Thoughts in Hindi on Life with Images [51+] Read Now !

नमस्कार, आप सभी का एक बार फिर से स्वागत है। दोस्तों सोच शक्ति आपकी वास्तविकता बनाने की कुंजी है प्राकृतिक दुनिया में जो कुछ भी आप देखते हैं वह सब कुछ आपके विचारों और विश्वासों की अदृश्य, आंतरिक दुनिया में है। अपनी नियति का स्वामी बनने के लिए, आपको अपने प्रमुख, अभ्यस्त विचारों की प्रकृति को नियंत्रित करना सीखना चाहिए। ऐसा करने से, आप अपनी जिंदगी में आकर्षित कर सकेंगे जो आप चाहते हैं और अनुभव करें जैसे आप सत्य को जानते हैं कि आपके विचार आपकी वास्तविकता बनाते हैं। यदि आप प्रेणादायक विचार अक्सर पढ़ते हैं तो ये आपके दिमाग को तरो ताज़ा कर देते हैं और आपके जीवन को एक सकारात्मक सोच की और ले जाते हैं। तो दोस्तों आज मै इस आर्टिकल मे कुछ ऐसे ही विचार बताऊँगा जिन्हे अपनाने से और उन्हें ठान लेने से आपका जीवन बदल जायेगा तो आईये जानते हैं Thoughts in Hindi on Life

Best Thoughts in Hindi on Life:

  • जीवन कर्म का ही दूसरा नाम है। वहजो कि कर्म नहीं करता, उसका अस्तित्व है, किन्तु वह जीवित नहीं।
  • हम इस प्रकार जीवन व्यतीत करें कि हमारे मरने पर हमें दफनाने वाले भी दो आंसू बहा दें।
  • जितना अधिक जीवित रहना चाहते हो, रहो, किन्तु स्मरण रखो कि जीवन के प्रारम्भिक बीस वर्ष जीवन की अधिकांश अवधि है।
  • प्रत्येक मनुष्य इस संसार के रंगमंच पर एक अभिनय करने का प्रण अपनी मन प्रवृत्ति से प्रेरित होकर अपने पाठ को दुहराता है, यही मनष्य जीवन है।
  • संसार में कोई ऐसी शक्ति नहीं, जो उच्चसरलसत्य एवं कर्मण्य जीवन के प्रभाव को कम कर दे।
  • मनुष्य जीवन का अधिकांश भाग यही विचारतेविचारने निकल जाता है। कि मैं अब जीवन को नाश से बचाऊंगा।
  • फलत: जीवन नष्ट हो जाता है। और हम जीवित रहने के उपक्रम में व्यस्त रह जाते हैं।
  • इस बात का कोई महत्व नहीं कि मनुष्य मरता किस प्रकार है, अपितु महत्त्व की बात तो यह है कि वह जीवित किस प्रकार रहता है।
  • मनुष्य के जीवन की तीन बड़ी घटनाएं विवाद से पूर्णत: परे होती हैं प्रथम, जन्म; द्वितीयविवाह और तृतीय, मृत्यु।
  • – वही सच्चा जीवन व्यतीत करता है, जो अपनी जीवन-शक्ति भावी सन्तान के लिए व्यय कर देता है। धन का महत्व नहीं, अपितु जीवन का है—प्रेम की समस्त शक्ति प्रसन और प्रशंसा से पूर्ण जीवन की।
  • जीवन का द्वार अत्यधिक संकीर्ण , रातो सीधा है, किन्तु मार्ग है।
  • जीवन एक गतिशील छाया मात्र है।
  • पुरुष जीवन को जल्दी पहचानते हैं, नारियां विलम्ब से। ऑस्कर वाइल्ड स्वाभिमान, आत्मज्ञान और आत्मसंयम-ये तीन ही जीवन को आलौकिक शक्ति की ओर ले जाते हैं।
  • चालीस वर्ष की अवस्था युवावस्था वार्धक्य है और पचास वर्ष की का अवस्था वृद्धावस्था का तारण।
  • लोकोक्ति जीवन नम्रता का महान् पाठ है।
  • अधिकांश अवसरों पर साहस की परीक्षा जीवित रहना होती है।
  • वे इसलिए जीवित हैं कि खा सकें, किन्तु वह (सुकरात) इसलिए खाता है कि वह जीवित रह सके हम आते हैं और रोते हैं, यही जीवन है, हम जंभाई लेते हैं और चल देते हैं यही मृत्यु है।
  • महत्त्व इसका नहीं है कि हम कितने अधिक जीवित रहते हैं, अपितु महत्त्व तो इसका है कि हम कैसे जीवित रहते हैं।

