Tenali Ramakrishna Stories in Hindi – तेनाली रामकृष्णा की कहानियाँ

नमस्कार, आप सभी का एक बार फिर से स्वागत है। दोस्तों आपने Tenali Raman का नाम तो सुना ही होगा। तेनाली रामकृष्ण, जिन्हे Vikatakavi के नाम से भी जाना जाता था, वे एक तेलुगु कवि थे जो आज के आंध्र प्रदेश क्षेत्र से लोकप्रिय थे। वे आम तौर पर उनकी बुद्धि और हास्य के लिए जाने जाते थे। तो दोस्तों आज हम उन्हीं की कुछ रोचक किस्से जानेंगे| दोस्तों आज मैं आपको इस आर्टिकल में Tenali Ramakrishna stories in hindi में बताऊंगा जो बहुत ही रोचक है

 

Tenali Ramakrishna Stories in Hindi/ तेनालीराम की कहानियां

Tenali Ramakrishna Stories in Hindi

#1. चोर और तेनालीराम

एक गर्मी की रात, जब तेनाली रमन और उसकी पत्नी अपने घर में सो रहे थे, तो उन्हें बाहर की ओर जंगल की तरफ से आने वाली पत्तियों की एक आवाज सुनाई दी ।
उस समय थोड़ी सी भी हवा नहीं चल रही थी, इसलिए उसने यह आभास हुआ कि झाड़ियों में कुछ चोर छिपे हुए हैं। उन्होंने सोचा कि उन्हें रात में अपने घर को लूटने से बचने की एक योजना बनानी चाहिए।

उसने एक योजना के बारे में सोचा और अपनी पत्नी से कहा, ” प्रिये, मैंने सुना है कि हमारे पड़ोस में कुछ कुख्यात चोर रहते हैं। तो, हमारे पास घर में जितने भी गहने और पैसे है उन्हें छुपाने के लिए हम उन्हें सामने वाले कुए मै डाल देते है।

थोड़ी देर बाद, तेनाली रमन और उनकी पत्नी एक बड़े ट्रंक को लेकर घर से निकल पड़ते हैं, और उसे कुएं में गिरा देते हैं और ट्रंक को गिराने के बाद वो दोनों घर के अंदर वापस चले जाते हैं और सो जाने का नाटक करते हैं। वहां खड़े चोरों ने उन दोनों को देखा और थोड़ी देर वहीं खड़े होकर इंतज़ार किया और फिर उसके बाद चोरों ने कुए मई से पानी निकलना शुरू कर दिया।

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वे अच्छी तरह से खाली करने और खजाना पाने की आशा रखे हुए थे । चोर पूरी रात पानी बाहर खींचते रहे । और आखिरकार चोर, उस ट्रंक को बाहर निकालने में कामयाब रहे, और जब उन्होंने इस ट्रंक को खोला, तो वे बहुत ही चौंक गए और निराश हो गये थे कि इसमें तो सिर्फ कुछ बड़े पत्थरों के अलावा कुछ और नहीं देखा जा सकता था ।

उन्हें समझ आ गया कि तेनाली रमन ने उन्हें चतुरता में मात दे दी और तेनाली रमन को उनकी योजना के बारे मै पहले ही आभास हो गया था । बस तभी तेनाली रमन अपने घर से बाहर निकले और कहा, ” आप सभी दोस्तों को धन्यवाद, मेरे पौधों को पानी देने के लिए। मुझे आपके श्रम के लिए आपको भुगतान करना होगा। ”
यह सुनकर, चोरों ने तेनाली रमन के पैर पकड़ कर माफ़ी मांगी और उन्होंने किसी को भी ना लूटने या चोरी करने का वादा किया । तेनाली रमन ने उन्हें माफ़ कर दिया और उन्हें जाने देने का फैसला कर लिया।

अर्थात – गंभीर हालात मे स्थिर दिमाग के साथ अपनी बुद्धि का प्रयोग करके आप उनसे बाहर निकलने मे सक्षम हो सकते।

Tenali Ramakrishna Stories in Hindi

#2. तेनालीराम की कहानियां : तेनालीराम और सोने के आम

राजा, कृष्णदेवराय की मां एक बहुत पवित्र और रूढ़िवादी महिला थी। वह सभी पवित्र स्थानों का दौरा करती थीं और और वे अपने खजाने में से बहुत सा हिसा मंदिरों मे दान कर दिया करती थी। एक बार जब उन्होंने दान में फल देने की इच्छा प्रकट की और उसके बेटे को बाध्य किया।

कृष्णदेवाराय ने तत्काल रत्नागिरी से कई आम प्राप्त किए। उन्होंने अपनी मां को बहुत सम्मान दिया और और कभी भी उनका सिर नीचा नहीं होने दिया। दुर्भाग्य से, शुभ दिन आने से पहले, उसकी मां की मृत्यु हो गई।

कृष्णदेवराय ने सभी धार्मिक संस्कारों का पालन किया। वे कई दिनों तक चले गए आखिरी दिन, राजा ने कुछ ब्राह्मणों को बुलाया और कहा, ‘मेरी मां की आखिरी इच्छा ब्राह्मणों को आमों की पेशकश करना था। लेकिन वह इस इच्छा को पूरा नहीं कर सकी और मर गई। मैं क्या कर सकता हूं कि मेरी मां की अंतिम इच्छा पूरी हो सके और वह शांति से आराम कर सकें?’

