Desh Bhakti Kahani in Hindi Lanuage – desh bhakti Story [15 सबसे अच्छी कहानी ]

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Desh Bhakti Kahani No.1 रेत के घरौदे

 

Desh Bhakti kahani

“वाह शिल्पी तुमने तो बहुत सुंदर घर बनाया है!” निम्मी बोली। यह सुनकर सभी बच्चे शिल्पी के रेत के घरौदे को देखकर दंग रह गए। शिल्पी के रेत के घरौदे को देखकर गोल्डी बोला”शिल्पीमेरा दिल तो कर रहा है कि
काश ऐसा घर हमारा रहने के लिए होता ।” कुछ देर बाद सभी बच्चे अपनी-अपनी झुग्गियों में चले गए। ये सभी बच्चे मोती बस्ती में रहते थे।

जहां पर झुग्गी बस्ती बनी हुई थी। इन बच्चों में अधिकतर के पिता मजदूरी करते थे और मांएं घरघर जाकर काम करती थीं। इनमें से कुछ ही बच्चे ऐसे थे जो सरकारी स्कूलों में जाते थेबाकी अपने मातापिता के साथ बचपन से काम में लग जाते थे और किशोरावस्था तक पहुंचतेपहुंचते वे भी उन कामों में परिपक्व हो जाते थे।

 

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शिल्पी और गोल्डी ऐसे बच्चों से अलग थे। शिल्पी को पढ़ाई के अलावा बड़ीबड़ी बिल्डिंगों के नक्शे देखना, सुंदर कोठियों के कलात्मक नमूनों को जांचना और घर की बनावट आदि में ध्यान देना बहुत भाता था।
कई बार चित्रकारी करते समय वह घरों को इतना खूबसूरत बनाती थी कि सभी दंग रह जाते थे।

वहीं गोल्डी को कार्टून बनाने का शौक था। हर पात्र को वह मिनटों में ही कार्टूनों में ढाल देता था। उसके कार्टून बोलते मालूम पड़ते थे। शिल्पी की उम्र बारह साल और गोल्डी की तेरह साल थी। दोनों एक दूसरे के अच्छे
दोस्त थे। शिल्पी के मातापिता उससे बेहद प्यार करते थे इसलिए उन्होंने उसे पढ़ने के साथसाथ अपने शौक को पूरा करने की छूट दी हुई थी।

दरअसलइसके पीछे यह कारण था कि शिल्पी उनकी एकमात्र संतान थी ।अभी तक पांच संता गरीबी, पौष्टिक भोजन के अभाव व समय उचित पर इलाज न मिलने के कारण चल बसी थीं। एकमात्र शिल्पी ही बच पाई थी।
दोनों ही निःसंतान कहलाए जाने के बजाय शिल्पी को जीवित रहना अच्छा मानते थे।

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गोल्डी का पिता शराब पीकर घर में मारपीट करता था। मां लोगों के कपड़ों पर प्रेस करती थी। जो भी कमाई आती थी उसे गोल्डी का पिता मारपीट करके ले जाता था। बची-खुची कमाई में गोल्डी और उसके तीन
छोटे भाई-बहनों का गुजारा बड़ी मुश्किल से होता था।

गोल्डी के साथ के लड़के भरपेट भोजन की तलाश में अक्सर चोरीमारपीट व गैरकानूनी कामों में फंस चुके थे लेकिन गोल्डी के पास इन सबके लिए वक्त ही कहां था?

उसे तो जैसे ही समय मिलता, वैसे ही वह अपने कागजों के साथ सड़क पर चलते वाहनों, लोगों, पशुओं आदि को देखकर कार्टून बनाने में जुट जाता। वह भी सरकारी स्कूल में सातवीं कक्षा में पढ़ता था।

एक दिन शिल्पी व गोल्डी सड़क पर चल रहे थे तभी एक बदमाश जैसा व्यक्ति उनसे टकराया और तेजी से हड़बड़ाकर आगे बढ़ गया। उसे देखकर शिल्पी बोली, “यह आदमी कितना अजीब लग रहा है? क्या तुम इसका कार्टून बना सकते हो?” गोल्डी आदमी को देखकर बोला, “हां, बना सकता हूं।” तभी गोल्डी की नजर उसके हाथों पर गई तो उसने देखा कि उसके हाथों पर एक बहुत सुंदर घर का टैटू बना हुआ था।