 

जिसको रहस्य गोपनीय रखना नहीं आता, वह सफलता का मुंह नहीं देख सकता।
• मितव्ययता का रहस्य रह है कि वेतन दिवस के बाद पहले कुछ दिनों इतनी सस्ती जिन्दगी जियो, जितनी अपने पहले अन्तिम कुछ दिनों में जी थी। ।
• कोई भी ऐसा रहस्य नहीं है, जिसका उद्घाटन नहीं होगा।
• यदि तुम इच्छा रखते हो कि दूसरे तुम्हारा रहस्य गुप्त रखेंतो पहले तुम स्वयं ही इसे गुप्त रखो।
• यदि तुम अपने रहस्य को किसी शत्रु से छिपाये रखना चाहते हो, तो किसी मित्र तक से उल्लेख मत करो। बैंजामिन फ्रेंकलिन
• जो व्यक्ति अपने रहस्य को छिपाये रखता है, वह अपनी कुशलता अपने हजरत उमर हाथ में रखता है।
• ईश्वर अपने रहस्य कायरों से नहीं खुलवाता।
• जो व्यक्ति अपना रहस्य अपने सेवक को बताता है, वह सेवक को अपना स्वामी बना लेता है।
० कोई व्यक्ति सारी बातें छिपा सकता हैकिन्तु दो बातें नहीं-एक तो यह कि मदिरापान किये और दूसरी यह कि वह प्रणय का शिकार है।
• सत्य का रहस्य वही समझ सकता हैजिसे किसी से द्वेष न हो।

 

 

 

स्मरण रखिये कि आप क्रोध की दशा में ही अत्यन्त निर्बल एवं क्षीणकाय रहते हैं। कारण यही है कि क्रोध का अस्त्र स्वयं चालक को ही घायल करता है।

• अक्रोध से क्रोध को जीतो। विदुर नीति /
• यदि आप अपकार करने वाले पर क्रोध करते हैं, तो क्रोध ही पर क्रोध क्यों नहीं करते, जो सबसे अधिक अपकार करने वाला है।
• जिस समय क्रोध उत्पन्न होने वाला हो, उस समय उसके परिणामों पर विचार करो।

  • क्रोध होने का अर्थ है-दूसरों की त्रुटियों का प्रतिशोध स्वयं से लेना।
  • क्रोध यमराज, अर्थात् काल है।
  • अम्मर्ण संसार को एकता के सूत्र में बांधने की योजनाएं है, बनाना सरल किन्त अपने हृदय में रहने वाले क्रोध पर विजय पाना अत्यन्त कठिन है।
  • वे महान् पुरुष धन्य है, जो अपने उड़े हुए क्रोध को अपनी बुद्धि के द्वारा उसी प्रकार रोक देते हैं, जैसे दीप्त अग्नि को जल से रोक दिया जाता है।
  • जिस क्षण क्रोध मस्तिष्क पर अपना शासन जमा लेता है, उसी क्षण विचारशक्ति शून्य हो जाती है
  • प्रायक्रोध से प्रेरित मूर्ख लोग अकार्य कर बैठते हैं। मत्स्यपुराण 157/3
    • जो मनुष्य अपने क्रोध को अपने ही ऊपर झेल लेता है, वही दूसरों के क्रोध से बच सकता है। वही अपने जीवन को सुखी बना सकता है।
    • प्रकृति का कोप सब कोपों से बड़ा होता है।
    • जो क्रोध पर उचित नियन्त्रण रख सकते हैं, वे ही स्वर्ग के सच्चे अधिकारी
    • क्रोधी मनुष्य कैसा भी अपशब्द कभी भी अपने मुंह से निकाल सकता है। और बुरे से बुरा कर्म कभी भी कर सकता है।• आत्मा को पतनोन्मुख बनाने वाले तीन ही मार्ग हैं-कामातुरता, क्रोध और मोह, अतये तीनों ही त्याज्य हैं।
    • जो क्रोध करने में शिथिल हैं, वह महान शक्तिशाली व्यक्ति से भी अधिक और जो स्वयं पर शासन करता है, वह नगरविजेता से भी कहीं अधिक श्रेयस्कर है। प्रयत्नपूर्वक रोकना चाहिए।

 

