कंप्यूटर पर निबंध Essay on Computer in Hindi 2018 Updates Essay

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कंप्यूटर पर निबंध Essay on Computer in Hindi 2018 Updates Essay
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हेलो दोस्तों आज फिर में आपके लिए लाया हु Essay on Computer in Hindi पर पुरा आर्टिकल लेकर आया हु। कंप्यूटर का उपयोग बहुत ज्यादा होने लग गया है बच्चो से लेकर बड़े सभी इसका यूज़ करते है। अगर आप सबको कंप्यूटर के बारे ज्यादा नहीं पता तो आप हमारे दिए हुवे essay को पढ़े। इस आर्टिकल में हम आपके लिए लाये है essay on Computer in Hindi स्कूलों में दिया जाने वाला Essay है जो बच्चो स्कूलो में दिया जाता है इसलिए अगर आपके बच्चो को भी Essay on Computer दिया है तो हमारे निचे दिए आर्टिकल को पढ़े।

 

कंप्यूटर पर निबंध Essay on Computer in Hindi

 

Essay on Computer in Hindi

आधुनिक युग में विज्ञान की मदद से मनुष्य ने कई महत्त्वपूर्ण आविष्कार किए हैं। कंप्यूटर इनमें से एक प्रमुख आविष्कार है। यह आदमी के दिमाग की तरह कार्य करता है। इसमें देश-दुनिया की सभी आवश्यक जानकारियाँ भरी होती हैं। इन जानकारियों को कंप्यूटर याद रखता है तथा माँगे जाने पर तुरंत प्रदर्शित भी कर देता है। बड़ी से बड़ी गणनाएँ यह पलक झपकते कर सकता है जिसे करने में आदमी को घंटों लग जाएँ। कंप्यूटर के आविष्कार के परिणामस्वरूप दुनिया में क्रांति आ गई है। सभी कार्यालयों बैंकों, सार्वजनिक संस्थानों आदि में इसका उपयोग किया जा रहा है। रेल और हवाई यात्रा के लिए टिकटों की बुकिंग में यह प्रमुख भूमिका निभाता है।

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कंप्यूटर सूचना क्रांति का अग्रदूत बन गया है। विद्यालयों में कंप्यूटर शिक्षा अनिवार्य-सी होती जा रही है। व्यापार और उद्योग में इसके उपयोग के बिना अब काम नहीं चल सकता कंप्यूटर आज की एक आवश्यक वस्तु बन गई है।

कंप्यूटर पर निबंध Essay on Computer in Hindi

 

जीवन का आधार कम्प्यूटर एक इलेक्ट्रानिक साधन है जो आवृतिमूलक गणना को अत्यधिक तीव्रता से करने में समर्थ है। कम्प्यूटर आँकड़ों (सामग्री) को संसाधित करने का साधन है जिसमें बहुत अधिक मात्रा में आँकड़े संचित कर सकते हैं। यह सामग्री गद्य, तस्वीरें, आवाज़ संख्यायेंछायाचित्र हो सकती है अथवा अन्य किसी भी प्रकार की सूचना जो लोगों द्वारा सामान्यता: प्रयोग की जाती है। आज कम्प्यूटर के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती।

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वास्तव में प्रस्तुत सहस्त्राब्दि कम्प्यूटर एवं इससे सम्बन्धित तकनीकों जिसे साधारणतय: सूचना तकनीक कहते हैं की महाकल्प है। कम्प्यूटर विद्यार्थियों को शिक्षा ग्राफिक, डिजाईनिंग खेल एवं अन्य शैक्षिक विनियोगों को नवीन तकनीकें सीखने में मदद करता है। इससे विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को रिपोर्ट बनाने में भी सहायता मिलती है। कार्यालय कर्मचारियों को कम्प्यूटर हिसाब करने, साफ्टवेयर को विकास करने, बिक्री बीजक बनाने एवं निर्माण में सहायता करता है। इससे पुस्तकालयों में काम सुचारू रूप से करने में सहायता मिलती है।

कम्प्यूटर उपग्रह एवं परमाणु अस्त्रों को नियंत्रित करते हैं। यह इन्टरनेट की विभिन्न साइटस पर सर्व करने (जाने) में हर उम्र के लोगों की विभिन्न रुचियों में सहायक बनता है। वास्तव में यह अपरिहार्य हैं क्योंकि मानव जीवन का कोई भी कार्य इसके बिना अधूरा एवं अकुंशल है।

