डॉक्टर पर निबंध – Essay on Doctor in Hindi @ 2018

हेलो दोस्तों आज फिर मै आपके लिए लाया हु Essay on Doctor in Hindi पर पुरा आर्टिकल। आज हम आपके सामने Doctor के बारे में कुछ जानकारी लाये है जो आपको हिंदी essay के दवारा दी जाएगी। आईये शुरू करते है Essay on Doctor in Hindi

Essay on Doctor in Hindi

Essay on Doctor in Hindi (300 word content)

मेरे जीवन का लक्ष्य : डाक्टर बनना । मेरे जीवन का क्या लक्ष्य है ? दूसरे शब्दों में शिक्षा पूर्ण करने के उपरान्त मैं क्या करना चाहता हूं ? इस प्रश्न का उत्तर तो आपको तब मिलेगा, जब आप थोड़ी देर के लिए मेरे घर पधारें तथा मेरे कमरे में आकर कुछ समय बितायें । मेरे कमरे में एक अलमारी है, जिसमें भौतिकी, रसायन शास्त्र तथा जीव विज्ञान की (अंग्रेजी तथा हिन्दी में) अनेक पुस्तकें भरी पड़ी हैं। मेरी अपनी एक छोटी-सी प्रयोगशाला है, जो एक छोटी-सी मेज तथा एक अलमारी तक ही सीमित है । फिर भी विज्ञान सम्बन्धी जो भी प्रयोग में स्कूल में करता । उन्हें घर आकर अवश्य दोहराता हूं । इस अलमारी को आप खोलें, तो शायद डर जायेंगे इसमें एक पूरा नरककाल है । मनुष्यशरीर और अस्थिरचना का पूरा ज्ञान प्राप्त करने के लिए मैं इसे मोल लाया हूं। दादीजी मेरे कमरे को कबाड़खाना कहती हैं और माताजी मेरी हरकतों को अजीब करतूतें कहती हैं । परन्तु पिताजी मेरी चेष्टाओं की सदा सराहना करते हैं और कभीकभी प्यार से कहा करते हैं मेरा बेटा डाक्टर बनेगा और गरीब जनता की सेवा करेगा।’

मेरे पिताजी सचमुच मेरे हृदय की बात कहते हैं। मेरे जीवन का लक्ष्य है डाक्टर बनकर गरीबों की सेवा करना। मेरे लिए यह दुनिया की दौलत है । यही सबसे पवित्र साधना है । में सारी दुनिया के सुख तथा धन को त्याग सकता हैं परन्तु अपने उद्देश्य को नहीं छोड़ सकता अपने उद्देश्य को नहीं भूल सकता। मैंने सब प्रकार की फिजूलखर्ची छोड़ दी है। तथा विज्ञान एवं चिकित्सा की पत्रिकाओं के वार्षिक चन्दे भेज दिये हैं । ये पत्रिकाएँ समय पर मेरे घर आती हैं और मैं उन्हें मनोयोग से पढ़ता भी हूं। मेरा जीवनलक्ष्य है डाक्टर बनना।

Essay on Doctor in Hindi (500 word content)

 

स्वास्थ्य मनुष्य का अमूल्य धन होता है। इसकी रक्षा की जिम्मेदारी व्यक्ति की होती है। परंतु स्वास्थ्य बिगड़ जाने पर उसे डॉक्टर की मदद लेनी पड़ती है। डॉक्टर उसे उचित दवा और सलाह देता है। डॉक्टर के निर्देशों के पालन से व्यक्ति धीरे-धीरे स्वस्थ होने लगता है। समाज में चिकित्सक का बहत सम्मान होता है। उसका स्थान बड़ा होता है क्योंकि वह व्यक्ति को नया जीवन देता है। वह व्यक्ति और समाज को रोगमुक्त रखने में बहुत सहायता करता है।