  • पापी के घर भोजन करने से बुद्धि भ्रष्ट होती है।
  • ऐसा कीर्तन करो कि भगवान आकर तुम्हारा द्वार स्वयं खटखटाएं।ईश्वर जिसे मान देते हैं, उसका मान स्थाई होता है।
  • महापुरुषों की आदर्श दृष्टि सदा आगे (साथ) रखना।
  • ईश्वरक सब जगह है।  मनुष्य ऐसा मानने लगे तो पाप करने के लिए कोई स्थान ही नहीं बचता।
  • प्रात:काल ऋषियों का स्मरण करने से अनेक गुण अपने में आ जाते हैं।
  • किसी जीव का तिरस्कार मत करो। उसके पापों का तिरस्कार करो।
  • इन्द्रियों में जो फंसावह भक्ति नहीं कर सकता।
  • दूसरों को ज्ञान दे और स्वयं विपरीत आचरण करे वह राक्षस है ।
  • पुण्य करना आसान है, पाप का पूर्ण त्याग करना कठिन है।
  • मेरा प्रत्येक व्यवहार भक्तिमय बने ऐसा निश्चय करोशुद्ध व्यवहार को ही भक्ति कहते हैं।
  • युक्ति से पाप-प्रवृति को रोकें वह पत्नी पति को परमात्मा की ओर प्रेरित करे वह धर्मपत्नी।  स्त्रियों अपने पति को धर्म-मार्ग पर चलाओ।
  • साधारणतया कामान्ध होने से पुरूष स्त्री के अधीन होता है। अत: पत्नी चाहे तो पति को भगवद्भक्ति में प्रवृत कर सकती है।
  • ज्ञान का अनुभव भक्ति और वैराग्य बिना नहीं होता।

 

जिस प्रकार प्रज्वलित अग्नि ईंधनों को सर्वथा भस्म कर देती है, ऐसे ही ज्ञान रूपी अग्नि सम्पूर्ण कुकों को सर्वथा भस्म कर देती है।
• एक व्यक्ति सब कुछ नहीं जान सकता।
• भोजननिद्रा, भयमैथुन-ये मनुष्य पशुओं के समान ही होते हैं, किन्त मनुष्यों में ज्ञान विशेष रूप से अधिक है। ज्ञानरहित मनुष्य पशु के समान होता है।
• जो दूसरों को जानता है, वह शिक्षित है, किन्तु जो स्वयं को पहचानता है, वह बुद्धिमान् है।
• अज्ञानी मूखे से शास्त्र पढ़ने वाला श्रेष्ठ होता है, उसे पढ़कर स्मृति में धारण करने वाला उससे श्रेष्ठ होता है। शास्त्र के मर्म को समझने वाला ज्ञानी और ज्ञानी से भी श्रेष्ठ उस पर आचरण करने वाला होता है।

• जो ब्राह्मण और चाण्डाल में, चोर और सदाचारी ब्राह्मण में, सूर्य और चिनगारी में तथा कृपालु और क्रूर में समदृष्टि रखता है, उसे ज्ञानी मानना श्रमद्भागवत
• बहुत-सी वस्तुओं का अपूर्ण ज्ञान प्राप्त करने की अपेक्षा अज्ञानता में विचरना श्रेयस्कर है।
० अपनी अज्ञानता का भास ज्ञान का प्रथम सोपान है।
• जिसे ज्ञान नहीं, श्रद्धा नहीं और जो संशयग्रस्त मनुष्य है, उसका नाश हो जाता है। महाभारत/भीमपर्व 28/40
० स्वयं को जान !
• संसार में ज्ञान समान करने निकुछ नहीं है। इस के पवित्र वाला :सन्देह भी
• ज्ञान से मनुष्य नीचे देखता है, अर्थात् विनम्र हो । जाता है

 