शिल्पी की नजर भी बदमाश के हाथ पर गई और वह बोली, “वाह, इसके हाथ पर बहुत खूबसूरत कलात्मक घर बना हुआ है। मैं शाम को रेत का घर बनाते समय यही डिजाइन बनाऊंगी ।” शाम को शिल्पी ने उसी डिजाइन का घर बनाया और स्वय ही मुग्ध हो गई।

 

उधर गोल्डी ने भी उस व्यक्ति का कार्टून बना अगले दिन गलीगली में यह शोर मच गया कि एक व्यक्ति ने देश के महत्त्वपूर्ण सुराग रक्षा मंत्रालय से हथिया लिए हैं। किसी को अनुमान नहीं था कि वह कौन था? इसलिए उसके स्केच भी तैयार नहीं हो पाए थे। अगले दिन शिल्पी रेत से अपना घर बना रही थी तभी पीछे से उसने दो में व्यक्तियों की आवाजें सुनीं। पहला कह रहा था, “सुना गया है कि जो बरतावेज लेकर भाग है उसके हाथ पर कोई टैटू भी बना हुआ है। जी सात | लोगों ने उसके हाथ में घर का सुंदरसा टैटू देखा है। इसके कि आदमी का बायां अंगूठा कटा हुआ । साथ ही यह भी पता चला है उस वह खबर सुनकर शिल्पी चौंक गई और तुरंत गोल्डी के पास पहुंची
और बोली, “कहीं ऐसा तो यह वही व्यक्ति हो जिसका नहींकार्टून तुमने और उसके टेटू के डिजाइन रेत का घरौदा मैंने बनाया का था” गोल्डी बोलाऐसा कैसे हो सकता है? टैटू तो बहुत लोगों के हाथों पर होता

यह सुनकर शिल्पी बोली, “हां, वह आदमी ये भी बोल रहे थे कि उसका बाएं हाथ अंगूठा नहीं था। यह तो मैंने ध्यान नहीं दिया।” तभी गोल्डी का उस आदमी को याद करते हुए बोला“अरे.हां, शिल्पी वाकई उसके बाएं
हाथ में चार थीं। वह व्यक्ति वही है। हमें किसी भी तरह उस अंगलियां व्यक्ति को पकड़वाना होगा।” पर यह बातें हम बताएंगे किसको?” तभी ही शिल्पी चहककर बोलीकल हम स्कूल में अपनेअपने टीचर को यह बताएंगे। वह हमारी मदद करेंगे।” इसके बाद दोनों ने अपनेअपने स्कूल में अपनी टीचर व मास्टर को यह बात बताई तो वह दंग रह गए। गोल्डी ने उस व्यक्ति का कार्टून मास्टर को सौंप दिया और शिल्पी ने स्कूल के मैदान में जाकर रेत के घरौदे में बदमाश के हाथ में बने घर का डिजाइन उकेर दिया। दोनों स्कूलों के प्रिंसीपल ने आपस में बात की और शिल्पी के घर के आकार व गोल्डी के बनाए कार्टून को पुलिस अधीक्षक तक पहुंचाया गया।

सारी बात पता चलते ही तीव्रगति से काम किया गया। पुलिस की मुस्तैदी के कारण बादमाश को पकड़ लिया गया। वह वही बदमाश था जो रक्षा मंत्रालय से दस्तावेज चुरा कर भागा था और शिल्पी और गोल्डी से जा टकराया था। शिल्पी व गोल्डी पर दोनों स्कूलों के प्रिंसीपलों के साथ ही पूरे देश को गर्व हो रहा था। दो ऐसे बच्चों ने आरामदायक सुविधाओं के अभाव में अपनी प्रतिभा व चतुरता से एक खतरनाक बदमाश को पकड़वा कर देश को विदेशीताकतों के हमले से बचा लिया था। दोनों को सरकार की ओर से इनाम दिया ।