विद्यालय जाने वाले विद्यार्थियों को कम्प्यूटर अवश्य सीखना चाहिये। आज कम्प्यूटर विभिन्न स्वरूपों में उपलब्ध हैं। कम्प्यूटर संचालन सीखने के लिये 166 एम एच जेड स्पीड जिसे सी पी यू स्पीड के रूप में जानते हैं), 1.2 एम बी को भंडारण क्षमता का एच डी डी एवं 32 एम बी के आर ए एम की आवश्यकता होती है। इन प्रारम्भिक कम्प्यूटरों से विद्यार्थी को लोगो, बेसिक, विंडो गेमस एवं सिलेबि से सम्बन्धित विभिन्न लेक्चर एवं इन्टरनेट संचालन में सहायता मिलती है। हालांकि भारतीय समाज, उद्योग एवं राज्यतंत्र कम्प्यूटर के अभिग्रहण की ओर अग्रसर है किन्त हम पश्चिमी देशों की अपेT T साक्षरता में अभी बहुत पीछे हैं। अमेरीका में प्रत्येक दो विद्यार्थियों में से एक के पास कम्प्यूटर है। भारत में दो सौ विद्यार्थियों में से केवल एक के पास ही कम्प्यूटर है। इसके अतिरिक्त अमेरीका में प्रत्येक चार विद्यार्थियों में से दो को इन्टरनेट की सुविधा उपलब्ध है जबकि भारत में पचास में केवल एक विद्या’ की पहुँच इन्टरनेट तक है।

एक विद्यार्थी कम्प्यूटर के मूल सिद्धान्त बहुत शीघ्र सीख सकता है। वह अपने विद्यालय में साध्य कक्षाओं में प्रवेश लेकर अग्रवर्ती स्तर का कम्प्यूटर प्रशिक्षण प्राप्त कर सकता है। कम्प्यूटर सीखना आसान है एवं यह विद्यार्थियों के अनुकूल यंत्र है। इससे विद्यार्थियों की कार्यकुशलता में वृद्धि होती है एवं अधिक ज्ञान प्राप्त होता है। कम्प्यूटर विद्यार्थियों के ज्ञान में वृद्धि करते है।

उनकी शिक्षा में, मानसिक विकास में एवं मनोरंजन में उसके सहायक होते है। आने वाले समय में प्रत्येक विद्यार्थी के पास या तो अपना एक कम्प्यूटर होगा अन्यथा उसकी उस तक स्वतन्त्र पहुँच होगी। बैंक पूरी तरह कम्प्यूटरीकृत हो गये हैं एवं अधिकतर फैक्ट्रियाँ कार्यालयविश्वविद्यालय एवं विद्यालयों में अग्रवर्ती कम्प्यूटर व्यवस्था है। कम्प्यूटर की नवीनतम संसाधन स्पीड एम एच जेड 533 है। किन्तु यह कम्प्यूटर अत्यन्त मंहगा है। एक कम्प्यूटर जो विद्यार्थियों की आवश्यक्ताओं को पूर्ण कर सकता है वह लगभग तीस हजार रुपये कीमत का है। आने वाले एक वर्ष में कीमतें और कम हो जायेंगी। विद्यार्थियों को सामूहिक शिक्षा एवं बौद्धिक विकास के लिये कम्प्यूटरों को अपनाना चाहिये। कम्प्यटर सॉफ्टवेयर T उदीयमान क्षेत्र हैं एवं विद्यार्थी इसमें प्रगति कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त प्रतिभाशाली प्रोग्रामरस की अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा,

आस्ट्रेलिया एवं म्यूज़ीलैंड इत्यादि देशों में भी बहुत माँग है। कम्प्यूटर के क्षेत्र में अगर विद्यार्थी कठिन मेहनत करते हैं तो उनके आने वाले जीवन में वह अच्छी जीविका कमा सकते हैं। )

 

 

कंप्यूटर पर निबंध Essay on Computer in Hindi

 