  1. जहाँ शक्ति हो वहाँ ज्ञानरूपी चक रक्षण करता है।
  2. सच्चा भक्त दूसरों के दोष नहीं देखता, वह, पुन: पुन:अपना दोष देखता है। दूसरों के दोष देखोगे तो अपने दोष नहीं दिखेंगे।
  3. जो दान लेता है वह बन्धन में पड़ता है, दान बहुत सोच समझ कर लेना चाहिए तथा दान देने में भी सत्पात्र का चयन करना चाहिए।
  4. इश्वर की सलाह लो मन की सलाह की सलाह मत लो, मन दगाबाज है।
  5. जो सबको खुश रखेउसके यहाँ भगवान आते हैं।
  6. पति-पत्नी का स्वभाव एक ना हो तब तक विवाह सफल नहीं होता। शरीर दो एक मन इसी का नाम विवाह है।
  7. देखो! दु:ख में प्रभु का नाम न भूलना, यह , बहुत बड़ा सहारा है।
  8. स्त्री स्त्री की मर्यादा पालन के बिना भक्ति पुरूष की मर्यादा में रहे।
  9. धर्म तथा मर्यादा पालन के बिना भक्ति ज्ञान बेकार है।
  10. सारे दिव्य सद्गुण जीवन में उतारने का प्रयत्न करो।
  11. राम जी का एक-एक सद्गुण जीवन में उतारने का प्रयत्न करो।
  12. माता-पिता, लक्ष्मी-नारायण के रूप हैं, उन्हें वन्दन करो।
  13. भोग बाधक नहीं है। भोगाशक्ति बाधक होती है। व्यवहार के समय भगवान् को न भूलना।
  14. बड़ों का दिल कभी मत दुखाओ, उनके श्राप का फल भोगना पड़ेगा।

 

  • जो भविष्य के लिए लड़ाई लड़ रहा है वो आज भी भविष्य में ही जी रहा है।
  • सभी को अपने निर्णय लेने का पूरा अधिकार है लेकिन किसी को भी अपने निर्णय दूसरे पर थोपने का अधिकार नहीं है।
  • बुराई और अच्छाई में अगर कोई समझौता होता है तो ऐसे में फायदा हमेशा बुराई का ही होगा।
  • आदमी की सोचने की क्षमता का ही उत्पाद है धन।
  • महान लोगों पर कभी शासन नहीं किया जा सकता है।
  • भ्रष्ट किस्म के लोगों के जीवन का कोई निर्धारित लक्ष्य नहीं होता है।
  • अन्य किसी बात की कोई अहमियत नहीं है सिवाय इसके कि आप अपना काम कितनी अच्छी तरह पूरा करते हैं।
  • तर्कसंगत व्यक्ति अपनी सोच और समझ के साथ आगे बढ़ता है। भावनाओं और अरमानों के जरिए नहीं।
  • सच्चाई से तो बचा जा सकता है लेकिन सच्चाई से दूर भागने के नतीजों से कभी नहीं बचा जा सकता।
    समाज के गुणों को नापने का यंत्र है पैसा
  • अगर कोई कुछ करने लायक है तो वो बहुत ज्यादा करने लायक भी है।
  • अपरक्लास देश का भूतकाल है जबकि मिडिलक्लास भविष्य है।
  • रचनात्मक व्यक्ति कुछ कर दिखाने की चाह से प्रेरित होते हैं न की दूसरे को गिराने की चाह से।
  • हर मुद्दे के दो पहलू होते हैं। एक सही व दूसरा गलतबीच में हमेशा बुराई ही होती है।
  • कुछ भी पाने के लिए विचार की जरूरत होती है। आपको ये पता होना चाहिए कि आप कर क्या रहे हैं, यही सच्ची शक्ति है।
  • फिलॉसफी का ही पुरातन रूप है धर्म खुद की कद्र करना सीखिए मतलब ये भी है कि अपनी ।
  • खुशी के लिए लड़ाई कीजिए तो आपको लगता है कि हर बुराई की जड़ पैसा है। कभी ये जाना है कि
    इस पैसे की जड़ कहां है?

All New thoughts on life in Hindi with images

 

  1. अज्ञानी जीव सुख की खोज में । यह भूल जाता है कि असली सुख क्या
  2. भौतिक सुविधाओं के पीछे अपना असली सुख कभी मत गंवाओ।
  3. जो नसीहत नहीं सुनता उसे लानत सुननी पड़ती है।
  4. विस्तार में जाने से सार नहीं रहता अत: संकल्पों का विस्तार छोड़ो।
  5. यह सत्य है कि विज्ञान की सुख व सुविधाओं के साथ मनुष्य का वास्तविक सुख और शान्ति भंग हो गई।
  6. शान्ति और सुख बाहरी वस्तुएँ नहीं हैं, यह हमारे अन्दर ही निवास करती हैं, केवल उन्हें पहचानने की आवश्यकता है।
  7. दूसरों की खुशी के लिए अपनी खुशी का त्याग करना बाद में अत्यधिक सुखद होता है।
  8. जो गैर जरूरी है उसे मत करो क्योंकि ९९ प्रतिशत गैर जरूरी बातें करते हुए ही हम अपना जीवन बिता देते हैं।
  9. किसी भी चीज को बरबाद करना अच्छा नहीं है क्योंकि प्रत्येक वस्तु का कुछ न कुछ प्रयोग अवश्य है।
  10. अपने आप को महान् और मेहमान समझो।
  11. किसी से मेहरबानी माँग कर अपना अधिकार मत बेचो।
  12. फूल चुनने के लिए रास्ते में मत रुको, आगे बढ़ते चलो, तुम्हारे रास्ते में हमेशा फूल खिलते रहेंगे।
  13. जो दूसरों की मदद करता है, ईश्वर उसकी मदद करता है।
  14. दानशीलता दय का गुण है, हाथों का नहीं।
  15. यदि हम जीवन पथ पर फूल नहीं बिखेर सकते तो कम से कम मुस्कान तो बिखेर ही सकते हैं।

