स्वतंत्रता दिवस पर निबंध – Essay on Independence Day in Hindi [5]

स्वतंत्रता दिवस पर निबंध – Essay on Independence Day in Hindi [5]
3.3 (66.23%) 61 votes

भारत का स्वतंत्रता दिवस भारतीयो के लिए बहुत ही खास दिन माना जाता है 15 अगस्त 1947 को भारत देश बहुत से शहीदो के कारण आज़ाद हुवा था। इनमे से प्रमुख है भगत सिंह , सुख देव ,राज गुरु ,चन्दरशेखर आज़ाद और भी बहुत से ऐसे वीर थे जो हस्ते हस्ते फांसी के फंदे पर झूल गए। लेकिन लोग आज उनके बलिदानो को भूल गए है। आज हम आप सबके लिए लाये है स्वतंत्रता दिवस के ऊपर निबंध जो आपके बच्चे के लिए बहुत जरुरी होंगे।आपके लिए हर तरह के essay on independence day in hindi में पब्लिश कर रहे है जो की 100, 200, 250, 300, and 400 words के है क्योकि ये सब स्कूल में प्रतियोगिता होने पर काम आती है।

Essay on Independence Day in Hindi

 

1. स्वतंत्रता दिवस पर निबंध – Essay on Independence Day in Hindi (100 word)

प्रतिवर्ष 15 अगस्त के दिन को भारतवासी स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाते हैं। भारत को 15 अगस्त, 1947 के दिन वह सुनहरी आजादी प्राप्त हुई थी जिसका लोगों को वर्षों से इंतजार था। इस दिन भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू ने लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया था। लोग गुलामी की जंजीरें तोड़कर बहुत प्रसन्न हुए थे। तब से भारत बहुत उन्नति कर चुका है। भारत के लोग आज भी अपना स्वतंत्रता दिवस बहुत उत्साह से मनाते हैं। प्रधानमंत्री लाल किले पर झंडा फहराकर राष्ट्र को संबोधित करते हैं। वे राष्ट्र को एकजुट रहने तथा अपनी स्वतंत्रता को बरकरार रखने की प्रेरणा देते हैं। देश के विभिन्न भागों में इस दिन चहलपहल होती है। लोग तिरंगा झंडा फहराकर एक-दूसरे को स्वतंत्रता दिवस की बधाई देते हैं। यह दिवस हमें अपने महान स्वतंत्रता सेनानियों तथा शहीदों का स्मरण करा जाता है। भारतवासी उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प प्रकट करते हैं। स्वतंत्रता दिवस भारत के लोगों को आपसी मतभेद भुलाकर देश के नवनिर्माण की प्रेरणा देता है।

 

Also, Read Bhagat Singh Quotes in Hindi

 

2. स्वतंत्रता दिवस पर निबंध – Essay on Independence Day in Hindi (200 words)

 

‘स्वतंत्रता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है’-यह कथन कितना अच्छा कितना उन्मादक और आनंददायक है ! स्वतंत्रता प्रत्येक प्राणी को प्रिय होती है। चाहे वह मनुष्य हो या कोई पशु पक्षीजीव-जंतु।

वस्तुत: स्वाधीनता में ही सुख है। तभी तो तुलसीदासजी ने लिखा है-‘पराधीन सपनेई सुख नाहीं।” इसी तरह महर्षि दयानंद का कथन है कि विदेशी राज्य चाहे कितना ही अच्छा हो, स्वदेश के लिए हानिकारक होता है।इसीलिए अंग्रेजों के शासन से मुक्त होने के लिएस्वतंत्रता पाने के लिए भारतवासी छटपटा रहे थे। लगभग दो सौ वर्षों से अंग्रेजों ने भारत को अपना गुलाम बना रखा था। इस गुलामी से छुटकारा पाने के लिए लाखों लोगों ने अपने प्राण न्योछावर किए। जेलों में वर्षों कष्ट झेले।

काला पानी की सजा भुगती। अंतत: १५ अगस्त, १९४७ को उन्हें सफलता मिली। आधी रात के समय जवाहरलाल
नेहरू ने जब स्वतंत्रता प्राप्ति की घोषणा की तब सारे देश में खुशी की एक लहर दौड़ गई। सरकारी भवनों पर राष्ट्रीय झंडा फहराया गया। इस अवसर पर देश-भर में उत्सव मनाए गए राष्ट्रीय गीत गाए गए। राष्ट्रीय धुन बजाई। गई।’भारत माता की जय , ‘स्वतंत्रता की जय’ आदि नारों से आकाश गूंज उठा। दीपों आदि से नगरों को दुलहन की तरह सजाया गया।