20वीं सदी में कम्प्यूटर क्षेत्र में आयी क्रान्ति के कारण सूचनाओं की प्राप्ति और इनके संसाधन में काफी तेजी आयी है। इस क्रांति के कारण ही हर किसी क्षेत्र का कम्प्यूटरीकरण संभव हो पाया है। स्थिति यह है कि माइक्रो प्रोसेसर के बिना अब किसी मशीन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। पिछले चार दशकों में कम्प्यूटर की पहली चार पीढ़ियां क्रमश: वैक्यूम ट्यूब तकनीकी, ट्रांजिस्टर और प्रिंटेड सर्किट तकनीकी, इंटिग्रेटेड सर्किट तकनीकी और वैरी लार्ज स्केल इंटिग्रेटेड तकनीकी पर आधारित थी। चौथी पीढ़ी की तकनीकी में माइक्रो प्रोसेसरों का वजन केवल कुछ ग्राम तक ही रह गया। आज पांचवीं पीढ़ी के कम्प्यूटर तो कृत्रिम बुद्धि वाले बन गये हैं । वास्तव में कम्प्यूटर एनालॉग या डिजिटल मशीनें ही हैं। अंकों को एक सीमा में परस्पर भिन्न भौतिक मात्राओं में परिवर्तित करने वाले कम्प्यूटर एनालॉग कहलाते हैं। जबकि अंकों का इस्तेमाल करने वाले कम्प्यूटर डिजिटल कहलाते हैं। एक तीसरी तरह के कम्प्यूटर भी हैं जो हाइब्रिड कहलाते हैं।

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इनमें अंकों का संचय और परिवर्तन डिजिटल रूप में होता है लेकिन गणना एनालॉग रूप में होती है। विज्ञान क्षेत्र में सूचना प्रौद्योगिकी का आयाम जुड़ने से हुई प्रगति ने हमें अनेक प्रकार की सुविधाएं प्रदान की हैं। इनमें मोबाइल फोन, कम्प्यूटर तथा इंटरनेट का विशिष्ट स्थान है। कम्प्यूटर का विकास गणना करने के लिए विकसित किये यंत्र केलकुलेटर से जुड़ा है। इससे जहां कार्य करने में समय कम लगता है वहीं मानव श्रम में भी कमी आई है। यही कारण है कि दिन-प्रतिदिन इसकी लोकप्रियता बढ़ती जा रही है। पहले ये कुछ सरकारी संस्थानों तक ही सीमित थे लेकिन आज इनका प्रसार घर-घर में होने लगा है।

जनसंख्या बढ़ने के साथ-साथ समस्यायें भी तीव्र गति से बढ़ती जा रही हैं। इन समस्याओं से जूझना व उनका समुचित हल निकालना मानव के लिए चुनौती रहा है। इन समस्याओं में एक समस्या थी गणित कीइस विषय की जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आवश्यकता पड़ती है। प्रारंभ में आदि मानव उंगलियों की सहायता से गणना करता था। विकास के अनुक्रम फिर उसने कंकड़ रस्सी में गांठ बांधकर तथा छड़ी पर निशान लगाकर गणना करना आरम्भ किया। करीब दस हजार वर्ष पहले अबेकस नामक मशीन का आविष्कार हुआ। इसका प्रयोग गिनती करने तथा संक्रियायें हल करने के लिए किया जाता था।

 

यांत्रिक केल्कुलेटर का उद्गम दो गणितज्ञों ब्लेज पास्कल और गॉट फ्राइड विलहेम के कार्यों में खोजा जा सकता है। चार्ल्स बेवेज ने जोन नेपियर द्वारा खोजे गये लघु गुणक अंकणों को समाहित कर सकने वाली ऑल परपज केल्कुलेटिंग मशीन बनाने का विचार किया था। आधुनिक कम्प्यूटर क्रांति बीसवीं सदी के चौथे दशक में आरम्भ हुयी थी। 1904 में खोजे गये थभ्रयोनिक को वैज्ञानिक विनविलयन्स ने 1931 में गणक यंत्र के रूप में उपयोगी पाया था। हावर्ड एकेन द्वारा निर्मित हावर्ड मार्क एक कम्प्यूटर विश्व का पहला डिजिटल कम्प्यूटर था। जिसमें इलेक्ट्रो मेकेनिकल यंत्रों का प्रयोग किया गया था। इसे 1944 में इंटरनेशनल बिजनेस मशीन (आईबीएम) और हावर्ड विश्वविद्यालय ने मिलकर विकसित किया था। 1946 में विश्व का पहला पूरी तरह से इलेक्ट्रोनिक डिजिटल कम्प्यूटर बना। पहली पीढ़ी का यह कम्प्यूटर वैक्यूम ट्यूब टेक्नालॉजी पर आधारित था। इसमें दस अंकों वाली बीस संख्यओं को संचित किया जा सकता था। इसकी कार्य करने की गति बहुत तेज थी। उदाहरण के लिए यह दस अंकों का दो संख्याओं का गुणनफल तीन मिली सेकेण्ड में निकाल सकता था और प्रति सेकेण्ड पांच हजार योग कर सकता था।