 

  • उठो और अपने लक्ष्य तक पहुँचे बिना आराम न करो।
  • बात सबसे बड़ा धन है, बात का धनी कभी निर्धन नहीं होता।
  • जो आदमी के वश में है वह क्षमता है, जिसके वश में आदमी है वह प्रतिभा
  • यदि मनुष्य सुख-दु:ख की चिन्ता से ऊपर उठ जाये तो आसमान की ऊंचाई भी उसके पैरों के नीचे आ जाये।
  • धन से अच्छे गुण नहीं मिलते, धन अच्छे गुणों से मिलता है।
  • जो केवल भाग्य पर भरोसा करता है उसमें पौरुष नहीं होता।
  • चापलूस आपको हानि पहुंचा कर अपना स्वार्थ सिद्ध करना चाहता है, इससे स्वयं को बचाकर रखें।
  • दुनिया की चीजों में सुख की लालसा फिजूल है, आनन्द का खजाना तो हमारे अपने अन्दर ही है।

 

1. फालतू की संख्याओं को दूर फेंक आइए। जैसे- उम्र, वजन, और लंबाई। इसकी चिंता डॉक्टर को करने दीजिए। इस बात के लिए ही तो आप उन्हें पैसा देते हैं।

2.  केवल हँसमुख लोगों से दोस्ती रखिए। खड़ूस और चिड़चिड़े लोग तो आपको नीचे गिरा देंगे।

3.  हमेशा कुछ सीखते रहिए। इनके बारे में कुछ और जानने की कोशिश करिए – कम्प्यूटर, शिल्प, बागवानी, आदि कुछ भी। चाहे रेडियो ही। दिमाग को निष्क्रिय न रहने दें। खाली दिमाग शैतान का घर होता है और उस शैतान के परिवार का नाम है – अल्झाइमर मनोरोग।

4.  सरल व साधारण चीजों का आनंद लीजिए।

5. खूब हँसा कीजिए – देर तक और ऊँची आवाज़ में।

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6. आँसू तो आते ही हैं। उन्हें आने दीजिए, रो लीजिए, दुःख भी महसूस कर लीजिए और फिर आगे बढ़ जाइए। केवल एक व्यक्ति है जो पूरी जिंदगी हमारे साथ रहता है – वो हैं हम खुद। इसलिए जबतक जीवन है तबतक ‘जिन्दा’ रहिए।

7. अपने इर्द-गिर्द वो सब रखिए जो आपको प्यारा लगता हो – चाहे आपका परिवार, पालतू जानवर, स्मृतिचिह्न-उपहार, संगीत, पौधे, कोई शौक या कुछ भी। आपका घर ही आपका आश्रय है।

8. अपनी सेहत को संजोइए। यदि यह ठीक है तो बचाकर रखिए, अस्थिर है तो सुधार करिए, और यदि असाध्य है तो कोई मदद लीजिए।

9. अपराध-बोध की ओर मत जाइए। जाना ही है तो किसी मॉल में घूम लीजिए, पड़ोसी राज्यों की सैर कर लीजिए या विदेश घूम आइए। लेकिन वहाँ कतई नहीं जहाँ खुद के बारे में खराब लगने लगे।

10. जिन्हें आप प्यार करते हैं उनसे हर मौके पर बताइए कि आप उन्हें चाहते हैं; और हमेशा याद रखिए कि जीवन की माप उन साँसों की संख्या से नहीं होती जो हम लेते और छोड़ते हैं बल्कि उन लम्हों से होती है जो हमारी सांस लेकर चले जाते हैं


11. एक छोटा सा दुःख हमारे अद्भुत दिमाग को खराब कर देता है, जैसे एक छोटा सा छेद एक बड़ी नाव को नुकसान पहुंचा देता है, तो खुश रहें और अपने दिमाग को अक्सर ताज़ा रखें।
12. मैं अपने शेष जीवन को सबसे अच्छा जीवन बनाने के लिए चुनता हूँ।

