होली पर निबंध Essay on Holi in Hindi [5 प्रकार के निबंध]

हेलो दोस्तों आज हम आपके लिए लाये है होली पर निबंध वो भी हिंदी में। होली पर निबंध आपके बच्चो के लिए बहुत उपयोगी हो सकते है क्योंकि स्कूल जाने वाले बच्चों को कई बार essay on holi in hindi में लिखने के लिए बोला जाता है तो उसके लिए ये आर्टिकल बहुत काम आएगा। हम आपके लिए लाये है 5 अलग अलग प्रकार के essay on holi पर मिलेंगे। 

होली पर निबंध 1- Essay on Holi in Hindi- 100 Word

 

होली का त्यौहार फागुन महीने की पूर्णमासी को मनाया जाता है । इसमें एक दूसरे पर रंग डालते हैं, सूखा रंग मलते हैं । रंग पानी में घोलकर पिचकारी चलाने से बड़ा आनन्द आता है । सबके मन मस्त हो जाते हैं। लोग नाचतेगाते और स्वांग रचते हैं । आपस में गले मिलते हैं । कई बच्चे और कई बड़े भी, मिट्टी उड़ाते, कालिख मलते, गालियां निकालते, भद्दे शब्द बोलते हैं । कभी कभी लड़ाई झगड़ा हो जाता है । कुछ लोग नशा पीते हैं । ये बुरी बातें हैं ।होली खुशी मनाने का पर्व है। इस दिन पुराना | बैर भुलाना चाहिए। रूठे हुए को मनाना चाहिये। इस समय चने के खेत लहलहा रहे होते हैं । होल के दिन चने की होला भी भूनते हैं । कहते हैं कि हिरण्यकश्यप की बहन होलिका थी। अत्याचारी हिरण्यकश्यप के कहने पर होलिका प्रलाद को गोद में | लेकर चिता में बैठ गई थी। पर होलिका तो जल गई प्रलाद बच गया । होली उस प्राचीन घटना की भी याद दिलाती है ।

 

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होली पर निबंध 2- Essay on Holi in Hindi मेरा प्रिय त्योहार : होली  200 Word

 

होली मेरा सबसे प्रिय त्योहार है। इस दिन घर-घर में उमंग एवं प्रसन्नता छायी रहती है। बाज़ारों में कई दिनों पूर्व से ही चहल-पहल देखी जा सकती है। मैं होली के अवसर पर माता-पिता के साथ खरीदारी करने जाता हूँ। नये वस्त्र, रंग, अबीर, पिचकारी आदि की खरीदारी करता हूँ। इनके अलावा पकवानों की सामग्री भी खरीदी जाती है। होली के दिन बहुत धूम-धाम रहती है। मैं अपने मित्रों तथा हमउम्र लोगों पर रंग डालता हूँ मित्र भी मेरे साथ होली खेलते हैं। पिताजी तथा बुजुर्ग माथे पर गुलाल लगाकर मुझे आशीर्वाद देते हैं। फिर पुए पकवानों को खाने तथा खिलाने का सिलसिला आरंभ होता है। आँगन तथा गलियों में लोग खुश होकर नाचते हैं तथा एकदूसरे पर रंग डालते हैं। इस दिन लोग आपसी वैर और द्वेष भुलाकर एक-दूसरे से गले मिलते हैं। शाम को ढोल-नगाड़े बजाए जाते हैं। लोग गीत गाकर नाचते हैं। मैं इन कार्यक्रमों में उत्साह से भाग लेता हूँ। रंगों का त्योहार होली मुझे बहुत ही आकर्षक लगता है। यह हमें बुराई से दूर रहने तथा अच्छाई के मार्ग पर चलने की शिक्षा देता है।

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होली पर निबंध 3- Essay on Holi in Hindi (500 Word)

 