तब से प्रतिवर्ष 15 अगस्त का दिन एक राष्ट्रीय पर्व के रूप में धूमधाम से मनाया जाता । है । दिल्ली के लालकिला पर प्रधानमंत्री झंडा फहराते हैं । इक्कीस तोपों की सलामी दी जाती है। एक बड़ा समारोह होता है। लालकिले की प्राचीर से प्रधानमंत्री देश को संबोधित करते हैं। यह सारा कार्यक्रम दूरदर्शन पर प्रत्यक्षत: प्रदर्शितप्रसारित किया जाता है।

देश के अन्य नगरों में भी इसी समय यह पर्व उत्साहपूर्वक मनाया जाता है। नगरों और गाँवों में प्रभातफेरियां निकाली जाती हैं। विद्यालयों में झंडा फहराने के पश्चात् खेलकूद होते हैं। विभिन्न प्रतियोगिताएँ होती हैं। तरह-तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। मिठाई बाँटी जाती हैं। कुल मिलाकर 15 अगस्त ‘स्वाधीनता दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह हमारा राष्ट्रीय पर्व है। ऐसे उत्सव देश को उन्नत बनाने की प्रेरणा देते हैं ।

 

Also Read:

Jhansi Rani Photos and Jhansi Ki Rani Images in HD Quality

 

3. स्वतंत्रता दिवस पर निबंध – Essay on Independence Day in Hindi (500 words)

 

स्वतंत्रता का महत्व तो वही व्यक्ति जान सकता है, जो गुलाम हो या कैद में हो। जब भारत पर अंग्रेज़ों का शासन था और हम गुलाम थे तब हमें हर काम के लिए अंग्रेज़ों की अनुमति लेनी पड़ती थी। हम अपनी मर्जी से आज़ादी से नहीं जी सकते थे। वो गुलामी का ही दौर था जब अंग्रेज़ों ने अफ्रीका में गाँधीजी को ट्रेन के फर्स्ट क्लास के डिब्बे से उतार दिया था। अंग्रेज़ अपने समक्ष भारतीयों को तुच्छ समझते थे। वे भारतीयों को हमेशा ‘काला आदमी’ (ब्लैक मैन) कहते थे। गुलामी के समय में प्रत्येक भारतीय ने इतना अपमान और पीड़ा सही है, जिसे शब्दों में बयाँ नहीं किया जा सकता। अंग्रेज़ बात-बात पर भारतीयों पर कोड़े बरसाते थे, उन्हें कारागार में डाल देते थे, काला पानी (अण्डमाननिकोबार) भेज देते थे और सरेआम पेड़ से लटकाकर फाँसी पर लटका देते थे। अंग्रेज़ों के सामने कोई भी अपना मुंह नहीं खोल सकता था, क्योंकि भारतीय के मुंह खोलते ही अंग्रेज़ क्रोध से लाल-पीले हो जाते थे और घटनास्थल पर ही सज़ा दे देते थे।

Also Read:

Ram Prasad Bismil Images Wallpaper ,Wiki , Personal Detail

 

जलियाँवाला काण्ड अंग्रेज़ों की क्रूरता का ही एक परिणाम था। तब भारतीयों को स्वतंत्रता के महत्व का अहसास हुआ। उसके बाद उन्होंने अंग्रेज़ों की दासतां से स्वतंत्र होने के लिए अपना सब कुछ त्याग दिया। और वे स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े1 स्वतंत्रता के महत्व को अनुभव करने के बाद भारत का बच्चा-बच्चा अंग्रेजों के खिलाफ खड़ा हो गया अनपढ़ से लेकर सुशिक्षित-सभी स्वतंत्र होने के लिए एकजुट हो गए फिर तमाम सत्याग्रह और आंदोलन चलाए गएहज़ारों-लाखों बच्चेबूढ़े और युवाओं को जेल जाना पड़े और अंग्रेज़ों की लाठियाँ खानी पड़ीं। लाला लाजपतराय अंग्रेज़ों के लाठी प्रहार से ही शहीद हुए थे। अंग्रेज़ों से स्वतंत्र होने के लिए ही भगतसिंह, चंद्रशेखर आज़ाद और सुखदेव हंसतेहंसते फाँसी पर चढ़ गए थे। भारत की आज़ादी के लिए ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस को भारत छोड़कर जर्मन जाना पड़ा था। और वहाँ वे ‘आज़ाद हिन्द’ फौज बनाकर अंग्रेज़ों के विरुद्ध लड़े थे। जवाहरलाल नेहरू, महात्मा गाँधी, सरदार पटेल आदि अनेकों देशभक्त अपना सब कुछ त्यागकर भारत को स्वतंत्र कराने में जुट गये थे। तब जाकर 15 अगस्त1947 को भारत स्वतंत्र हुआ और हमें आजादी मिली।