13. जीवन में बिना कारण के लिए खुश रहो बिलकुल एक बच्चे की तरह यदि आप किसी कारण के लिए खुश रहते हैं तो आप परेशानी में हैं क्योंकि यह कारण आपसे वापस लिया जा सकता है।

14. सपने ऐसे देखो जो असम्भव हो , अज्ञात को तलाश करो और महानता को प्राप्त करो।

15. जीवन में छोटी चीज़ों का आनंद लें और एक दिन जब आप पीछे मुड़ कर देखेंगे तब आप महसूस करेंगे की वो छोटी नहीं बड़ी चीज़ें थी।

 

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16. कभी-कभी भगवान आपकी स्थिति नहीं बदलते हैं क्योंकि वह आपके दिल को बदलने की कोशिश करते हैं …

17. मुश्किल सड़कें हमेशा ख़ूबसूरत मंज़िलों के लिए होती हैं।

Thoughts in Hindi on Life

Thoughts in Hindi on Life

18. अपने सपनों की दिशा में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें। अपनी कल्पना किये गए जीवन को जियो।

19. अगर आप दुनिया के प्यार की नज़र के साथ देखते हैं तो आप सब कुछ बहुत सुन्दर और अर्थपूर्ण पाएंगे।

20. आपके जीवन की खुशी आपके विचारों की गुणवत्ता पर निर्भर करती है, लेकिन आपके विचारों की गुणवत्ता उस व्यक्ति पर निर्भर करती है, जिसे आप अपने जीवन में मिलते हैं।

21. जीवन में आत्मविश्वास से चलना भ्रमित होके दौड़ने से ज्यादा सफल होता है।

22. एक चुनौती एक मौका है की आप खुद को और दूसरों को अपनी क्षमता साबित कर सकते हैं।

23. एक लक्ष्य निर्धारित करें जो काफी बड़ा हो ताकि इसे प्राप्त करने के अनुभव से आप कुछ बन सकें।

24. अधिकाँश लोग कभी उपलब्धि के स्तर तक नहीं पहुँच पाते, जिसके वे काबिल हैं क्योंकि वे स्वयं को चुनौती नहीं देते हैं …

25. जब यात्रा पर बाहर निकलें .. उन लोगों की सलाह न माने जो अब तक घर से बाहर ही नहीं निकलें हैं।

Thoughts in Hindi on Life

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26. अपने जीवन मे ऐसे लोगों को साथ रखें जो आपसे सचमुच प्यार करते हैं, आप को प्रेरित करते हैं, आपको प्रोत्साहित करते हैं, प्रेरणा देते हैं, आप को बढ़ाते हैं और आपको खुश करते हैं। अगर आपके साथ के लोग इनमें से कुछ नही करते तो उन्हें जाने दे… ..

27. चलते वक़्त जो पैर आगे है उसे कोई गर्व नहीं है और जो पैर पीछे है उसे कोई शर्म नहीं है क्योंकि वे दोनों जानते हैं कि उनकी स्थिति बदलेगी, तो निराश न हो और स्तिथि बदलने का इंतज़ार करें।

28. समस्या से दूर भागना केवल समाधान से आपकी दूरी बढ़ाता है, ये समस्या को दूर नहीं कर सकता।

29. आप कभी भी नकारात्मक लोगों के साथ रह कर एक सकारात्मक जीवन जीने की उम्मीद नहीं कर सकते हैं।

30. आपका जीवन मौके से बेहतर नहीं हो सकता है, यह परिवर्तन से बेहतर होता है।

31. जीवन में हमेशा किसी की खुशियों का कारण बनें, बल्कि इसका एक हिस्सा होने के बजाय और हमेशा किसी की चिंताओं का हिस्सा बनें उसका कारण बनने की बजाए।

 

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32. जीवन एक लड़ाई है आप योद्धा हैं आपके पास तलवारें हैं और आपके पास कवच है प्रकृति आपकी सेना है और एकमात्र दुश्मन संदेह है कि आप जीत नहीं सकते।
जादू होना कभी बंद नही होता है यह केवल ऐसे लोग हैं जो महसूस करते हैं की वे भी ऐसा कर सकते हैं.

