की पहुंच से दूर है। ईमेल और ई-कॉम बहुत जल्द गति पकड़ रहे हैं, पर सिर्फ कोरपोरेट क्षेत्र में। शहरी क्षेत्र में ईमेल का इस्तेमाल आनंद और दोस्ती के लिए किया जाता है। कोरपोरेट इस्तेमाल करने वाले -मेल व ईकॉम का और दूसरी वेबसरफिंग गतिविधियों का इस्तेमाल अपनी कोरपोरेट बढ़ोतरी के लिए कर रहे हैं। विद्यार्थियों के लिए इंटरनेट की कीमतें कम हैं। विद्यार्थी इंटरनेट का कनैक्शन 100 घंटे के लिए 3500 रु. की कम से कम लागत में ले सकते हैं। पर कम्प्यूटर हार्डवेयर सस्ता करना होगा।

बहुत से अखबारों और पत्रिकाओं की इंटरनेट पर अपनी वेबसाइट है। इंटरनेट पर लगभग 300 सर्च इंजन हैं, जो लगभग हर चीज के बारे में सूचना उपलब्ध कराते हैं, चाहे वह | ब्रह्माण्ड से जुड़ी हो, विज्ञान, दवाई, मित्र, तकनीक या यातायातविश्व के राष्ट्रों, घोटालों किताबों, पत्रिकाओंखरीदने और बेचने के तरीके, साहित्य, खेल, तत्कालीन घटनाएँ, शिक्षा आदि कुछ प्रिय विषय हैं, जिनके लिए सूचना माँगी और ली जाती है। ऐसे सर्च इंजन (जैसे याहू) व्यापार, पीले पन्नों और दुनियाभर की दूसरी गतिविधियों के बारे में सूचना देते हैं।

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दुनिया इंटरनेट क्रांति की वजह से सिकुड़ रही है। भारत में पूरी उम्मीद है कि कार्यकर्ता अधिक से अधिक फायदा लेंगेजिससे इंजीनियरिंग और प्रबंधन व्यवसायों, मालिकों और युवाओं को मौका मिलेगाक्योंकि इंटरनेट की कीमतें अब बहुत घट चुकी हैं। टेलनेटइंटरनेट, वैन, यूजनेट और आईएसडी.एन. फोन संचार क्षेत्र में शासन करेंगे यह तरीका नई सहस्राब्दी के व्यापार का होगा। भारत को तकनीक को स्वीकार करने के बाद भी अभी लम्बी राह में जाना है। हमारे बच्चे किसी भी सामाजिक, व्यक्तिगत आनंदक्रीड़ा, शैक्षिक या व्यापारिक गतिविधियाँ बिना इस सेवा के नहीं ले पाएंगे।

यह समय बिल्कुल सही है, जब हम सूचना के उस अति विलक्षण तकनीक पर टिके रहें। भारतीयों को सूचना के तरीकों और तकनीकों में महारथ हासिल कर लेनी चाहिएहमें इंटरनेट की सेवाएँ दुनिया के किसी भी राष्ट्र से ज्यादा चाहिएहमारी इतनी ज्यादा जनसंख्या, बढ़ती हुई समस्याएँबड़ी दूरियाँअर्थव्यवस्था की वृद्धि के लिएइस उपग्रह क्रांति और संचार की बहुत आवश्यकता है।

भारत ने हमेशा नई तकनीकों का स्वागत किया है और यह तकनीक भारत की अर्थव्यवस्था को नई और दृष्टिगत ऊँचाई पर ला देगी।

 

इंटरनेट पर निबंध Essay on Internet in Hindi

 

‘इन्टरनेट’ कम्प्यूटर व्यवस्था का जाल है जो उपग्रहों, टेलिफोन की लाइनों एवं प्रकाशीय केबिल के माध्यम से एक दूसरे से जुड़ा है। इन कम्प्यूटरों की पहुँच बहुल मूल्यवान एवं उपयोगी जानकारियों तक हो सकती है। प्रारम्भ में इन्टरनेट का प्रचलन वल अमेरीका में था किन्तु पिछले दस वर्षों में इस प्रौद्योगिकी ने सम्पूर्ण विश्व में अपने पंख फैला लिये हैं। इन्टरनेट का प्रचलन 1986 में प्रारम्भ हुआ जब अमेरीका के रक्षा विभाग ने कुछ कम्प्यूटरों को प्रकाशीय बिल के नेटवर्क | द्वारा जोड़ा। इन नेटवर्क ने दूर-दराज के स्थानों पर आंकड़ों | के प्रेषण के लिये उपग्रह का प्रयोग किया। बाद में अमरीका के कुछ विश्वविद्यालयों ने भी ‘इन्टरनेट’ के कार्यक्षेत्र में प्रवेश किया। मुख्य व्यवस्था जिसे ‘इन्टरनेट सर्वरस’ कहते हैं वह अमरीका में स्थापित थी। अब ‘इन्टरनेट’ एक वैश्विक संवृति है। प्रत्येक |

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विद्यार्थी अपनी कम्प्यूटर व्यवस्था एक टेलिफोन लाइन एवं एक मॉडम के द्वारा ‘इन्टरनेट’ तक पहुँच सकता है। इन्टरनेट की सेवा किसी सरकारी निकाय (जैसे – वी. एसएन. एल, एम टी एवं एल इत्यादि) अथवा किसी निजी फर्म जिसे इन्टरनेट सेवा प्रबंधक कहते हैं द्वारा उपलब्ध करायी जानी चाहिये। ‘इन्टरनेट’ की सफलता का राज़ है ज्ञान, सूचना, जानकारी जो वहाँ से प्राप्त होती है। विशेषतायें जितनी अधिक होगी इंटरनेट के संचालन के उपयोग भी उतने अधिक होंगे। और यह अधिक से अधिक संख्या में उपयोगकर्ताओं को ‘इन्टरनेट इईवे’ पर अकिषित करेगा। इन्टरनेट एक विशेष तरह के सॉफ्टवेयर’ का प्रयोग करता है जोकि एचटी. एमएलजावा, वी. बी. एवं एसजी. एमएलमें विकसित किया जाता है।