निष्कर्षत: अब हमें स्वतंत्रता का महत्व समझना होगा और इस आज़ादी को कायम रखने के लिए हमें देशभक्ति से पूरी ईमानदारी से देश के विकास के लिए कार्य करने होंगे। देश से छुआछूत और रूढ़िवादियों को मिटाना होगा तथा अपने देश (भारत) के लिए अपना सब कुछ बलिदान करने के लिए हर वक्त तैयार रहना होगा तभी हम देश की स्वतंत्रता को अक्षुण्ण रख सकेंगे

 

Also Read:

Shaheed Udham Singh Images With Udham Singh Quotes

 

4. स्वतंत्रता दिवस पर निबंध – Essay on Independence Day in Hindi (600 words)

 

15 अगस्त भारतवर्ष का एक राष्ट्रीय त्यौहार है। 15 अगस्त, 1947 का दिन भारत देश के इतिहास में स्वर्णाक्षरों से लिखा गया हैइस शुभ दिन हमारा देश सैकड़ों वर्षों की अंग्रेजी पराधीनता से स्वतंत्र हुआ था। तभी से भारत के करोड़ों नागरिक इस त्यौहार को ‘स्वतंत्रतादिवसके रूप में बड़े हर्षोल्लास से मनाते हैं। इस अवसर पर सभी विद्यालय कार्यालयकारखानेसंस्थान और बाजार बन्द रहते हैं। इस दिन प्रत्येक वर्ष भारतवर्ष की राजधानी दिल्ली में लालकिले की प्राचीर पर प्रधानमंत्री राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं तथा देशवासियों के नाम सन्देश देते हैं। राष्ट्रीय ध्वज को 21 तोपों की सलामी दी जाती है, तत्पश्चात् राष्ट्रगान होता है। स्वतंत्रता तथा समृद्धि का प्रतीक यह दिवस भारत के कोनेकोने में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। 15 अगस्त की सुबह राष्ट्रीय स्तर के नेतागण पहले राजघाट आदि समाधियों पर जाकर महात्मा गांधी आदि राष्ट्रीय नेताओं तथा स्वतंत्रतासेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं फिर लाल किले के सामने पहुंच कर सेना के तीनों अंगों (वायुजल व स्थल सेना) तथा अन्य बलों की परेड का निरीक्षण करते हैं तथा उन्हें सलामी देते हैं। 15 अगस्त को सभी सरकारी कार्यालयों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है तथा सभी लोग अपने घरों व दुकानों पर राष्ट्रीयध्वज फहराते हैं। इस दिन रात्रि के समय सरकारी कार्यालयों व अनेक विशेष स्थानों पर विद्युतप्रकाश किया जाता है। इसकी सुन्दरता के – कारण भारत की राजधानी दिल्ली एक नववधू-सी लगने लगती है। सभी स्कूलों व कॉलेजों में यह पर्व एक दिन पूर्व अर्थात् 14 अगस्त को ही मना लिया जाता है। इस दिन स्कूलों में बच्चों को फलमिठाइयां आदि वितरित की जाती हैं।

 

Also Read:

15 अगस्त भारत के गौरव व सौभाग्य का पर्व है। यह पर्व हम सभी के हृदयों में नवीन स्फूर्ति, नवीन आशाउत्साह तथा देश-भक्ति का संचार करता है। यह स्वतंत्रतादिवस हमें इस बात की याद दिलाता है कि इतनी कुर्बानियां देकर जो आजादी हमने प्राप्त की है, उसकी रक्षा हमें हर कीमत पर करनी है। चाहे हमें उसके लिए अपने प्राणों की आहुति ही क्यों न देनी पड़े। इस प्रकार पूरी उमंग और उत्साह के साथ इस राष्ट्रीय पर्व को मनाकर हम राष्ट्र की स्वतंत्रता तथा सार्वभौमिकता की रक्षा का प्रण लेते हैं।