 

कम्प्यूटर चाहे कम समय में मानव से ज्यादा काम कर ले और वह भी बिना किसी त्रुटि के लेकिन मानव मस्तिष्क से तेज नहीं माना जा सकता कम्प्यूटर को। क्योंकि इसका आविष्कार करने वाला मनुष्य ही है। इसलिए कम्प्यूटर से श्रेष्ठ मानव है। कम्प्यूटर उपयोगी होते हुए भी मशीन के समान है। वह मानव के समान संवेदनशील नहीं हो सकता। मनुष्य को कम्प्यूटर को एक सीमा तक ही प्रयोग में लाना चाहिए। मनुष्य स्वयं निष्क्रिय न बनेबल्कि वह स्वयं को सक्रिय बनाये रखे तथा अपनी क्षमता को सुरक्षित रखे।

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कंप्यूटर पर निबंध Essay on Computer in Hindi

 

हमारे जीवज में कंप्यूटर की उपयोगिता एक समय था, जब लोगों के पास गणना करने के लिए कुछ भी नहीं था। वे लकड़ी के छोटे-छोटे टुकड़ों का इस्तेमाल करते थे, दानेदार वस्तुओं का भी उपयोग करते थे। दिन-महीने याद रखने के लिए दीवारों पर चित्र बना लिया करते थे। सन् 1833 में एक और मशीन तैयार की गईजिसे चार्ल्स बैबेज ने तैयार किया था। उसका नाम ‘डिफरेंस मशीन’ (Diference Machine) रखा गया था। उस मशीन में कई पहिए लगे हुए थे। उन पहियों को घुमाने से गणितीय प्रश्नों के हल मिलते थे। उस मशीन में एक बहुत बड़ा दोष था, जिसके चलते वह अधिक सफल नहीं रही। दोष यह था कि उस मशीन से एक ही काम लिया जा सकता था। चार्ल्स बैबेज ने एक नए प्रकार की मशीन तैयार करने का निर्णय लिया।

चार्ल्स बैबेज ने अपने प्रयासों के चलते एक नए प्रकार की मशीन बना ली। उस मशीन में ‘प्रोग्राम’ बनाकर प्रश्नों को हल किया जा सकता था। उस मशीन का नाम ‘एनालिटिकल इंजन’ (Analytical Engine) रखा गया। चार्ल्स ने जो सिद्धांत उस इंजिन को बनाने के लिए अपनाया था, आज कंप्यूटर में भी उसी सिद्धांत का इस्तेमाल किया जाता है। इसीलिए चार्ल्स बैबेज को ‘कंप्यूटर का जनक’ कहा जाता है। हाँ, चार्ल्स बैबेज ने एनालिटिकल इंजन बनाने का जो सिद्धांत दिया था, उसे पूरा करने से पूर्व ही उसकी मृत्यु हो गई थी।

उसके इस अधूरे कार्य को उसकी एक प्रिय मित्र लेडी एडा Lady Ada) ने पूरा किया था। इस तरह दुनिया का सबसे पहला प्रोग्रामर लेडी एडा को माना जाता है। चार्ल्स बैबेज और ब्लेज पास्कल द्वारा बनाई गई मशीनें पूरी तरह से यांत्रिकीय थीं। वहीं ‘हर्मन हॉलरिथ’ Herman Hollerth) ने सबसे पहले विद्युत् शक्ति का प्रयोग करके एक मशीन का आविष्कार किया और उस मशीन का नाम ‘टेबुलेटर’ (Tabulator) रखा।

 