33. यदि कुछ बाहरी व्यक्ति के कुछ बाहरी शब्द आपके दिल को परेशान करते हैं और आपके भावनाओं को परेशान करते हैं जो पूरी तरह से आपके नियंत्रण में हो, यह गुलामी का उच्चतम रूप है जिसे आप कभी भी अनुभव कर सकते हैं।

34. किसी को नहीं पता है कि जीवन में सही चुनाव करना क्या है, आपको केवल एक चुनाव बनाना है और इसे सही रूप से साबित करने की आवश्यकता है।

35. इस दुनिया में हर एक व्यक्ति सबसे महान चालबाज है, फिर भी उनमें से ज्यादातर अपने पूरे जीवन को किसी ऐसे व्यक्ति को चकरा देने में बिताते हैं जो वास्तव में सबसे सरलतम मूर्ख होते हैं और वो मुर्ख वो खुद होते हैं ।

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36. अपने अधिकतम समय को अपने आप को समर्पित करें और आप बहुत खुश होंगे।

37. आप जीवन मै अपने बलिदानो से नही जाने जायेंगे बल्कि आप कई अन्य लोगों के बलिदानों पर प्राप्त सफलता के द्वारा जाने जायेंगे।

38. ज़िंदगी मे आप या तो बस बैठ कर बड़ा सोच सकते हैं या बाहर जा सकते हैं और कुछ छोटे करने से शुरू कर सकते हैं. बुद्धिमानी से चुनें की आपको क्या करना है?
आपको जो भी मिलेगा उसका एक ही कारण होगा की आपको “लगता है” आप इसी के ही हक़दार थे।

39. लोग अक्सर अपनी ज़िंदगी अपने परिवार के साथ जीने के बजाए औरों के हाल चाल पूछने मे रहते हैं।

40. स्वर्ग में सब कुछ है लेकिन मौत नहीं है,
गीता में सब कुछ है लेकिन झूठ नहीं है,
दुनिया में सब कुछ है लेकिन किसी को सुकून नहीं है, और आज के इंसान में सब कुछ है लेकिन सब्र नहीं

41. ना खुशी खरीद पाता हूँ ना ही गम बेच पाता हूँ फिर भी मै ना जाने क्यु हर रोज कमाने जाता हूँ…..

42. “जीवन” जितना सादा रहेगा…, “तनाव” उतना ही आधा रहेगा।

43. योग करें या ना करें पर…
ज़रूरत पड़ने पर एक दूसरे का
【सह+योग】 ज़रूर करें..!

44. अगर इंसान शिक्षा के पहले संस्कार
व्यापार से पहले व्यवहार
भगवान से पहले
माता पिता को पहचान ले तो
जिन्दगी में
कभी कोई कठिनाई नहीं आयेगी

 

45. दु:ख” और “तकलीफ”
भगवान की बनाई हुई
वह प्रयोगशाला है l
जहां आपकी काबलियत
और आत्मविश्वास को
परखा जाता है l

 

 

46. पावों में यदि जान हो
तो
मंजिल तुमसे दूर नहीं।

आँखों में यदि पहचान हो,
तो
इंसान तुमसे दूर नहीं।

दिल में यदि स्थान हो
तो
अपने तुमसे दूर नहीं।

भावना में यदि जान हो,
तो
भगवान तुमसे दूर नहीं।

 

47. कर्मों की आवाज़
शब्दों से भी ऊँची होती है…!
“दूसरों को नसीहत देना
तथा आलोचना करना
सबसे आसान काम है।
सबसे मुश्किल काम है
चुप रहना और
आलोचना सुनना…!!”
यह आवश्यक नहीं कि
हर लड़ाई जीती ही जाए।
आवश्यक तो यह है कि
हर हार से कुछ सीखा जाए

 

48. जिन्होंने आपका संघर्ष देखा है,
केवल वही आपके कामयाबी की कीमत जानते है….. अन्यथा
औरों को तो लगता है कि सिर्फ… आपकी किस्मत बहुत अच्छी है

 

49. “इलाईची के दानों सा,
मुक़द्दर है अपना…!

महक उतनी ही बिखरती गई …
जितने पिसते गए”..!!