 

स्वतंत्रता दिवस को देश की स्वतन्त्रता का जन्म दिवस भी कह सकते हैं। क्योंकि इसी दिन देश को गुलामी से मुक्ति मिली थी। 1947 से पूर्व लगभग दो सौ वर्षों तक अंग्रेजों ने भारत में राज्य किया। जबकि भारत आदि काल से हिन्दू भूमि रहा है। अंग्रेजों से पूर्व करीब बारह सौ वर्षों तक मुगलों ने भारत पर शासन किया। इसके बाद कूटनीति में माहिर अंग्रेजों ने विलासी, भोगी और सत्ता पाने के लिए पारिवारिक षड़यंत्रों में उलझे रहे मुगलों को खदेड़ कर अपना शासन भारत में स्थापित किया। इनके काल में वैज्ञानिक उन्नति से देश प्रगति पर अग्रसर हुआ। उन्होंने अपनी कूटनीति के चलते भारत से श्रीलंका और बर्मा को अलग कर उन्हें स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में प्रतिष्ठित किया। बंगाल को भी वे दो भागों में विभाजित करने के प्रयास में थे। पर जनमत विरोध के कारण इसमें उन्हें सफलता नहीं मिली। इसी दिन दिल्ली के लालकिले पर पहली बार यूनियन जैक के स्थान पर सत्य और अहिंसा का प्रतीक तिरंगा झंडा लहराया गया था। यह राष्ट्रीय पर्व प्रतिवर्ष प्रत्येक नगर बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। विद्यालयों में छत्र अपने इस ऐतिहासिक उत्सव को बड़े उल्लास और उत्साह के साथ आयोजित करते हैं। हमारे स्कूल में भी अन्य वर्षों की भाँति इस वर्ष यह उत्सव बहुत ही उत्साह के साथ मनाया गया। स्कूल के सभी छात्र स्कूल के प्रांगण में एकत्रित हुए। यहां अध्यापकों ने उपस्थिति लीजिससे यह मालूम हो गया कि कौन-कौन नहीं आया है। हालांकि कार्यक्रम शुरू होने के बाद भी विद्यार्थियों का आना जारी था। उपस्थिति पूर्ण होने के बाद मंच का संचालन कर रहे शिक्षक ने उन छात्रों से आगे आने को कहा जिन्हें कार्यक्रम के लिए चुना गया था। शिक्षक की इस उद्घोषणा के बाद कार्यक्रम के लिए चयनित छात्र अन्य छात्रों से अलग हो चुके थे।

Essay on Independence Day in Hindi

इसके बाद प्रधानाचार्य ने प्रभात फेरी में चलने के लिए विद्यार्थियों को संकेत दियास्कूल के छात्र तीन-तीन की पंक्ति बनाकर सड़क पर चलने लगे। सबसे आगे चल रहे विद्यार्थी के हाथ में तिरंगा झण्डा था, उसके पीछे विद्यार्थी तीन-तीन की पंक्तियों में चल रहे थे। सभी छात्र देशभक्ति से ओतप्रोत गीत गाते हुए जा रहे थे। बीचबीच में अचानक वे ‘भारत माता की जय, हिन्दुतान जिन्दाबाद-जिन्दाबाद के नारे बुलन्द आवाज में लगा रहे थे। इस प्रकार प्रभात फेरी नगर के प्रमुख चौराहों से होते हुए जिलाधीश के आवास के सामने से निकली। अन्त में प्रभात फेरी स्कूल परिसर में आकर रुकी। जहां ध्वजारोहण की तैयारियां पूरी हो चुकी थी। ठीक आठ बजे स्कूल के प्रधानाचार्य ने ध्वजारोहण किया और उपस्थित सभी छात्रों ने तिरंगे को सलामी दी। इस अवसर पर राज्य के शिक्षामन्त्री तथा शिक्षा अधिकारी द्वारा भेजे गये संदेश पढ़कर सुनाए गये। इसके बाद शुरू हुए खेल व सांस्कृतिक कार्यक्रम। सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत जलियांवाला बाग पर आधारित एक नाटक का मंचन किया गया। इसके अलावा कुछ छात्रों ने देश भक्ति से ओतप्रोत अपनी रचनाएं सुनाईं। कार्यक्रम के अंत में विभिन्न क्षेत्रों में अव्वल रहे छात्रों को क्षेत्र के प्रमुख समाजसेवी व स्वतंत्रता सेनानी श्री जसवंत सिंह ने पुरस्कार देकर सम्मानित किया। और छात्रों के मध्य मिष्ठान वितरण हुआ।

