दिवाली पर निबंध Essay on Diwali in Hindi 2018 के सभी नए

हेलो दोस्तों आज फिर में आपके लिए लाया हु एक और essay का article इसमें हम आपको बातयेंगे essay on diwali in hindi में जिससे आप पूरी तरह से उसको समझ सके और अपने बच्चो को पढ़ा सके। आजकल हिंदी परियोग सिर्फ स्कूल तक ही सीमित हो गया है क्योकि इंग्लिश ने हर जगह अपना स्थान ले लिया है लेकिन हिंदी भाषा का स्कूलों में जरुरी होना इससे अभी तक बचया हुवा है। तो निचे दिए गए है essay on diwali in hindi के कई प्रकार जैसे की 100 ,200 ,300 ,400 ,500 ,600 शब्दो के निबंध जो आप अपनी जरूरत के अनुशार यूज़ कर सकते है। 

 

दिवाली पर निबंध essay on Diwali in Hindi

 

दीवावली दिवाली शब्द से बनकर बना है । इसका अर्थ है दीपकों की माला । यह बड़ा सुनहरा पर्व है । यह कार्तिक महीने की अमावस्या को मनाया जाता है । दिवाली से एक दो दिन पहले लोग घरों की सफाई करते हैं । कूड़ाकरकट बाहर फेंकते हैं । सफेदी करवाते हैं । घरों को खूब सजाते हैं । यह सफाई का भी पर्व है । बाजारों में भांति-भांति की मिठाइयां सजी हुई होती हैं । बच्चे सुन्दर सुन्दर कपड़े पहनकर अपने माता, पिता, भाई बहिन, आदि के साथ बाजार जाकर मिठाइयां, खिलौने चित्र कंडील, गुब्बारे, मोमबत्तियां आदि खरीदकर लाते हैं । सब के मन बड़े प्रसन्न होते हैं । सायंकल होते ही हम घरों के ऊपर तेल के दिये या मोमबत्तियां जलाते हैं । कुछ लोग बिजली की लड़ियों का प्रकाश करते हैं । उस समय चारों ओर बड़ी सुन्दर दीपमाला होती है । फिर सब मिलकर मिठाइयां खाते हैं । पटाखे चलाये जाते हैं । लंका के राजा रावण को मारने के बाद श्रीराम | चन्द्र जी सीता आदि के साथ इस दिन अयोध्या में आये थे । तब अयोध्या में बड़े उत्साह से दीपमाला हुई थी। हम भी उसी दिन की याद मनाते हैं । दिवाली को कुछ लोग जुआ खेलते हैं । यह प्रथा बुरी है । दिवाली मनाने से देश में नया जीवन पैदा होता है ।

 

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दिवाली पर निबंध essay on Diwali in Hindi

 

दीपावली हिन्दुओं का महत्वपूर्ण त्यौहार है। सम्पूर्ण भारत में यह अति उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस त्यौहार के साथ बहुत सी जनश्रुतियाँ एवं दंत कथायें जुड़ी हैं। यह भगवान राम की रावण पर विजय की प्रतीक है। वस्तुतयह त्योहार बुराई पर अच्छाई की विजय को प्रमाणित करता है।

दीपावली के दिन पूरे देश में उत्तेजना का वातावरण होता है। लोग अपने सगे सम्बन्धियों को आंमत्रित करते हैं। इस त्यौहार पर मिठाइयाँ बनाई जाती हैं एवं मित्रों व रिश्तेदारों में उनका आदान-प्रदान किया जाता है। लोग दीपावली के दिन आमोद-प्रमोद में व्यस्त रहते हैं। अमीर-गरीब, बालवृद्ध सभी नये कपड़े पहनते हैं। बच्चे और वृद्ध अपनी सबसे अच्छी चमकीली पोशाक धारण करते हैं। इसी तरह रात को पटाखे और आतिशबाजी की जाती है। अन्धेरी रात में आतिशबाजी एक मनोहर दृश्य बनाती है।