टेबुलेटर के आविष्कार से अंकगणित के प्रश्नों के हल आसान हो गए। हर्मन हॉलरिथ ने अपने आविष्कार को बेचने के लिए एक कंपनी बनाई। उस कंपनी का नाम टेबुलेटिंग कंपनी’ रखा गया था। आगे चलकर ‘टेबुलेटिंग कंपनी में अनेक कंपनियाँ मिल गईं। ऐसे में उसका नाम बदला गया। उसका नाम ‘आईबीएम’ IBM: International Business Machine) रखा गया। आज की दुनिया में सबसे ज्यादा कंप्यूटर बनानेवाली कंपनी आईबीएमही है। सन् 1943 में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के ‘हावार्ड आइकेन’ ने एक अन्य मशीन का आविष्कार किया।

उसका नाम ‘मार्क-१’ (MARK1) रखा गया। दो वर्षों के बाद सन् 1945 में संयुक्त राज्य अमेरिका में एक इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर का आविष्कार किया गया। उसका नाम ‘एनिएक’ (E.NIA.: Electronic Numeric Integrator and cal culator) था। इस तरह आधुनिक कंप्यूटर का आगमन हुआ। कंप्यूटर के प्रयोग से हमें तरह-तरह के लाभ हैं- कंप्यूटर बहुत ही कम समय में कोई भी कार्य पूरा कर देता है। इसकी गति MOPS तक की होती है।

कंप्यूटर द्वारा जो गणना की जाती है, वह बिलकुल सटीक होती है। कंप्यूटर बार-बार किए जानेवाले कार्य को भी बड़ी आसानी से करता है। वह व्यक्ति की तरह न तो थकता है और न ही अपनी जिम्मेदारी को नजरअंदाज करता है। कंप्यूटर अनेक लोगों का कार्य अकेले कर सकता है। इसकी मेमोरी (स्मरण शक्ति) बहुत ज्यादा होती है। आज का युग कंप्यूटर युग है।

जीवन का कोई ऐसा क्षेत्र बचा नहीं है, जिसमें कंप्यूटर का उपयोग न होता हो। शिक्षाचिकित्साविज्ञान, वाणिज्य, बैंकिंग क्षेत्र तो इस पर पूरी तरह निर्भर हैं।

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कंप्यूटर पर निबंध Essay on Computer in Hindi

 

कंप्यूटर क्रांति : लाभ व हानि हमारे देश में सर्वप्रथम 1961 में कंप्यूटर का प्रयोग शुरू हुआ किंतु राजीव गांधी के प्रधानमंत्रित्व काल (1984-1989) के दौरान विविध क्षेत्रों में कंप्यूटर का जिस बड़े पैमाने पर प्रचलन बढ़ा उसे मद्देनजर रख पर्यवेक्षकों ने उनके कार्यकाल को कंप्यूटर क्रांति की संज्ञा दी। लेखन तथा गणना के क्षेत्र में विगत पांच दशकों में आश्चर्यजनक प्रगति हुई है। कम्प्यूटर भी इन्ही आश्चर्यजनक आविष्कारों में से एक है। कम्प्यूटर शब्द को हिन्दी भाषा में शामिल कर लिया गया है। वैसे इसका हिन्दी पर्याय कामिल बुल्के ने अपने अंग्रेजीहिन्दी शब्दकोश में दिया है।

आज दफ्तरोंस्टेशनोंबड़ीबड़ी कम्पनियोंटेलीफोन एक्सचेंजों आदि अन्य अनेक ऐसे कलकारखानों में जहां गणना करने अथवा काफी मात्रा में छपाई का काम करने की जरूरत होती है वहां भी कम्प्यूटर लगाए गए हैं ताकि कर्मचारियों की संख्या में कटौती की जा सके। कम्प्यूटर अब वह काम भी करने लगे हैं जो मानव के लिए काफी श्रम साध्य तथा समय लेने वाले हैं। कम्प्यूटर की पहली परिकल्पना सन् 1642 में साकार हुई जब जर्मन वैज्ञानिक ब्लेज़ पॉस्कल ने संसार का पहला सरल कम्प्यूटर तैयार किया था।