Also Read:

राष्ट्रीय स्तर पर इस पर्व का मुख्य आयोजन दिल्ली के लाल किले में होता है। इस समारोह को देखने के लिए भारी जनसमूह उमड़ पड़ता है। लाल किला मैदान व सड़कें जनता से खचाखच भरी होती हैं। यहां प्रधानमंत्री के आगमन के साथ ही समारोह का शुभारम्भ हो जाता है। सेना के तीनों अंगों जलथल और नौसेना की टुकड़ियां तथा एन.सी.सी. के कैडिट सलामी देकर प्रधानमंत्री का स्वागत करते हैं। प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर पर बने मंच पर पहुंच कर जनता का अभिनन्दन स्वीकार करते हैं और राष्ट्रीय ध्वज लहराते हैं। ध्वजारोहण के समय राष्ट्र ध्वज को सेना द्वारा इकत्तीस तोपों की सलामी दी जाती है। इसके बाद प्रधानमंत्री राष्ट्र की जनता को बधाई देने के बाद देश की भावी योजनाओं पर प्रकाश डालते हैं। साथ ही पिछले वर्ष पन्द्रह अगस्त से इस वर्ष तक की काल में घटित प्रमुख घटनाओं पर चर्चा करते हैं। भाषण के अंत में तीन बार वे जय हिन्द का घोष करते हैंजिसे वहां उपस्थित जनसमूह बुलन्द आवाज में दोहराता है। लाल किले पर इस अवसर पर रोशनी की जाती है।

 

स्वतंत्रता दिवस पर निबंध – Essay on Independence Day in Hindi (500 words)

 

15 अगस्त भारतवर्ष का एक राष्ट्रीय त्यौहार है। 15 अगस्त, 1947 का दिन भारत देश के इतिहास में स्वर्णाक्षरों से लिखा गया है। इस शुभ दिन हमारा देश सैकड़ों वर्षों की अंग्रेजी पराधीनता से स्वतंत्र हुआ था। तभी से भारत के करोड़ों नागरिक इस त्यौहार को स्वतंत्रतादिवसके रूप में बड़े हल्लास से मनाते हैं। इस अवसर पर सभी विद्यालय कार्यालयकारखाने, संस्थान और बाजार बन्द रहते हैं। इस दिन प्रत्येक वर्ष भारतवर्ष की राजधानी दिल्ली में लालकिले की प्राचीर पर प्रधानमंत्री राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं तथा देशवासियों के नाम सन्देश देते हैं। राष्ट्रीय ध्वज को 21 तोपों की सलामी दी जाती है, तत्पश्चात् राष्ट्रगान होता है।

स्वतंत्रता तथा समृद्धि का प्रतीक यह दिवस भारत के कोनेकोने में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। 15 अगस्त की सुबह राष्ट्रीय स्तर के नेतागण पहले राजघाट आदि समाधियों पर जाकर महात्मा गांधी आदि राष्ट्रीय नेताओं तथा स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। फिर लाल किले के सामने पहुंच कर सेना के तीनों अंगों (वायु, जल व स्थल सेना) तथा अन्य बलों की परेड का निरीक्षण करते हैं तथा उन्हें सलामी देते हैं। 15 अगस्त को सभी सरकारी कार्यालयों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है तथा सभी लोग अपने घरों व दुकानों पर राष्ट्रीयध्वज फहराते हैं। इस दिन रात्रि के समय सरकारी कार्यालयों व अनेक विशेष स्थानों पर विद्युतप्रकाश किया जाता है। इसकी सुन्दरता के कारण भारत की राजधानी दिल्ली एक नववधू-सी लगने लगती है। सभी स्कूलों व कॉलेजों में यह पर्व एक दिन पूर्व अर्थात् 14 अगस्त को ही मना लिया जाता है। इस दिन स्कूलों में बच्चों को फल मिठाइयां आदि वितरित की जाती हैं।

