Mulla Nasruddin Stories in Hindi – मुल्ला नसरुद्दीन ओशो के किस्से व कहानियां

दोस्तों आज में आपके लिए लाया हु mulla nasruddin की कहानिया जो आपको रोमांचित कर देंगी। mulla nasruddin अपनी रोचक कहानियों के लिए ज्यादा जाने जाते है इनका जन्म Hortu Village in Sivrihisar जो की तुर्की में है। आइए पढ़ते है Mulla Nasruddin Stories in Hindi भाषा में जो आपको अच्छे से समझ आ जायँगी।

 

 Mulla Nasruddin Story No. 1: असली कौन.नकली कौन ?

 

Mulla Nasruddin Stories

बूढ़े मौलाना हुसैन ने खुद को संभाला और घुटनों क बल बैठ गया। उसका सारा बदन कांप रहा था। वह रहम की याचना कर रहा था। अमीर ने सख्त लहजे में कहा”इस बागी काफिर को सीधा खड़ा करो” सिपाहियों ने उसे उठाकर खड़ा कर दिया

अमीर और कोई हुक्म जारी करता, इसक पहल हां असंला बंग आग बढ़कर बाला, “आपके हर हुक्म की तामील होगी, लेकिन मेरी अर्ज भी सुन लें।”
“क्या बकना चाहते हो, बोलो?”
‘हुजूरमेरा यकीन करें, यह बूढ़ा नसरुद्दीन नहीं हो सकता वह जवान है, करीब तीस साल का बांका। सिपाहियों को जरूर कोई धोखा हुआ है। ये लोग इनाम के लालच में किसी को भी नसरुद्दीन समझ कर पकड़ लेते हैं।”

इधर बूढ़ा कांपती आवाज में कह रहा था, “अमीरे आजम मैं तो बगदाद से यहां सीधा आपसे मिलने आया था। बाजार में अफरातफरी मची हुई थी।

एक अजनबी मुझे भीड़ से बचाकर एकांत में ले गया और बताया कि बुखारा के अमीर ने मुनादी करवाई है
कि शहर में मेरे दाखिल होते ही मेरा सिर कलम कर दिया जाए। मैं डर गया और भेस बदलकर भागने को तैयार हो गया। मैं बगदाद के खलीफा का खास आलिम मौलाना हुसैन । खासतौर पर आपके लिए बुखारा भेजा गया । ”
तू और मौलाना हुसैन! ऐसा सफेद झूठ मैंने आज तक नहीं सुना। तू जरूर कोई धोखेबाज है।”

 

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“अमीरे आजम मुझे झूठ बोलने की क्या जरूरत? सचमुच में ही मौलाना हुसैन हूं।” तुम मौलाना हुसैन हो ही नहीं सकते असली मौलाना हुसैन तो यह देखो मेरे बगल में बैठे हैं।”

नसरुद्दीन ने गर्दन आगे बढ़ा दी। उस पर नजर पड़ते ही बूढ़ा डर और ताज्जुब से वह सहमकर एक कदम पीछे सरक गया, धीरे-से बोला, “हुजूर यही है मक्कार अजनबी।

अमीर ने नसरुद्दीन की ओर देखा, “यह क्या कहता है, मौलाना हुसैन? मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा। ” नसरुद्दीन कुछ कहता, इसके पहले ही बूढ़े ने जोर देकर कहा, “इसमें समझना क्या ।

है मेरे आकायह कोई बहरूपिया है। बगदाद का असली मौलाना हुसैन तो मैं हूं हुजूर इसने मेरा नाम चुराया है।”
नसरुद्दीन मुस्करा कर कहा, “हुजूर, यह बुड्ढा तो गजब का गुस्ताख है।कहता है। मैंने इसका नाम चुराया है, अब कहेगा, मैंने इसकी पोशाक भी चुराई है।”

“बिलकल ठीक, यह पोशाक भी मेरी है। ”

नसरुद्दीन अमीर की ओर देखकर बोला, “सुन लिया आपने, मैं न कहता था कि यह बूढ़ा मक्कार और जालसाज है। झूठ बोलने में इसका जवाब नहीं।”

अमीर ने सिर हिलाया, “तुम्हारी बातों में दम है, मौलाना हुसैन। यह खतरनाक शख्स हमारा नुकसान करने के इरादे से महल में घुसा है। इसका जिंदा रहना ठीक नहीं, क्यों न इसका सिर कलम करवा दिया जाए।”

बूढ़ा आलिम हुसैन फूटफूटकर रो पड़ा। वह उस घड़ी को कोस रहा था, जब उसने बुखारा आने का फैसला किया था। नसरुद्दीन असलियत जानता था।