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ब्राह्मण लालची थे उन्होंने कहा कि केवल अगर राजा प्रत्येक ब्राह्मण को एक सोने का आम देगा, तो उसकी मां शांति में आराम कर सकती है।
सुनवाई पर कृष्णदेवराज ने तुरंत कुछ स्वर्ण आमों को बनाया और उन्हें ब्राह्मणों को प्रस्तुत करने का आदेश दिया, अब सोचकर कि उनकी मां सुखी और शांतिपूर्ण होगी।
तेनाली रमन ने इस बारे में सुना और उन्होंने उन ब्राह्मणों को अपनी मां के अंतिम संस्कार समारोह में अपने घर बुलाया।

जब ब्राह्मण तेनाली के घर पहुंचे तोनाली ने सभी दरवाजे और खिड़कियां बंद कर दीं और उनके सामने एक लाल गर्म लोहे की छड़ी लगाई। ब्राह्मणों को अचंभित किया गया था लेकिन तेनाली ने उनके भ्रम को हटा दिया।
‘मेरी मां को घुटने का दर्द था और एक उपाय के रूप में वह मुझे इस गर्म लोहे की छड़ के साथ इलाज करने के लिए कहती थी । लेकिन इससे पहले कि मैं उसकी मदद कर सकूं, वह मर गई तो अब मैं आपको यह सब कुछ देकर अपनी इच्छा पूरी करना चाहता हूं ‘, तेनाली ने ब्राह्मणों से कहा, ब्राह्मण चौंक गए और कहा कि यह उन पर अन्याय है और वे इसका हिस्सा नहीं होंगे।

लेकिन तेनाली ने कहा कि चूंकि उन्होंने राजा से सुनहरी आमों को ले लिया है, क्योंकि इस तरह से वह अपनी मां की आत्मा को शांति प्रदान कर सकता था और इस तरह ही तेनाली की माँ शांति पा सकती थी। लालची ब्राह्मणों को समझ आ गया कि उन्होंने सही नहीं किया है और उन्होंने आम को राजा के पास लौटा दिया ।
बाद में तेनाली रमन ने राजा कृष्णदेवराय को बताया कि इस तरह के लालची लोगों को सोने की चीज़ें देकर महल का खजाना  गलत इस्तमाल नहीं किया जाना चाहिए। इसके बजाय, इसे भोजन और जरूरतमंदों की सेवा के लिए रखा जाना चाहिए।

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#3. तेनालीराम और लाल मोर की कहानी

विजयनगर के राजा कृष्णदेव को एक अनोखी चीजों को जमा करने का शौक था इसीलिए उनका हर दरबारी राजा को खुश करने के लिए अनोखी चीजों की खोज में लगे रहते थे , ताकि राजा को खुश करके वो उनसे मोटी रकम वसूल कर सके .

एक बार राजा कृष्णदेव के दरबार में एक दरबारी राजा ने मोटी रकम वसूल करने के लिए एक मोर को लाल रंग करके राजा के सामने पेश कर दिया और कहा ,“ महाराज ये लाल मोर मेँ आपके लिए बहुत मुश्किल से मध्य प्रदेश के घने जंगलों से पकड़ कर लाया हु   राजा भी लाल मोर को देख कर चकित रह गए और उससे घूरते रहे क्योकि उन्होंने भी लाल मोर को कभी नहीं देखा था। इसीलिए राजा ने दरबारी को कहा की की तुम

वास्तव में एक अद्भुत चीज लेकर आए हो और इस मोर को लाने में आपको कितना खर्च करना पडा ?
इतना कहते ही दरबारी ने कहा : मुझे इस मोर को लाने में करीब 25 हजार रुपए खर्च करने पड़े .

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राजा ने उस दरबारी को 30 हजार रुपए के साथ 5 हजार रुपए की राशि इनाम के रूप में देने की घोषणा कर दी राजा की घोषणा सुनकर वह दरबारी तेनालीराम की तरफ देखकर मुस्कराने लगा .

फिर क्या था तेनालीराम को समझ आ गया की उसकी मुस्कराहट के पीछे कोई राज है और वह जानते थे कि लाल रंग का मोर कहीं नहीं होता फिर तेनालीराम उस रंग विशेषज्ञ की तलाश में जुट गए जिसने नीले मोर को लाल किया था और दूसरे ही दिन उस चित्रकार को खोज निकाला। तेनालीराम ने 4 नीले मोर को लाल करवा कर खुद भी राजा के सामने पेश कर दिया और महाराज से कहा मै 25 हजार में 4 मोर लेकर आया हु।

राजा ने तेनालीराम को 25 हजार रुपए देने की घोषणा की . तेनाली राम ने यह सुनकर कहा की “ महाराज अगर कुछ देना ही है तो उस चित्रकार को दें जिसने नीले मोरों को इतनी खूबसूरती से लाल रंगा किया है।

राजा को सारा गोरखधंधा समझते देर नहीं लगी . वह समझ गए कि उस दरबारी ने राजा को मूर्ख बनाया था .

राजा ने तुरंत उसी दरबारी से 25 हजार रुपए लेने के साथ 5 जार रुपए जुर्माने का आदेश दिया  और चित्रकार को उचित पुरस्कार दिया गया वह दरबारी बेचारा सा मुंह लेकर रह गया

 

तो दोस्तों आज मैंने आपको इस article मे बताया Tenali Ramakrishna stories in hindi. उम्मीद करता हूं दोस्तों कि आपको ये article पसंद आया होगा। ऐसे और रोचक विषय के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए  हमसे जुड़े रहें और हमारे article पढ़ते रहे।

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