 

50. नम्रता से बात करना, हर एक का आदर करना, शुक्रिया अदा करना और यदि आवश्यक हो तो, माफी भी माँग लेना, ये गुण जिसके पास हैं, वो सदा सबके करीब औऱ सबके लिये खास है।”

51. जीवन का कोई उद्देश्य नहीं है, लेकिन जीवन में आप क्या करना चाहते हैं इसका एक उद्देश्य हो सकता है।

 

जब बाकी लोग अपने दुख गिन रहे हों तब आप अपने सुखों के बारे में
सोचें। यही खुश रहने का रहस्य है।

सही सही ही रहेगा चाहे सभी विरोध में हों और गलत गलत ही रहेगा
चाहे सभी पक्ष में क्यों न हों।

जो व्यक्ति खुद पर नियंत्रण नहीं रख सकता वो दूसरों को नियंत्रित करने
योग्य कतई नहीं है।

ईश्वर के बाद केवल माता पिता ही सच हैं।

शादी भी सोच-समझकर करें पहले साथी बाद में पैसा देखें गुण पहले
दिखाई , बाद में खूबसूरती। दिमाग पहले बाद में शरीर। तब आपको।
एक पत्नी, दोस्त, साथी के तौर पर खुद का ही रूप मिलेगा ।

आजादी के बिना दोस्ती संभव नहीं है। दोस्ती में आजाद हवा का होना।
जरूरी है। इस रिश्ते को कैद नहीं किया जा सकता है।

सबसे अधिक जरूरत हमें समय की होती है और सबसे
ज्यादा दुरुपयोग भी हम उसी का करते हैं।

हर तरह की बहस में केवल सच बोलना ही मकसद हो, न की जीतना।

जो खुद को ईश्वर का अंश नहीं मानते हैं दरअसल वे तानाशाह की
गुलामी करते हैं।

जलन करने वाले दूसरों के लिए परेशानी का सबब होते हैं लेकिन स्वयं
के लिए यातना।

सच्चा दोस्त न्यायपूर्वक सलाह देगातुरंत मदद देगा,
साहसिक कार्य में साथ रहेशासंयम बरतेगाबहादुरी से
बचाव करेगा और हमेशा दोस्त बनकर ही रहेगा।

महंगे कपड़ों में लिपटी अज्ञानता और घमंड से ऊपर और बेहतर है सस्ते
कपड़ों में लिपटा ज्ञान और मानवीयता।

अक्लमंद और समझदार व्यक्ति का धन ज्ञान होता है।
संयम और मेहनतआस्था की ही तरह हैं। ये पहाड़ हिला देते हैं।
वो जो प्यार में जीता है, ईश्वर में जीता है।

मौत केवल एक दायरा है जो हमारी दृष्टि की सीमा भी है। ज्यादा साफ
और देखने पड़ेगी

दूर तक के लिए ज्यादा आंखें खोलनी
उससे कभी घृणा मत करो जिसे समझते ही नहीं हो।

 

  1. मन के अनेक जन्मों का फल एकत्र हुआ है ।
  2. इन्द्रियों के अधीन होने से मनुष्य के जीवन में विकार आता है।
  3. पापी प्राणी प्रेत बनता है-उसकी मुक्ति नहीं होती।
  4. गया-श्राद्ध करने वाले के पितरों को मुक्ति मिलती है।
  5. भगवान की सेवा करने के लिए हमारा साथ हुआ है-पति-पत्नी ऐसा मानकर चलें तो जीवन सुखमय होता है।
  6. वासना का नाश एवं आसक्ति का त्याग करना जरूरी है।
  7. श्रवणमनन एवं निदिव्यासन से दृढ़ होता है।
  8. कथा सुनो, करो मनन एवं उसे जीवन में उतारा।
  9. आंख और कान दोनों को पवित्र रखो।
  10. भूख प्यास को सहन करने की आदत डालो।
  11. परमात्मा जिस स्थिति में रखे, उसी में संतोष मानकर ईश्वर का स्मरण करना चाहिए।
  12. भगवान् को देहार्पण करने से (कर्ता का) कल्याण होगा।
  13. जिन हाथों से भगवान् की सेवा एवं परोपकार नहीं होता वे हाथ मृत पुरुष के हाथों के समान है।
  14. संध्या करने से बुद्धि तेजस्वी होती है।
  15. किसी भी उपाय से मन को, सांसरिक विषयों से हटाकर भगवान में लगाओ।
  16. संसार को कामदृष्टि एवं भोगदृष्टि से मत देखो, देषदृष्टि रहेगी, तब तक देवदृष्टि प्राप्त नहीं होती।

तो दोस्तों आज मैंने आपको इस article मे बताये Thoughts in Hindi on Life. उम्मीद करता हूं दोस्तों कि आपको ये article पसंद आया होगा। ऐसे और रोचक विषय के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए हमसे जुड़े रहें और हमारे article पढ़ते।

 

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Romi Sinha

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