सो बोला, “इसका सिर कलम करवाने में जल्दबाजी न करेंमुझे इसकी हरकत के पीछे गहरी चाल नजर आती है। यह अकेला नहीं हो सकता इसके जरूर कई साथी भी होंगे। क्या पता यह बागी नसरुद्दीन की शरारत हो। मेरी राय है, पहले इससे अच्छी तरह पूछताछ की जाए।

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मैं चाहता हूं, इसे मेरे हवाले कर दिया जाए” “हूं, तुम्हारी राय में दम है, मौलाना हुसैनइसे तुम्हारे हवाले कियाजरा होशियार रहना।

बुड्ढा चालाक है, कहीं तुम्हें चकमा देकर फरार न हो जाए।” उन दोनों को एक आलीशान मकान में भेज दिया। नसरुद्दीन ने बूढ़े आलिम मौलाना हुसैन को एक कमरे में डाला और दरवाजे पर ताला लगाकरचाबी जेब के हवाले कर दी।

 

Mulla Nasruddin Stories No. 2: नसरुद्दीन की धाक जमी

 

अमीर पर नसरुद्दीन की धाक जम चुकी थी। वह नसरुद्दी बात कि इस के दिमाग का कायल हो चुका था। अब यह और थी समय नसरुद्दीन मौलाना हुसैन के के वेश में था।

नसरुद्दीन की हर बात अमीर आंख मूंदकर मान लेता था। पूरे महल में अमीर यदि। किसी पर भरोसा करता था तो वह था नसरुद्दीन। अमीर को हैरानी थी कि शहर में अमन-चैन था और कहीं से नसरुद्दीन की शरारत का समाचार नहीं था।Mulla Nasruddin Story hindi

 

वह इसका करता तो जवाब में जब जिक्र मौलाना हुसैन बना नसरुद्दीन कहता, “मेरे ख्याल से नसरुद्दीन को खबर लग चुकी है कि मौलाना हुसैन के होते वह शहर में दंगा करने के बारे में सोच भी नहीं सकता। हो सकता है, वह बुखारा से भाग निकला हो।” मगर नसरुद्दीन को अफसोस था कि वह जिस मकसद से यहां आया था , उसमें अभी तक कामयाब नहीं हुआ था। वह गुलनाज की सूरत तक न देख पाया था।

इधर अमीर बीचबीच में असली मौलाना हुसैन के बारे में पूछ लेता था। नसरुद्दीन ने उसे बड़े आराम से कैद में रखा हुआ था।

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एक दिन नसरुद्दीन एक कमरे में बैठा गुलनाज के बारे में सोच रहा था। तभी महल का एक सिपाही आकर बोला, जनाबआपको अमीर साहब ने शाही बाग में याद फरमाया है। नसरुद्दीन शाही बाग में पहुंचा। अमीर एक पेड़ के नीचे खड़ा था।

नसरुद्दीन पास आया और हैरानी से बोला”यह मैं क्या देख रहा हूं। इस कदर गमगीन होने की वजह? मेरे रहते आपका यह हाल?” लंबी सांस लेकर अमीर बोला”तुमसे क्या छिपा है मौलाना। यह ऐसा मामला है, जिसमें तुम भी कुछ नहीं कर सकते” “ऐसा न कहेंमुझ पर भरोसा करके आपको निराश नहीं होना पड़ेगा।” मेरी उदासी की वजह वह नई लड़की गुलनाज है?” नसरुद्दीन की धड़कनें तेज हो गईं, “क्या हुआ उसे? क्या वह भाग गई?” नहीं मौलाना, हरम से कोई भाग जाए, यह ममकिन नहीं।

Mulla Nasruddin Story

यह वही लड़की हूं जिसके पास जाने से तुमने रोक रखा है। खबर मिली है कि पिछले तीन दिनों से उसन खाना-पीना छोड़ दिया है। वह बीमार और कमजोर हो गई है। वह मर गई तो मेरा दिया। होगा?”