चारों ओर बहुत खूबसूरत नज़ारा होता है। सभी अच्छे कपड़ों में, उल्लास में व्यस्त रहते हैं। कुछ लोग त्यौहार को बहुत उमंग और उत्साह से मनाते हैं तो कुछ लोग जुआ खेलते हैं। जुआरियों के लिये जुआ दीपावली का एक हिस्सा है और उनके अनुसार जो भी इस दिन जुआ नहीं खेलता अगले जन्म में गधा बनता है। रात्रि में लोग अपने घरों को सजाते हैं। तरह-तरह से रोशनी करते हैं, मोमबत्तियाँ जलाते हैं, दिये जलाते हैं एवं लड़ियाँ लगाते हैं। वह खातेपीतेमौज मनाते हैं व पटाखे जलाते हैं। सारा शहर रोशनी और पटाखों की आवाज में डूब जाता है। घरों के अतिरिक्त सार्वजनिक इमारतें एवं सरकारी कार्यालयों पर भी रोशनी की जाती है। उस सायं का दृश्य बहुत मनोहर होता है। बहुत से हिन्दु दीपावली मनाने से पूर्व गणपति, सरस्वती व लक्ष्मी की पूजा करते हैं। हिन्दु इस दिन धन की देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं। वह धन की देवी से प्रार्थना करते हैं वह उनके घर पर कृपा करे।

दीपावली सम्पूर्ण देश का त्यौहार है। यह देश के प्रत्येक हिस्से में मनाया जाता है। इस तरह यह लोगों में एकता की भावना को बलवती करता है। भारत में यह त्यौहार हजारों वर्षों से मनाया जा रहा है एवं आज भी उतने धूमधाम से मनाया जाता है। सभी भारतीयों का यह प्रिय त्यौहार है।

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दिवाली पर निबंध essay on Diwali in Hindi

 

भारत के त्योहारों में दीपावली भी एक अत्यन्त महत्वपूर्ण योहार है। कहते हैं कि जब श्री रामचन्द्रजी लंकाविजय कर अयोध्या आये तो उसी खुशी में लोगों ने अपने घरों में घी के दोपक जलाये और खुशियाँ मनायीं। कोई कहते हैं कि दुर्गा ने जब शुम्भनिशुम्भ राक्षसों का वध कर दिया तो लोगों ने खुशियाँ मनायीं । वे दोनों राक्षस अत्यन्त अत्याचारी थे । परन्तु आजकल लोग यह मानते हैं कि यह त्योहार लक्ष्मीजी का है। लक्ष्मीजी विष्णु भगवान की भाय व धन की देवी मानी जाती हैं। अस्तु, व्यापारी वर्ग या वैश्य लोग इसे बड़े उत्साह से मनाते हैं । दीपावली का त्योहार कार्तिक की अमावस्या को मनाया जाता है । यह त्योहार लगभग पाँच दिन चलता है धनतेरस छोटी दीपावलीबड़ी दीपावलीगोवर्धन और भ्रातृद्वितीया या भैया-दूज। कातिकी अमावस्या को दीपावली का त्योहार होता है । इस दिन लोग नवीननवीन वस्त्र धारण करते हैं तथा खील, खिलौनेसुन्दरसुन्दर मूतियाँचित्रमिठाइयाँ आदि खरीदकर लाते हैं। कोईकोई धनी पुरुष चाँदी की लक्ष्मीजी की प्रतिमा रखते हैं । कण्डील, मोमबत्तीफुलझड़ी सर्वत्र बिकती हुई दिखाई देती हैं।

