Andhvishwas Story in Hindi – अंधविश्वास पर कहानियाँ

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Andhvishwas Story in Hindi – अंधविश्वास पर कहानियाँ
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हेलो दोस्तों आज हम आपके लिए लाये है अंधविश्वास पर निर्धारित कहानियाँ जो डरने और सोचने पर मजबूर कर देंगी। इस आर्टिकल में हम आपके लिए लाये है बहुत सारी  अंधविश्वास से जुडी हुई कहानियाँ जो आपको बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर देंगे। हम आपके लिए लाये है अंधविश्वास पर कहानियाँ वो भी हिंदी में। 

 

Andhvishwas Story in Hindi

Andhvishwas Story No # 1 : अंधविश्वास

 

रामधन रामनगर नामक गांव में रहता था। उसके खेत बहुत उपजाऊ थे और हर बार उसके खेतों में झूमती और लहलहाती फसल को देखकर सब ईष्र्या करते थे। हमेशा फसल से उसे बहुत आमदनी होती थी इसलिए दिनप्रतिदिन वह अमीर होता जा रहा था। अब उसकी गिनती अमीर लोगों में होने लगी रामधन थोड़ा बहुत पढ़ा हुआ था परंतु उसकी पत्नी विद्या ने इंटर की हुई थी । वह काफी बुद्धिमान थी।

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वह रामधन को हमेशा समझदारी भरी और व्यावहारिक बातें बताती किंतु वह उन्हें गंभीरता से न लेते हुए मजाक में उड़ा देता। वह पुराने विचारों का था इसलिए जादूटोनों, अंधविश्वास व भाग्य पर बहुत यकीन करता था।

कभी किसी पंडित की बात संयोगवश सच हो जाती तो वह यह मान बैठता कि पंडित के कहे अनुसार ही उसके जीवन में आगे होगा और पंडित जो बताएंगेवही उसके भाग्य में लिखा होगा।

उनके विवाह को पांच वर्ष हो गए थे किंतु दुर्भाग्यवश अभी तक उनके यहां कोई संतान नहीं थी। रामधन अनेक पंडितों से संतान योग पूछ कर आता और फिर वह जो करने को कहते वह विद्या को बताता।

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कभी कहता कि पंडित ने कहा है कि यदि रात को हम एक विशेष जाप करेंगे तो हमारे यहां शीघ्र ही एक स्वस्थ संतान का जन्म होगा, कभी कहता कि यदि हम पंडित को ग्यारह हजार रुपए दक्षिणा दें और उसे विभिन्न तरह के पकवान खिलाएं तो हमारे यहां गुणवान संतान होगी।

विद्या रामधन की इन मूर्खता भरी बातों पर सिर पीट लेती। एक दिन विद्या रामधन को अपने साथ जबरदस्ती शहर में डॉक्टर के पास ले गई। डॉक्टर ने उन दोनों का चेकअप किया। चेकअप करने पर उसने उन्हें उचित इलाज कराने का परामर्श दिया। पहले तो रामधन विद्या पर बहत भड़का और बोला”हमारे यहां डॉक्टरों पर कोई विश्वास नहीं करता। सब कुछ झाड़ फूक के द्वारा किया जाता है किंतु तुम हो कि मेरी बात मानती ही नहीं हो। उलटा इन सबको अंधविश्वास और पागलपन कहती हो।

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बारह क्लास क्या पड़ गई हो अपने आपको अफसर समझने लगी हो।” उसकी इस बात पर विद्या बोली, “देखोयदि डॉक्टर के बताए इलाज से हमें बच्चा हो गया तो तुम इन सब अंधविश्वासों पर विश्वास करना बंद कर दोगे और हमेशा के लिए इन जादू-टोनों से दूर हो जाओगे ।” नासमझ रामधन मन ही मन विद्या का मजाक उड़ाने लगा और सोचने लगा कि चलो अब तो कुछ समय बाद विद्या मेरे साथ जप करेगी और झाड़ फूक से ही अपनी हर समस्या हल करेगी।

उधर विद्या ने डॉक्टर द्वारा बताए गए इलाज को समय पर किया। कुछ ही समय बाद उनके यहां एक सुन्दर-सी बेटी ने जन्म लिया। रामधन यह देखकर हैरान रह गया कि जो मंत्रजाप, अनुष्ठान व झाड़फूक वह वर्षों से संतानोप्राप्ति के लिए कर रहा था। वह उसके किसी काम न आए बल्कि डॉक्टर द्वारा इलाज की सलाह ने एक वर्ष के अंदर ही उसके घर में एक नन्ही-सी परी की किलकारियां गूंज उठी।

 

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रामधन ने उस बच्ची का नाम परी रखा और अपनी पत्नी विद्या से अपनी अंधविश्वासी हरकतों के कारण माफी मांगी। फिर उसने उससे वादा किया कि आगे से वह कभी भी इन पोंगा पंडितों की बातों में नहीं आएगा और बीमारी या समस्या के समय हमेशा डॉक्टर या पढ़े लिखे व्यक्ति से परामर्श कर उसका समाधान निकालेगा ।

विद्या रामधन को सही रास्ते पर आते देखकर बहुत खुश हुई और बोली, “रामधन आज सही मायनों में तुमने प्रगति की ओर एक कदम बढ़ाया है क्योंकि जो इंसान में वह नहीं ।