गयामंच पर शिल्पी ने कहा कि वह बड़ी होकर एक कुशल इंजीनियर बनना चाहती है और अपने देश के लिए मजबूत व सुंदर बिल्डिंगों का निर्माण करना चाहती है। गोल्डी बोला, “वह भविष्य में एक सफल कार्टूनिस्ट बनना चाहता है।” दोनों की यह घोषणा सुनकर वहां मौजूद मंत्री बोले, “इन दोनों बच्चों को उत्कृष्ट शिक्षा सरकार की ओर से प्रदान की जाएगी ताकि ऐसे गरीब अनगिनत बच्चे मात्र रेत के घरौदों तक सिमटकर न रह जाएं बल्कि उनके रेत के घरौदों को बनाने के खेल भविष्य में एक मजबूत नींव बनकर उभरें। पूरा देश इन गरीब नौनिहालों को सलाम करता है जिन्होंने अपनी जान की परवाह न कर वतन पर सब कुछ न्योछावर करने की ठान ली।”
यह घोषणा सुनकर शिल्पी व गोल्डी दोनों ही आसमान से ऊंची उड़ान भरने को आतुर दिखाई दिए। आखिर भरते भी क्यों नउन दोनों की कल्पनाएं साकार होकर उनके सामने एक मजबूत भविष्य का निर्माण करती
हुई जो दिखाई दे रही थीं।

Desh Bhakti Kahani No 2:  प्रश्नों का पिटारा

नंदन को विद्यालय से पुस्तकें मिली थीं। वह बिस्तर पर लेटा हुआ उन्हें उलटपुलटकर देख रहा था। पुस्तक के अन्तिम पृष्ठ पर लिखी पंक्तियां वह गुनगुनाने लगा। “जन गण मन अधिनायक जय हे भारत भाग्य विधाता ।”

“ऐ-ऐ नंदन यह क्या? राष्ट्रगान को इस तरह लेटकर नहीं गाया जाता।  राष्ट्रगान को हमेशा सावधान की मुद्रा में खड़े होकर खुले आसमान के नीचे राष्ट्रध्वज के सामने गाया जाता है।”

अगर लेटकर या बैठकर या चलते हुए गाएं तो दीदी?” “नहीं, इससे हमारे राष्ट्र का अपमान होता है।

राष्ट्रगान का सम्मान करना हमारे देश प्रेम की भावना को प्रकट करना है। अब कभी भी कहीं भी चलते या बैठे हुए तुम्हारे कानों में यदि राष्ट्रगान की धुन भी सुनाई पड़ जाएतो तुरन्त वहीं ठहरकर सावधान की मुद्रा में खड़े हो जाना। फिर गान की समाप्ति पर श्रद्धा से शीश झुका देना।

“वह क्यों दीदी?” वह तुम्हारा मातृभूमि को किया गया नमन होगा।” ओह दीदी। अज्ञानतावश मैं कितनी बड़ी गलती कर बैठा।” अच्छा नंदन अब मैं चलती हूं। आज शाम को मैं तुम्हें राष्ट्रीय चिन्हों से सम्बन्धित बातें बताऊंगी। अभी मुझे जाना है।” दीदी की बातें सुन नंदन की उत्सुकता बढ़ गई थी। शाम तक का इन्तजार करने का सब्र उसमें नहीं था। वह दौड़ा-दौड़ा रसोई में मां के पास |

“मां-मां, मुझे राष्ट्रीय चिन्हों के बारे में बताओ न?”

“हूं से नोट तो निकालो

अभी बताती पर पहले अपनी जेब । नंदन ने जेब से एक रुपए का नोट निकाला। मां बताने लगी. देखो नंदनहमारा राष्ट्रीय चिन्ह जो कि वाराणसी के पास सारनाथ से सब अशोक द्वारा बनाए गए सिंह स्तंभ से लिया है।”

“बना हुआ है। हां, और नीचे की इस चौरस पट्टी के बीच एक चक्र जिसके दाईं ओर सांड और घोड़ा बना हुआ है। बीच में देखोसत्यमेव जयते’ लिखा हुआ , जो हमारे राष्ट्र का आदर्श वाक्य भी है।