सन्ध्या से ही द्वार, बाजार, गली आदि अभी जगमगा उठते हैं । रात्रि में दिन हो जाता है । कहीं लड़के मोमबत्ती जलाते हैं, कहीं फुलझड़ी छोड़ते हैं, कहीं पटाखे चलाते हैं । घरों में रंग विरंगे कण्डीलों का प्रकाश सुन्दर देता है बहुत ही दिखाई । रात्रि को लक्ष्मीपूजन होता है और लोग खी, खिलौने और मिठाइयाँ बाँटते हैं । व्यापारियों के यहाँ विशेषकर आज के ही दिन बहियाँ बदली जाती हैं । वे लोग इनका पूजन भी करते हैं। परन्तु सबसे अधिक दर्शनीय वस्तु तो रोशनी होती है । दीपों की जगमगाती पंक्ति मन को मोह लेती है । शहरों में बिजली के हरे, पीले, लाल, नीले लट्टुओं से दुकानें तथा घर सजाये जाते हैं। अस्तुवे पुतेलिपे मकान चमक उठते हैं। प्रत्येक घर में लक्ष्मीपूजन करने के उपरान्त लोग रोशनी देखने जाते हैं और बाजारों में मनुष्यों की भीड़ लग जाती है । सभी मनुष्य अपने सुन्दर से सुन्दर कपड़े पहनकर निकलते हैं । इसी को हम दीपावली का त्योहार कहते हैं ।

 

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दिवाली पर निबंध essay on Diwali in Hindi

 

हिन्दू धर्म में यों तो रोजाना कोई न कोई पर्व होता है लेकिन इन पर्वो में मुख्य त्यौहार होली, दशहरा और दीपावली ही हैं। हमारे जीवन में प्रकाश फैलाने वाला दीपावली का त्यौहार कार्तिक मास की अमावस्या के दिन मनाया जाता है। इसे ज्योतिपर्व या प्रकाश उत्सव भी कहा जाता है। इस दिन अमावस्या की अंधेरी रात दीपकों व मोमबत्तियों के प्रकाश से जगमगा उठती है। वर्षा ऋतु की समाप्ति के साथ-साथ खेतों में खड़ी धान की फसल भी तैयार हो जाती है। दीपावली का त्यौहार कार्तिक मास की अमावस्या को आता है। इस पर्व की विशेषता यह है कि जिस सप्ताह में यह त्यौहार आता है उसमें पांच त्यौहार होते हैं। इसी वजह से सप्ताह भर लोगों में उल्लास व उत्साह बना रहता है। दीपावली से पहले धन तेरस पर्व आता है। मान्यता है कि इस दिन कोई-न-कोई नया बर्तन अवश्य खरीदना चाहिए। इस दिन नया बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। इसके बाद आती है छोटी दीपावलीफिर आती है दीपावली।

इसके अगले दिन गोवर्द्धन पूजा तथा अन्त में आता है भैयादूज का त्यौहार। अन्य त्यौहारों की तरह दीपावली के साथ भी कई धार्मिक तथा ऐतिहासिक घटनाएं जुड़ी हुई हैं। समुद्रमंथन करने से प्राप्त चौदह रत्नों में से एक लक्ष्मी भी इसी दिन प्रकट हुई थी। इसके अलावा जैन मत के अनुसार तीर्थकर महावीर का महानिर्वाण भी इसी दिन हुआ था। भारतीय संस्कृति के आदर्श पुरुष श्री राम लका नरेश रावण पर विजय प्राप्त कर सीता लक्ष्मण सहित अयोध्या लौटे थे उनके अयोध्या आगमन पर अयोध्यावासियों ने भगवान श्रीराम के स्वागत के लिए घरों को सजाया व रात्रि में दीपमालिका की। ऐतिहासिक दृष्टि से इस दिन से जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाओं में सिक्खों के छठे गुरु हरगोविन्दसिंह मुगल शासक औरंगजेब को कारागार से मुक्त हुए थे। राजा विक्रमादित्य इसी दिन सिंहासन पर बैठे थे। सर्वोदयी नेता आचार्य विनोबा भावे दीपावली के दिन ही स्वर्ग सिधारे थे। आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानन्द तथा प्रसिद्ध वेदान्ती स्वामी रामतीर्थ जैसे महापुरुषों ने इसी दिन मोक्ष प्राप्त किया था।