डॉक्टर चिकित्सा पद्धति का ज्ञाता होता है अत: वह रोगी को उचित सलाह देने में सक्षम होता है। वह बीमार व्यक्ति को न केवल दवा देता है अपितु उसे स्वस्थ दिनचर्या भी बताता है। वह स्वस्थ व्यक्ति को बताता है कि उसे किस प्रकार का आहार-विहार करना चाहिए जिससे कि वह बीमारियों से दूर रह सके। आधुनिक युग में शहरीकरण और प्रदूषण के कारण नएनए रोगों का प्रकोप हुआ है।

संक्रामक बीमारियों पर तो काबू पाया जा सका है लेकिन एड्स, कैंसर, मधुमेह, हृदय संबंधी बीमारियों और मानसिक तनाव से संबंधित बीमारियों का प्रकोप बढ़ गया है। तरह-तरह की बीमारियों के फैलने से चिकित्सकों की माँग भी बढ़ गई है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में निष्णात चिकित्सक पहले बीमारी का पता लगाते हैं, फिर इलाज करते हैं। वे रोगी के मल-मूत्ररक्त, धड़कन आदि की जाँच करते हैं ताकि बीमारी का उचित निदान किया जा सके। आजकल बीमारी की जाँच के लिए माइक्रोस्कोप, स्टेथेस्कोप, एक्स-रे, .सी.जी, अल्ट्रासाउंड जैसे तकनीकी उपकरणों का बड़े पैमाने पर उपयोग हो रहा है। चिकित्सकों की माँग पूरी दुनिया में है।

ये अस्पतालों एवं डिस्पेंसरियों में नियुक्त होते हैं। बहुत से चिकित्सक अपना निजी अस्पताल संचालित करते हैं। अस्पतालों में चिकित्सा की आधुनिक सुविधाएँ होती हैं जिनके उपयोग से डॉक्टरों को इलाज करने में बहुत मदद मिलती है। डॉक्टरों की सहायता के लिए अस्पताल में नर्स होती हैं। नर्स रोगी को दवा खिलाती हैं तथा उसकी देखभाल करती हैं।

चिकित्सक गर्भवती महिला को उचित सलाह देते हैं। वे जच्चे और बच्चे की सुरक्षा का उपाय करते हैं। वे नवजात बच्चे का टीकाकरण आरंभ करते हैं। वे दुर्घटना में घायल व्यक्ति का बचाव करते हैं। वे संक्रामक रोगों के फैलाव को रोकने के लिए टीकाकरण अभियान चलाते हैं। वे गंभीर रोगियों को आपातकालीन कक्ष में भर्ती करते हैं तथा उनका गहन उपचार करते हैं। रोगी को अस्पताल में तब तक रखा जाता है जब तक कि उसकी तबियत ठीक न हो जाए।

चिकित्सक के व्यवसाय में मानवीय संवेदना का बहुत महत्व है। रोगी को दवा के साथ-साथ दुलार और हमदर्दी की भी आवश्यकता होती है। हमदर्दी का संबंध मन से है, जब मन को उचित खुराक मिलती है तो शरीर जल्दी स्वस्थ होता है। अत: चिकित्सक का यह दायित्व है कि वह रोगी का इलाज मानवीय संवेदना और हमदर्दी से युक्त होकर करेवह मानसिक रोगियों के साथ सहानुभूति से पेश आएवह केवल धन को ही नहीं, धर्म को भी देखे। धर्म व्यक्ति को पीड़ित व्यक्ति की पीड़ा का अनुभव करने की सलाह देता है। चिकित्सा दिनों-दिन महँगी होती जा रही है। ऐसे में गरीब व्यक्ति अपनी उचित चिकित्सा करा पाने में असमर्थ होते हैं।

चिकित्सकों को गरीबों की चिकित्सा के लिए तत्पर रहना । चाहिए। उसका ध्यान रोगियों को जल्दी-जल्दी निबटाने क बजाय सही चिकित्सा की तरफ़ होना चाहिए। इन गुणों से युक्त चिकित्सक समाज में उचित सम्मान पाते हैं। बीमार व्यक्तियों का भी यह दायित्व है कि वे चिकित्सक की सलाह पर ध्यान दें और उनकी मेहनत को विफल न जाने दें।

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