 

15 अगस्त भारत के गौरव व सौभाग्य का पर्व है। यह पर्व हम सभी के हदयों में नवीन स्फूर्तिनवीन आशाउत्साह तथा देश-भक्ति का संचार करता है। यह स्वतंत्रतादिवस हमें इस बात की याद दिलाता है कि इतनी कुर्बानियां देकर जो आजादी हमने प्राप्त की है, उसकी रक्षा हमें हर कीमत पर करनी है। चाहे हमें उसके लिए अपने प्राणों की आहुति ही क्यों न। देनी पड़े। इस प्रकार पूरी उमंग और उत्साह के साथ इस राष्ट्रीय पर्व को मानकर हम राष्ट्र की स्वतंत्रता तथा सार्वभौमिकता की रक्षा का प्रण लेते हैं।

 

भारत जिस प्रकार सामाजिक और धार्मिक पर्व (त्योहार) धूमधाम से मनाए जाते हैं वैसे ही स्वतंत्रता दिवस भी बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। स्वतंत्रता दिवस एक राष्ट्रीय पर्व है, जो 15 अगस्त को बड़ी धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इसी दिन हमारा देश विदेशी दासता से मुक्त हुआ था और अंग्रेज़ देश के शासन की बागडोर हमारे हाथों में सौंपकर भारत छोड़कर अपने देश लौट गये थे। इसलिए हम सब इस दिन को ऐतिहासिक दिन के रूप में मनाते हैं। स्वतंत्रता दिवस का हम सबके लिए बहुत महत्व है। क्योंकि देश को स्वतंत्र कराने के लिए हमारे देश के हज़ारों वीर जवानों ने अपने प्राणों की बलि दी है। अनेक नेताओं ने स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए जेलों की यातनाएँ भोगी हैं। वे अंग्रेजों द्वारा दी गई यातनाओं से डिगे नहीं, बल्कि जी-जान से कोशिश में जुटे रहेतब कड़ी मेहनत और बलिदानों के बाद हमारा देश स्वतंत्र हो सका।

स्वतंत्रता दिवस सभी स्तरों-राष्ट्रीय, प्रान्तीय और स्थानीय पर बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। राष्ट्रीय स्तर पर भारत की राजधानी दिल्ली में प्रधानमंत्री 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर पर झण्डा फहराते हैं और देश के नाम संदेश प्रसारित करते हैं। अन्य राज्यों की राजधानी में भी स्वतंत्रता दिवस बड़े उल्लास के साथ मनाया जाता है। राज्यों के मुख्यमंत्री जनता को संबोधित करते हैं और प्रदेश की प्रगति की योजनाओं से जनता को अवगत कराते हैं। छोटे-बड़े सभी नगरों में इस अवसर पर अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं, जिनमें ध्वजारोहण, राष्ट्रगान और उत्साहवर्धक भाषण प्रमुख हैं।

हमारे विद्यालय में भी स्वतंत्रता दिवस बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। हम प्रातकाल 8 बजे विद्यालय के प्रांगण में एकत्रित हो जाते हैं। फिर प्रधानाचार्य और अन्य अध्यापक उपस्थित होते हैं। राष्ट्रगान के साथ उत्सव आरंभ होता है और प्रधानाचार्य तिरंगा झण्डा फहराते हैं। तत्पश्चात् एक-एक करके विद्यार्थी देशभक्ति के गीत गाते हैं, फिर अध्यापकगण और प्रधानाचार्य भाषण देते हैं और छात्रों को स्वतंत्रता दिवस का महत्व बताते हैं।

 

इस प्रकार स्वतंत्रता दिवस सभी स्थानों पर धूमधाम से मनाया जाता है। यह दिवस हमें याद दिलाता है कि इस दिन हम अंग्रेजों की गुलामी की बेड़ियों से आज़ाद हुए थे। देश की स्वतंत्रता के लिए हमारे वीरों को बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ी थी, अतहमें इसकी तन-मनधन से रक्षा करनी चाहिए। और अवसर पड़ने पर भारत की एकता और अखण्डता के लिए अपना बलिदान देने के लिए भी तैयार रहना चाहिए। अपने देश के लिए हम सबका यही परम कर्तव्य है।

 

 

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.