 

मेरे होते हुए वह मर कैसे सकती है। मैं  आपके सितारों और ग्रहों को शांत करने में करीब-करीब कामयाब हो गया हूं। जल्दी ही आपको उसके पास जाने की इजाजत मिल जाएगी। मेरी हकीमी में वह कमाल है कि कैसी भी बीमारी और कमजोरी हो मेरे सामने टिक नहीं सकती।”

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अमीर ने बेचैनी से करवट बदली, “क्या तुम हकीम भी हो?” “बगदाद के खलीफा से पूछ लें, है कोई मेरे जैसा हकीम।” “तो देर मत करो मौलाना, इसी वक्त उसके लिए ऐसी खुराक तैयार करें कि वह तंदुरुस्त हो जाए।”
“मेरे आकाखुराकें ऐसे तैयार नहीं होती हैं। पहले मरीज को देखना पड़ेगा। उसका मर्ज क्या है, यह भी तो जानना जरूरी है। उसकी जांच-परख किए बिना खुराक नहीं बन सकती।”

 

“जांच-परख तो मुमकिन नहीं, मौलाना। तुम अच्छी तरह जानते हो हरम में सिवा हमारे किसी के कदम नहीं पड़ सकते” “हुजूरमेरी नजर में मरीज सिर्फ मरीज होता है, औरत या मर्द नहीं। मरीज की जांच-परख किए बिना इलाज मुमकिन नहीं। हां, चेहरा देखना जरूरी नहीं, मेरी ।

खासियत तो यह है कि दूर से मरीज का नाखून देखकर ही भांप लेता हूं कि इसे किस तरह की दवा की जरूरत है।” अमीर ने राहत की सांस ली, “तब तुम्हें जांचपरख की इजाजत दी जा सकती है।

लेकिन हरम में तुम अकेले नहीं जाओगेहम भी तुम्हारे साथ होंगे। तुम मरीज का नाखून देखोगे बस। ”
नसरुद्दीन के लिए इतना ही बहुत था। वह गुलनाज को अपनी मौजूदगी का अहसास
दिलाना चाहता था।

 

Mulla Nasruddin Stories No 3: मिलने का मौका मिला।

 

नसरुद्दीन को ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ा। अमीर ने नसरुद्दीन को साथ लिया और हरम की ओर चल पड़ा।
हरम की ओर जाने वाली राहदारी पर सख्त पहरा था। नसरुद्दीन ने राहदारी , मोहों और घुमावों का पूरा नक्शा दिमाग में उतार लिया। अमीर ने एक दरवाजा खोला और नसरुद्दीन के साथ अंदर प्रवेश किया। सामने गुलनाज मुलायम गद्देदार दीवान पर लेटी थी। बिस्तर के चारों तरफ सफेद चमचमाता झीना पा लटक रहा था।

 

नसरुद्दीन ने देखापर्दे क के उस पार गुलनाज क चेहरे पर पीलापन था और आखा म डर। नसरुद्दीन ने पास पहुंचकर धीरे से पुकारा, “गुलनाज!” नसरुद्दीन की जानी-पहचानी आवाज सुन वह चौंकी।

नसरुद्दीन को लगा, कहीं घबराहट में गुलनाज की जबान से उसका असली नाम न निकल जाए, इसलिए बोला, ” में मौलाना हुसैन हूं अमीर का नया आलिमनजूमी और हकीम। बगदाद से इनकी खिदमत में हाजिर हुआ ।

मैं क्या कहता हूं, समझती हो न गुलनाजमैं..।

गलनाज के चेहरे पर हैरत छा गई। वह खुशी से चीख ही पड़ती कि एकाएक नसरुद्दीन ने अमीर की ओर देखकर कहा”मुझे हर तरह के मरीजों को ठीक करना बखूबी आता है, मैं इसे ठीक कर देंगा।”


गुलनाज की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़ेयकीनन यह आवाज नसरुद्दीन की ही थी। वह निश्चित हो गई और सावधान भी। उसने आंसू पोंछकर कहा, “मुझे आप पर पूरा भरोसा है, मौलाना। आप जैसा कहेंगे, वैसा ही करेगी।

“‘अच्छा, अब तुम पर्दे के बाहर हाथ निकालो, ताकि नाखूनों का रंग  देखकर तुम्हारे मर्ज का हाल मालूम कर सका”
गुलनाज ने पर्दे की दरार से हाथ बाहर निकाला

 

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नसरुद्दीन नाखून जांचने के बहाने उसका हाथ दबा दिया, जवाब में गुलनाज ने भी । – ऐसा ही किया
अब नसरुद्दीन गुलनाज के हाथ की सबसे छोटी उंगली के नाखून का गए हैं। मुआयना करने लगा।

फिर बोलामैं कल बनाकर तुम्हारे गुलनाज, खुराक पास आऊंगा। तुप तैयार अमीर निकले दरबार में पहुंच
और नसरुद्दीन हरम से बाहर । अमीर खुश था। बहुत कर वह बोला, ” सचमुच आपने उस पर कोई जादू किया है। यह तो कमाल मौलानालो, इसे मेरी तरफ से मामूली सौगात समझकर रख लो।