जो भी हो विद्यार्थियों को इन प्रोग्रामों के विषय में चिन्तित होने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि ‘इन्टरनेट सर्फिगबहुत सरल है। ‘विंडो 98 साफ्टवेयर एवं ‘नेट स्केप नेविगेटर साफ्टवेटयर या इनमें से किसी एक को विद्यार्थी के कम्प्यूटर में लोड करके इनकी सहायता से ‘इन्टरनेट पर ‘सर्फ’ करना सम्भव है। ‘इन्टरनेट’ से सम्प्रेषण की एक नवीन विधिक ‘ई-मेल’ प्राप्त हुई है। जो इसका सबसे बड़ा रोमांच है। विश्व के किसी भी कोने में हम ई-मेल भेज सकते हैं। ईमेल के एक पृष्ट पर केवल तीस पैसे खर्चा आता है। इसके अतिरिक्त जैसे कि पहले बताया है ‘इन्टरनेट’ का प्रयोग सूचनायें एकत्र करने के लिये किया जा सकता है। यह सूचनायें हमें सर्वरस के भंडारण क्षेत्र, जिन्हें हम ‘वेब साइट’ कहते हैं,

 

वेयर कम्प्यूटर व्यवसाय मनोरंजन मित्रता अथवा शौक से सम्बन्धित हो सकती हैं। व्यापार की कार्यविधि के लिये भी ‘इन्टरनेट’ का प्रयोग किया जाता है और इस संचालन को इलेक्ट्रानिक कामर्स ( ई-काम र्स कहते है। सभी मुख्य समाचार पत्र-पत्रिकायें एवं विश्व के प्रसिद्ध ‘जनरल’ इन्टरनेट पर उपलब्ध है। इस सूचनाओं के सुपर हार्ड (उच्च राजमार्ग) पर हमारा ‘दूरदर्शन भी उपलब्ध है। इस तरह इन्टरनेट’ पर असीम सम्भावनायें हैं। कोई भी विद्यार्थी अगर ‘इन्टरनेट पर बैठा है तो विश्व के किसी भी विषय पर कुछ ही घंटों में पूरी जानकारी प्राप्त कर सकता है। कुछ विद्यार्थी शरारती प्रवृति के होते है। वह झूठी ईमेल भेजने में अपना समय बिताते हैं। कुछ अन्य ऐसी वेब साइट पर जाने का प्रयत्न करते हैं तो उनके मतलब की नहीं है।

यह एक बरी प्रवति है जिसपर नियंत्रण रखना चाहिये। ‘इन्टरेनट’ लिये नहीं। एम. टी. एन. एलद्वारा ‘इन्टरनेट की सुविधा 1500/- रुपये प्रति वर्ष के निम्न दर पर उपलब्ध है। दरों की भविष्य में और कम होने की सम्भावना है। कम्प्यूटर व्यवस्था, ‘मोंडम एवं सम्बन्धित ‘हार्ड वेयर’ की दरों में और कटौती होने की उम्मीद है।

‘इन्टरनेट का प्रयोग करने वाले के पास एक ‘टेलिफोन लाइन’ होना आवश्यक है जो उसके कम्प्यूटर को आईएस पी से जोड़ेगा। भारत में यह सुविधा स्थानीय नेटवक्र्स द्वारा प्रदान की जा रही है। ‘इन्टरनेट’ आज देश के हर शहर एवं नगर में उपलब्ध है। चार प्रमुख शहरों में ‘इन्टरनेट’ सुविधायें बहुत आसानी से बहुत निम्नदरों पर प्राप्त हैं।

 

‘इन्टरनेट’ भविष्य की प्रौद्योगिक है। आने वाले समय में ‘इन्टरनेट के माध्यम से दूर स्थान पर बैठ कर कार्यालयों का प्रबन्धन हो सकेगा।’इन्टरनेट की विशेषतायें हैं निम्न दरेंसूचनाओं की बाहुल्यता, पहुँच में तीव्रता एवं अच्छे स्तर का मनोरंजन। त्रुटि पूर्ण ‘टेलिफोन’ नेटवर्क अनावश्यक सूचनायें एवं विद्यार्थियों द्वारा विभिन्न वेब साइट पर सर्फिग करके समय का अपव्यय इसके सबसे बड़े दोष हैं। विद्यार्थी अपनी स्वयं की वेबसाइट का निर्माण एवं स्थापन कर सकते हैं इसके लिये उन्हें इन्टरनेट प्रोग्रामिंग’ सीखनी होगी।

वह ‘इन्टरनेट का संचालन सीख सकते हैं, आने वाले समय में अच्छे ‘इन्टरनेट प्रोग्रामरस बन सकते हैं। विद्यार्थियों को ‘इन्टरनेट’ संचालन सीखना चाहिये एवं केवल उपयोगी जानकारी एकत्र करना चाहिये। आने वाली सदी में मानव सूचना प्राधौगिकी के एक नये युग में प्रदेश करेगा। इस रोमांचक युग की रीढ़ की हड्डी है ‘इंटरनेट।

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