होली भारतीय पर्यों में आनंदोल्लास का पर्व है। नाचने-गाने हँसी-मजाक, मौज-मस्ती करने व ईष्योद्घष जैसे विचारों को निकाल फेंकने का अवसर है। फाल्गुन मास की पूर्णिमा को यह त्योहार मनाया जाता है। होली के साथ अनेक दंत-कथाएँ जुड़ी हुई हैं। होली से एक रात पहले होली जलाई जाती है।

इसके लिए एक पौराणिक कथा है कि प्रह्लाद के पिता राक्षस राज हरिण्यकश्यप स्वयं को भगवान मानते थे व विष्णु के परम विरोधी थे परन्तु प्रहलाद विष्णु भक्त थे। उन्होंने प्रह्लाद को विष्णु भक्ति करने से रोका जब वह नहीं माने तो उन्होंने अनेकों बार उन्हें मारने का प्रयास किया। प्रह्लाद के पिता ने तंग आगर अपनी बहन होलिका से सहायता मांगी। होलिका अपने भाई की सहायता करने के लिए तैयार हो गई। होलिका को आग में न जलने का वरदान प्राप्त था इसलिए होलिका प्रहलाद को लेकर चिता में जा बैठी परन्तु विष्णु की कृपा से प्रहलाद सुरक्षित रहे और होलिका जल कर भस्म हो गई। यह कथा इस बात का संकेत करती है की बुराई पर अच्छाई की जीत अवश्य होती है। आज भी पूर्णिमा को होली जलाते , और अगले दिन सब लोग एक दूसरे पर गुलालअबीर और तरह-तरह के रंग डालते हैं। यह त्योहार रंगों का त्योहार है।

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इस दिन लोग ‘प्रातःकाल उठकर रंगों को लेकर अपने नाते-रिश्तेदारों व मित्रों के घर जाते हैं और उनके साथ जमकर होली खेलते हैं। बच्चों के लिए तो यह त्योहार विशेष महत्व रखता है। वह एक दिन पहले से ही बाजार से अपने लिए तरह-तरह की पिचकारियाँ व गुब्बारे लाते हैं। बच्चे गुब्बारों व पिचकारी से अपने मित्रों के साथ होली का आनंद उठते हैं। सभी लोग बैर-भाव भूलकर एक-दूसरे से परस्पर गले मिलते हैं। घरों में औरतें एक दिन पहले से ही मिठाई, गुजियां आदि बनाती हैं व अपने पास-पड़ोस में आपस में बाँटती हैं। व होली का आनंद उठाती हैं। कई लोग ढोलडफ, मृदग आदि बजा कर नाचतेगाते हैं हुए घर जाकर होली मांगते हैं। गाँवों में तो होली का अपना ही मजा होता है। लोग टोलियाँ बनाकर कर घर-घर जाकर खूब नाचते-गाते हैं। शहरों में कहीं मूर्ख सम्मेलन कहीं कवि सम्मेलन आदि होता हैं। ब्रज की होली तो पूरे भारत में मशहूर है। वहाँ की जैसी होली तो पूरे भारत में देखने को नहीं मिलती है। कृष्ण मंदिर में होली की धूम का अपना ही अलग स्वरूप है। ब्रज के लोग राधा के गाँव जाकर होली खेलते हैं। मंदिर कृष्ण भक्तों से भरा पड़ा रहता है। चारों तरफ गुलाल लहराता रहता है। कृष्ण व राधा की जय-जयकार करते हुए होली का आनंद लेते हैं।

आजकल अच्छे रंगों का प्रयोग न करके रासायनिक लेपों, नशे आदि का प्रयोग करके इसकी गरिमा को समाप्त करक रहे हैं। आज के व्यस्त जीवन के लिए होली चुनौती है। इसे मंगलमय रूप देकर मनाया जाना चाहिए। तभी इसका भरपूर आनंद लिया जा सकेगा।

 

होली पर निबंध 4 – Essay on Holi in Hindi (500 Word)

 