तुमसे बहुत खुश अमीर ने अशर्फियों से भरी थैली उसके हाथों में सौंप दी। नसरुद्दीन ने। झुककर अभिवादन किया और अपने डेरे की तरफ चल पड़ा।

Mulla Nasruddin Stories No 4 ( जासूस की शामत आयी )

नसरुद्दीन का महल में दम घुट रहा था। वह एक जगह बंधकर रहने का आदी नहीं था। वह गुलनाज के साथ यहां से फौरन उड़न-छू होना चाहता था। मगर कैसे.?”
रात का अंधेरा उतर आया था।

नसरुद्दीन कमरे में बैठेबैठे ऊब गया तो घूमने के इरादे से बाहर निकल पड़ा। सड़कों पर लोग कम थे और माहौल में ठंडक थी।

वह कुछ देर तक बाजार में टहलता रहाफिर इधर-उधर देखता हुए अली की सराय के पिछले दरवाजे पर रुककर हौले से दस्तक दी। नसरुद्दीन इस वक्त ।

आवाज पहचानते ही अली ने दरवाजा खोल दिया। जानता था, खास मकसद से ही आया होगा। उसने दरवाजा बंद किया और नसरुद्दीन को लेक गोदाम में जा बैठा।

तब नसरुद्दीन ने उसे अपनी योजना से अवगत करवाया।
सुनकर अली बोला”बिलकुलमैं तुम्हारा और गुलनाज का यहीं इंतजार करना गुलनाज के लिए मना लिबास तुम्हें तैयार मिलेगा। तुम्हारा गधा भी तैयार होगा।” “शुक्रिया अलीतुम्हारा अहसान जिंदगी भर याद रहेगा।”

गोदाम में अधरा था, इसलिए अंदर कौन बैठा है, यह किसी को नजर नहीं आ रहा था।

सामने पर्दा था और पर्दे के उस पार लोग गद्दों बैठे चाय-पानी पी रहे थे। वहां पर रोशनी थी और लोगों के चेहरे साफ नजर आ रहे थे। सहसा नसरुद्दीन को उन लोगों के बीच चेचक के दागों वाला जासूस नजर आया वह
कह रहा था, कुछ अरसा पहले बुखारा में खुद को जो नसरुद्दीन कहता फिरता था, दरअसल वह कोई छलिया था। असली नसरुद्दीन तो मैं हूं।”

 

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नसरुद्दीन बोला, “ अली, महल वालों को भ्रम है कि मैं मालाना हुसैन के डर से बुखारा छोड़कर चला गया हूं। लगता है, इसक माध्यम से महल तक बुखारा में अपनी मौजूदगी की खबर पहुंचानी ही पड़ेगी।”

नसरुद्दीन ने गोदाम में रखी अपनी पुरानी पोशाक पहन ली। वह पिछले दरवाजे से ।

बाहर निकला और सामने के दरवाजे से सराय में घुस गया और अंधेरे कोने में जाकर बैठ गया।

काफी देर तक वह जासूस नसरुद्दीन को बुरा-भला कहता रहा। जब बात बदाश्त से बाहर हा गई तो नसरुद्दीन अंधेरे कान से निकलकर उजाले में खड़ा हो गया।

बुखारा से उसे देखते ही सबने पहचान लिया।
नसरुद्दीन जासूस के सामने जा खड़ा हुआ और उसे तीखी नजरों से देखा। बोला, “तुम असली नसरुद्दीन हो तो मैं कौन हूं?”
जासूस उसे देखते ही बौखला गया, बोला, “तुम.तुम शहर में ही होने वाला। भागे नहीं?”
नसरुद्दीन बोला, “दोस्तो, थोड़ी देर पहले यह कह रहा था कि जो खुद को नमन कहे उसे नकली समझो और सिपाही या जासूस के हवाले कर दो। तो उठाओ इसे औ बाहर फेंक दो।

नसरुद्दीन ने जासूस की दाढ़ी-छ नोच ली और साफा उतार फेंका जासूस। -मारो, लोगों ने उसे पहचान लिया“अरे यह तो वही है, अमीर का मारो बचने न पाए।” अजर-पजर भीड़ उस पर टूट पड़ी। लातों और घूसों से लोगों ने उसके ढीले कर दिए।

थोड़ी देर में उसके कपड़े तार-तार हो गए थे और सिर के बाल नुच चुके थे। फिर लोग उसे मारते-घसीटते महल की ओर ले गए।

 

The Author

Romi Sinha

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