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यह त्यौहार बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन लोगों द्वारा दीपों व मोमबत्तियाँ जलाने से हुए प्रकाश से कार्तिक मास की अमावस्या की रात पूर्णिमा की रात में बदल जाती है। इस त्यौहार के आगमन की प्रतीक्षा हर किसी को होती है। सामान्यजन जहां इस पर्व के आने से माह भर पहले ही घरों की साफ-सफाई, रंग-पुताई में जुट जाते हैं। वहीं व्यापारी तथा दुकानदार भी अपनी-अपनी दुकानें सजाने लगते हैं। इसी त्यौहार से व्यापारी लोग अपने बही-खाते शुरू किया करते हैं। इस दिन बाजार में मेले जैसा माहौल होता है। बाजार तोरणद्वारों तथा रंग-बिरंगी पताकाओं से सजाये जाते हैं। मिठाई तथा पटाखों की दुकानें खूब सजी होती हैं। इस दिन खीलबताशों तथा मिठाइयों की खूब बिक्री होती है। बच्चे अपनी इच्छानुसार बमफुलझड़ियां तथा अन्य आतिशबाजी खरीदते हैं।

इस दिन रात्रि के समय लक्ष्मी पूजन होता है! माना जाता है कि इस दिन रात को लक्ष्मी का आगमन होता है। लोग अपने इष्ट-मित्रों के यहां मिठाई का आदान-प्रदान करके दीपावली की शुभकानाएं लेते-देते हैं। वैज्ञानिक दृष्टि से भी इस त्यौहार का अपना एक अलग महत्व है। इस दिन छोड़ी जाने वाली आतिशबाजी व घरों में की जाने वाली सफाई से वातावरण में व्याप्त कीटाणु समाप्त हो जाते हैं। मकान और दुकानों की सफाई करने से जहां वातावरण शुद्ध हो जाता है वहीं वह स्वास्थ्यवर्द्धक भी हो जाता है। कुछ लोग इस दिन जुआ खेलते हैं व शराब पीते हैं, जोकि मंगलकामना के इस पर्व पर एक तरह का कलंक है। इसके अलावा आतिशबाजी छोड़ने के दौरान हुए हादसों के कारण दुर्घटनाएं हो जाती हैं जिससे धनजन की हानि होती है। इन बुराइयों पर अंकुश लगाने की आवश्यकता है।

 

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दिवाली पर निबंध essay on Diwali in Hindi

 

दीपावली हिंदुओं का प्रमुख पर्व है। यह पर्व समूचे भारत में उत्साह के साथ मनाया जाता है। वर्षा और शरद् ऋतु के संधिकाल का यह मंगलमय पर्व है। यह कृषि से भी संबंधित है। ज्वार, बाजरामक्का, धान, कपास आदि इसी ऋतु की देन हैं। इन फसलों को खरीफ की फसल कहते हैं।

इस त्योहार के पीछे भी अनेक कथाएँ हैं। कहा जाता है कि जब श्रीरामचंद्र रावण का वध करके अयोध्या लौटे, तब उस खुशी में उस दिन घर-घर एवं नगर-नगर में दीप जलाकर यह उत्सव मनाया गया। उसी समय से दीपावली की शुरुआत हुई।यह भी कहा जाता है कि श्रीकृष्ण ने नरकासुर का इसी दिन संहार किया था। यह भी कहा जाता है कि वामन का रूप धारण कर भगवान् विष्णु ने दैत्यराज बलि की दानशीलता की परीक्षा लेकर उसके अहंकार को मिटाया था। तभी तो विष्णु भगवान् की स्मृति में यह पर्व मनाया जाता है । जैन धर्म के अनुसारचौबीसवें तीर्थकर भगवान् महावीर ने इसी दिन पृथ्वी पर अपनी अंतिम ज्योति फैलाई थी और वे मृत्यु को प्राप्त हो गए थे। आर्यसमाज के प्रवर्तक स्वामी दयानंद सरस्वती की मृत्यु भी इसी अवसर पर हुई थी। इस प्रकार इन महापुरुषों की स्मृतियों को अमर बनाने के लिए भी यह त्योहार बहुत उल्लास के साथ मनाया जाता है।