होली भारतीय समाज का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है। होली का शुभारंभ माघ शुक्ल पंचमी को ही हो जाता है जिसे बसंत पंचमी कहते हैं। किन्तु त्यौहार के रूप में यह फाल्गुन महिने के अंतिम दिन अर्थात पूर्णमासी के दिन होलिका दहन के रूप में मनाया जाता है और चैत्र कृष्णपक्ष की प्रतिपदा तिथि तक चलता है। कतिपय स्थानों पर होलिका दहन के दिन ही लोग एक-दूसरे पर रंग उड़ेलकर खुशियां मनाते हैं तो अधिकांश लोग चैत्र महिने के प्रथम दिन रंगों और अबीरों के प्रयोग से आनन्दोत्सव मनाते हैं।

होली हिन्दुस्तान के कणकण में आनन्दोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस पर्व का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व भी है। इस पर्व के साथ भक्त प्रहलाद की कथा जुड़ी हुई है। हिरण्यकश्यप के के अत्याचार से तंग आकर भक्त प्रह्लाद भगवान विष्णु की आराधना में तल्लीन हो गया। उसके पिता ने उसे खत्म करने के अनेक उपाय किये किन्तु वह ईश्वरीय कृपा से बचता गया। अन्त में हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को बुलाया। होलिका को देवताओं से वरदान स्वरूप एक चादर मिला था जिसे ओढ़ लेने से अग्नि का कोई प्रभाव नहीं पड़ता था। वह चादर ओढ़कर प्रह्लाद को गोद में ले अग्निकुंज में प्रविष्ट हो गई। किन्तु ईश्वर की कृपा से वही चादर प्रह्लाद का सुरक्षा कवच बन गया और होलिका उसी अग्नि में जल गई। इसी अलौकिक घटना के आनन्द में होलिका दहन के पश्चात् होली मनाने की प्रक्रिया चल पड़ी।

इस पर्व से जुड़ी एक और कथा है एक “लुढला” नाम की राक्षसी थी। वह बालकों को पकड़ कर खा जाया करती थी। मानव समाज उससे आतंकित रहने लगा। एक ऋषि ने उससे छुटकारा पाने के लिए यह विधान निकाला कि जो बालक अपने चेहरे को विकृत बना लेगा वह ‘लुढलाओं के कोप से बच जायेगा। कदाचित् इसी कारण नाना प्रकार के रंगों से अपने आपको विकृत और भयंकर बना लेने की प्रथा चल पड़ी और होली पर्व का प्रारंम हो गया।

होली मनाने का ढंग विचित्र है। फाग पूर्णिमा की रात्रि में संगीत-नृत्य की उमंगों से भरे हुए लोग होलिका का दहन करते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दाह से उठने वाली लपटें पाप की कालिमा को नष्ट कर देती है।

होलिका दहन के पश्चात् चैत्र प्रतिपदा को प्रत्येक व्यक्ति रंगों से सराबोर रहते हैं। भारत वर्ष में ब्रज की होली’ अपना विशेष आकर्षण रखती हैं। यहाँ देश के कोने-कोने से लोग आते है। बड़ेछोटे, स्त्री-पुरुष आबालवृद्ध सभी इस आनन्दोत्सव के रंग में बहते दिखते है। भारतीय जन-जीवन के लिए यह पर्व उमंग और उल्लास का प्रतीक है। बंसत के मोहक और मादक परिवेश को होली का रंग और भी उत्तेजित कर देता है। अमीर-गरीब बड़े छोटे, ब्राह्मण-सभी साथ-मिलकर इस उत्सव का आनन्द उठाते हैं। यह त्यौहार सभी को अपने रंग में रंगकर पारस्परिक प्रेम के सूत्र में बांध देती है।

 