इस कम्प्यूटर में ऐसी कोई खास जटिलता नहीं थी फिर भी अपने समय में यह आम लोगों के लिए एक कौतूहल का विषय अवश्य था। समय बीता और अन्य लोग भी इस पिटारेनुमा कम्प्यूटर से प्रभावित और उत्साहित हुए। सन् 1680 में जर्मनी में ही विलियम लैबनिट्ज ने एक ऐसे गणनायंत्र का आविष्कार किया जिसके माध्यम से जोड़घटागुणा, भाग और वर्गमूल तक निकाले जा सकते थे। खोज का काम नहीं रुका, यह कभी चला, कभी आगे बढ़ा और सन् 1801 में उक्त मशीन से प्रेरित होकर जोजेफ एम. जाकवार्ड ने एक ऐसा करघा यंत्र बनाया जिससे कम्प्यूटर के विकास को काफी सहायता मिली। वर्तमान कम्प्यूटर डॉ. हरमन के प्रयासों का अति आधुनिक विकसित रूप है।

 

कम्प्यूटर का निरन्तर विकास हो रहा है। ई.सी.जी. रोबोट, मानसिक कम्पनरक्तचाप तथा न जाने कितने जीवनरक्षक कार्यों के लिए कम्प्यूटर का उपयोग किया जाता । है अमेरिका, फ्रांसजर्मनी, रूस, हालैण्डस्वीडन, ग्रेट ब्रिटेन जैसे समृद्ध देशों में इसका स्थान मनुष्य के दूसरे दिमाग के रूप में माना जाता है। भारत में भी कम्प्यूटर विज्ञान की निरंतर प्रगति होती जा रही है। शायद वह दिन दूर नहीं जब भारत भी इस क्षेत्र में समुन्नत देशों की बराबरी करने लगेगा। आज कम्प्यूटर के विविध तथा बहुक्षेत्रीय उपयोग हो रहे हैं। भारत में कम्प्यूटर कितने लाभप्रद तथा कितने अलाभकारी हैं-इस पर भी विचार करना जरूरी है। यह बात तो हमें | स्वीकार कर ही लेनी चाहिए कि कम्प्यूटर भी मानव निर्मित उपकरण है जिसमें आंकड़े सूचनाएंअंकहिसाबकिताब आदि मानव के द्वारा ही भरे जाते हैं।

अतः यदि मानव से , कोई त्रुटि हो जाए तो वह कम्प्यूटर में बार-बार तब तक होती रहेगी जब तक वह सुधारी न जाए। अतः यह कहना कि कम्प्यूटर गलती नहीं करता, एक गम्भीर तथ्य को| अस्वीकार करना है। भारत जैसा विकासशील देश भी विविध क्षेत्रों में कम्प्यूटर का उपयोग करने लगा है। इससे उन सभी क्षेत्रों में कार्यकुशलता बढ़ी है। इन क्षेत्रों में उत्पादकता व विज्ञान, शिक्षाव्यवसायसूचना, प्रौद्योगिकी आदि प्रमुख हैं। हमारा देश विकासशील देश है जहां प्रतिवर्ष हजारों नहीं लाखों की संख्या में बेकार युवक बढ़ते जा रहे हैं। कम्प्यूटरों का बहुक्षेत्रीय उपयोग मानव मस्तिष्क को पंगु बना देता है और उसे अपने कार्य में सहज निरंतर प्रगति करते रहने की भावना में बाधा डालता है।

ऐसा देखने में आया है कि निरंतर हिसाबकिताब तथा ड्राफ्टिंग करने वाले लोग मिनटों में बड़ेबड़े हिसाबकिताब हल कर डालते हैं। ऐसा वे अपने निरंतर अभ्यास के बल पर करते हैं। गणित से सम्बद्ध कार्योंड्राफ्टिंग तथा अन्य क्षेत्रों में अनुभवी लोगों के करिश्मे आए दिन अखबारों में पढ़ने को मिलते हैं। कम्प्यूटरीकरण इन सब प्रगति के लिए बाधक और भयावह है।

 

विज्ञान के उपहारों को नकारना आज के युग में संभव नहीं है। इसलिए कम्प्यूटरीकरण भी आज समय की मांग बन चुका है। भारत में लगभग सभी निजी व्यावसायिक संस्थानों, बैंकोंकई सरकारी संस्थानों व सेवाओं को कम्प्यूटरीकृत किया जा चुका है। भविष्य में भी यह प्रक्रिया जारी रहेगी।

 

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