यह त्योहार पाँच दिनों तक चलता रहता है। त्रयोदशी के दिन ‘धनतेरस’ मनाया। जाता है। उस दिन नएनए बरतन खरीदना बहुत शुभ माना जाता है। एक कथा प्रचलित है कि समुद्र-मंथन से इसी दिन देवताओं के वैद्य ‘धन्वंतरि’ निकले थे। इस कारण इस दिन ‘धन्वंतरि जयंती भी मनाई जाती है। दूसरे दिन कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को ‘नरक चतुर्दशी’ अथवा ‘छोटी दीपावली का उत्सव मनाया जाता है। श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर के वध के कारण यह दिवस ‘नरक चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है। अपने-अपने घरों से गंदगी दूर कर देना ही एक प्रकार से नरकासुर के वध को प्रतीक रूप में मान लिया जाता है।

तीसरे दिन अमावस्या होती है। दीपावली उत्सव का यह प्रधान दिन है। रात्रि के समय लक्ष्मी-पूजन होता है। उसके बाद लोग अपने घरों को दीप-मालाओं से सजाते हैं। बच्चे-बूढ़े फुलझड़ी और पटाखे छोड़ते हैं । सारा वातावरण धूमधड़ाके से गुंजायमान हो जाता है। इस प्रकार अमावस्या की रात रोशनी की रात में बदल जाती है। चौथे दिन ‘गोवर्द्धनपूजा होती है। यह पूजा श्रीकृष्ण के गोवर्द्धन धारण करने की स्मृति में की जाती है। स्त्रियाँ गोबर से गोवर्द्धन की प्रतिमा बनाती हैं। रात्रि को उनकी पूजा होती है। किसान अपने-अपने बैलों को नहलाते हैं और उनके शरीर पर मेहंदी एवं रंग लगाते हैं।

इस दिन ‘अन्नकूटभी मनाया जाता है। पाँचवें दिन ‘भैयादूज का त्योहार होता है। इस दिन बहनें अपने-अपने भाइयों को तिलक लगाकर उनके लिए मंगलकामना करती हैं। कहा जाता है कि इसी दिन यमुना ने अपने भाई यमराज के लिए कामना की थी। तभी से यह पूजा चली आ रही है। इसीलिए इस पर्व को ‘यम द्वितीया’ भी कहते हैं। दरअसल दीपावली का पर्व कई रूपों में उपयोगी है। इसी बहाने टूटेफूटे घरों दूकानफैक्टरी आदि की सफाई-पुताई हो जाती है। वर्षा ऋतु में जितने कीट-पतंगे उत्पन्न हो जाते हैं, सबके सब मिट्टी के दीये पर मंडराकर नष्ट हो जाते हैं । जहाँ दीपावली का त्योहार हमारे लिए इतना लाभप्रद है, वहीं इस त्योहार के कुछ दोष भी हैं। कुछ लोग आज के दिन जुआ आदि खेलकर अपना धन बरबाद करते हैं।

उनका विश्वास है कि यदि जुए में जीत गए तो लक्ष्मी वर्ष भर प्रसन्न रहेंगी। इस प्रकार से भाग्य आजमाना कई बुराइयों को जन्म देता है, एक बात औरदीपावली पर अधिक आतिशबाजी से बचना चाहिएक्योंकि इसका धु हमारे पर्यावरण के लिए हानिकारक है।

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