इसका अर्थ । समझते हो नंदन?” नहीं, नंदन ने “ना” में गर्दन हिलाई। इसका अर्थ है सत्य की हमेशा विजय होती है। यह चक्र, जिसे तम तिरंगे झंडे में भी देखते हो।

“हां, मां झंडे के तीनों रंग मुझे मालूम हैं। सबसे ऊपर केसरिया, बीच। में सफेद और नीचे हरा।।
हां, राष्ट्रीय ध्वज की सफेद पट्टी पर नीले रंग का यह चक्र बना हुआ है जिसे अशोक चक्र कहते हैं। यह हमारी प्रगति का सूचक है। तिरंगे। के सभी रंग अपने अन्दर संदेश समाहित किए हुए हैं। इतना कहने के बाद मां चौंक पड़ी। दूध उबलकर बाहर आ गया था। आगे की बात बाद में बताने को कहवह रसोई में जुट गईकिन्तु नंदन की।
जिद थी कि वे उसे पूरी बात उसी समय ही बताएं।

नंदन की जिद सुन उसके पिताजी ने पुकारा, “इधर आओ नंदनमैं तुम्हें बताता हूं, कहकर पिताजी नंदन को बताने लगेइडे का के ऊपर केसरिया रंग हमारी वीरता का प्रतीक है।

प्राचीन समय में जब भारत में राजाओं का राज्य था। तब वीर राजपूत योद्धा केसरिया बाना (वस्त्र ) पहनकर युद्धभूमि में अपनी मातृभूमि की रक्षार्थ निकल पड़ते थे। यह रंग हमें संदेश देता है कि हम हमेशा हमारे उन वीरों की तरह मातृभूमि की रक्षा के लिए सदा तत्पर रहें।

सफेद रंग शान्ति का प्रतीक है। जो विश्व में शान्ति का संदेश देता है।

हरा रंग हमारी समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक है। खेतों में लहलहाती फसलों का रंग हरा होता है। अब फसलें अच्छी होंगी तो चारों ओर खुशहाली छा जाएगी।

समृद्धि फैल जाएगी।” नंदन ने सारी बात ध्यान से सूनी। उसे भी विद्यालय जाना था। समय हो चुका था तैयार होकर वह विद्यालय के लिए निकला।

पूरे रास्ते उसके दिमाग में यही सारी बातें घूमती रहीं। विद्यालय में प्रार्थना के बाद राष्ट्रगान गाया गया। आज इस गीत के प्रति उसके मन में असीम श्रद्धा थी। सभी बालक अपनी-अपनी कक्षाओं में पहुंचे । नंदन सभी
बच्चों को राष्ट्रीय चिन्ह और ध्वज के बारे में बताने लगा। इतने में कक्षा में गुरुजी ने प्रवेश किया। सभी बच्चों ने खड़े होकर गुरुजी को प्रणाम किया।

गुरुजी ने उन्हें बैठ जाने का संकेत दिया। “क्या तुम बता सकते हो नंदन कि राष्ट्रगान के रचयिता कौन थे?”
इस प्रश्न पर पूरी कक्षा मौन हो गई। गुरुजी ने बताया-रवीन्द्रनाथ टैगोर। उन्होंने यह गीत 1912 में लिखा तथा इसे राष्ट्रगान के रूप में 24 जनवरी1950 में स्वीकार किया गया।

“इसी तरह बंकिमचन्द्र चटर्जी द्वारा रचित गीत वन्देमातरम्’ को राष्ट्रीय गीत के रूप में माना जाता है, यह गीत भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का प्रेरणा स्रोत रहा है।

जब दीदी ने राष्ट्रीय पक्षी, राष्ट्रीय पशु और राष्ट्रीय फूल के बारे में पूछा तो वह नहीं बता पाया अभी इनके बारे में और जानना बाकी था। दीदी ने नंदन को बड़े प्यार से बताया कि अपना राष्ट्रीय पक्षी मोर, राष्ट्रीय पशु
बाघ और राष्ट्रीय फूल कमल है।

अपने राष्ट्र के महत्व की इतनी सारी रोचक जानकारी पाकर नंदन फूला नहीं समाया।

 

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The Author

Romi Sinha

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1 Comment

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  1. bhut achchhi khaniya hai sir apki abut gyan deti hai

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