अंधविश्वासों जीता है कभी आगे बढ़ सकता अंधविश्वासों के कारण एक दिन ऐसा आता है जब नकसान भी वह अपना ही कर डालता है किंतु शुक्र है से कि तुम सही समय पर भटके हुए मार्ग प्रगति के मार्ग पर आ गए हो।”

इसके बाद वे दोनों खुशी-खुशी अपना जीवन बिताने

 

Andhvishwas Story No # 1 साहसी राहुल

 

राहुल दस साल का एक बहुत ही प्यारा-सा बच्चा था। उसे सब बहुत करते थे पर उसमें एक बहुत खराब आदत थी कि वह अंधेरे से बहुत डरता था। इस डर के कारण वो ना तो रात में देर तक जागकर पढ़ पाता और ना ही अपनी मम्मी का हाथ पकड़े बिना कमरे से बाहर जाता।

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Andhvishwas Story in Hindi

 

इस वजह से उसके घर में सब लोग बहुत परेशान रहते थे। दिनभर तो वो बहुत मस्ती करता और उछलकूद मचाता पर जैसे ही रात होती तो बत्ती बंद होने पर वो थरथर कांपने लगता। उसके डर की वजह उसकी चाची थी जो बचपन में उसे जल्दी सुलाने के लिए तरहतरह के मन से बनाए हुए डरावने किस्से सुनाती रहती थी।

शुरू में तो राहुल को भी इन अजीबोगरीब किस्सों को सुनने में बड़ा मजा आता था पर धीरे-धीरे उसके मन में डर बैठ गया और अब वो चाची की भी बात मानने के लिए तैयार नहीं होता था कि भूत अंधेरे में नहीं आते हैं। क्योंकि ये सब होते ही नहीं हैं। अब बेचारी चाची भी बहुत दुखी होती थी। कि उनके कारण ही राहुल इतना डरपोक हो गया था। इसी तरह से कई दिन बीत गए और राहुल का डर कम होने के बजाए बढ़ता ही गया। एक रात बहुत बरसात हो रही थी और घर में सबको शादी में जाना पड़ा था। बस राहुल ही चाची के साथ घर पर था और खाना खा रहा था।

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अचानक बिजली चमकने के साथ ही बत्ती गुल हो गई। बेचारे राहुल के हाथ से डर के मारे चम्मच छूट गया । यह देखकर उसकी चाची बड़े ही प्यार से बोली, “तुम बिलकुल मत डरो। मैं अभी मोमबत्ती लेकर आती हूं।” कहकर जैसे ही अंधेरे में हाथों से टटोलकर आगे बढ़ी कि जमीन वह पर पानी होने कि वजह से फिसलकर गिर पड़ी। जब तक वह संभल पाती अंधेरे उनका के माथे से खून निकलने सर मेज नुकीले कोने से टकराया और लगा। ” चाची जोरजोर से रोते हुए राहुल को बुलाने लगी। राहुल जो अब तक में डर के मारे पत्थर का बुत बना बैठा हुआ था चाची के पास दौड़ा।

बिजली चमकने पर उसने देखा कि चाची के माथे से बहुत खून बह रहा है। वह हवा की गति से घर के सामने रहने वाले डॉक्टर अंकल को बुलाने के लिए दौड़ बरसात में वह रहरहकर फिसल रहा था, पर उसकी आंखों के सामने सिर्फ चाची का खून भरा माथा घूम रहा था। अंधेरे में जब रह-रहकर बिजली गरज रही थी और कुत्ते भौंक रहे थे तो डर के मारे उसके माथे पर पसीना छलछला जाता था।

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पर वो बिना रूके दौड़ता ही रहा और सामने की गली पार करके 1 गोद डॉक्टर अंकल के यहां पहुंच गया। डॉक्टर अंकल ने जैसे ही उसकी बात सुनी वो तुरंत अपना फर्स्ट एड बॉक्स और जरूरी दवाइयां लेकर उसके साथ झट 1 उसी से चल पड़े। जब वे दोनों घर पहुंचेतब तक लाइट आ चुकी थी और चाची जमीन पर ही पड़ी हुई दर्द से कराह रही थी।

डॉक्टर अंकल ने उन्हें सहारा देकर बिस्तर पर लिटाया और तुरंत उनके माथे से बहते खून को पोंछकर उनकी 1 श मरहम पट्टी की। तब तक घर के सभी सदस्य भी शादी से लौटकर आ चुके थे। सबकी आंखों में घबराहट और चिंता के भाव देखते ही डॉक्टर अंकल |

पद मुस्कुराकर बोलेजिस घर में राहुल जैसा हिम्मती और समझदार बच्चा हो 1 जन वहां किसी को कभी भी कोई चिंता करने की जरूरत ही नहीं है। देखिएउसने कितनी हिम्मत और बहादुरी से सब कुछ संभाल लिया।” यह कहते हुए डॉक्टर अंकल ने बड़े ही प्यार से उसकी पीठ थपथपाई। मम्मी ने तो सारी बातें सुनकर राहुल को गले से लगा लिया और खुशी के मारे रोने लगी।

उस दिन से तो राहुल सबका हीरो बन गया। और हां चाची ने अपने मन में प्रण कर लिया कि अब वो किसी भी बच्चे को कभी भी झूठी और डरावनी कहानियां ना सुनाकर उसका आत्मबल और मनोबल बढ़ाने ज्ञानवर्धक कहानियां सुनाएंगी।

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