वर्तमान समय में इस पर्व की पवित्रता और प्रेम के मध्य अश्लीलता और फूहड़ता का भी समावेश हो गया है जो बांछनीय नही है। कभीकभी आपसी रागद्वेष और अनैतिक क्रियाकलाप के चलते प्रेम के इस त्यौहार में संघर्ष और वैमनस्यता की स्थिति भी दिखाई देने लगती है। इस प्रकार के कलंक से होली के पावन त्यौहार को अछूता रखना हमारा धर्म है। होली भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण अंग है। यह हमें आपसी वैमनस्यता और रागद्वेष को छोड़कर परस्पर मेल मिलाप आपसी सौहार्द और प्रेम के साथ रहना सिखाती है। भारत की अनेकता और विषमता की खाईयों को पाटकर यह पर्व एकता और समता की जाज्वल्यमान धारा प्रवाहित करती है। यह पर्व हमारी अखण्डता का भव्य दिग्दर्शन कराती है ।

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होली पर निबंध 5 – Essay on Holi in Hindi (500 Word)

 

होली का त्योहार संपूर्ण भारतवर्ष में बड़े हल्लास से मनाया जाता है। यह रंगों का त्योहार है। इस दिन सभी लोग बच्चे युवा और वृद्ध एक दूसरे के गले मिल कर रंग और गुलाल लगाते हैं तथा मिठाइयाँ बाँटते हैं। इससे आपस में भाई-चारा बढ़ता है। यह त्योहार हमें आपस में मिलजुलकर रहने की प्रेरणा देता है।

यह त्योहार भारत में सदियों से मनाया जा रहा है। ऐसी मान्यता है। कि हिरण्यकश्यप की बहन होलिका ने इस दिन भगवान विष्णु के भक्त प्रह्लाद को जाने से मारने की कोशिश की थी। क्योंकि प्रहलाद के पिता हिरण्यकश्यप अपने पुत्र प्रहलाद की विष्णु भक्ति के अत्यंत विरोधी थे। उन्होंने अपने पुत्र प्रहलाद को जान से मरवाने के अनन्य प्रयास किए परंतु वह सफल नहीं हो सके। तब एक दिन उन्होंने अपनी बहन होलिका को प्रहलाद के प्राण लेने के लिए कहा। होलिका को वरदान था कि वह आग में नहीं जलेगी उसके पास ऐसी वरदानी चुनरी (दुपट्ा) थी जिसे ओढ़कर वह आग में भी सुरक्षित रह सकती थी।

इसलिए वह अपने भाई हिरण्यकश्यप की बात मानकर प्रहलाद को अपनी गोद में लेकर बैठ गई और हिरण्यकश्यप ने उसके चारों तरफ लकड़ियाँ रखकर आग लगा दी। लेकिन भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रहलाद को बचा लिया और वरदानी होलिका उस आग में जलकर भस्म हो गई। तभी से होली का यह त्योहार मनाया जाने लगा। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की विजय के रूप में मनाया जाता है। इस दिन सभी लोगों को चहिए कि वे होलिका दहन के रूप में अपने अन्दर की सभी बुराइयों को जलाकर नष्ट कर दें और अच्छाइयों को ग्रहण कर लें, जैसे भगवान विष्णु ने दुष्ट होलिका को नष्ट करके अपने भक्त प्रहलाद को बचाया था।

होलिका-दहन फाल्गुन (मार्च) माह के अंतिम दिन पूर्णमासी को होता है। उसके अगले दिन हिन्दू नववर्ष के चैत्र माह में होली खेली जाती है। इसी दिन से वसंतोत्सव प्रारंभ होता है। लोग नाचते हैं, गाते हैं और अपने घरों में गुझिया तथा मिठाइयाँ बनाते हैं। सभी लोग मिठाइयाँ एक-दूसरे को बाँटकर खाते हैं। इसी माह में गेहूँ, चना आदि की नई फसल भी तैयार हो जाती है, इसलिए इस त्योहार की खुशी चौगुनी हो जाती हैं

The Author

Romi Sinha

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